जयपुर – सामाजिक समानता व् आपसी सोहार्द के लिए 100 से अधिक सामाजिक संघठन एक मंच पर –

100 से अधिक सामाजिक संघठनो द्वारा विधायकों का अभिनन्दन समारोह –

जयपुर | राजस्थान 15 वीं विधानसभा में निर्वाचित होने वाले विधायकों का राजस्थान में संयुक्त रूप 100 से अधिक सामाजिक संघठनो द्वारा अभिनन्दन समारोह 6 फ़रवरी को सायं 4 बजे मानसरोवर स्थित ” दीप स्मृति ऑडिटोरियम” में  होने जा रहा  है सबसे ख़ास बात यह है की राजस्थान में संयुक्त रूप से किसी कार्यक्रम में सभी जातियों के संगठनो का एक साथ एक मंच पर आना बड़ी सकारात्मक पहल है |

राजस्थान के सभी सम्मानीय  – विधायकगणों का है होगा – सम्मान 

जयपुर शहर में पहली बार होने जा रहे इस कार्यक्रम की राजनीति गलियारों में चर्चा है क्योंकि इस से पहले जितने भी सम्मान समारोह हुये है उन में या तो एक -दो विधयाकों मंत्रियों को ही बुलाया जाता था यह पहला मौका है जब इतने सामाजिक संघठनो द्वार संयुक्त रूप से

इतने बड़े स्थर पर इस अभिनन्दन समारोह  का आयोजन हो रहा है |

ख़ास नज़र –

जब इस समारोह का निमंत्रण हमारी न्यूज़ टीम को मिला तो हम भी एक बार हेरान हुए क्योकि 100 से अधिक  सामाजिक संगठ

नो

द्वारा संयुक्त रूप से राजस्थान के सभी 200 विधायकों का सम्मान समारोह एक मंच पर होना  बड़ी बात है उससे भी बड़ी बात यह है की इस में अनुसूचित जाती / अनुसूचित जन -जाती / अल्पसंख्यक समुदाय व् ओबीसी समाज से जुड़े लगभग सभी  छोटे -बड़े सामाजिक संगठन शामिल है |

राजनिति नजरिया –

राजनीति द्रष्टिकोण से देखा जाये तो यह सभी समाजो के संगठन किसी विचार 

– मुद्दे पर एक सहमती हो जाये तो बड़े परिवर्तन भी हो सकते है राजस्थान में तो यह सभी संगठन बड़े स्तर पर अपना कार्य करते है बाकी यह एक सकारात्मक पहल है जो की प्रशंसा के योग्य है |

जयपुर शहर लोकसभा चुनाव – यह दिग्गज लगे है लोबिंग में – भाजपा – कांग्रेस से

जयपुर शहर लोकसभा चुनाव
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कांग्रेस किस नेता पर लगाएगी दांव ?
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उम्मीदवार को लेकर कांग्रेसी खेमे में हो रहा है जबरदस्त चिन्तन मन्थन

 

जयपुर। दो महीने बाद होने जा रहे लोकसभा चुनाव को लेकर राजस्थान में दोनों बङी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दल भी पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं। भाजपा को अपनी एकतरफा जीती हुई सभी सीटों पर दोबारा जीत मुश्किल लग रही है और वो सम्भावित नुकसान को कम से कम करना चाह रही है। वहीं कांग्रेस राज्य की सत्ता में आने के बाद केन्द्र की सत्ता में स्थापित होने के लिए आधी से ज्यादा सीट जीतना चाह रही है। लेकिन कांग्रेस के पास सबसे बङी दुविधा यह है कि उसके पास बहुत सी सीटों पर मजबूत उम्मीदवार ही नहीं हैं। लिहाजा वो ऐसी सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर जबरदस्त पशोपेश में है और उसके लिए पार्टी के उच्च खेमे में बङी बारीकी से चिन्तन मन्थन शुरू हो गया है। इन सीटों की सूची में जयपुर शहर लोकसभा सीट भी शामिल है, जहाँ कांग्रेस नेतृत्व जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है और वो कोई मजबूत उम्मीदवार तलाश करने में अपना माथा लगा रहा है।

जहाँ तक भाजपा का सवाल है तो जयपुर शहर लोकसभा सीट उसका अभेद्य दुर्ग माना जाता है और यहाँ से ज्यादातर चुनावों में भाजपा उम्मीदवार ही विजयी हुए हैं। वर्तमान में यहाँ से रामचरण बोहरा सांसद हैं और सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा उनका टिकट काटेगी तथा जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया कुमारी को मैदान में उतारेगी, जो 2013 के विधानसभा चुनाव में सवाई माधोपुर सीट से भाजपा की विधायक रही हैं तथा इस चुनाव में उनको टिकट नहीं दिया गया था। भाजपा के कुछ और नेताओं को भी दावेदार माना जा रहा है, जिनमें पूर्व मन्त्री अरूण चतुर्वेदी, मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ और पूर्व विधायक एवं जिलाध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता का नाम प्रमुख है। भाजपा यहाँ से अधिकतर ब्राह्मण समुदाय से सम्बंधित नेता को टिकट देती है, अगर इस बार भी उसने ब्राह्मण नेता को मैदान में उतारा, तो फिर कांग्रेस वैश्य समुदाय के नेता पर दांव लगा सकती है। अगर भाजपा दीया कुमारी को टिकट देती है, तो फिर कांग्रेस किसी ब्राह्मण नेता को मैदान में उतार सकती है। ऐसी चर्चाएं आजकल जयपुर के सियासी गलियारों में चल रही हैं।

कांग्रेस से करीब आधा दर्जन दावेदार हैं और कुछ चेहरे ऐसे हैं जो खुलेआम दावेदारी तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर किसी सियासी समीकरण से उन्हें टिकट मिल जाए, तो वो पूरी ताकत से चुनाव लङने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस टिकट के लिए जिन नेताओं की चर्चा सियासी खेमों में हो रही है, उनमें पीसीसी उपाध्यक्ष राजीव अरोङा, पूर्व सांसद अश्क अली टाक, पूर्व महापौर ज्योति खण्डेलवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी डाॅक्टर अर्चना शर्मा, संजय बाफना, सुरेश मिश्रा, जाकिर गुडएज आदि के नाम प्रमुख हैं। अर्चना शर्मा, जिन्हें एक सभ्य और शान्त स्वभाव की नेता माना जाता है तथा वे लम्बे समय से पीसीसी में विभिन्न पदों पर

कार्यरत रही हैं और वर्तमान में मीडिया इन्चार्ज हैं। वे कार्यकर्ताओं और आमजन में काफी लोकप्रिय हैं तथा उन्होंने इस बार भी शहर की मालवीय नगर विधानसभा सीट से चुनाव लङा और मामूली अन्तर से चुनाव हार गईं थीं। उनकी हार पर सभी को बङा मलाल हुआ, यहाँ तक कि उनके प्रतिद्वंदी खेमे को भी, ऐसा मतगणना के बाद हुई विभिन्न चर्चाओं में महसूस किया गया।

जहाँ तक बात राजीव अरोङा की है, तो वे इस बार आदर्श नगर सीट से मजबूत दावेदार थे तथा उनका टिकट एक तरह से पुख्ता माना जा रहा था। लेकिन एनवक्त पर उनका टिकट काट दिया गया और खबर है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें लोकसभा चुनाव लङवाने का आश्वासन दिया था। अगर पार्टी व्यापारिक घराने से सम्बंधित किसी परम्परागत कांग्रेसी नेता को मैदान में उतारती है, तो राजीव अरोङा एक मजबूत दावेदार हैं। उनकी सभी वर्गों में अच्छी पकङ है और उन्हें एक सुलझा हुआ शरीफ राजनेता कहा जाता है। वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी और खासमखास समझे जाते हैं। अगर बात ज्योति खण्डेलवाल की करें, तो वे जयपुर की महापौर रह चुकी हैं और महापौर के चुनाव में वे डायरेक्टर विजयी हुईं थीं। उन्होंने किशनपोल विधानसभा सीट से टिकट भी मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। जिस पर उन्होंने नाराजगी का भी इजहार किया, लेकिन पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद उन्होंने किसी भी प्रकार की नाराजगी से इन्कार किया। खबर है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें भी लोकसभा चुनाव लङवाने का आश्वासन दिया था। ज्योति खण्डेलवाल वैश्य समुदाय से स

म्बंधित कांग्रेस की एक मजबूत नेता हैं, लेकिन स्थानीय कुछ कांग्रेसी नेताओं से उनका छत्तीस का आंकड़ा भी जग जाहिर है। फिर भी सिया

सी हल्कों में चर्चा है कि अगर कांग्रेस नेतृत्व किसी महिला और वैश्य समुदाय के नेता के तौर पर उम्मीदवारी तय करेगा, तो ज्योति को नजरअंदाज करना उसके लिए आसान नहीं होगा।

अगर कांग्रेस हर बार की तरह इस बार भी एक लोकसभा प्रत्याशी मुस्लिम नेता को बनाएगी, तो उसके पास टोंक, चूरू, झुन्झुनूं और जयपुर शहर के अलावा कोई सीट नहीं है। इस समीकरण में अगर कांग्रेस जयपुर शहर को मुस्लिम कोटे की सीट बनाती है, तो फिर पार्टी के पास दो ही नेता हैं एक पूर्व सांसद अश्क अली टाक और दूसरे जाकिर गुडएज। अश्क अली टाक ने फतेहपुर से

विधानसभा का टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी माने जाते हैं, लेकिन उनके सामने दुविधा यह है कि वे जयपुर में कभी सक्रिय नहीं रहे, जबकि 2008 में पार्टी ने उन्हें किशनपोल विधानसभा सीट से टिकट दिया था। फिर भी चुनाव हारने के बाद वे जयपुर को भूल गए। वे वर्तमान में सांसद कोटे से वक्फ बोर्ड के मेम्बर हैं। जहाँ तक जाकिर गुडएज की बात है, तो वे भी यहाँ की आदर्श नगर सीट से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वे पिछले तीन चुनावों से विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं। वे कांग्रेस की विचारधारा वाले परम्परागत कांग्रेसी घराने से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता सईद खान गुडएज को कांग्रेस ने एक बार जयपुर शहर लोकसभा सीट से और एक बार यहाँ की जौहरी बाज़ार विधानसभा सीट से टिकट दिया था। सईद खान गुडएज को कांग्रेस का कद्दावर नेता माना जाता था। जाकिर गुडएज एक अच्छे बिजनेस मैन हैं और वे एक सभ्य व मिलनसार छवि के धनी हैं।

भाजपा -कांग्रेस की राह नहीं होगी आसा –

सूत्रों के अनुसार जयपुर शहर लोकसभा सीट से इस बार दलित – मुस्लीम समाज भी सयुक्त रूप से अपना प्रत्याशी मैदान में उतार सकती है क्योकि दलित समाज आरक्षण , रोस्टर व् मुस्लीम समाज तीन तलाक व् मोब्लिंचिग जैसे मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस की कार्यशेली से नाराज चल रहे है |

 

लेख़क – एम फारूक़ ख़ान  { सम्पादक इकरा पत्रिका }

राजस्थान – रामगढ़ चुनाव में यह रहा वोट प्रतिशत – 20 प्रत्याशियों की किस्मत फ़ेसला

रामगढ़ चुनाव में हुआ 79.12 प्रतिशत मतदान – 

जयपुर, 28 जनवरी। अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में शाम 5 बजे तक 79.12 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इसी के साथ 20 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। मतगणना 31 जनवरी को बाबू शोभाराम राजकीय कला महाविद्यालय, अलवर में प्रातः 8 बजे से प्रारंभ होगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री आनंद कुमार ने बताया कि क्षेत्र में मतदान पूर्णतया शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ। मतदाताओं ने मतदान के प्रति खासा उत्साह दिखाया और बढ़-चढ़कर मतदान किया। उन्होंने क्षेत्र के जागरूक मतदाताओं और चुनावी प्रक्रिया में नियोजित अधिकारी-कर्मचारियों और मीडिया का आभार जताया है।
रामगढ़ विधानसभा सीट पर आज सुबह आठ बजे से वोटिंग शुरू हुई, जिसमें धीमी शुरुआत के बाद दोपहर में तेजी आई। प्रातः 9 बजे तक 7.37 प्रतिशत, 11 बजे तक 29.37 प्रतिशत, दोपहर 1 बजे तक 51.27 प्रतिशत, दोपहर 3 बजे तक 68.25 प्रतिशत और शाम 5 बजे तक 79.12 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। 
गौरतलब है कि बसपा प्रत्याशी की मृत्यु के बाद रामगढ़ में चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। रामगढ़ में कुल 2 लाख 35 हजार 625 मतदाता थे। इनमें से 1 लाख 10 हजार 497 महिला मतदाता और 1 लाख 46 हजार 613 पुरुष मतदाता थे। क्षेत्र में 278 मतदान केंद्रों पर 1280 र्कामिकों ने मतदान प्रक्रिया को संपादित कराया।

कठूमर {अलवर } से सुरेन्द्र सिंह चाहते है – समाज में परिवर्तन – महिला सशक्तिकरण –

# हमे भीख नहीं अधिकार चाहिए – आरक्षण नहीं रोजगार चाहिए – सुरेन्द्र सिंह

नाम – सुरेन्द्र सिंह

surendr singh

संस्थापक – बहुजन समाज स्टूडेंट यूनियन

शिक्षा- B.com, M.com

व्यवसाय- सामाजिक कार्यकर्ता

क्षेत्र – कठूमर विधानसभा ( अलवर, राजस्थान)

सम्पर्क -8955520606,9983000606
Gmail- ssjpr015@gmail.com

उद्देश्य/विचार- संवैधनिक मूल्यों को पूर्ण रूप से लागू करवाना,महिलाओं को समाज मे समानता मिले, युवाओं को रोजगार, समान शिक्षा,दबे- कुचले लोगो के लिए अवसर तैयार करना, भयमुक्त स्वतंत्र व मजबूत लोकतंत्र स्थापित करना

 

नोट – अगर आप भी राजनीति  के क्षेत्र में सक्रिय है और आपके उदेश्य में है दम – तो हमें लिख भेजें  – हम देंगे आपको प्लेटफार्म – आपके विचारो को एक खुला मंच –

 

mail – pawandev024@gmail.com

contact -7976371944 , 7688827752

भाजपा ने किया आपके बच्चों के भविष्य का क़त्ल – SC ST व् OBC के बच्चे अब नहीं बन सकते – प्रोफ़ेसर

आरक्षण विरोधी मोदी सरकार – ख़त्म किया शेक्षणिक आरक्षण –

मोदी सरकार ने किया – SC -ST व् OBC समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ – जबकि 10% सवर्ण आरक्षण देकर 10 प्रतिशत लोगों को पहुँचाया सीधा लाभ – अब सड़कों पर आ रहे है शिक्षक व् छात्र आंदोलन के लिए  –

सुप्रीम कोर्ट ने 200 प्वाइंट रोस्टर पर एमएचआरडी और यूजीसी की ओऱ से दायर एसएलपी को 22 जनवरी को खारिज कर दिया। इससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि 5 मार्च 2018 का लेटर लागू हो गया है और 13 प्वाइंट रोस्टर लागू हो गया है। बस एक नोटिस आने की देर है कि अब 19 जुलाई 2018 का वह लेटर ‘नल-एंड-वाइड’ हो रहा है। अब नियुक्तियाँ 13 प्वाइंट रोस्टर पर शुरू की जाएं।

कहा जाता है अगर देश में विकास की बात करनी हो तो उसके लिए शिक्षा पर जोर देना जरूरी है। शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों में शिक्षकों पर ध्यान देना जरूरी है। लेकिन आजकल धारा ही कुछ बदली हुई है। गुरु की स्थिति कुछ ऐसी है कि छात्र का क्या ही कहना शिक्षक ही सड़कों पर आने को मजबूर हो गए हैं। वर्तमान मोदी सरकार के समय में तो आरक्षण को लेकर जिस तरह स्थिति बिगड़ गई है। ऐसा कहा जा रहा है कि अब सरकार को विदाई लेने का वक्त आ गया है। बात ऐसी है कि दिल्ली सहित अनेकों विश्वविद्यालय में शिक्षक सड़क पर इसलिए आ रहे हैं क्योंकि उन्हें विश्वविद्यालय में आरक्षण कोटे में अब जगह मिलने की उम्मीद है ही नहीं। ऐसे में एडहॉक शिक्षक जो स्थायी होने का सपना अब तक देख रहे थे वह उनका सपना ही रह जाएगा।

आंदोलन की बन रही है रूप रेखा –

दिल्ली विश्वविद्यालय में 23 जनवरी को रोस्टर के मुद्दे पर एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। आगे के आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी, लेकिन शामिल लोगों के आक्रोश ने बैठक को एक आक्रोशित प्रदर्शन में तब्दील कर दिया। आनन-फानन में नरेंद्र मोदी और प्रकाश जावड़ेकर का पुतला बनाया और बहुजन नारों के साथ पुतला दहन किया। यह पुतला दहन इसलिए था कि आरक्षण विरोधी रोस्टर अब नहीं चलेगा और सरकार इसके लिए अध्यादेश ले आए।

अब आए दिन शिक्षक होंगे सड़कों पर –

रोस्टर के मुद्दे पर दिल्ली विश्वविद्यालय 24 जनवरी को आक्रोश ज़ाहिर किया  विभागवार रोस्टर वापस लेने के लिए और 200 प्वाइंट रोस्टर पर तत्काल अध्यादेश लाने को लेकर सायं 4 बजे गे

ट नं 4 नॉर्थ कैम्पस डीयू में शिक्षक अपना प्रदर्शन किया । लखनऊ विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और काशी हिंदू विश्वविद्यालय में भी 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ 24 जनवरी से शिक्षक अपना प्रदर्शन जारी करने कर दिया ।

राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफ़सर C B यादव  व् दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर लक्ष्मण यादव  ने समझाया  (13 प्वाइंट रोस्टर) है क्या ?

दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक लक्ष्मण यादव ने काफी सरल ढंग से इसे समझाया है। पढ़िए आखिर क्या है यह विभागवार आरक्षण। इस पूरे लेख में उन्होंने सिलसिलेवार बताया है कि आखिर सरकार ने कैसे विश्वविद्यालयों में आरक्षण खत्म करने का मन बना लिया है।

“उच्च शिक्षा में आरक्षण लागू होने के बाद स्वीकृत पदों के क्रम-निर्धारण को ‘रोस्टर’ कहा गया. 21 जुलाई 1997 को ST-SC के लिए और 04 मार्च 2007 को OBC आरक्षण उच्च शिक्षा में लागू हुआ।

इसके निर्धारण के लिए DoPT ने रोस्टर बनाया. माना कि कुल पदों की संख्या 100 है. जिसमें पदों का आनुपातिक विभाजन इस प्रकार होगा-

ST का आरक्षण 7.5% है। 100/7.5=13.33 यानी हर 14 वाँ पद ST को आरक्षित होगा।SC का आरक्षण 15% है। 100/15=6.66 यानी हर 7वाँ पद SC को आरक्षित होगा।OBC का आरक्षण 27% है। 100/27=3.70 यानी हर चौथा पद 

OBC को आरक्षित होगा।

चूँकि ST के लिए

निर्धारित आरक्षण 7.5% है, जिसे पूर्ण पद संख्या में बनाने के लिए 100 के स्थान पर 200 पदों के लिए रोस्टर निर्धारण किया गया। विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज को एक इकाई मानकर पदों के सृजित होने की तिथि के बढ़ते क्रम से 200 पदों में रोस्टर को निर्धारित किया जाता है। इसमें सभी वर्ग को निर्धारित अनुपात में हिस्सेदारी मिलती रही, लेकिन यूजीसी ने 5 मार्च 2018 को जारी सर्कुलर में विभागवार रोस्टर का निर्देश दिया, जिसे आम तौर पर 13 प्वाइंट रोस्टर मान लिया गया है। साज़िशन 200 प्वाइंट रोस्टर को ही 13 पर रोककर 13 प्वाइंट रोस्टर बना दिया गया। इस रोस्टर में आरक्षित क्रम-विभाजन के बाद रोस्टर क्रम और पदों के आरक्षण की रोस्टर सूची इस होगी-

  1. UR
  2. UR
  3. UR
  4. OBC
  5. UR
  6. UR

  1. Schedule Cast
  2. OBC
  3. UR
  4. UR
  5. UR
  6. OBC
  7. UR
    ———————————–
  8. Schedule Tribes
  9. Schedule Cast
  10. OBC

13 प्वाइंट रोस्टर के कुल पद: 13
UR: 09, OBC: 03, SC: 01, ST: 00
अनारक्षित:आरक्षित अनुपात – 9:4

अब 200 प्वाइंट रोस्टर को 13 पर ही रोक कर विभागवार रोस्टर क्यों लागू किया गया है, उसे आप स्वयं समझ लें। पहला तो ये कि ST को कभी मौक़ा ही न मिले और दूसरा व सबसे शातिर साज़िश कि अगले 14-15-16 तीनों पद आरक्षितों को मिलने थे। इसलिए विभागवार रोस्टर को 13 पर ही रोककर लागू कर दिया। जबकि कहीं नहीं लिखा है कि विभागवार रोस्टर का मतलब 13 प्वाइंट रोस्टर होगा। इसमें कभी आरक्षण मिल ही नहीं सकेगा। वहीं दूसरी तरफ नए बने विभागों में तीन से कम पद विज्ञापित करो और सब UR होगा, जिससे 15% सवर्णों को 95% पदों पर भरते जाओ। 1997 के पहले और 2018 के बाद भी सब कुछ उच्च वर्गीय सवर्णों के ही कब्ज़े में रहेगी उच्च शिक्षा। माँ सरस्वती का पावन प्रांगण, विद्या का मंदिर दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, पसमांदा के प्रोफ़ेसर बन जाने से दूषित न हो सकेगा।

कल्पना कीजिये कि इस मुल्क को चलाने और नीतियाँ बनाने लोग किस दर्जे के हक़मार, शातिर जातिवादी और धूर्त हैं, जो आरक्षण खत्म करने की घोषणा बिना किए कि उच्च शिक्षा में आरक्षण नहीं होगा, व्यवहार में खत्म कर दिया। अब इस मुल्क को तय करना है कि उसे क्या ऐसे ही चलना है या संविधान से चलना है।

पहला चार्ट सरकारी 13 प्वाइंट रोस्टर है, और दूसरा मैंने सुझाया है।

कैसे ताज़ा विभागवार (13 प्वाइंट) रोस्टर आरक्षण विरोधी और असंवैधानिक है-

विभागवार रोस्टर का पहला खेल समझते हैं। इस विभाजन को अब दो स्तरों से समझें। मसलन किसी नए कॉलेज या विभाग में यदि कुल 3 पद ही होंगे, तो तीनों पद रोस्टर में UR होंगे। यही है पहला और सबसे ख़तरनाक खेल, जिसमें विभागवार रोस्टर बनाने से हमेशा के लिए ये आसानी हो जाएगी कि हर विभाग में 3 या 3 से कम पदों को विज्ञापित किया जाएगा और आरक्षित पदों का क्रम कभी आ ही नहीं सकेगा। अब जिन विश्वविद्यालयों में नए विज्ञापन आ रहे हैं, वे सब इसी विभागवार रोस्टर से आ रहे हैं। जहाँ आरक्षित पद कभी आ ही नहीं सकेंगे. यदि कॉलेज/विश्वविद्यालय को एक इकाई माना जाता, तो यह खेल कभी नहीं संभव होता। क्योंकि तब यह 200 तक चलता और कुल मिलाकर आरक्षण पूरा होताय़यदि किसी विभाग में कुल 15 पद स्वीकृत होंगे, तब जाकर वितरण कुछ इस प्रकार होगा- 1 ST, 2 SC, 3 OBC, 9 UR. अब यहाँ भी आरक्षण का कुल प्रतिशत हुआ 15 में 6 पद आरक्षित यानी 40% आरक्षण। इस लिहाज़ से कभी संवैधानिक आरक्षण तो लागू ही नहीं हो सकेगा। यदि कॉलेज/विश्वविद्यालय को एक इकाई माना जाता तो आरक्षण कमोबेश 50% तक मिल तो जाता।विभागवार रोस्टर का तीसरा और सबसे खतरनाक खेल देखिये. माना कि एक पुराने हिंदी विभाग में कुल 11 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 8 पदों पर आरक्षण लागू होने का पहले ही नियुक्तियाँ हो चुकी हैं, तो ये सभी सवर्ण यहाँ पढ़ा रहे हैं। अब आरक्षण लागू किया गया, तो इन आठ में से चौथा और आठवाँ पद OBC को और सातवाँ पद SC को जाएगा, जिसपर पहले से कोई सवर्ण पढ़ा रहे हैं। अब नियमतः ये तीनों पद ‘शार्टफ़ॉल’ में जाएगा और आगामी विज्ञप्ति में नव-सृजित नवें, दसवें ग्यारहवें तीनों पद इस ‘शार्टफ़ॉल’ को पूरा करेंगे। लेकिन देश के हर विश्वविद्यालय में मनुवादियों ने शार्टफ़ॉल को लागू ही नहीं किया, और नियम बना दिया कि चौथे, सातवें और आठवें पदों पर काम करने वाले सवर्ण जब सेवानिवृत्त होंगे, तब जाकर इनपर आरक्षित वर्ग के कोटे की नियुक्ति होगी। यानी ‘शार्टफ़ॉल’ लागू ही नहीं किया गया, जिससे आरक्षण कभी पूरा होगा ही नहीं और सीधे हज़ारों आरक्षित पदों पर सवर्णों का ही कब्ज़ा होगा।अंतिम साज़िश ये कि यदि किसी विश्वविद्यालय/कॉलेज में अगर 1997 के बाद से SC-ST की और 2007 के बाद से OBC की कोई नियुक्ति नहीं हुई है और पहली बार 2018 में अगर विज्ञापन आयेगा, तो इस बीच के पदों में जो ‘बैकलाग’ होगा, उन्हें पहले भरा जाएगा। लेकिन जब रोस्टर ही विभागवार बनेगा, तो न तो ‘शार्टफ़ॉल’ लागू होगा और न ‘बैकलाग’. यानी आज की तिथि में ही आरक्षण मिलेगा, जो कभी 49.5% भी पूरा नहीं हो पाएगा।ध्यान रहे कि उच्च शिक्षा में UR कैटेगरी को हमेशा सामान्य माना गया, यानी साक्षात्कार के ज़रिये होने वाली नियुक्तियों में कभी गैर-सवर्ण की नियुक्ति अपवाद ही रही। आसान भाषा में समझें तो 15% सवर्णों के लिए 50.5% आरक्षण। 1931 की जाति-जनगणना और 1980 के मंडल कमीशन के सैम्पल सर्वे से OBC की जनसंख्या 52% है, लेकिन इन्हें आरक्षण 27% ही मिला है। ऐसे में पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्त्व तो कभी पूरा हो ही नहीं सकेगा। ऐसे ही PwD, अल्पसंख्यक और महिलाओं की स्थिति तो और भी भयावह होगी।

घटनाक्रम पर एक नजर – 

1950 में SC-ST को मिला आरक्षण उच्च शिक्षा में औने-पौने तरीके से लागू हो पाया 1997 में।

1993 में OBC को मिला आरक्षण उच्च शिक्षा में, औने-पौने तरीके से लागू हो पाया 2007 में।

आरक्षण लागू न हो सके, इसके लिए दर्जनों कोर्ट केस। फिर भी लागू करना पड़ा तो रोस्टर गलत।

किसी तरह गलत तरीके से 200 प्वाइंट रोस्टर लागू हो सका, लेकिन शॉर्टफॉल बैकलाग खत्म।

5 मार्च 2018 को 200 प्वाइंट रोस्टर हटाकर विभागवार यानी 13 प्वाइंट रोस्टर कोर्ट के ज़रिए लागू हुआ।

सड़क से संसद तक भारी विरोध के चलते 19 जुलाई को नियुक्तियों पर रोक, सरकार द्वारा दो SLP दायर।

सरकार और यूजीसी की SLP पर सुनवाई टलती रही। मीडिया व संसद में मंत्री ने अध्यादेश की बात की।

22 जनवरी 2019 को दोनों SLP ख़ारिज। संसद के आख़िरी सत्र तक कोई अध्यादेश नहीं।

ख़ास नज़र –

10% सवर्ण आरक्षण चंद घंटों में पास होकर चंद दिनों में ही लागू हो गया। इससे साफ़ जाहिर है की भाजपा की मोदी सरकार दलित व् आरक्षण विरोधी है अब इस रोस्टर प्रणाली से भविष्य में SC – ST व् OBC वर्ग के छात्र कभी भी आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते अब जब पिछड़ेसमाज के लोग शिक्षित ही नहीं होंगे तो देश केसे आगे बड़ेगा जबकि जनसंख्या अनुपात ने देश में 85% से 90 % तक SC -ST व् OB C समाज है

जयपुर से ” युवा नेता ” # पवन देव – चाहते है राजनीति में परिवर्तन – और आप 

PAWAN DEV – JAIPUR

# यूथ जो चाहते है – सिस्टम { व्यवस्था } में परिवर्तन – पवन देव

नाम – पवन देव 

शिक्षा -B A , BJMC – MMC -PR &A –

व्यवसाय – पत्रकारिता

कांटेक्ट न : 7688827752

क्षेत्र – जयपुर शहर  

उदेश्य / विचार – राजनीति में सकारात्मक , ज्वलंत मुद्दों – रोजगार .एट्रोसिटी. महिला सुरक्षा.सामाजिक रूप से समाज मे आपसी सौहार्द .राष्ट्रीय एकता. समानता बेहतर शिक्षा के लिये – युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना ।

नोट – अगर आप भी राजनीति  के क्षेत्र में सक्रिय है और आपके उदेश्य में है दम – तो हमें लिख भेजें  – हम देंगे आपको प्लेटफार्म – आपके विचारो को एक खुला मंच –

 

mail – pawandev024@gmail.com

contact -7976371944