परेड खत्म होने के बाद राजपथ पर किसान निकाल सकेंगे ट्रैक्टर रैली

पिछले 2 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है और किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन किसान संगठन 3 नये कृषि कानूनों का खत्म करने की मांग को लेकर अड़े है और हर दिन नये नये तरीके से विरोध प्रदर्शन कर सरकार को अपनी मांगे पूरी करवाने के लिए मजबूर कर रहे है। हाल ही में किसानों को दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर शर्तों के साथ ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति प्रदान कर दी है। लेकिन किसान संगठन इस अनुमति को लेकर भी अपनी नाराजगी जता चुके है किसान संगठनों को कहना है कि ट्रैक्टर रैली की टाइमिंग और जो रूट दिया है वह सही नहीं है।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा को लेकर रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था लेकिन अब कुछ शर्तों के साथ मंजूरी प्रदान की है। ट्रैक्टर रैली निकालने का समय 12 बजे का दिया है जिसका कोई तुक नहीं है और इसके साथ ही किसान संगठनों ने रूट को लेकर भी सवाल उठाया है। किसानों ने बताया है कि रैली को जिन इलाकों से इजाजत दी गई है वह ज्यादातर हरियाणा का भाग है।किसानों की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी दी जाए और तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए और इसी बात को लेकर किसानों का प्रदर्शन 61 दिनों से जारी है।

गणतंत्र की परेड में हिंसा फैलाने की पाकिस्तान की साजिश का भी खुलासा हुआ है और बताया जा रहा है कि हिंसा फैलाने के लिए पड़ोसी देश इंटरनेट मीडिया का सहारा ले रहा है। इसके उन्होंने 300 से ज्यादा ट्विटर अकाउंट बनाए हैं, जिसकी जानकारी इंटेलिजेंस को मिल गई है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के बेहद कड़े बंदोबस्त किए जा गये हैं।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में जानकारी दी गयी कि  गाजीपुर बार्डर पर 46 किलोमीटर सिंघु बार्डर पर 62 किलोमीटर व टीकरी बार्डर पर 63 किलोमीटर के दायरे में परेड निकालने की अनुमति प्रदान की गयी है और इसके साथ तीनों बार्डरों से परेड का 100 किलोमीटर से ज्यादा का रूट दिल्ली में होगा।

किसान आंदोलनः किसान और सरकार के बीच आज होगी 11वें दौर की बातचीत

नए कृषि कानूनों के मुद्दों को हल करने के लिए केंद्र सरकार के केंद्रीय मंत्री व किसान संघ के प्रतिनिधि 11 वें दौर की बातचीत शुक्रवार यानी आज होगी। यह बातचीत विज्ञान भवन में होगी जिसमें तीनों कृषि कानून को लेकर पिछले दस दौरे की चर्चाओं में कोई नतीजा नहीं निकल सका है। किसान इन कानूनों को खत्म करने की मांग पर अड़े जबकि केन्द्र सरकार कानूनों को खत्म करने बजाय उन में कुछ बदलाव करने पर तैयार है।

किसान संगठनों ने 26 जनवरी को टै्रक्टर मार्च निकालने का ऐलान कर चुके है जबकि केन्द्र सरकार इस मार्च को नहीं निकालने की बात कह रही है। देश की सर्वोच्च अदालत ने किसान आंदोलन पर सुनवाई करते हुए कहा था कि आंदोलन करने वाले किसानों की मांगों को सही प्रकार से समझने के लिए एक समिति नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन इस समिति को लेकर किसान सगठनों ने आपत्ती जताई है। किसान सगठनों ने गुरुवार को सरकार की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनकी मांग कानूनों को खत्म करने को लेकर है।

इसके साथ किसान संगठन ट्रैक्टर रैली आयोजित करने की अनुमति के संबंध में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे।
तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर किसान संगठन पिछले लगभग दो महीने से आंदोलन कर रहे हैं। सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक न्यूनतम समर्थन मूल्य ;एमएसपी पर एक कानून बनाने की बात कही है। अब यह देखना होगा की आज की वार्ता में किसान संगठन क्या निर्णय करते है अगर बात नहीं बनी तो यह आंदोलन जारी रहेगा

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सुप्रीम कोर्ट ने तीनों नये कानूनों पर रोक लगा दी है। कोर्ट के अगले आदेश तक ये कानून लागू नहीं होंगे और इसके साथ अदालत ने इन कानूनों पर चर्चा के लिए एक समिति का गठन भी किया है। इसके लिए कोर्ट ने हरसिमरत मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, डॉ प्रमोद कुमार जोशी (पूर्व निदेशक राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन), अनिल धनवत के नाम कमिटी के सदस्य के तौर पर पेश किये है।

कोरोना वैक्सीन से साइड इफेक्ट्स के मामलों में आई तेजी, जानें इसके प्रभाव

भारत में कोरोना का टीकाकरण का अभियान शुरू हो गया है और बड़े शहरों के साथ छोटे गांव में भी इसका कार्य शुरू हो गया है। 3 दिन बीत जाने के बाद कई लोगों में इस वैक्सीन के साइड इफेक्टस भी देखने को मिले है जिसकों लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बताया की कुछ लोगों में इसके इफेक्टस देखने को मिले है। अगर बात करें इस अभियान की तो अब तक 3 लाख से ज्यादा लोगों को टीका लग चुका है और इसके बाद इसके कई लोगों को परेशानी भी हुई है।

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अगर बात करें दुनिया की तो फाइजर वैक्सीन के मुकाबले अभी तक भारत में वैक्सीन का ज्यादा बुरा प्रभाव नहीं देखने को मिला है। अगर आने वाले दिनों में इस बात का पता चल जाएगा की यह वैक्सीन कितनी कारगर साबित होगी। कई स्वास्थ्य जानकारों ने वैक्सीन को लेकर सवाल भी खड़े किये है और इसके प्रभावों के बारे में बताया है। इस वैक्सीन के लिए आपको ज्यादा इंतजार करना नहीं होग।

खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों में ज्यादा टीकाकरण हो रहा है। अगर बात करें इसके साइड इफेक्टस की तो यह कोई बड़ी परेशानी नहीं है क्योंकि सभी लोगों का शरीर एक जैसा नहीं होता है और इसी वजह से कुछ लोगों में इसका साइड इफेक्टस देखा जा सकता है।

रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए एक ऐप तैयार किया गया है इसके माध्यम से आप घर बैठे बिना किसी दलाल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे। इस ऐप का नाम Co-WIN होगा हालांकि अभी ये ऐप लॉन्च नहीं किया गया है लेकिन जल्द ही इसे लॉन्च कर दिया जाएगा। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड और दूसरी कोवैक्सीन, जिसे हैदराबाद में भारत बायोटेक लैब में तैयार किया है।अभी सरकारी अधिकारी ही जानते हैं कि लोगों को कौन सी वैक्सीन लगाई जाएगी।

भीम आर्मी का किसान आंदोलन में 28 वां दिन , 26 जनवरी 2021 को किसानों के साथ लाल किलें की परेड में शामिल होगीं भीम आर्मी 

Bhim Army to join Republic Day parade on 26 January 2021 with

farmers –

भीम आर्मी का किसान आंदोलन में 28 वां दिन , मेडिकल कैंप सहित अन्य सेवाओं में दे रहें हैं योगदान , 26 जनवरी को किसानों के साथ टेक्टर रेली ( परेड ) में होगें शामिल दिल्ली लाल कीलें पर –
अलवर |  भीम आर्मी एकता मिशन ” भीम आर्मी ” अक्सर दलित मुद्दों पर संघर्ष करती नज़र आती हैं लेकिन इस बार भीम आर्मी किसानों के साथ पूर्ण समर्थन से खड़ी हैं  राजस्थान भीम आर्मी  कार्यकर्ता  शाहजापुर बॉर्डर पर पिछलें 28 दिनों से किसानों की सेवा में लगें हैं |
भीम आर्मी तिजारा विधानसभा अध्यक्ष मोनू रेवाड़ीया ने कहा कि हम लगातार किसान आंदोलन में 28 दिन से तन मन धन के साथ लगे हुए हैं किसान आंदोलन में आंदोलनकारियों के लिए सैकड़ों लोगों को प्रतिदिन दवाई फ्री दी जा रही है और हम आगें भी किसानों के लिए तन मन धन से लगे रहेंगे चाहे यह आंदोलन कितना ही लंबा चले हम किसान कमेटी के आदेशों का पालन करते रहेंगे |
किसानों की 26 जनवरी की परेड में भी शामिल होंगे जो भी किसान कमेटी का आदेश होगा वह सर्वप्रथम होगा सभी के लिए मान्य होगा यह आंदोलन बहुत भाईचारे से चल रहा है इस आंदोलन में हिन्दू .मुस्लिम सिख इसाई सभी शामिल हैं |
भीम आर्मी कार्यकर्त्ताओं मेडिकल कैंप – शहंजापुर बॉर्डर राजस्थान
यह आंदोलन सफल होगा और भविष्य में कोई भी सरकार किसानों  की तरफ आंख उठाकर नहीं देखेंगी  किसान अपने हक की लड़ाई के साथ-साथ पूरे देश के एक-एक व्यक्ति की लड़ाई लड़ रहा है किसान नहीं चाहता अंबानी अडानी पतंजलि का टैग लेकर ₹50 किलो आटा बिके  भीम आर्मी किसानों के साथ कंधे से कंधा लगाकर इस लड़ाई को आखरी समय तक लड़ेगी
प्रदेश अध्यक्ष अनिल धेनवान सत्यवान मेहरा  जिलाध्यक्ष सद्दाम हुसैन विकास जोगी लक्ष्मी नारायण सुरेंद्र मेहरा राजाराम मीणा इंद्रजीत अनिल अजय इंद्रपाल रणवीर सचिन सतीश सुबह सिंह मनीष पार्षद राजू सरपंच और काफी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहते हैं |
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भारत में मिलेगा दुनिया का सबसे सस्ता कोरोना टीका

कोरोना की मार झेल रही पूरी दुनिया इसके इलाज के पानी की तरह पैसे बर्बाद कर रही है लेकिन इसके बाद भी उसे कारगर इलाज नहीं मिल पा रहा है। भारत में कोरोना के दो टीके बनकर तैयार है और इस सप्ताह में टीकाकरण का अभियान शुरू हो जाएगा और यह टीका दुनिया का सबसे सस्ता टीका होने के साथ बहुत कारगर टीका है जो कोरोना के नये वायरस को भी खत्म करने में कारगर है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि चीन ने दुनिया भर में कोरोना का टीका बहुत अधिक कीमत में बेच रहा है और इसके विपरित भारत में बना टीका बहुत ही सस्ता उपलब्ध होगा।

इस बीच सरकार ने बताया है कि उसने सीरम इंस्टीट्यूट से 1 करोड़ 10 लाख डोज और भारत बायोटेक से 55 लाख डोज खरीदी है। सरकार ने यह भी बताया कि दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले भारत सरकार ने कोरोना वैक्सीन की खरीदारी बेहद कम कीमत खरीदी है।स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से 110 लाख डोज 200 रुपए प्रति डोज खरीदने का करार किया है। जबकि भारत बायोटेक से 55 लाख डोज खरीदने का समझौता किया गया है। भारत बायोटेक से कोवैक्सीन की 38 लाख डोज 296 रुपए रुपए प्रति डोज के हिसाब से खरीदी है जबकि कंपनी ने 16 लाख डोज मुफ्त में देने का फैसला किया है।

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जानकारों के अनुसार फाइजर की वैक्सीन की कीमत प्रति डोज भारतीय मुद्रा के हिसाब से 1400 रुपये ज्यादा है यानी एक व्यक्ति को दो डोज टैक्स छोड़कर 2800 रुपए की होगी। कोरोना वॉरियर्स को दिए जाने वाले पहले तीन करोड़ डोज की कीमत केंद्र सरकार देगी। राज्यों को को कोई पैसा नहीं खर्च करना होगा। सरकार ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 14 जनवरी तक मिल जाएगी।

अगले आदेश तक सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर लगाई रोक, जानें पूरी खबर

किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश सुनाते हुए तीनों नये कानूनों पर रोक लगा दी है। कोर्ट के अगले आदेश तक ये कानून लागू नहीं होंगे और इसके साथ अदालत ने इन कानूनों पर चर्चा के लिए एक समिति का गठन भी किया है। इसके लिए कोर्ट ने हरसिमरत मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, डॉ प्रमोद कुमार जोशी (पूर्व निदेशक राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन), अनिल धनवत के नाम कमिटी के सदस्य के तौर पर पेश किये है। इस फैसले के बाद किसान संगठनों को बड़ी राहत मिली है और सब ने अदालत के फैसले पर खुशी जाहिर की है।

सुनवाई के दौरान किसानों का पक्ष रख रहे वकील शर्मा ने बताया कि किसान संगठन सुप्रीम कोर्ट की ओर से समिति गठित किए जाने के पक्ष में नहीं हैं और वो समिति के समक्ष नहीं जाना चाहते हैं इस कोर्ट ने कहा कि किसान सरकार के समक्ष जा सकते हैं तो कमिटी के समक्ष क्यों नहीं। अगर वो समस्या का समाधान चाहते है तो कमिटी के समक्ष जाना होगा तभी इस बात को पता चलेगा कि यह बिल सही या गलत।

 

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मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने कहा कि ‘हमें समिति बनाने का अधिकार है. जो लोग वास्तव में हल चाहते हैं वो कमेटी के पास जा सकते हैं।’ कोर्ट ने कहा कि ‘हम समस्या को सबसे अच्छे तरीके से हल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि ‘कोई भी शक्ति, हमें कृषि कानूनों के गुण और दोष के मूल्यांकन के लिए एक समिति गठित करने से रोक नहीं सकती है। अब यह देखना होगा की किसान आंदोलन वापस ​लेते है या समिति कै फैसले का इंतजार करेंगे।

किसान आंदोलन को लेकर पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार

45 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है और किसान अपनी मांगों लेकर लगातार सरकार के साथ वार्ता कर रहे है लेकिन इसके बाद भी अभी तक कोई उचित समाधान नहीं निकल पाया है। इस आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार ने कई बार किसान संगठनों से आग्रह किया है वह सरकार पर विश्वास करें और आंदोलन खत्म करे लेकिन किसान संगठन ​कृषि बिलों को समाप्त करने की मांग को लेकर अड़े हुए है।

इस बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर आज सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से पूछा है कि क्या वह कानून को स्थगित करती है या फिर वह इस पर रोक लगा दे। भीषण ठंड को देखते हुए अदालत ने कहा कि किसानों की चिंता करनी चाहिए और उनकी समस्या का समाधान करने के लिए एक कमिटी बनानी चाहिए। इसके साथ कोर्ट ने किसान आंदोलन पर सरकार के विवाद निपटाने के लिए जो तरीका अपनाया उसे लेकर भी सख्त टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने किसान कानून समाप्त करवाना चाहते हैं जबकि सरकार मुद्दों पर बात करना चाहती है लेकिन हम एक विशेषज्ञ लोगों की एक कमिटी बनाकर कानूनों पर विचान करेंगे। किसान कमिटी के पास जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि हमने केंद्र सरकार को कहा था कि क्यों नहीं इस कानून को कुछ दिन के लिए स्थगित कर दें और उचित समाधान होने पर इस पर फैसला करें। कोर्ट किसान आंदोलन को हैंडल करने के तरीके से बहुत ज्यादा नाराज है।

मुख्य न्‍यायाधीश एसए बोबडे वाली बेंच किसाना आंदोलन से जुडी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। केंद्र और किसान संगठनों के बीच अगली बैठक 15 जनवरी को होनी है, ऐसे में SC की टिप्पणी बहुत अहम साबित हो सकती है। आज नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों का आंदोलन का 47वां दिन है केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत फेल होने के बाद, किसान संगठनों के नेता आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाने में लगे हैं। कोर्ट की इस बात पर विपक्ष पर केन्द्र सरकार पज जमकर हमला बोल दिया है।

 

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना है कि वह तब तक आंदोलन करेंगे जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाएंगी और सरकार जितनी देर करेगी आंदोलन उतना ही तेज होता जाएगा।

कांग्रेस सभी राज्यों में 15 जनवरी को ‘किसान अधिकार दिवस’ मनाएगी और राजभवनों का घेराव करेंगे। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि ‘अब देश के किसान काले कानून खत्म करवाने के लिए करो या मरो की राह पर चल पड़े हैं।’

 

कोरोना वैक्सीन: इस दिन से शुरू होगा टीकाकरण, ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन,जानें पूरी खबर

दुनिया भर में कोरोना का टीकाकरण शुरू हो गया है लेकिन भारत में अभी तक टीका लगने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायी है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि 14 या 16 जनवरी से कुछ राज्यों में टीकाकरण का अभियान शुरू हो सकता है और इसकी सभी तैयारिया पूरी कर ली गयी है। सरकार ने सभी राज्य सरकारों को आदेश जारी कर दिया है कि वह सभी तैयारियां पूरी करके रखे और एक अभियान की तरह प्रत्येक देशवासी तक आसानी से टीका पहुंच सके।

 

टीकाकरण का अभियान सिलसिलेवार तरीके कई चरणों में शुरू होगा जिसमें पहले चरण में डॉक्टर्स, नर्स, मेडिकल स्टाफ व दूसरे हेल्थ वर्कर्स शामिल है इसके बाद फ्रंटलाइन वर्कर्स का नंबर आएगा। इन्हें खुद रजिस्ट्रेशन करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बाद 50 साल से ज़्यादा की उम्र के लोगों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को टीका लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन होगा। रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए एक ऐप तैयार किया गया है इसके माध्यम से आप घर बैठे बिना किसी दलाल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे। इस ऐप का नाम Co-WIN होगा हालांकि अभी ये ऐप लॉन्च नहीं किया गया है लेकिन जल्द ही इसे लॉन्च कर दिया जाएगा।

पूरे देश में टीकाकरण के पहले चरण में तीन करोड़ भारतीयों को वैक्सीन उपलब्ध करवाने का प्लान तैयार किया गया है। कोरोना की वैक्सीन पहले किसे और कैसे मिलेगी इसकी तैयारी के साथ-साथ वैक्सीन की डिलीवरी और स्टोरेज जैसी सभी प्रकार की जरूरी चीजों को बड़े अच्छे से बनाया है।भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसके पास अभी दो वैक्सीन हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड और दूसरी कोवैक्सीन, जिसे हैदराबाद में भारत बायोटेक लैब में तैयार किया है।अभी सरकारी अधिकारी ही जानते हैं कि लोगों को कौन सी वैक्सीन लगाई जाएगी।

 

 

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कैसे करे रजिस्ट्रेशन

आप इस ऐप के लॉन्च होने के बाद आपको इसे प्ले स्टोर से डाउनलोड करना होगा या फिर Co-Win पोर्टल पर जाकर सेल्फ रजिस्टर करा सकते हैं। इसके बाद आपको अपनी फोटो या फोटो वाला पहचान पत्र अपलोड करना होगा। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज आएगा, जो आपके रजिस्ट्रेशन को स्वीकार करेगा। इसके बाद वैक्सीन की पहली खुराक के लिए टीकाकरण केंद्र का नाम, दिन और समय की जानकारी आपको एसएमएस से मिलेगी।

किसानों आंदालोन को लेकर सर्वोच्च अदालत ने दिया यह सुझाव

किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि कोरोना महामारी के खतर को देखते हुए केंद्र से पूछा कि किसान आंदोलन में कोविड नियमों का ध्यान रखने की जरूरत है। मुख्य न्याया​धीश एस ए बोबडे ने कहा कि ‘हमें नहीं पता कि किसान कोरोना से सुरक्षित हैं या नहीं? अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो तबलीगी जमात की तरह कोरोना का बड़ा विस्फोट होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अगर समय रहते किसाना आंदोलन में कोविड—19 के नियमों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह देश के लिए नई मुशिबत खडी हो सकती है।

केंद्र की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वहां नियमों का पालन नहीं हो रहा है और कोरेाना का खतरा होने का डर बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी निजामुद्दीन मरकज में जमातियों के जुटने की CBI जांच की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही याचिकाकर्ता का कहना था कि मोहम्मद साद कोअभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

यह याचिका जम्मू की रहने वाली वकील सुप्रिया पंडिता ने दायर कहा कि कोरोना के समय बड़े पैमाने पर लोगों के एकत्र होने कि अनुमति कैसे दी गई, जबकि उस समय कोरोना महामारी का खतरा मंडरा रहा था।

किसानों का आंदोलन अभी खत्म होता हुआ नजर नहीं आ रहा है और आने वाले दिनों में अगर किसानों और सरकार के मध्य समझौता नहीं हुआ तो आंदोलन लंबा चल सकता है। कोरोना की खतरे को देखते हुए सरकार ने भी किसानों से अपील की वह अपने बच्चों को घर भेजे व ज्यादा उम्र के लोग बॉर्डर पर नहीं रहे। कल किसानों और सरकार के बीच वार्ता होगी अगर उसमें कोई नतीजा नहीं निकलता है तो किसान इस आंदोलन देशव्यापी करने का काम करेंगे।

आज सुप्रीम कोर्ट सुना सकता है किसान आंदोलन पर बड़ा फैसला

कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन 21वें दिन भी जारी है। किसानों और सरकार के बीच अब तक कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। एक तरफ तो सरकार कुछ संशोधन पर अड़िग है तो किसान कृषि कानूनों को खत्म कराने की मांग पर अड़े हैं।

आज कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। दायर याचिका में कहा गया है कि धरना-प्रदर्शन से आम जनता को बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है और हर दिन किसान सड़कों को बंद करके प्रदर्शन कर रहे हैं। कभी जयपुर—दिल्ली हाईव जाम किया तो आज किसानों ने चिल्ला बॉर्डर जाम करने की चेतावनी दी है।


चिल्ला बॉर्डर प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसान यूनियन के किसानों ने आज चिल्ला बॉर्डर को पूरी तरह से दिल्ली जाने के लिए बंद कर करने का एलान कर दिया है। आंदोलन कर रहे किसानों को सड़कों पर से हटाने की याचिका एक लॉ स्टूडेंट ऋषभ शर्मा ने याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट किसान आंदोलन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी हो रही इनमें दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर जाम और कोरोना वायरस संकट को लेकर भी याचिका दायर की गई है। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच इन मामलों पर सुनवाई कर रही है।

कल पीएम मोदी ने एक बार फिर कृषि कानूनों को किसानों के लिए अच्छा बताया और कहा है कि विपक्ष किसानों को डरा रहा है और भड़काने की कोशिश कर रहा है जिसके कारण किसान इस बिल को समझ नहीं पा रहा है।