राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: अमिताभ बच्चन दादा साहब फाल्के पुरस्कार से हुए सम्मानित

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में अमिताभ बच्चन को रविवार को प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बच्चन को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण भी मिल चुका है। बिग बी ने फिल्‍मों में करियर की शुरुआत 1969 में वॉइस नैरेटर के रूप में की थी।

अमिताभ बच्चन अस्वस्थ होने के कारण सोमवार को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो पाए थे। इस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया था कि ऐक्टर को दादा साहब फाल्के सम्मान से 29 दिसंबर को नवाजा जाएगा। अमिताभ बच्चन ने 1969 में सात हिंदुस्तानी फिल्म से अपना ऐक्टिंग डेब्यू किया था।

अमिताभ बच्चन ने कहा कि दादा साहब फाल्के पुरस्कार को देने की शुरुआत करीब 50 साल पहले हुई और मुझे इंडस्‍ट्री में काम करते हुए भी करीब 50 साल हो गए हैं। अमिताभ बच्चन ने पुरस्कार लेने के बाद सभी का शुक्रिया अदा किया और यह भी साफ किया कि वह अभी रिटायर नहीं होने जा रहे हैं, अभी उन्हें काम मिल रहा है।

1969 में शुरू हुए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार का नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के के नाम पर रखा गया है जिन्हें भारतीय सिनेमा का जनक कहा जाता है। इस पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, एक शॉल और 10 लाख रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं।

बता दें कि अस्वस्थ होने के कारण अमिताभ बच्चन सोमवार को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो पाए थे। बताते चलें कि सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया था कि अमिताभ बच्चन को दादा साहेब फाल्के सम्मान से 29 दिसंबर को नवाजा जाएगा।

बच्चन ने कहा कि जब इस पुरस्कार की घोषणा हुई तो मेरे मन में एक संदेह उठा कि क्या कहीं ये संकेत है मेरे लिए कि भाई साहब आपने बहुत काम कर लिया है, अब घर बैठ के आराम कीजिए। क्योंकि अभी भी थोड़ा काम बाकी है, जिसे मुझे पूरा करना है और आगे भी कुछ ऐसी संभावनाएं बन रही हैं जहां मुझे काम करने का अवसर मिलेगा, यदि इसकी पुष्टि हो जाए तो बड़ी कृपा होगी।’ इस दौरान बैठे सभी लोग हंस पड़े और तालियों की गड़गड़ाट से सभागार गूंज उठा।

राष्ट्रपति ने वायुसेना की दो यूनिट को किया सम्मानित

लुधियाना। राष्ट्रपति और सर्वोच्च सेना नायक रमानाथ कोविंद ने गुरुवार को भारतीय वायुसेना के 51 स्कवाड्रन को राष्ट्रपति निशान और 230 सिंगल यूनिट को राष्ट्रपति सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान ग्रुप कैप्टन सतीश एस पवार, कमांडिंग अफसर, 51 स्कवाड्रन और ग्रुप कैप्टन एसके त्रिपाठी, स्टेशन कमांडर, 230 सिंगल यूनिट ने प्राप्त किया।यह सम्मान गुरुवार को वायुसेना स्टेशन हलवारा में एक भव्य समारोह के दौरान इन यूनिट की प्रशंसनीय राष्ट्रसेवा के लिए दिया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने दोनों यूनिटों की इतिहास पत्रिकाओं का भी विमोचन किया। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त की और देश की एकता, निष्ठा एवं अखंडता की रक्षा करनेे वाली तेेजस्वी सैन्य परंपराओं का स्मरण किया।

सशस्त्र सेना के लिए राष्ट्रपति सम्मान और राष्ट्रपति निशान सर्वोच्च सम्मान होता है जो शांति और युद्ध के दौरान राष्ट्र की सुरक्षा में अदम्य योगदान के लिए सैन्य इकाइयों को दिया जाता है। इस समारोह की शुरुआत में राष्ट्रपति को एक भव्य परेड नेे राष्ट्रीय सलामी दी गई। उसके बाद वायु सेना की वायु योद्धा टीम ने मंत्रमुग्ध कर देने वाली ड्रिल का प्रदर्शन किया गया।राइफल पर लगी संगीनों के साथ समकालिक ड्रिल का प्रदर्शन करने वाली वायु योद्धाओं की टीम सैन्य और अर्धसैनिक बलों में एकमात्र है। बाद में भारतीय वायु सेना की युद्धक शक्ति को चमत्कारी रूप में दिखाने वाली वायु करतब टीम सूर्यकिरण ने हैरतअंग्रेज प्रदर्शन किया और साथ ही सुखोई 30 लड़ाकू विमान नेे दिल थाम देने वाले हवाई करतबों का प्रदर्शन किया।

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