जयपुर – रोज़ा इफ्तार में दिखा – हिन्दू – मुस्लिम समाज का आपसी प्रेम – भाईचारा

Jaipur appeared in the holy month of Ramzan – Ganga Jamuna Tahajib Rosa Iftar Party

 विभिन्न धर्मों के बीच शांति,सद्भाव और प्रेम बढ़ाने के लिए सामूहिक रोज़ा इफ़्तार का आयोजन

 

 

जयपुर | आज जयपुर में स्थित आरको पैलेस होटल में रोजा इफ़्तार पार्टी का आयोजन किया गया  जिसके आयोजक दलित – मुस्लिम एकता मंच व् लोकत्रांतिक एवं साम्प्रदायकता सद्भाव मंच ,जमाअते इस्लामी हिन्द राजस्थान और मिल्ली काउंसिल रहे |

रोज़ा इफ्तार पार्टी में सभी धर्म – जाति के बुद्धिजीवियों ने शिरकत की साथ ही संकल्प लिया है देश की एकता – अखंडता ,सामाजिक समानता को बनायें रखने व् आपसी सोहार्दय के लियें एकजुट हो कर फासीवादी ताकतों के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद करती रहेगी |

सम्रग सेवा संघ अध्यक्ष – सवाई सिंह जी

फ़ोरम फ़ॉर डेमोक्रेसी एंड कम्यूनल एमिटी के प्रदेशाध्यक्ष सवाई सिंह ने कहा- कि भारत विविधताओं का देश है हमें सभी धर्मों का सम्मान करते हुए सभी त्यौहार मिलजुलकर हर्षोल्लास से मनाना चाहिए,अनेकता में एकता ही हमारे भारत की विशेषता है।

जमाते इस्लामी हिन्द राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहम्मद नाज़िमुद्दीन ने कहा कि रमज़ान का महीना इबादत,रहमत और बरकतों का महीना है, यह हमें त्याग और प्रेम का संदेश देता है। रोजे का संदेश है कि हम गरीबों की भूख और प्यास को समझें, ज्यादा से ज्यादा दान दें।

दलित मुस्लिम एकता मंच के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ़ आरको ने कहा कि इस्लाम में सब बराबर हैं कोई बड़ा या छोटा नहीं है। रमज़ान का महीना भी हमें समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखना सिखाता है।

रोज़ा इफ़्तार पार्टी  हिन्दू – मुस्लिम भाईयों का आपसी प्रेम भाईचारा देखने

अब्दुल लतीफ़ आरको – अध्यक्ष दलित मुस्लिम एकता मंचलायक था 

कार्यक्रम में उपस्थित रहे – विधायक अमीन कागज़ी , कांग्रेस प्रवक्ता अर्चना शर्मा ,जाट महासभा के अध्यक्ष  राजाराम मील साहब , राजस्थान सम्रग सेवा संघ से  सवाई सिंह जी , दलित  मुस्लिम एकता मंच के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ़ आरको , कामरेड सुमित्रा चौपडा , राजस्थान नशाबंदी समिति से धर्म वीर कटेवा , युवा सामाजिक कार्यकर्ता धर्मेन्द्र आँचर , दलित चिन्तक मोहन लाल जी बैरवा , राजस्थान नागरिक मंच से अनिल गोस्वामी , संवेधानिक अधिकार संगठन से बसंत हरियाणा  ,वरिष्ट पत्रकार फारुक जी { इकरा पत्रिका }  प्रदेश महासचिव FDCA राजस्थान -डॉ. मुहम्मद इक़बाल सिद्दीक़ी

दलित मुस्लिम एकता मंच के राजस्थान मीडिया प्रभारी – पवन देव  आदी उपस्थित रहे |

 

मातृशक्ति के अधिकारों , सशक्तिकरण ,और सम्मान के लियें संघर्षो के साथ लड़ते रहेंगे – पवन देव

 उदेश्य / विचार – राजनीति में सकारात्मक , ज्वलंत मुद्दों – रोजगार .एट्रोसिटी. महिला सुरक्षा.सामाजिक रूप

से समाज मे आपसी सौहार्द .राष्ट्रीय एकता. समानता बेहतर शिक्षा के लिये – युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित

करना ।

 

PAWAN DEV 

M – 7688827752 , 7976371944

MAIL – PAWANDEV024@GMAIL.COM

पवन देव का जन्म 24 जनवरी 1989 को राजस्थान के जयपुर शहर में हुआ इनके पिता का नाम पूरण मल एवं माता का नाम देवकी देवी है |

पवन देव का झुकाव बचपन से ही सामाजिक कार्यों व् समाज सेवा की ओर रहा , 16 वर्ष की उम्र से ही उन्होंने मंडी – खटिकान , ईदगाह , चार दरवाजा क्षेत्र के गरीब , दलित ,मुस्लिम व् वंचित तबके के बच्चो को शिक्षा की और अग्रसर करने हेतू कार्य किया  , इसके लियें वह अपने स्वंम के स्कूल के समय को छोड़ कर बाकी समय इन बच्चो को शिक्षा की और अग्रसर करने में लगाया |

सामाजिक कार्यो में सक्रिय भूमिका –

VERTEX EDUCATIONAL FOR SOCIAL DEVELOPMENT SANSTHAN { JAIPUR }

पवन देव ने शिक्षा व् सामाजिक कार्यो के लीये अग्रणी संस्था  { वर्टेक्स एजुकेशनल  फॉर सोशल डेवलपमेंट संस्थान } से जुड़ कर जनसंपर्क पद कार्य करते हुयें , कन्या भ्रूण हत्या , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , बाल -विवाह रोकथाम , नशा मुक्त भारत , बाल मजदूरी – एक अभिशाप , महिला सशक्तिकरण , सामाजिक समानता , दहेज़ एक मानसिक बीमारी ,रक्तदान शिविर , पर्यवारण सुरक्षा – हमारी ज़िम्मेदारी , विवाह सम्मलेन आदी समाज से जुड़े मुद्दों पर काम किया व् लोगों को जागरूक किया व् निरंतर इस दिशा में प्रयास जारी है |

भीम संसद – 

पवन देव – भीम संसद संगठन में राष्टीय मीडिया प्रवक्ता के पद पर कार्य करते हुयें –

संविधान निर्माता डॉ बाबा साहब अम्बेडकर द्वार दियें गयें संवैधानिक / मूल अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करना व्  मातृ शक्ति { महिलाओं } दलित , आदिवासी वंचित- शोषित व् अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाले यूथ में लीडरशिप का विकास कर समतामूलक समाज का निर्माण करना  इसके लियें गाँव ,क़स्बे – ढाणी , जिला स्तर पर भीम संसद के सदस्यों के माध्यम से विचार गोष्टी – सम्मलेन आयोजन किया जा रहा है निरंतर |

राजस्थान दलित – मुस्लिम एकता मंच 

पवन देव – राजस्थान दलित मुस्लिम एकता मंच संगठन में राजस्थान मीडिया प्रभारी व् प्रवक्ता के पद कर कार्य कर रहे है 

देश में आपसी सोहार्द व्  भाईचारा कायम रहे है इसके लियें प्रबुद्ध समाज के गणमान्य लोगों ने इस संगठन का निर्माण किया है इसमें  युवा पत्रकार पवन देव  पधाधिकारी की ज़िम्मेदारी निभाते हुयें देश हित व् राष्ट निर्माण में युवाओं की भूमिका पर कार्य कर रहे है किसी भी अवांछित / अप्रिय घटना पर संगठन द्वारा पुलिस प्रशासन व् सामाजिक गणमान्य लोगो व् स्थानीय लोगो द्वारा समस्या की जड़ तक पहुँच कर दोनों पक्षों के पहलू ओं की जांच -पड़ताल कर उसका निराकरण कर ,शांति स्थापित कर स्वस्थ समाज का निर्माण करना संगठन की पहली प्राथमिकता है |

अखिल भारतीय परिसंघ में जयपुर शहर अध्यक्ष के पद मिली ज़िम्मेदारी

पूर्व सांसद उदित राज जी ने राजस्थान में अपने संगठन में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने व् गरीब ,वंचित , पिछड़े वर्ग के विकास व् लीडरशिप विकसित करने के अपने प्रयासों में पवन देव को महत्वपूर्ण  ज़िमेदारी दी है पूर्व सांसद उदित राज जी के निर्देशानुसार पवन देव यूथ की समस्यों को लेकर काम कर रहे है इसके साथ ही अनुसूचित जाति / जन जाति संगठनो के एकीकरण व् कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों व समाज के विकास के लिये काम कर रहे है |

पत्रकारों के अधिकारों के लियें – संघर्ष व् कार्य –

RAJASTHAN WORKING MEDIA JOURNALISTS UNION – 

पत्रकारों के कल्याण व् उनके उत्थान के लियें अग्रणी संस्था { RAJASTHAN WORKING MEDIA JOURNALISTS UNION } में STATE COORDINETOR { स्टेट कोऑर्डिनेट } के पद कार्य करते हुयें साथी पत्रकारों के उन्नति के लियें कार्य –

पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुयें साथी पत्रकारों के हक्क व् अधिकारों के लीये संघर्ष कर केंद्र व् राज्य सरकार से  व्  केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री महोदय व् राजस्थान की मुख्यमंत्री से मिल कर वर्किंग पत्रकारों की समस्या व् पत्रकारों की सुरक्षा के लियें कानून बनवाने का कार्य किया , जिसके फलस्वरूप राजस्थान सरकार ने वर्किंग पत्रकारों के केमरों व् अन्य उपकरणों का अपनी और { सरकार }  से बीमा  { Insurance } करवाया गया व् पत्रकार आवास योजना के लियें संगठन के माध्यम से सरकार से  योजना को पूर्ण करने के लीये प्रयास जारी |

PRSI { PUBLIC RELATION SOSAITY OF INDIA }

पवन देव ने अपनी पत्रकारिता के बाद अपनी मास्टर डिग्री JOURNLISM AND MAAS COMMUNICATION   पब्लिक रिलेशन एंड एडवरटाइजिंग में विशेषज्ञ ”  राजनीतिक जनसंपर्क ( political public relations ) किया है पवन देव  पब्लिक रिलेशन क्षेत्र में कार्य कर रहे है इसके साथ ही इन्होंने जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन  {JMRC } में ( जयपुर मेट्रो रेल ) के उद्घाटन के समय बेहतर संवाद  व्यापारियों के साथ स्थापित कर व्यापरियों व् रेल प्रशासन के बीच सेतु का काम किया |

इसके साथ ही पवन देव ने विधानसभा चुनावों से पूर्व ” भारतीय चुनाव अभियानों में सोशल मीडिया की भूमिका “ पर बुद्धिजीवी वर्ग ,सांसद , विधायक, वरिष्ठ पत्रकार , पीएचडी स्कोलर , समाज सेविका महिलाओं व यूथ पर अपना लघु शोध किया ” पूरा किया |

जनसंपर्क के क्षेत्र में कड़ी मेहनत को देखते हुये पब्लिक रिलेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के जैसे राष्ट्रीय संगठन के जयपुर चैप्टर में मुख्य सदस्यो में पवन देव को जगह मिली इसके साथ ही गत { prsi } कार्यकरणी चुनावों में पवन देव को चुनाव अधिकारी की विशेष जिम्मेदारी मिली जिसका पवन देव द्वारा सफलता पूर्वक चुनाव करवाया गया  | पवन देव को  इस संगठन में सबसे छोटे सदस्य के रूप में मुख्य सदस्यता मिलने का गौरव मिला है

व्यवसाय –

वर्तमान में आर्थिक आजीविका के लिये पवन देव MEDIA AND PR CONSULTANT का काम कर रहे है इसके साथ ही  https://politico24x7.com/  नामक अपनी न्यूज़ वेबसाइट चला रहे है  साथ ही जल्द ही अपना समाचार पत्र / पत्रिका का संचालन भी जल्द शुरू किया जाना है

PERSONAL INFORMATION

NAME – PAWAN DEV 

FATHER – PURAN MAL

CAST – SC { ANUSUCHIT JAATI } – { KHATIK }

DOB  – 24 JAN 1989

CONTACT- 7688827752 ,7976371944

ADD – R- 202 JIVAN MARG LAXMI NARAYAN PURI  { JAIPUR -302002 }

MAIL – PAWANDEV024@GMAIL.COM

VIDHANSBHA – KISHANPOL – JAIPUR

EDUCATION  – B.A RAJASTHAN UNIVERSITY

 BJMC {  Bachelor of Journalism & Mass Communication } – VMOU KOTA 

MMC – PR  { Master of Mass Communication(PR&A) – HJUJ JAIPUR 

Certificate courses

 Digital marketing – Micro, Small &  Medium Enterprises ( MSME )

 Entrepreneurial Development Program { EDP } – MSME govt of india 

क्या पीएम मोदी और अमित शाह झूठ -जुमलो के सहारे चुनाव जीतना चाह रहे हैं –

Is PM Modi and Amit Shah want to win the elections with the lie

यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय है, जहाँ प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल के मुखिया तथा मुख्यमंत्री स्तर के राजनेता खुलकर चुनावी सभाओं में झूठ बोल रहे हैं, जनता को गुमराह कर रहे हैं, जनहित के मुद्दों से मतदाता का ध्यान हटा रहे हैं, ताकि पूर्व की भांति जनता उनकी लफ्फाजी के चक्रव्यूह में फंस जाए और उन्हें एक बार फिर सत्ता सौंप दे ! 

जयपुर (टीम इकरा पत्रिका)। भारतीय लोकतंत्र को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है, क्योंकि यहाँ बहुत से देशों की कुल आबादी से अधिक करीब 90 करोड़ वोटर हैं। जितने किसी एक देश में तो होने का सवाल ही नहीं है। साथ ही यह वोटर पंचायत और नगर निकाय से लेकर विधानसभा एवं लोकसभा तक का हर पांच साल में चुनाव करते हैं। जनता को नीचे से लेकर ऊपर तक के तमाम लोकतांत्रिक राजाओं को बदलने का अधिकार है। भारतीय लोकतंत्र की एक और विचित्र बात भी है कि यहाँ देश के किसी न किसी कौने में हर वर्ष कोई ना कोई चुनाव होता है। यानी यहाँ चुनाव एक लोकतांत्रिक त्यौहार बन चुका है।

यह बड़ी खूबसूरती है भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था की, इसीलिए इसे विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। लेकिन 70 साल बाद इस बेमिसाल लोकतंत्र पर लोकतंत्र के जरिए ही काले बाद मण्डराने लग गए हैं ! आज हमारा लोकतंत्र जातिवाद, धर्मवाद, वंशवाद, पूंजीवाद, अपराधवाद, घोटालेवाद आदि कई वादों के साथ एक और वाद का भी शिकार हो चुका है तथा वो है झूठवाद ! सियासी बहसों और चुनावी भाषणों में हल्की फुल्की झूठ तो बरसों से चल रही है तथा कमोबेश सभी राजनीतिक दल इसका सहारा लेते रहे हैं।लेकिन तर्क वितर्क की जो हत्या और सफेद झूठ का बोलबाला इस चुनाव में हो रहा है, या पिछले पांच साल के विभिन्न चुनावों में हुआ है, वैसा कभी नहीं हुआ है !

यह भी सच है कि कुछ पार्टियों को छोड़ दें, तो झूठवाद के इस सियासी हमाम में बाकी सभी पार्टियां नंगी नज़र आती हैं। लेकिन यह और खतरनाक तब हो जाता है, जब सत्तारूढ़ दल के नेता और यहाँ तक कि स्वयं प्रधानमंत्री खुलेआम चुनावी सभाओं में झूठ बोलने लग जाएं ! सवाल यह है कि कोई आदमी झूठ क्यों बोलता है ? झूठ तीन वजह से बोली जाती है। पहली सच का सामना करने की हिम्मत नहीं हो। दूसरी वजह किसी बात को छुपाना चाह रहा हो, ताकि उसकी पोल न खुल जाए। तीसरी वजह लोगों को गुमराह कर अपना फायदा उठाने की कोशिश में झूठ बोली जाती है। अगर झूठ बोलने से किसी व्यक्ति विशेष का फायदा और नुकसान होता है, तो वो ज्यादा खतरनाक नहीं होता है, लेकिन अगर झूठ बोलने से किसी राष्ट्र या समाज का नुकसान होता है, तो वो झूठ बेहद खतरनाक होती है !

कुछ ऐसा ही आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनके खासमखास और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तथा भाजपा के बड़े नेता कर रहे हैं। यह लोग जनहित के मुद्दों पर बात करने की बजाए ऐसे मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जिनसे लोकतंत्र कमजोर हो तथा इनकी झूठी बातों से मतदाता गुमराह होकर इन्हें पुनः सत्ता सौंप दे। जनता ने इन्हें पांच साल पहले पूर्ण बहुमत की सरकार सौंपी थी, क्योंकि जनता कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के काले कारनामों से दुखी थी। जनता ने सोचा कि सत्ता बदलनी चाहिए और नरेन्द्र मोदी एवं उनकी टीम को मौका देना चाहिए। क्योंकि इन्होंने अच्छे दिन लाने, विकास, रोजगार आदि लाने का वादा किया था। अब पांच बाद चुनावों में इन्हें यह बताना चाहिए कि हमने विकास कौनसा और कहाँ कहाँ किया तथा रोजगार कितनों को दिया ? लेकिन इन मुद्दों पर यह बात नहीं करते, क्योंकि इन्होंने इन मुद्दों पर पांच साल में कुछ किया ही नहीं।

पांच साल में जिस भी राज्य में विधानसभा चुनाव हुए हैं, घुमा फिराकर यह लोग कश्मीर, पाकिस्तान, मुसलमान, हिन्दू, मदरसे, कब्रिस्तान, शमशान, गौ हत्या, लव जिहाद, जिन्नाह, धर्मान्त्रण, घर वापसी, तीन तलाक, राम मन्दिर, बाबरी मस्जिद, मुस्लिम तुष्टीकरण, हिन्दुओं को खतरा, हिन्दुओं का पलायन, बांग्लादेशी घुसपैठिये, रोहिंग्या जैसे मुद्दों को अपना चुनावी मुद्दा बनाते आ रहे हैं। हाँ, इन मुद्दों में भी यह उच्च स्तर का चयन करते हैं, जिस राज्य में जो फ़िट बैठ रहा हो, उसे पूरी ताकत से उठाते हैं और जो वहाँ फायदेमंद नहीं हो, उस मुद्दे को छोड़ देते हैं। यह लोग रोटी, रोजगार, खेती किसानी, शिक्षा, चिकित्सा आदि जनहित के मुद्दों पर कोई बात नहीं करते, अगर कहीं मजबूरी में करते भी हैं तो घुमा फिराकर फर्जी आंकड़ों व लफ्फाजी का सहारा लेकर करते हैं।

गत दिनों प्रधानमन्त्री ने वर्धा की एक चुनावी रैली में कहा कि हिन्दू आतंकवाद शब्द कांग्रेस की देन है। अब यह बात समझ से परे है कि कांग्रेस ने कब कहा था कि हिन्दू आतंकवादी होते हैं ? अगर कांग्रेस ने ऐसा कहा है तो उसके खिलाफ उसी वक्त मुकदमा दर्ज होना चाहिए था। उन्होंने यह बात विभिन्न बम धमाकों में साध्वी प्रज्ञा और असीमानंद मामले को लेकर कही। लेकिन प्रधानमंत्री जी को मालूम होना चाहिए कि जिस तत्कालीन गृह सचिव आर के सिंह ने इन मामलों को उजागर करवाया या किसी बेगुनाह हिन्दू भाई को आतंकवाद के मुकदमे में फंसवाया, वे भाजपा के सांसद और आपके मन्त्रीमण्डल के सदस्य हैं ! आपने आज तक आर के सिंह पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की ? इसी तरह से एक अप्रेल को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ओडिशा की चुनावी सभा में कहा कि कांग्रेस

हिन्दुओं पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है।

7 अप्रेल को कूच बिहार की एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री ने कहा बंगाल विकास से वंचित रहा है। ममता बनर्जी राष्ट्र विरोधी लोगों का समर्थन करती हैं। अगर यह बात सही है तो प्रधानमन्त्री जी आप पांच साल क्या कर रहे थे ? जनता ने देश की चाबी आपको सौंप रखी थी, आपको बंगाल सरकार को बरखास्त कर ममता बनर्जी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना चाहिए था और फिर बंगाल में विकास की गंगा बहानी चाहिए थी। साथ ही प्रधानमन्त्री जी को यह भी बता देना चाहिए जिन प्रदेशों में भाजपा का राज है, वहाँ कितना विकास हुआ है ? हकीकत तो यह है प्रधानमंत्री जी कि जिस तरह से बंगाल में आम आदमी बुनियादी समस्याओं को लेकर त्राहि त्राहि कर रहा है, उसी तरह से भाजपा शासित राज्यों में भी त्राहि त्राहि मची हुई है !

मोदी जी ने 6 अप्रेल को सोनपुर की एक सभा में कहा कि गरीबी हटाने के लिए सबसे बेहतर जड़ी बूटी है, जिसका नाम है कांग्रेस हटाओ ! इसी दिन उन्होंने नांदेड़ में कहा कि कांग्रेस जनता से किए वादे भूल जाती है ! मोदी जी कांग्रेस को हटाए तो पांच साल हो गए ? फिर आपने इस जड़ी बूटी से जनता की गरीबी दूर क्यों नहीं की ? रही वादों की बात, तो यह सच है कि कांग्रेस अपने वादों को भूल जाती है। लेकिन आपको यह बात कहते शोभा नहीं देती, क्योंकि आपने भी ऐसा ही किया है। यानी आपने जो वादे 2014 के चुनाव में किए थे उनमें से एक भी पूरा नहीं किया !

इसी तरह प्रधानमन्त्री ने 5 अप्रेल को देहरादून में कहा कि अगस्ता हेलिकॉप्टर घोटाले में एपी और फेम दो नाम गिरफ़्तार दलाल मिशेल ने बताए हैं। एपी का मतलब अहमद पटेल और फेम का मतलब फैमिली ! यानी सोनिया गांधी का परिवार। मोदी जी अगर यह सच है तो आपने आज तक एपी और फेम को सलाखों के पीछे क्यों नहीं भेजा ? क्या यह आपकी देश से गद्दारी नहीं है ? क्योंकि जनता ने देश का मुखिया आपको बनाया और आपको यह मालूम है कि एपी और फेम चोर हैं, तो आपके द्वारा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करना एक तरह से देश को धोखा देना और चोरों को बचाना है ! क्या जनता यह समझे कि आपने एपी और फेम को बचाने के लिए कोई बड़ा सौदा किया है ?

ऐसे बेशुमार झूठ प्रधानमन्त्री और उनकी पार्टी के बड़े नेता चुनावी सभाओं में बोल रहे हैं। क्योंकि इनसे आसानी से जनता का ध्यान जनहित के मुद्दों से हट जाता है। क्या प्रधानमन्त्री जी को यह नहीं बताना चाहिए कि कितने लोगों को रोजगार मिला ? कालाधन कितना आया और उसका वितरण 15 लाख या उससे कम किस किस के खाते में हुआ ? कितने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई ? इनमें भाजपा के कितने नेता शामिल हैं ? अगर जिनके खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनमें एक भी भाजपाई नेता नहीं है, तो क्या भाजपा के किसी भी नेता ने आज तक कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है ? चलिए यह तो कुछ कठिन सवाल हैं, सिर्फ इस सवाल का जवाब दे देना चाहिए कि पांच साल में केन्द्रीय सेवाओं में कुल कितनी भर्तियां हुई और आज कुल कितने पद खाली पड़े हैं ? दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा !

लेख़क -एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।

कांग्रेस -छोटे राजनेतिक दलों के साथ धोखा करती है क्या यह चरित्र है कांग्रेस का – जानें यहाँ

Whether Chhotu Bhai Vasawa was betrayed by CM Gahlot or was not fit to fulfill the demand

of Chhotu Bhai –

जयपुर/डूंगरपुर (इकरा पत्रिका)। छोटू भाई वसावा समाजवादी पृष्ठभूमि के एक कद्दावर आदिवासी नेता हैं। जो भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वे गुजरात की झागड़िया सीट से विधायक हैं और करीब आधा दर्जन बार से लगातार विधायक बनते आ रहे हैं। उनके पुत्र महेश भी गुजरात की डोडियापाड़ा विधानसभा सीट से विधायक हैं। छोटू भाई 2017 से पहले जनता दल के नेता के तौर पर विधायक रहे हैं। 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीटीपी का गठन किया और एक बार फिर फतह का झण्डा गाड़ दिया।

छोटू भाई वसावा का इतना ही परिचय नहीं है, और भी है। जिससे आप भलीभांति परिचित हैं। सिर्फ आपको याद दिलवाने की आवश्यकता है। याद करें 8 अगस्त 2017 का दिन। इस दिन गुजरात में राज्यसभा चुनाव थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमहद पटेल हारते हारते चुनाव जीत गए थे। उनको चुनाव जीतवाने में जो एक वोट ऐतिहासिक सहायक बना था, वो वोट छोटू भाई वसावा का ही था। छोटू भाई वसावा तब जनता दल यूनाइटेड के विधायक थे और पार्टी के अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश व आग्रह के बावजूद उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को वोट नहीं दिया।

उनका वोट भाजपा उम्मीदवार को डलवाने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने भी एड़ी चोटी का जोर लगा लिया। लेकिन छोटू भाई न किसी लालच में आए और ना ही किसी दबाव में। उन्होंने दो टूक कह दिया कि मेरा वोट साम्प्रदायिक पार्टी भाजपा को कतई नहीं मिलेगा। नीतीश कुमार ने बगावत करने के कारण उन्हें पार्टी से निकाल दिया। उनका वोट अहमद पटेल को पड़ा, लेकिन मतगणना और चुनाव परिणाम को लेकर विवाद हो गया था। मामला केन्द्रीय चुनाव आयोग तक पहुंच गया था, हर टीवी चैनल पर यही मुद्दा छाया रहा। देर रात को चुनाव आयोग का आदेश आया और मतगणना शुरू हुई।

पूरे देश की नजर टीवी चैनलों पर टिकी हुई थी, भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चैनलों की बहस में अपने अपने पक्ष को सही बता रहे थे। यह पहली बार था जब राज्यसभा का चुनाव इतना चर्चित हुआ। देर रात को परिणाम आया और अहमद पटेल को विजयी घोषित किया गया। चुनाव आयोग की इस घोषणा से भाजपा खेमे में सन्नाटा पसरा गया, क्योंकि मामला गुजरात का था, जहाँ से प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आते हैं। साथ ही अहमद पटेल का था, जो गुजराती मुसलमान तो हैं ही, कांग्रेस की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के तब राजनीतिक सलाहकार भी थे। इस जीत से कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी खेमों में खुशी की लहर थी, उन्होंने इस खुशी का प्रदर्शन इस तरह किया, जैसे पीएम मोदी को करारी मात दे दी हो।

अहमद पटेल की जीत और भाजपा की करारी हार तय करने वाले तथा सम्पूर्ण विपक्ष को खुशी का जश्न मनाने का मौका देने वाले नेता का नाम छोटू भाई वसावा है। लेकिन आज कांग्रेस ने छोटू भाई वसावा को एक भी लोकसभा की सीट नहीं देकर उस एहसान को भूला दिया है। यह मानना है बीटीपी से जुड़े हुए लोगों और समाजवादी, अम्बेडकरवादी व मार्क्सवादी सियासी जानकारों का। सियासी गलियारों में चर्चा है कि सीएम अशोक गहलोत ने छोटू भाई वसावा के साथ सरासर धोखा किया है। वो इसलिए कि 2017 में अशोक गहलोत गुजरात के प्रभारी महासचिव थे और छोटू भाई वसावा का वोट अहमद पटेल को दिलवाने में उनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

छोटू भाई वसावा की पार्टी बीटीपी की दिसम्बर 2018 में हुए राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन की चर्चा थी। लेकिन यह गठबंधन नहीं हो सका और बीटीपी ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। विधानसभा चुनाव में बीटीपी के दो उम्मीदवार विधायक बनने में सफल हुए। इस चुनाव में बीटीपी ने डूंगरपुर जिले की चारों सीटों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई। उसने यहाँ की चौरासी और सागवाड़ा विधानसभा सीटों को पहली बार में फ़तह किया तथा आसपुर सीट पर वो मामूली वोटों से चुनाव हार गई। बीटीपी ने इन तीनों सीटों पर कांग्रेस को तीसरे नम्बर पर धकेल दिया। बीटीपी से लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन करने की चर्चा सियासी गलियारों में चल रही थी। लेकिन वो चर्चा सिर्फ चर्चा ही रही और गत दिनों कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए।

खबर है कि छोटू भाई वसावा कांग्रेस से राजस्थान में चार सीटें मांग रहे थे, लेकिन वो दो पर भी राज़ी हो जाते। परन्तु कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें एक भी लोकसभा सीट देना उचित नहीं समझा तथा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी आलाकमान को समझाया कि क्षेत्रीय दलों से गठबंधन करने से आगे चलकर कांग्रेस कमजोर हो जाएगी एवं यह क्षेत्रीय दल मजबूत होकर अगले चुनाव में और अधिक सीट मांगेंगे। सियासी पण्डितों का यह भी मानना है कि कांग्रेस की एक आदत है कि वो गठबंधन और चुनावी चर्चा के नाम पर क्षेत्रीय दलों को अटकाए रखती है और एनवक्त पर उन्हें छोड़ कर उम्मीदवार घोषित कर देती है। यही उसने बीटीपी के साथ किया।

कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित करते ही छोटू भाई वसावा ने भी राजस्थान में अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। उन्होंने बांसवाड़ा डूंगरपुर लोकसभा सीट से कांतिलाल रोत और जोधपुर लोकसभा सीट से अमर सिंह कालुंदा को अपना प्रत्याशी बनाया है तथा उदयपुर, राजसमन्द व जालोर से उम्मीदवार दूसरी सूची में घोषित करने की घोषणा की है। उन्होंने खुद के लिए गुजरात की भरूच लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की भी घोषणा की है। सियासी गलियारों में चर्चा यह भी है कि छोटू भाई वसावा राजस्थान के अलावा गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में भी सीटें मांग रहे थे और यह संख्या बीस के करीब थी, जिसे कांग्रेस देने में असमर्थ थी।

कारण जो भी हो लेकिन उक्त घोषणा से कांग्रेस और बीटीपी के रास्ते अलग अलग हो गए हैं। जिसके बारे में सियासी जानकारों का कहना है कि छोटू भाई वसावा जैसे मजबूत और संकट मोचक साथी को छोड़कर कांग्रेस ने सही नहीं किया है। उनसे कैसे भी करके गठबंधन करना चाहिए था, ताकि एक तो वोटों के बंटवारे से भाजपा को फायदा नहीं हो और दूसरा कांग्रेस पर यह स्थाई ठप्पा न लगे कि वो क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलने में ईमानदारी नहीं बरतती है |

जयपुर – 2 अप्रैल अब ” स्वाभिमान दिवस ” भीम सैनिको का होगा – सम्मान

Jaipur Dr. Ambedkar Memorial Welfare Society – will be celebrated on April 2 as “Swabhiman Day ”  –

जयपुर | 2 अप्रैल 2018 का दिन दलित समाज के लियें ऐतिहासिक व् महत्वपूर्ण रहा वही दूसरी और एससी/एसटी समाज ने अपने अधिकारों के संरक्षण व् अन्याय के विरोध ” भारत बंद ” के द्वारा विरोध प्रदर्शन किया था जिस पर प्रशासन ने शांति पूर्ण विरोध कर रहे एससी/एसटी समाज  के युवाओं पर दमनकारी – निति अपनाते हुयें लाठीचार्ज किया व् समाज विरोधी मनुवादी ताकतों के द्वारा निर्दोष युवाओं पर फर्जी केस लगा कर गिरफ्तार कर शाररिक व् मानसिक रूप से प्रताड़ित किया  |

2 अप्रैल 2018को भारत बंद- आखिर क्यों-

दलित समाज लम्बे समय से समाज में व्याप्त बुराई छुआछूत – अत्याचारों से पीड़ित रहा है इस सामाजिक बुराई व् दलित समाज के लोगों की सुरक्षा के मध्यनजर ” भारतीय संसद ने 1989 में अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम ” पारित किया था जो की कुछ मामूली स्तर पर दलित समजा को सुरक्षा दे रहा था लेकिन इस अधिनियम के विरोध में 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा समाप्त कर दिया गया क्योकि सुप्रीम कोर्ट में इस अधिनियम के पक्ष में सरकारी वकीलों के द्वारा कमजोर पैरवी की गई व् दलित अत्याचारों के सही -सटीक आकड़े सुप्रीम कोर्ट में नहीं रखे गए.  जिस के विरोध में दलित – आदिवासी समाज द्वारा 2 अप्रैल 2018 को भारत बंद कर विरोध प्रदर्शन किया था जिसके चलते समाज के कई युवा शहीद हुये हजारों  ज़ेल गयें |

डॉ . अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी के महासचिव

अनिल कुमार गोठवाल ने कहा –

2 अप्रैल 2018 का दिन हमारे समाज के लियें बड़ा संघर्षमय रहा  हमारे अधिकारों की रक्षा के लियें हमें संयुक्त रूप से “भारत बंद ” के रूप में सड़कों पर उतरना पड़ा और आंदोलन करना पड़ा क्योकिं सवाल हमारे समाज के अस्तित्व को बचाने का था इस आंदोलन ने हमें गहरा आघात भी पहुँचाया है हमारे समाज के युवा साथी पवन  इस आंदोलन में शहीद भी हुयें और कई युवा साथी ज़ेल गयें आज पूरा समाज इन भीम सेनिकों को सलाम करता है और समाज को इन युवाओं पर गर्व है की अपने अधिकारों के संरक्षण व् न्याय के ली सजग है

इस घटना क्रम  को 2 अप्रैल 19 को एक वर्ष पूरा हो रहा है जिसे जयपुर में डॉ. अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी ” स्वाभिमान दिवस ” के रूप में मना रहीं है इस कार्यक्रम में सभी भीम सेनिकों व उनके अभिभावकों का सम्मान किया जायेगा और समाज हर कदम पर उनके साथ खड़ा है |

संस्था प्रांगन में 2 अप्रैल को एससी/एसटी वर्ग के सभी सम्मानीय मंत्री ,विधायक और सभी गणमान्य लोगों को सादर आमंत्रित किया गया है |

इस कार्यक्रम की अधिक जानकारी के लियें सम्पर्क करे – धर्मराज सिंगोर 9887915814

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वर्तमान समय में दलित समाज की होती – दुर्दशा आखिर क्यों –

At the present time, falling level of dalit politics – spark era

वर्तमान समय में दलित राजनीति का गिरता स्तर – चमचायुग शुरू –

भारतीय संविधान के शिल्पकार भारत रत्न  बाबा साहब डॅा. बी.आर. अंबेडकर की यह दूरदर्शिता ही थी कि उनके द्वारा गोलमेज़ सम्मेलन में भारत के दलितों (अनु.जाती / अनु. सूचित जन जाती /तथा पिछडा वर्ग ) के व्यस्क मतदाता के लिए दो मतों की मांग करना कितनी अहमियत रखती ,यदि मिस्टर गांधी द्वारा उसका आमरण अनशन के द्वारा प्रतिरोध नहीं किया जाता तो आज अधिकारों से वंचित मूलनिवासियो के अधिकारों से इस कदर खिलवाड़ नहीं किया जाता .

जो हम आज देखने को मजबूर हैं। कारण यह है कि बाबा साहब यह भली -भांति जानते थे कि दोहरे मतदान

का अधिकार यदि मूल -निवासियो को मिल गया होता तो भारत की लोकसभा और तमाम विधानसभाओं  में वास्तविक रूप से हमारे ही जनप्रतिधियो का प्रतिनिधित्व होता,जो आज देखने को भी नहीं मिलता है – और यहीं इस समाज का दुर्भाग्य भी है कि सुरक्षित सीटों से चुनकर जाने वाले जनप्रतिनिधि अपने समाज से अधिक अपनी स्वयं तथा अपने राजनीतिक दलों और उनके आंकाओ के तलवे  चाटने में अपनी बहादुरी समझने में संकोच नहीं करते हैं |

आज सत्ता के लालच में समाज के गणमान्य लोग बाबा साहब के सिद्धांतो के विपरीत जाकर मनुवादियों के षड्यंत्र में फंस गये है जिसका खामियाजा आज समाज अपने शोषण से दे रहा है अर्थार्त मनुवादी लोग हमेशा हमारे समाज के गरीब ,वंचित लोगों के शोषण हमारे समाज के पथ विहीन लोगों द्वारा ही करवा रहे है आज युवा पीड़ी बाबा साहब के सपनो के भारत के निर्माण के लीये वचनबद्ध है इस सकारात्मक मुहीम में हमारे युवा कामयाब ही हो रहे है |

बीजेपी का आंबेडकर प्रेम –

क्या बाबा साहब की इन 22 प्रतिज्ञाओँ से सहमत होंगे – मनुवादी 

14 अप्रैल को संविधान निर्माता आंबेडकर की जयंती पूरे देश में धूमधाम से मनाई गई। तमाम राजनैतिक दलों में बाबा साहब की जयंती के अवसर पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने की होड़ मची हुई थी। आश्चर्य की बात यह है कि बाबा साहब जिस हिंदुत्व और जातिवाद के खिलाफ ताउम्र लिखतें-लड़ते रहें उसी अमानवीय व्यवहार के पैरवीकार माने जाने वाले और बाबा साहब के विचारों से घोर असहमति रखने वाले तमाम राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन भी इस अवसर को मनाने के बहाने अपना उल्लू सीधा करते नज़र आए। अब मनाने और मान्यताओं में फर्क करना बहुत ज़रूरी हो गया है।
हैं 1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
2.मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा ।
3.मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
4.मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ।
5.मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ।
6.मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा।
7.मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा।
8.मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा।
9.मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ।
10.मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा।
11.मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा।
12.मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा।
13.मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा।
14.मैं चोरी नहीं करूँगा।
15.मैं झूठ नहीं बोलूँगा।
16.मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा।
17.मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा।
18.मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा।
19.मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हा
निकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप
मैं बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ।
20.मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है।
21.मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ।
22. मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा।

 


यह लेखक के निजी विचार है |

लेख़क – मोहन लाल बैरवा – { सोशलिस्ट एक्टिविस्टएवं  एवं टीवी डिबेटर } जयपुर राजस्थान

AJAK – डॉ बाबा साहब अम्बेडकर की 128 वीं जयंती – बड़े हर्ष व् धूमधाम से मनाई जायेगी

AJAK’s affection on the 128th birth anniversary of Dr. Babasaheb Ambedkar –

डॉ बाबा साहब अम्बेडकर  की 128 वीं जयंती  पर AJAK का स्नेह -मिलन समारोह  –

जयपुर | भारत के संविधान निर्माता – भारत रत्न डॉ . भीम राव अम्बेडकर की जयंती पर प्रत्येक वर्ष के  भांति इस वर्ष भीअजाक { डा. अम्बेडकर अनुसूचित जाति अधिकारी कर्मचारी एसोसिएशन } संस्था द्वारा बड़े स्तर पर 14 अप्रैल 19 को राजस्थान विधानसभा के पास स्थित यूथ होस्टल में मनाया जायेगा |

संस्था का उदेश्य –

AJAK  –  भारत के अनुसूचित जाति अधिकारी कर्मचारी एसोसिएशन के लोगों को एकजुट कर भारत के संविधान में वर्णित मूल्यों के आधार पर  सशक्त देश का निर्माण , डॉ बाबा साहब अम्बेडकर के विचारो व् उनके द्वारा दलित – गरीब वंचित ,शोषित महिला वर्ग को दिये गए अधिकारों को जन – जन तक पंहुचा कर अन्तिम छोर पर खड़े व्यक्ति के अधिकारों को सुनिश्चित कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है   |

मुख्य कार्यक्रम –

जयपुर स्थित यूथ होस्टल में { 14 अप्रैल 19 } सांय 6 बजें  बाबा साहब डॉ अम्बेडकर की वंदना की जायेगी जिसके बाद केंडल मार्च , आतिशबाज़ी , बाबा साहब पर चित्रकला व् निबंध प्रतियोगिता , भीम डिनर आदी कार्यक्रम किये जायेंगे |

इस कार्यक्रम की अधिक जानकारी के लियें –  सम्पर्क करें –

AJAK मीडिया प्रवक्ता – GL VARMA : 9829688869

 

 

 

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OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक संगठनो का निर्णय – लोकसभा चुनावों में मनुवादी प्रत्याशियों का करेंगे -बहिष्कार

95% समाज ने कहा – लोकसभा चुनावों में करेंगे – मनुवादि प्रत्याशियों का बहिष्कार —

OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों ने  सर्व सहमती से निर्णय लिया की आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में सभी पार्टियों के मनुवादी प्रत्याशियों का वह विरोध करंगे और किसी भी कीमत पर इन मनुवादी प्रत्याशियों को वोट नहीं देंगे |

 

जयपुर | OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज के  वरिष्ट संगठनों ने आज जयपुर में आयोजित “संयुक्त स्वाभिमान बैठक ” में भाजपा और कांग्रेस द्वारा मूलनिवासियों के अधिकारों का जो हनन किया जा रहा है उस पर विस्तार से चर्चा की गई |

स्वाभिमान बैठक में सभी समाजों के वरिष्ट , बुद्धिजीवी व् युवा वर्ग शामिल हुवें जिसमे वर्तमान भाजपा मोदी सरकार द्वारा जो कुठाराघात OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज पर किये जा रहे है जैसे – मोदी की भाजपा सरकार द्वारा आरक्षण के खत्म करने की साजिश – 13 पॉइंट रोस्टर , evm की विश्वसनीयता पर सवाल , बिन मांगे सवर्णों को दिये गए – 10% आरक्षण आदी गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई |

क्या कहा बुद्धिजीवियों ने –

अध्यक्ष्य – आरक्षण अधिकार मंच के राजाराम मील साहब –

ने कहा की आज वर्तमान भाजपा सरकार ने आरक्षण को मजाक बना दिया है आज तक आरक्षण सही तरीके से लागू भी नहीं हुआ है

जबकि भाजपा आरक्षण विरोधी सरकार साबित हुई है आज देश का शिक्षित युवा बेरोजगार घूम रहा है मोदी सरकार आज पूरी तरह से विफल साबित हुई है आज जिन गरीब ,वंचित शोषित वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए था उन्हें तो सही तरह से मिला भी नहीं है और सवर्णों को बिन मांगे 10 % आरक्षण लाभ दे दिया गया है जो की इस मनुवादी सरकार के पक्षपात को उजागर करता है |

दलित – मुस्लिम एकता मंच अध्यक्ष – आरको साहब 

अब्दुल लतीफ़ आरको साहब ने कहा की आज देश को कुछ मुठ्टी भर लोग अपने अनुसार चला रहे है उन्हें सिर्फ अपने चहीते मित्रमण्डली { अडानी -अम्बानी } को लाभ केसे पहुँचाया जाये इस पर अधिक ध्यान रहता है जबकि देश के 40% बेरोजगार लोग  प्रतिदिन रोजगार की तलाश में शहरों की और जाते है आज देश में साम्प्रदायिक ताकते फन उठाये हुए है आज देश के हालत चिन्त्ता जनक है आज  OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज के लोग इस विषम परिस्थितियों में है की कांग्रेस – भाजपा में से कौन सही है जबकि वर्तमान में दोनों पार्टिया सांप नाथ – नाग नाथ से कम नज़र नहीं आती है जो कि हमारे बहुसंख्यक समाज के लिए बड़ी चिंता का विषय है |

भीम संसद – पवन देव 

भीम संसद के मीडिया प्रवक्ता पवन देव ने कहा की आज देश की सत्ता में हर स्तर पर मनुवादियों का कब्ज़ा है आज इन मनुवादियों ने संविधान को मजाक बना दिया है आज देश का संविधान ख़तरे में है भारत का संविधान विश्व का सबसे मजबूत संविधान है क्योकिं संविधान निर्माता डॉ बाबा साहब अम्बेडकर ने इस संविधान के माध्यम से देश के सभी वर्गों – दलित ,पिछड़ा ,वंचित अल्पसंख्यक , महिला वर्ग आदी सभी के अधिकारों को सुरक्षित व् संरक्षित किया है जिससे यह पिछड़ा वंचित समाज – मुख्य समाज के साथ मुख्यधारा में आ सके लेकिन आज इस भाजपा मनुवादी सरकार ने बहुसंख्यक 95 % समाज के लोगों पर षड्यंत्र द्वारा कुठाराघात कर अपने चहितों को लाभ देने में मशगूल है जो की देश की जनता के साथ धोखा है  |

युवा सामाजिक कार्यकर्ता – धर्मेन्द्र आँचर –

युवा सामाजिक कार्यकर्ता आँचर ने कहा की आज देश में 5 प्रतिशत सवर्ण समाज के लोगों ने सभी संसाधनों पर कब्ज़ा कर रखा है जबकि मूलनिवासी OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज आज हाशिये पर खड़ा है आज देश में 5 % लोगों को 10 % आरक्षण  बिन मांगे यह  मनुवादी सरकार ने गिफ्ट कर दिया है जबकि देश की 95 %  जनसंख्या को आज अपने संविधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया है आज देश का युवा बेरोजगारी से तंग आ कर आत्महत्या कर रहा है और देश के यह मनुवादी नेता विदेशी दौरों में मस्त है आज हम इन दोनों भाजपा – कांग्रेस के मनुवादी प्रत्याशियों को लोकसभा में वोट नहीं देंगे – यह निर्णय है हमारा |

OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों ने सर्वसहमति से कहा है की आगामी लोकसभा चुनावों में वह मनुवादी प्रत्याशियों  को किसी भी कीमत पर वोट नहीं देंगे व् उनका विरोध करेंगे |

5 मार्च के भारत बंद का समर्थन – 

‘‘संविधान बचाओ संघर्ष समिति’’ द्वारा घोषित दिनांक 5 मार्च 2019 को राष्ट्रव्यापि भारत बंद व राष्ट्रीय आंदोलन को पूर्णतया समर्थन करने का निर्णय लिया गया।

इस “संयुक्त स्वाभिमान बैठक में विभिन्न संगठनों जिसमें आरक्षण अधिकार मंच, सामाजिक अधिकार न्याय मंच, दलित मुस्लिम एकता मंच, श्री कृष्ण यादव विकास संस्थान, अम्बेडकर वेलफेयर सोसाईटी, भीम संसद आदि के प्रमुखों ने भाग दिया

 

कौन होगा अगला प्रधानमंत्री  – जानें ख़ास – सियासी गणित 

कौन होगा अगला प्रधानमंत्री  – सियासी गणित 
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लोकसभा चुनाव के दिन नजदीक आ चुके हैं और राजनीतिक दलों में केन्द्र की सत्ता हासिल करने तथा अगला प्रधानमंत्री बनाने के लिए बङे पैमाने पर जद्दोजहद शुरू हो चुकी है। गठबन्धन और महागठबन्धन बनाने का प्रयास भी तेज हो चुका है। सवाल यह है कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा और वो किस दल से होगा ?


जयपुर। दो महीने बाद लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। यह चुनाव विश्व के सबसे बङे लोकतांत्रिक देश भारत की केन्द्रीय सत्ता के लिए होंगे। यह चुनाव तय करेंगे कि देश गांधी, मौलाना आज़ाद, नेहरू, डाॅक्टर अम्बेडकर औ

साभार

र लोहिया की समानता व भाईचारे की नीतियों पर चलेगा, या नफरत की खाई में धकेला जाएगा ! यह चुनाव यह भी तय कर देंगे कि देश की सत्ता जनहित और सिद्धांत आधारित मूल्यों पर स्थापित नहीं होगी, तो गांधीवाद, समाजवाद, अम्बेडकरवाद और मार्क्सवाद के अध्याय भविष्य में किताबों से फाङ कर फेंक दिए जाएंगे ! अब सवाल यह है कि चुनाव परिणाम किसके हक में होंगे और प्रधानमंत्री कौन बनेगा ? मौजूदा सियासी माहौल को देखकर लगता है कि चुनाव परिणाम किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत तक नहीं पहुंचाएंगे तथा अगली सरकार गठबंधन की होगी।

 

यह भी खुली किताब की तरह है कि देशभर में दो ही पार्टियों का सबसे ज्यादा वजूद है, एक भाजपा और दूसरी कांग्रेस। लेकिन यह भी तय सा लग रहा है कि दोनों ही बङी पार्टियों की सांसद संख्या 200 के आंकड़े को नहीं छू पाएगी। जहाँ तक भाजपा का सवाल है, तो उसके पास वर्तमान में हिन्दी पट्टी की अधिकतर सीटें हैं और इन सीटों में से काफी सीटें घटेंगी तथा गैर हिन्दी पट्टी में भाजपा का बङा जनाधार बढ़ने की कोई सम्भावना नहीं है। साथ ही अधिकतर सियासी पण्डित भी भाजपा को अधिकतम 200 सीटें दे रहे हैं। बात पीएम नरेन्द्र मोदी की, तो प्रधानमन्त्री की कुर्सी पर वे दोबारा तभी बैठ पाएंगे, जब भाजपा 250 के आस पास पहुंचे। क्योंकि ऐसी स्थिति में जनता दल यूनाइटेड, बीजू जनता दल, अन्ना द्रमुक, तेलंगाना राष्ट्र समिति, लोजपा जैसी पार्टियां मोदी को फिर से पीएम बनवा सकती हैं। लेकिन इसकी सम्भावना न के बराबर है, क्योंकि कोई भी सियासी पण्डित भाजपा की सांसद संख्या 200 से ऊपर आती हुई नहीं बता रहा है। ऐसी स्थिति में यह तय लग रहा है कि मोदी को सत्ता की दूसरी पारी खेलने का अवसर कतई नहीं मिलेगा।

अगर भाजपा की सीटें 200 के आस पास आ गईं, तो फिर सरकार भाजपा के ही नेतृत्व में बनेगी और प्रधानमन्त्री की कुर्सी नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह या शिवराज सिंह चौहान को मिल सकती है तथा इनमें से कोई दूसरा अटल बिहारी वाजपेयी बन सकता है, जिसे कई क्षेत्रीय क्षत्रप समर्थन दे देंगे। यह स्थिति तब पैदा होगी, जब विपक्षी वोटों में बिखराव ज्यादा होगा। अगर विपक्षी वोटों में बिखराव कम हुआ तथा चुनावों को भाजपा के फेवर में करने वाला कोई तात्कालिक मुद्दा नहीं हुआ, तो यह तय है कि भाजपा 150 सीटों के आंकड़े को भी नहीं छू पाएगी। ऐसी स्थिति में सरकार भाजपा विरोधी खेमे की बनेगी। इस खेमे में पीएम पद की दौड़ में ममता बनर्जी, मायावती, शरद पवार आदि नेताओं का नाम लिया जा रहा है। अगर चुनाव बाद सम्भावित गठबंधन और समर्थन के लिए कामरेडों की आवश्यकता पङी, तो यह तय है कि कामरेड किसी भी परिस्थिति में ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगे।

 

जहाँ तक मायावती की बात है, तो उन्होंने यूपी में अखिलेश यादव की सपा और अजीत सिंह की आरएलडी से गठबंधन कर लिया है तथा सीटों का बंटवारा भी कर लिया है। इस गठबंधन में कांग्रेस को कोई भाव नहीं दिया गया है, जिससे कांग्रेस ने सभी सीटों पर अकेले चुनाव लङने की घोषणा कर दी है। सियासी गलियारों में चर्चा यह है कि अगर यूपी की अधिकतर सीटों पर सपा बसपा गठबंधन जीत जाता है, तो अखिलेश यादव पीएम की कुर्सी पर मायावती को बैठाने का प्रयास करेंगे, ताकि यूपी में उनका रास्ता साफ हो जाए। चर्चा यह भी है कि इस मुद्दे पर मायावती व अखिलेश यादव में सहमति बन चुकी है। मायावती को महिला और पहली दलित प्रधानमन्त्री बनवाने के नाम पर सम्भावना है कि कांग्रेस सहित अधिकतर दल सहमत हो जाएंगे।

इस कङी में एक नाम और भी है, वो है पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा का। वो अपना हर पत्ता संभल कर चल रहे हैं तथा उन्होंने राहुल गांधी, मायावती और ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनवाने की बात विभिन्न मंचों से कही है। साथ ही कामरेडों से भी उनके अच्छे सम्बन्ध हैं। उन्हें 1996 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री से दिल्ली के तख्त पर बैठाने में तत्कालीन सीपीएम महासचिव कामरेड हरकिशन सिंह सुरजीत का महत्वपूर्ण योगदान था। अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार गिरने के बाद कांग्रेस, कम्युनिस्ट आदि पार्टियों के समर्थन से जनता दल के नेता देवगौड़ा को प्रधानमंत्री बनाया गया था। वे उम्र के आखरी पङाव में 23 साल बाद तेजी से सक्रिय हो चुके हैं और उनका शायद ही कोई पार्टी विरोध करे, इसलिए सियासी गलियारों में उनको भी प्रधानमन्त्री का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। प्रधानमंत्री पद के लिए शरद पवार को भी दावेदार माना जा रहा है। उनके सभी दलों के साथ अच्छे सम्बन्ध हैं। लेकिन चर्चा है कि कांग्रेस आलाकमान पवार को 7 लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमन्त्री निवास) तक पहुंचाने में सहयोग नहीं करेगा, क्योंकि पवार कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे और उन्होंने सोनिया गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के विरोध में कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी।

अब बात करें राहुल गांधी की, तो राहुल गांधी के प्रधानमन्त्री बनने की सम्भावना तभी बनेगी, जब कांग्रेस की सीटें 200 के करीब आएं तथा भाजपा की 150 से कम आएं। सियासी पण्डितों का यह तो मानना है कि भाजपा की सीटें तो 150 से कम हो सकती हैं। परन्तु यह कोई भी सियासी पण्डित नहीं मान रहा है कि कांग्रेस का आंकड़ा 200 के पास पहुंच जाएगा। आज स्थिति यह है कि 543 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस करीब 135 पर नम्बर एक और दो पर है। शेष करीब 410 सीटों पर कांग्रेस तीसरे, चौथे और पांचवें नम्बर पर है। अगर पहले और दूसरे नम्बर की सभी सीटें कांग्रेस जीत जाती है, तो भी कांग्रेस का आंकड़ा 150 से कम ही रहेगा। मौजूदा सियासी माहौल और विपक्षी वोटों के बिखराव की सम्भावना को देखकर सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस तीन अंकों के आंकड़े तक पहुंच जाए, तो गनीमत है। यानी 100 सीट मिल जाएं, तो यह कांग्रेस के लिए सबसे बेहतर प्रदर्शन होगा। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी का प्रधानमन्त्री बनना असम्भव हो जाएगा, क्योंकि उनके नेतृत्व में अन्य वरिष्ठ नेता सरकार चलाने के लिए तैयार नहीं होंगे।

इस सन्दर्भ में चर्चा यह भी है कि कांग्रेस अपना नया मनमोहन सिंह तलाश करेगी तथा नए मनमोहन सिंह के तौर पर लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खङगे का नाम लिया जा रहा है। जो कर्नाटक से हैं तथा दलित समुदाय से सम्बंधित हैं। खङगे की गिनती एक सुलझे हुए और शरीफ नेताओं में होती है, जो राहुल गांधी के विश्वसनीय भी हैं। अगर कांग्रेस खङगे का नाम पीएम के तौर पर आगे करेगी, तो शायद ही कोई पार्टी विरोध करे। एक सम्भावना और भी है, जिस पर सियासी गलियारों की उच्च चौपालों पर चर्चा हो रही है, वो है गांधी जी के पोते राज मोहन गांधी के नाम की। चर्चा है कि जब प्रधानमंत्री के नाम पर सहमति नहीं बनेगी, तो कुछ राजनेता राज मोहन गांधी के नाम को आगे करेंगे तथा अधिकतर विपक्षी दल इस नाम पर सहमत हो जाएंगे। लेकिन चर्चा है कि कांग्रेस राज मोहन गांधी के नाम पर सहमत नहीं होगी, क्योंकि वो गांधी जी के खानदान से सम्बंधित किसी चिङिया को भी सत्ता की उच्च सीढ़ी पर नहीं बैठने देगी।

लेख़क – एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।

जयपुर – रामगंज चौपड़ पर रिक्शा श्रमिकों ने कैंडल जलाकर शहीदों को दी श्रद्धांजलि –

आतंक के खिलाफ़ – एकजुट देश             

 

कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले मैं शहीद हुए जवानों को जयपुर के रामगंज चौपड़ पर रिक्शा श्रमिकों ने कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की कैंडल मार्च में अखिल भारतीय आम जन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नसीम अंसारी और रिक्शा श्रमिकों के

लिए संघर्ष कर रहे इरफ़ान रब्बानी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की हमले की निंदा करते हुए नसीम अंसारी ने कहा ऐसी घटनाएं दोबारा ना हो उसके लिए कड़े कदम उठाने चाहिए केंद्र सरकार को इस मामले में गंभीर होकर सोच विचार करना चाहिए और कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए इस हमले से पूरा देश सदमे में है जनता में आक्रोश है जनता केंद्र सरकार से जल्द कार्यवाही की मांग कर रही है ऐसे में सरकार को सोच समझकर उचित कार्रवाई का फैसला जल्द से जल्द लेना होगा क्योंकि अब सर्जिकल स्ट्राइक से काम नहीं चलेगा आतंकवादियों को सबक सिखाने के लिए बड़ी कार्रवाई आवश्यक है यही देश की जनता की मांग है कार्यक्रम में भाग लेने आए सैकड़ो श्रमिक फहीम खान शराफत हुसैन मुस्ताक खान रफीक खान जाहिद खान रशीद खान साजिद खान आसिफ बैग वसीम अब्बासी वाहिद खान इकराम अजीज बैग नफीस अंसारी शहजाद
नसीम अंसारी प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतीय आमजन पार्टी

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