पहली पीढ़ी गोली खाएगी……दूसरी पीढ़ी जेल जाएगी ………तीसरी पीढ़ी राज करेगी – बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन दर्शन पर – संवैधानिक अधिकार संगठन का वेबीनार संपन्न 

संवैधानिक अधिकार संगठन राजस्थान की महामानव की कहानियां वेबीनार संपन्न –
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष धर्मेंद्र तामडिया ने बताया कि वर्तमान कोरोना महामारी से पूरा देश जूझ रहा है इस समय सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए आम जनता को जागरूक करना और स्व अनुशासन की पालना कराने की जिम्मेदारी हम सब की है अभी घर पर बैठकर समय का सदुपयोग करने के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले अंबेडकर, साहूजी महाराज तमाम महामानव जिन्होंने गैर बराबरी की व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी उनके जीवन दर्शन को  समझने जरूरत है |
आज का वेबीनार बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन दर्शन पर किया गया जिसमें मुख्य कहानीकार मोनिका शर्मा और गोपाल मीणा जी रहे मोनिका ने कहा कि बिहार में जन्मे बाबू जगदेव प्रसाद जी का जीवन बहुत संघर्ष भर रहा था वो  समाजवाद के लिए लड़ाई लड रहे थे | इस दौरान उनको जातीय उत्पीड़न का भी शिकार होना पड़ा था जब वह पढ़ लिखकर जिला कमिश्नर की नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गए तो उन्हें पूछा गया कि आप किस जाति से हो जब उनकी जाति बताएं तो सामने वाले ने कहा कि आपका काम तो खेती करना है आप तो खेती करो और पशु चराओ यह बात बाबू जगदेव प्रसाद को बहुत बुरी तरह से चुभ गई और इस जातीय मानसिकता को बदलने के लिए उन्होंने इस व्यवस्था खिलाफ संघर्ष करना शुरू कर दिया था गरीब दलित वंचितों के लिए संघर्ष करते समय पुलिस प्रशासन की गोली से उनकी मौत हो गई थी उन्होंने कहा था की पहली पीढ़ी गोली खाएगी ,दूसरी पीढ़ी जेल जाएगी ,तीसरी पीढ़ी राज करेगी |
 गोपाल मीणा सरपंच ग्राम पंचायत हीरापुरा तहसील फागी ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन संघर्ष से हमें सीख लेनी चाहिए और उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए स्वयं की नेतृत्व क्षमता को भी विकसित करने की जरूरत है |
पवन देव के द्वारा संवैधानिक अधिकार संगठन की टीम का परिचय करवाया गया तथा सीमा कुमारी ने कहा कि इन कहानियों के माध्यम से महामानव के जीवन दर्शन को सुनने के बाद धरातल पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता होंसला बढ़ता है और उनसे प्रेरणा लेकर अच्छा काम करते है ‌|
कार्यक्रम का मंच संचालन राम तरुण ने किया इस दौरान पूरे राजस्थान के विभिन्न जिलों से सामाजिक कार्यकर्ता जुड़े जयपुर से शाहिस्ता खान, शाबिर कुरेशी ,चंदा लाल बेरवा, चाकसू से जितेंद्र बैरवा,कमल सिंह,रतन लाल बेरवा,राष्ट्रीय सेवा योजना से हरीश बेरवा,राष्ट्रीय वंचित लोक मंच के प्रहलाद धामनिया,रेनवाल फागी से लक्ष्मण, दौसा से भाग चन्द निकटपुरी ,हेमन्त ,टोंक से रामकेश प्रजापत,कविता शर्मा, द्वारिका शर्मा, अलवर से संजना, कवि सुरेंद्र आजाद ,मनोहरपुर से अर्जुन लाल मोहनपुरिया पूर्व सरपंच,जोधपुर से ललिता पवार, जोगाराम कडेला अरूणा लीलावत,उदयपुर हरलाल बेरवा, अजमेर से नेहा सेन, भीलवाड़ा से अंशुल तंबोली, आदि उपस्थित रहे |

 संवैधानिक अधिकार संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन – 

Delegation of Constitutional Rights Organization gave memorandum to Chief Minister on International Human Rights Day –
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर विशेष कार्यक्रम  –
जयपुर |  संवैधानिक अधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं ने 26 नवंबर से 10 दिसम्बर तक संविधान पखवाड़े का आयोजन किया था जिसका आज अंतिम दिन था | 26 नवंबर 2020 से राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में जमीनी स्तर पर आम जनता , युवा वर्ग , महिलाओं को संविधान की प्रस्तावना में वर्णित मूल्यों की जानकारी और संविधान के प्रति समझ बढ़ाने का काम जागरूकता कैम्प के माध्यम से किया गया हैं जिसमे हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से स्लम एरिया बगराना बस्ती , प्रेम नगर , लाल कुंडा बस्ती मालवीय नगर , इंद्रा बाजार, मंडी खटीकान , पुरानी बस्ती आदी जगहों पर कोरोना की गाइड लाइन की पालना करते हुयें जन जागृति का काम किया हैं |
मुख्यमंत्री को विश्व मानवाधिकार दिवस पर आज संगठन से जुड़े वरिष्ट लोगों ने प्रमुख मांगो के साथ मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन देकर  निम्न मांगों की मांग की – 
एडवोकेट चंदा लाल बैरवा ( सहायक निर्देशक दलित अधिकार केंद जयपुर ) ने कहा –  माननीय मुख्यमंत्री महोदय आज अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस हैं आप राज्य के मुख्यमंत्री हैं तो आप की यह जिम्मेदारी बनती हैं कि राजस्थान में वंचित वर्ग ,दलित, शोषित पीड़ित ,आदिवासी , महिलाओं के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो ,
गौरतलब हैं कि  मानव अधिकार सार्वभौमिक हैं जब एक बच्चा माँ के पेट पलता हैं जब से ही उसके मानवाधिकार उसे मिलते हैं सभी देशों में लगभग मानवाधिकार समान रहते हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होती हैं अतः सभी मानवों के अधिकार हक्क उसे मिलने चाहियें |
हस्ताक्षर जागरूकता अभियान – बायें से सुनील प्रजापति , एडवोकेट चंदा लाल जी बैरवा , शाहिस्ता खान ,राकेश वाल्मीकि , शुभम सोखरिया
राकेश वाल्मीकि प्रदेश संयोजक ( राजस्थान वाल्मीकि विकास मंच ) – आज यह गर्व की बात हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों ,गांवों में आज विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जा रहा हैं एक व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक व सचेत रखना चाहियें और अपनी गरिमा व मान सम्मान के साथ कभी भी कोई समझौता नहीं करना चाहियें और अपने अधिकारों हक्क के लियें संघर्ष करना चाहियें |
सुनील प्रजापति ( जिला अध्यक्ष DSP DAL) – आज अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस हैं आज के दिन ही वर्ष के 365 दिन हमें हमारे सभी भाई बहनों , जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना चाहिए जिससे जनता , युवा अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सचेत रहें |
शाहिस्ता खान – ( संवैधानिक अधिकार संगठन ) ने कहा – आज हम राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी के यहां ज्ञापन दिया हैं जिस में हमने मांग की हैं कि आज विश्व मानवाधिकार दिवस हैं और राजस्थान में अभी जिला प्रमुख , पार्षद , सरपंच के चुनाव संपन्न हुयें हैं जिसमे महिला जनप्रतिनिधि भी अधिक विजेता रही हैं लेकिन आज भी राजस्थान में महिला जन प्रतिनिधि के नाम पर उनके पति , ससुर आदी रिश्तेदार मीटिंग बैठके उनके नाम से करते नज़र आते हैं जो गैर संवैधानिक हैं जिन्हें सरपंच पति के नाम से जाना जाता हैं आज वास्तविकता में महिलाओं को उनके अधिकार मिले यह राज्य सरकारें सुनिश्चित करें |
पवन देव – संवैधानिक अधिकार संगठन 
आज अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर हमारे साथियों ने सीवरेज मैनहॉल में कार्यरत सफाईकर्मियों के अधिकारियों के लियें संघर्ष कर रहें हैं भारत सरकार ने 2013 में हाथ से मैला ढोने की प्रथा को रोकने के लियें ms and th act 2013 बना रखा हैं लेकिन दलित समाज के सफाईकर्मी आज भी ठेकेदारो के दबाब व प्रलोभन में सीवरेज लाइन में कार्य करने के लियें उतर जाते हैं जिससे उनकी जहरीली गैस के कारण दम घुटने से मौत हो जाती हैं इस कुप्रथा को रोकने के लियें संविधान पखवाड़े के तहत वाल्मीकि कॉलोनी व अन्य स्थानों पर लोगों को जागरूक किया हैं और राजस्थान के मुख्यमंत्री जी से इस कुप्रथा को खत्म व रोकथाम के लियें अपील की हैं भारत के संविधान ने भारत के सभी छोटे बड़े सभी नागरिकों को सम्मान जनक जीवन जीने का अधिकार दे रखा हैं जिसकी पालन करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी हैं उस दिशा में सकारात्मक काम हो –
शुभम सोंखरिया – आज विश्व मानवाधिकार दिवस पर सबसे अधिक शिक्षा विभागों को काम करने की आवश्यकता हैं क्योंकि शिक्षा उस शेरनी के दूध के समान हैं जो पियेगा वो दहाड़ेंगा अतः सभी बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित हो |
पवन देव – संवेधानिक अधिकार संगठन