अजमेर: 40 साल बाद कांग्रेस ने खेला ऐसा दांव –

जयपुर। राजस्थान की अजमेर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी की ओर से उम्मीदवार पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ही होंगे। करीब 40 साल बाद कांग्रेस ने अजमेर संसदीय सीट पर किसी ब्राह्मण पर दांव लगाया है। वहीं भाजपा ने सांवर लाल जाट के निधन से सहानुभूति लहर के भरोसे जाट कार्ड खेला है। किसका दांव सही पड़ेगा यह परिणाम बताएगा। अजमेर लोक सभा संसदीय सीट का इतिहास देखा जाए तो किसी जाति वर्ग का सांसद सबसे ज्यादा बार चुना गया तो वह ब्राह्मण वर्ग है। 1945 से लेकर 1977 तक तीन बड़े राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सैनानी अजमेर लोक सभा सीट से चुने गए। यह सभी ब्राह्मण वर्ग से थे। इसमें मुकुट बिहारी लाल भार्गव, ज्वाला प्रसाद शर्मा और बीएन भार्गव के नाम शामिल हैं। यह तीनों ही कांग्रेस से थे।

 

40 साल के लंबे अंतराल मे बाद अब एक बार फिर कांग्रेस ने ब्राह्मण पर भरोसा जताया है। अजमेर में बड़ा वोट बैंक होते हुए भी ब्राह्मण समाज राजनीतिक रूप से उपेक्षित महसूस करता रहा है। गाहे बगाहे सामाजिक मंचों से समाज की यह व्यथा कई बार सामने आई भी है। मौजूदा हालात में कांग्रेस को भरोसा है कि ब्राह्मण सहित अन्य सामान्य वर्ग से जुड़े वोटर इस बार अहम साबित होंगे।

 

जीवन परिचय

 

राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष रहे। भिनाय से दो और जयपुर लोक सभा सीट से एक बार चुनाव लड़ चुके हैं। 2009 में केकड़ी विधानसभा से सीट लड़ा और त्रिकोणीय मुकाबले में जीते।पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित सीपी जोशी व सचिन पायलट तीनों से ही उनका बेहतरीन तालमेल। प्रदेश कांग्रेस में अभी उपाध्यक्ष हैं, युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं। अजमेर संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घोषित किए गए रघु शर्मा मूलत: अजमेर जिले के सावर गांव के निवासी हैं।

 

उन्होंने वर्ष 1982-83 में एलएलबी किया। वर्ष 1986-87 में राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। राजस्थान यूनिवर्सिटी से ही उन्होंने डाक्टरेट की। डॉ. शर्मा केकड़ी के पूर्व विधायक (2008-2013) और विधानसभा में मुख्य सचेतक भी रहे हैं। वे पूर्व में जयपुर लोकसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़ चुके हैं।

राजस्थान: BJP के रामस्वरूप लांबा और कांग्रेस के रघु शर्मा के बीच होगा कड़ा मुकाबला – सूत्र

अजमेर। अजमेर संसदीय क्षेत्र के उप चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के रामस्वरूप लांबा और कांग्रेस के डॉ. रघु शर्मा के बीच ही मुकाबला होने के आसार हैं। हालांकि दोनों ही दलों ने अभी अपने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। भाजपा प्रदेश इकाई पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत सांवर लाल जाट के पुत्र ररामस्वरूप लांबा का इकलौता नाम केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेज चुकी है, वहीं कांग्रेस में भी कमोबेश डॉ. रघु शर्मा के नाम पर सहमति बन जाने की चर्चा है।

 

अजमेर लोकसभा उपचुनाव के लिए बुधवार से नामांकन शुरू हो गए लेकिन अब तक कांग्रेस ने प्रत्याशी को लेकर अधिकृत रूप से घोषणा नहीं की है। वहीं पूर्व मुख्य सचेतक व केकड़ी से पूर्व विधायक डॉ रघु शर्मा के नाम पर सहमति बनने की चर्चाएं बुधवार को भी बनी रही। यह भी चर्चा रही शर्मा के नजदीकी कुछ कार्यकर्ता चुनाव कार्यालय के लिए श्रीनगर रोड पर मकान तलाश रहे हैं। बताया जाता है कि एक भवन को लेकर नगर निगम से यह भी पड़ताल की गई है कि इसका यूडी टैक्स या अन्य कोई कर तो बकाया नहीं है। चुनाव कार्यालय को लेकर बाद में किसी तरह का विवाद नहीं हो, इसलिए पहले ही जांच पड़ताल की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस इंतजार में है कि पहले भाजपा की ओर से प्रत्याशी की घोषणा हो जाए। यह भी संकेत मिले हैं कि 5 या 6 जनवरी को घोषणा की जा सकती है। इधर प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने दिल्ली में अजमेर के प्रभारी व पार्टी महासचिव अविनाश पांडे सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से प्रत्याशी चयन को लेकर विचार विमर्श किया, लेकिन देर रात तक कोई अधिकृत घोषणा नहीं हुई।

अजमेर लोकसभा उपचुनाव BJP और कांग्रेस दोनों के लिए ही आसान नहीं –

राजस्थान। अजमेर लोकसभा उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ही आसान नहीं है। केंद्र और राज्य की सत्ता के दम पर भाजपा चुनावी मैदान  पार करने में पूरा दम लगाएगी, लेकिन सत्ता विरोधी स्वभाविक माहौल उसके लिए बड़ी परेशानी का कारण बनेगा। कांग्रेस सिर्फ सत्ता विरोधी माहौल की नाव पर सवार होकर चुनावी नैया पार नहीं कर  सकती, उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती अंदरूनी कलह और बिखरा संगठन ही रहेगा।

 

भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग दांव पर

 

केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार होने से भाजपा काे कुछ हद तक इसका लाभ मिलेगा लेकिन यह चुनाव उतना आसान नहीं है। हाल ही में गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बयान दिया कि भाजपा के सामने कोई चुनौती नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। राजनीति के मामलों के जानकारों का है कि सांवर लाल जाट के निधन के बाद अजमेर लोकसभा क्षेत्र में उप चुनाव भाजपा के लिए एक मुश्किल मामला हो सकता है, क्योंकि पार्टी जिस सोशल इंजीनियरिंग को लेकर चल रही है उसकी सफलता संदेहास्पद है। पिछले कुछ समय से जातिगत राजनीति के कई रंग अजमेर में देखने काे मिले हैं।

 

भाजपा के खिलाफ नाराजगी

 

आनंदपाल के मामले में राजपूत समाज की भाजपा के खिलाफ नाराजगी सड़कों पर सामने आ गई। यह नाराजगी अब तक तक कायम है। सांवर लाल जाट राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी थे और लेकिन अब भाजपा को कोई दूसरा जाट नेता उनके आसपास भी नहीं है। ऐसे में जाटों को भाजपा के पक्ष में लामबंद रखना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। सचिन पायलट खुद गुर्जर है और अगर पायलट मैदान में आ जाते हैं तो गुर्जर वोट कांग्रेस को मजबूती देंगे।अनुसूचित जाति वर्ग पहले कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक था, लेकिन पिछले कुछ सालाें में इस वोट बैंक की स्थिति काफी हद तक बदल गई है।

 

अनुसूचित जाति वोट बैंक इस बार किसके साथ रहेगा यह देखना दिलचस्प होगा। ये वर्ग इस उप चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएगा। रासा सिंह रावत ने भी इस बार चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन उनका नाम पैनल तक में शामिल नहीं हुआ। लोकसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में रावत हैं और अब तक भाजपा का वोट बैंक माने जाते थे लेकिन अपने ही समाज से जुड़े भाजपा नेताओं से रावत नाराज हैं और यह नाराजगी वोटों में तब्दील हुई तो भाजपा के लिए मुश्किल बढ़ेगी।

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