UGC के नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा है – राजस्थान विश्वविधालय

Playing with the future of students – in the temple of education

जयपुर | राजस्थान  विश्वविधालय से सम्बंधित कॉलेज में इन दिनों नये  की  प्रक्रिया  चल रही  है वही दूसरी ओर एडमिशन ले रहे स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों को एक डर सत्ता रहा है जिसको लेकर स्टूडेंट्स ओर अभिभावकों कुछ कर भी नही कर पा रहे ,क्योंकि उनके बच्चे स्कूल को पास कर अपने जीवन के नये दौर में प्रवेश जो कर रहे है वही बच्चों के बेहतरीन भविष्य के लिये उनके अवसरों पर विराम लगा रहा है राजस्थान यूनिवर्सिटी आख़िर क्यों !

क्या है पूरा मामला

राजस्थान यूनिवर्सिटी के संबधित कॉलेजो में प्रवेश के लिये आ रहे स्टूडेंट्स के मूल दस्तावेज ( ऑरिजनल डॉक्यूमेंट्))  कॉलेज  प्रशासन द्वारा जमा करे जा रहे है जिसकी कोई रसीद भी नहीं दी जा रही  है  जिसके कारण स्टूडेंट्स अन्य जगह अपने प्रवेश के फार्म नहीं लगा पा रहे है इस उलझन में स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों को ख़ासी परेशानी उठानी पड़ रही है  कॉलेज प्रशासन के इस मनमानी रवैये से स्टूडेंट्स को अपने भविष्य के साथ समझोता करना पड़ रहा है उनके भविष्य के अवसरों को कॉलेज प्रशासन द्वारा विराम लगाया जा रहा है आखिर क्यों यह एक बड़ा सवाल है !

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन ओर एनरोलमेंट के बाद डॉक्युमेंट वापस कर दिये जायेगे  लेकिन कब इसका जवाव कॉलेज प्रशासन के पास नही है |

क्या कहता है UGC 

गौरतलब है ugc ने साफ़ नोटिफिकेशन दे रखा है कि सभी विश्वविधालय / कॉलेज स्टूडेंट्स के एडमिशन के समय ऑन द स्पोर्ट वेरिफिकेशन कर ऑरिजनल डॉक्यूमेंट स्टूडेंट्स को वापस करे लेकिन राजस्थान विश्वविद्यालय और उसके संगठन कॉलेज सरेआम ugc के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है |

अब यह बड़ा सवाल है की स्टूडेंट्स को बड़े संस्थानो में प्रवेश लेने के अवसरों को राजस्थान विश्वविधालय / कॉलेज आख़िर क्यों सीमित कर रहा है |

 

UGC ख़त्म – यह होगा नया आयोग – प्रकाश जावेडकर

भारतीय उच्‍च शिक्षा आयोग विधेयक 2018″ का मसौदा तैयार –

केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि उनके मंत्रालय ने भारतीय उच्‍च शिक्षा आयोग विधेयक 2018 का मसौदा तैयार कर लिया है। यह विधेयक विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 को खत्‍म कर उसके स्‍थान पर भारतीय उच्‍च शिक्षा आयोग का गठन करने के लिए लाया जा रहा है। यह आयोग देश में उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों को स्‍वायत्‍ता प्रदान करने और वैश्विक प्रतिस्‍पर्धी माहौल में देश में उच्‍च शिक्षा की गुणवत्‍ता तथा अनुसंधान कार्यों को प्रोत्‍साहित करेगा।

केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि 1956 में यूजीसी के गठन के बाद से तेजी से बदलते परिदृश्‍य में उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार जरूरी हो गए हैं। उन्‍होंने कहा कि तब से लेकर अब तक देश में विश्‍वविद्यालयों की संख्‍या 20 से बढ़कर 900 पर पहुंच गई है। इसी तरह कॉलेजों की संख्‍या भी 500 से बढ़कर 40000 हो गई है। छात्रों की संख्‍या भी दो लाख से बढ़कर 3.75 करोड़ हो चुकी है।  जावड़ेकर ने कहा कि भारतीय उच्‍च शिक्षा आयोग विधेयक 2018 पर आम लोगों के सुझाव और टिप्‍पणियां प्राप्‍त करने के लिए इसे 27 जून को सार्वजनिक डोमेन पर डाल दिया गया था। सांसदों, राज्‍य सरकारों, शिक्षा विदो, शिक्षक संगठनों, छात्रों और उद्योग जगत की ओर से इस पर 9926 सुझाव और टिप्‍पणियां मिली हैं। इनके आधार पर प्रस्‍तावित विधेयक में जरूरी बदलाव किये जा रहे हैं और इसके साथ ही मसौदे को अंतिम रूप देने का

काम चल रहा है।

जावड़ेकर ने कहा कि उच्‍च शिक्षा आयोग नौकरशाही के प्रभाव से मुक्‍त होगा। इसका सारा ध्‍यान देश में शिक्षा की गुणवत्‍ता बनाए रखने पर केन्द्रित होगा।

जावड़ेकर ने आज लोकसभा में एक तारांकित प्रश्‍न के उत्‍तर में यह जानकारी सदन में रखी है |