“संयुक्त राष्ट्र संघ जाति के विरोध में बनाएं- अंतरराष्ट्रीय कानून

      “बामसेफ का दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन कोलम्बिया विश्वविद्यालय अमेरिका मे सम्पन्न “

वाशिंगटन | भारत के संविधान निर्माता डॉ .बी.आर .आंबेडकर के  शोध –भारत मे जाति व्यवस्था तथा मानव अधिकारो का पतन “

( 1 दशक ) 100 साल  पुरे होने  के उपलक्ष्य पर अंतर्राष्टीय स्तर पर “भारत मे जाति व्यवस्था” तथा मानव अधिकारो का पतन ” पर विचार -विमर्श व् सयुक्त सम्मलेन किया गया  | 

यह कार्यक्रम डॉ बी .आर.अम्बेडकर द्वारा 9 सितम्बर 1916 में कोलम्बिया विश्वविद्यालय में जाति व्यवस्था पर लिखे गए शौध (Thesis) के सौ साल पूरे होने पर मनाया गया है  जिसका विषय – बाबा साहेब के द्वारा लिखे गए शोध-

  “भारत मे जाति व्यवस्था” तथा मानव अधिकारो का पतन ” रहा  इस कार्यक्रम में सिख संस्थाओं में शिरोमणि अकाली दल अंमृतसर अमेरिका के साथी सरबजीत सिंह खालसा, स. हंसरा जी , तथा अन्य साथियों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मा. वामन मेश्राम ने की।

अध्यक्ष मा. वामन मेश्राम  ने  डा. बी .आर .अम्बेडकर जी की सौ साल पहले की गई बात जाति व्यवस्था को खत्म किए बगैर हम भारत में समानता स्थापित नहीं कर सकते. अगर ऐसा  नहीं किया गया तो ये जाति व्यवस्था पूरे विश्व में फैल जाऐगी ओर आज उनकी कही गई बात सच्च साबित हुई। अभी ब्रिटिश सरकार ने पिछलें दिनों अपने देश से जाति व्यवस्था को खत्म करने के लिए एक नया कानून पास किया जिसे ब्राहम्णों के चलते लागू नहीं किया जा सका ये विश्व में जाति व्यवस्था के पैर पसारने का उदाहरण है।

दुनियां के लोग नस्लभेद के बारे में जानते है लेकिन उनको जाति व्यवस्था का ज्ञान नहीं है |
जाति व्यवस्था नस्लभेद नहीं है बल्कि नस्लभेद के कारण जाति व्यवस्था उत्पन्न हुई ,जिसके  कारण भारत के लोगो का डीएनए समान न होना पाया गया है । भारत का शासक वर्ग ऊंची जाति का ब्राहमण बनिया वैश्य है और वो

भारत के सभी साधनों एंव संसाधनों पर कब्जा जमाएं हुए इनका डीएनए भारत के बहुजन लोगो से मेल नहीं खाता है ऐसा उताह विश्वविद्यालय के माईकल बामशाद नाम के सांईटिस्ट द्वारा किए गए डीएनए टेस्ट में सिद्ध हुआ है कि ब्राहमण का डीएनए यूरेशिया के आस्किमोजों प्रांत के लोगों के साथ मिलता है।और यही नहीं इस बात को ब्राहमणों ने खुद कबूला। आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में राजन दिक्षित नाम के एक ब्रामहण ने इस

के आगे चलकर ये साबित किया की आस्किमोजी प्रांत के मोरुआ वंश के लोगो के साथ ब्राहमणों का डीएनए मेल खाता है इससे ये बात सिद्ध होती है कि ब्राहम्ण क्षत्रिय एंव वैश्य भारत के मूलनिवासी नहीं हैं । इनका डीएनए मोरूओं प्रजाति ओर यहूदियों से मेल खाता है ।

ब्राहमण समानता के सिद्धांत को मानने वाले नहीं हैं ये लोगअसमानता को कायम रखने में अपना विश्वास रखते हैं। लोग जाति व्यवस्था का कारण हिंदुत्व को बताते है लेकिन बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के शब्दों में

हिंदुत्व कुछ नहीं ये केवल ब्राहमणवाद है और ब्राहमणवाद असमानता का निचोड है।”

भूमंडलिकरण के साथ साथ जाति व्यवस्था का भूमंडलिकरण भी बहुत तेजी के साथ हो रहा है। अगर इसे रोका नहीं गया तो जो भारत के लोग दूसरे देशों मे माईग्रेट होकर जाऐंगें वो अपनी जाति भी साथ में ही लेकर जाऐंगें। जिसके कारण जाति व्यवस्था का भूमंडलिकरण पूरे विश्व में फैल जाऐगा। हमें सब बहुजन मूलनिवासी लोगों को सिख ईसाई बुद्धिष्ट मुस्लिमों को एक होकर ब्राहमणों का सामना करना होगा और भारत देश मे जाति व्यवस्था ख़त्म करके समानता की स्थापना करके समता स्वतंत्रता न्याय बंधुता आधारित समाज और देश कि व्यवस्था कायम करनी होगी

संयुक्त राष्ट्र संघ से हम अपील करते हैं कि वह जाति के विरोध में अंतरराष्ट्रीय कानून बनाएं अन्यथा हम लोग संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतरराष्ट्रीय ऑफिस पर मोर्चा निकालेंगे
वामन मेश्राम साहेब (राष्ट्रीय अध्यक्ष बामसेफ) अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से..

 

राजस्थान डिजिफेस्ट कोटा-2017 का उत्साही आगाज़ –

राजस्थान में डिजिटल क्रांति का भव्य दिग्दर्शन – ‘हेकाथॉन 2.0’ में देश की आईटी प्रतिभाओं का समागम

जयपुर, 17 अगस्त। राजस्थान में डिजिटल क्रांति के बढ़ते कदमों को जन-जन तक पहुंचाने और नव प्रतिभाओं के नवाचारों से इसे अधिक समृद्ध बनाने की मंशा से दो-दिवसीय राजस्थान डिजिफेस्ट कोटा-2017 का उत्साही आगाज गुरूवार को कोटा के यूआईटी ऑडिटोरियम में हुआ। राजस्थान सरकार की इस नवोन्मेषी पहल से प्रदेश में हो रहे डिजिटल नवाचारों का भव्य प्रदर्शन हो रहा हैवहीं हेकाथॅान 2.0’ जैसी प्रतियोगिता से देश के कोने-कोने से आए मेधावी विद्यार्थियों की नव संकल्पनाओं को धरातल पर उतारने का मंच मिला है।

देश-विदेश में शिक्षा नगरी के रूप में खास पहचान बना चुके कोटा में पहली बार हो रहे आईटी प्रतिभाओं के इस महाकुंभ में देश के विभिन्न प्रान्तों से सूचना प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं अन्य तकनीकी विषयों के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं और साथ ही विभिन्न विषय विशेषज्ञ तथा स्टार्ट अप से जुड़ी हस्तियां भी इस समारोह में नव प्रतिभाओं को प्रोत्साहन दे रही हैं।

ऎतिहासिक पहल

राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के तत्वावधान में आयोजित डिजिफेस्ट की शुरूआत ‘हेकाथॅान 2.0’ के साथ हुई, जिसमें लगभग 800 कोडर्स एवं विद्यार्थी अपनी प्रतिभा और नवाचार का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रतियोगिता लगातार 24 घंटे चलेगी। संभागियों ने राज्य सरकार के इस कदम को डिजिटल क्षेत्र में प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की ऎतिहासिक पहल बताया है।

क्या है ‘हैकाथॉन 2.0
‘हैकाथॉन 2.0’ में देश भर के विभिन्न इंजीनियरिंग व तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी ऑनलाइन व ऑनस्पॉट रजिस्ट्रेशन के माध्यम से शामिल हुए हैं। ये प्रतिभागी भामाशाह योजना, ई-मित्र, इंटरनेट ऑफ थिंग, ब्लॉग चेन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि विषयों पर एप्लीकेशन के माध्यम से नवाचार व उपयोगी सुझाव इस 24 घंटे की अवधि के दौरान प्रस्तुत कर रहे हैं। हैकाथॉन में शामिल विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत एप्लीकेशन की संकल्पना, उपयोगिता, डिजाइन एवं क्रियान्वयन संभाविता के आधार पर शीर्ष टीमों को चुना जाएगा एवं विशेषज्ञों द्वारा उनका साक्षात्कार लेने के पश्चात् विजेताओं का चयन कर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा

महिला सहायता ट्रेकिंग

पारूल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बडौदा से हेकाथॉन में भाग ले रही शिखा रथ ने बताया कि उनकी टीम भामाशाह पोर्टल को महिला ट्रेकिंग सिस्टम एप्लीकेशन के माध्यम से लिंक करना चाहती है। इसके माध्यम से महिलाएं यात्रा करते समय अपनी लोकेशन जीपीएस द्वारा ऑनलाइन ट्रेकर स्टेटस द्वारा पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगी।  इसे सीएम हेल्पलाइन से भी लिंक किया जा सकता है।

डिजिटल राजस्थान –

राजस्थान डिजिफेस्ट का एक खास आकर्षण यहां लगाई गई डिजिटल प्रदर्शनी है। इस प्रदर्शनी में राजस्थान में संचालित विभिन्न योजनाओं के डिजिटल प्लेटफॉर्म, विभागीय पोर्टल, मोबाइल एप्लीकेशन इत्यादि को प्रदर्शित किया गया है। आमजन इनके संचालन, क्रियान्वयन व उपयोग की जानकारी से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदर्शनी में ड्राइविंग सिमुलेटर के माध्यम से वर्चुअल ड्राइविंग प्रशिक्षण, ऑगमेंटेड रियलिटी विद मोशन सेंसिंग, वर्चुअल रियलिटी टूर, ऑनलाइन एमिशन एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम और ड्रोन सिस्टम में संभागी खास रूचि ले रहे हैं। इसके साथ ही ज्ञान संकल्प पोर्टल, स्मार्ट कोटा, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान आदि की जानकारी भी यहां डिजिटल रूप से प्रदर्शित की गई है।

जिस व्यक्ति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई उसे ज़ेल- हेमंत खींची

” जिस व्यक्ति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई , आज उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से ही जेल भेजा जा        रहा है और मीडिया पर जस्टिस कर्णन के बयान छापने पर भी पाबंदी लगा दी गई है  “

हेमन्त खींची                               {{युवा , सामाजिक कार्यकर्त्ता }

जस्टिस कर्णन ने जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, ये सब उस एक पत्र का नतीजा है, क्या प्रधानमंत्री मोदी जी को भ्रस्टाचार के खिलाफ लिखे गए पत्र की  जाँच करवा कर  उचित कारवाई नहीं  करनी चाहिए थी क्या , लेकिन  ना भ्रस्टाचार की जाँच हुई न कोई कारवाई | इसके बाद जो हुवा है वो सब के सामने है  | जो की अपने आपमें कई प्रश्न खड़े करता है  जो की विचारनीय है – कही यह सब तो जस्टिस कर्णन  के दलित होने के कारण नहीं हो रहा अगर ऐसा है तो आप  सोच सकते है  की जस्टिस कर्णन के आड़ में समूचे दलित तबके को कठोरता से दबाये जाने की कोशिश है | हम भारतीय सविंधान में वर्णित सभी एक -एक शब्दों का अनुसरण करते है लेकिन जो घटना क्रम होवा है उस पर गहन विचार करना समय की माँग है हम किधर जा रहे है ?

माननीय न्यायालय और प्रधानमंत्री महोदय के पास जस्टिस कर्णन को जेल भेजने के अलावा जस्टिस कर्णन द्वारा लिखे गए पत्र की विश्वसनीयता के साथ उच्च स्तरीय जांच करवाने का विकल्प भी मौजूद था, इसलिए अगर जस्टिस कर्णन गलत थे तो उन्हें जांच के बाद गलत सिद्ध कर विधिवत जेल भेजते तो हमें भी लगता और भरोसा रहता कि वास्तव में जस्टिस कर्णन गलत है और न्यायपालिका निष्पक्ष है|
ये गलत है, ये तानाशाही है, ये भ्रष्टाचार को बढ़ावा है ,यह दलितों के पतन सा महसूस होता है |

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के लिए दिल्ली में बिछी विसात –

नई दिल्ली |  मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही दलित और वंचित वर्ग के समुदाय और  जातियो को  निरंतर निशाना  बनाया जा रहा है | राजनेतिक पार्टिया दलित समुदाय के लोगो को संविधान में वर्णित अधिकारों के नाम पर मात्र योजनओ का निर्माण तो कर देती है लेकिन जमीनी स्तर पर उन योजनाओं पर अमल नहीं होता  | जिसके परिणाम स्वरूप  आजादी के 7 दशक बाद भी  दलित वर्ग सामाजिक हाशिय पर है और रोटी कपडा. शिक्षा .मकान  स्वास्थ्य  जैसी मुलभूत सेवाओं से वंचित है | बाबा साहब डॉ .अम्बेडकर  ने  भी कहा था की जब तक समाज अपने को राजनेतिक  स्तर पर मजबूत नहीं करेगा तब तक समाज हाशिये पर रहेगा और  मुख्यधारा से वंचित रहेगा  यह  कहना है –   हेमंत खिंची   { युवा और सामाजिक कार्यकर्त्ता }

आगामी 2018 विधान सभा के लिए  खटिक समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले खिंची  ने कहा है कि सरकार दलितों और पिछड़ी जातियो के  विकास के नाम पर मात्र आश्वासन देती है | राजस्थान आज दलितों पर हत्याचार के मामले में प्रथम स्थान पर आ गया है  और राज्य सरकार इस और ध्यान नहीं दे रही है | जिससे दलितों में  सरकार के प्रति नाराजगी है| लेकिन आगामी चुनाव ओं में दलित समुदाय को उचित सम्मान और राजनीती में समान भागीदारी हो,  इस के लिए  आगामी समय में वंचित समाज के लोगो को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाना होगा | ताकि  अधिक से अधिक  संख्या में  राजनीति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके   | इस के लिए सभी  समाज के प्रतिनिधियो  ने अपने विचार रखे और  आगामी कार्य योजना का रोड मेप तैयार किया  |

राजस्थान सरकार के तीन वर्ष और दलित……

राजस्थान सरकार के तीन वर्ष और दलित………..

राजस्थान की वर्तमान सरकार ने अपने तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है जिसके दौरान राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य करने में उपलब्धियां भी प्राप्त की है। इन तीन सालों में तकनीकी सूचना तंत्र व आई.टी.इन्टरनेट, के क्षेत्र में तीव्र गति से जो विकास हुआ है उसको भी राज्य सरकार ने अपने मंत्रालय व विभागों में गुड गर्वेनेंस अपना कर अपने शासन बताया ।

इन तीन सालों में सरकार ने अनेक चुनौतियों व बाधाओं का सामना भी करना पडा है। परन्तु यदि हम राज्य के दलितों , आदिवासियों व महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक स्थिति और उनके विकास के आंकडों पर नजर डाले तो पता चलेगा कि धरातल पर चल रही
विकास योजनाओं और कार्यक्रमों का पूरा-पूरा लाभ उन्हे नही मिल पा रहा है। तीन साल पहले पूर्व वृति सरकार द्वारा जो कल्याणकारी योजनाऐं चलाई जा रही थी जिनमे से अनेक कार्यक्रम व योजनाओं को या तो धीरे-धीरे बन्द कर दिया जा रहा है या उन्हें संषोधित करने के नाम पर कुछ कार्यक्रमों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है जिनमें से प्रमुख कल्याणकारी योजनाऐं और कार्यक्रम जैसे महात्मा गांधी नरेगा, इन्द्राआवास योजना, खाद्यय सुरक्षा अधिनियम, स्वास्थ्य सेवाओं मेे निःशुल्क दवा योजनाओं में कटोती कर आम जनता को जीवन जीने के अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रजातंत्र में किसी भी सरकार के लिए प्रत्येक नागरिक स्वस्थ रहे यह सरकार की प्रथम जिम्मेदारी है लेकिन निःशुल्क  बन्द कर भामाशाह योजना दिनांक 15 अगस्त 2014 से शुरू की गई । आम लोगों को लोक कल्याण कायक्रमों , राशन वितरण, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, नरेगा भुगतान छात्रवृति, जननी सुरक्षा योजना को इस भामाषाह योजना से जोडने की सर्वोच्च प्राथमिकता है परन्तु इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भामाषाह योजना के बारे में कोई जानकारी नही है। ऐसे लोगों के पास कार्ड तो है, परन्तु उन्हे इस के लाभ और उद्ेष्य के बारे में पता ही नही है। निःषुल्क वितरण योजना का लाभ प्रदेष मंे दलित व वंचित महिलाओं को मिल रहा था लेकिन दवाईयों, जांचों में कटोती कर निःषुल्क दवा वितरण योजना के लाभ से दलितों व महिलाओं को वंचित किया गया है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना (मनरेगा):- राज्य में ग्रामीण बेरोजगारों, और अल्प आय मजदूरों को रोजगार के लिए मनरेगा अधिनियम के लागू होने के बाद हर ग्रामीण को सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिये। लेकिन मनरेगा के एक दशक  पूरा होने के बाद भी राज्य में सौ दिन का रोजगार गांरटी दिए जाने की मांग करने पर भी केवल पचास दिन का ही रोजगार राज्य सरकार उपलब्ध करवा पा रही है । सरकार रोजगार उपलब्ध करवाने में अभी कोसों दूर ही चल रही है। राज्य में सामाजिक संगठनों, विधायकों की ओर से विधानसभा में आवाज उठाने के बाद भी इस समस्या का कोई कारगर समाधान नहीं निकल सका।
चिन्ता का विषय यह है कि मनरेगा योजना को चलाने के लिए केन्द्र सरकार ने वर्ष 2016 में राज्य सरकार 2455,53 करोड की राशी  दी गई थी जब कि राज्य सरकार की ओर से मनरेगा योजना के लिए 198 करोड की राशि ही जारी की इससे साफ पता चलता है कि सरकार की मंशा  में खोट है इसलिए पूरी आवंटित  आवंटित नही की। मनरेगा में 15 दिन में रोजगार का भुगतान नही करने पर मनरेगा एक्ट के अनुसूची 2 के पेराग्राफ 29 के अनुसार मजदूरी की कुल राशि  पर 0.05 प्रति दिन की दर से ब्याज देना होता है लेकिन राज्य सरकार पिछले चार साल में 25 करोड का ब्याज का भुगता नही कर रही इससे साफ पता चलता है कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों का भुगतान समय पर नही हो पा रहा ना ही मनरेगा के एक्ट क तहत रोजगार व मुआवजा भता मिल रहा है।
अधिनियम में 100 दिन के अधिकार की गांरटी का प्रावधान है लेकिन धरातल पर स्थिति विपरित है। मनरेगा वेबसाईट के आंकडों में राज्य में प्रति परिवार औसत रोजगार दिवस घटे है। इससे वर्ष 2012-13 में 52, वर्ष 2013-14 में 51, वर्ष 2014-15 में 46, और 2015-16 में औसतन 42 प्रति परिवार दिवस तक स्थिति पहुंच गई है।

शिक्षा  –
राजस्थान में शिक्षा  चैकाने वाले तथ्य व आंकडे सामने आते है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि किसी देश का भविष्य देखना हो तो उस देश के बच्चों को देखे।, उनके कथन पर गौर किया जाये तो पता चलता है कि प्रदेश में देश का भविष्य सुरक्षित नही है राजस्थान के प्राथमिक से सीनीयर सैकण्डरी विद्यालयों की शिक्षा दिया जावे तो पता चलता है कि स्कूलों में सवा लाख शिक्षक  की कमी है। पिछले साल 9 लाख बच्चों का नामांकर बढने के बावजूद उपस्थिति घटी है जिससे साफ पता चलता है कि विद्यालयों में शिक्षा  का स्तर सही नही है, माॅनिटरिेग तंत्र मजबूत नही है अफसरों की ढिलाई व सरकार की उदासीनता के कारण से सर्व शिक्षा  अभियान के तहत स्कूल भवन का निर्माण नही किया गया जिसके कारण 788 स्कूल खूुले में या झोपडों में चल रहे है। राज्य सरकार के दावों के बावजूद अभी भी सवा लाख शिक्षकों की कमी है। माध्यमिक  शिक्षा बोर्ड में साढे 88 हजार पर रिक्त है। इनमें प्रधानाचार्य के 1855, प्रधानाध्यापक के 755, व्याख्याता के 26,543 वरिष्ठ अध्यापक के 15,412 अध्यापक स्तर  के प्रथम के 22629, अध्यापक लेवल द्वितीय के 18,308, शाररिक शिक्षा  के 124 तथा पी.टी.आई. ग्रेड थर्ड के 2,631 पर रिक्त है। वहीं प्रारंभिक शिक्षा  में 48 हजार पद रिक्त है। इनमें वरिष्ठ अध्यापकोें के 8609 तृतीय श्रैणी के 38,988 तथा पी.टी.आई. के 517 पद रिक्त है। शिक्षा  विभाग के अभी 2 लाख 76 हजार 616 पद स्वीकृत है। उनमें से 1 लाख 57 हजार 882 पदोें पर अधिकारी, शिक्षक  और कर्मचारी कार्यरत है लेकिन 1 लाख 18 हजार 734 पद खाली है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में स्कूलों की स्वच्छता की स्थिति भयावह है। प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2014 में शुरू  किये गये स्वच्छता अभियान के तहत जारी क्लीन स्कूल गाइडालईन के मुताबिक हर स्कूल में 40 बच्चों पर एक शोचालय  नही होने के कारण से 10 वीं के बाद बहुत सी छात्राऐं खुले में शोच  की जिल्लत के कारण ड्रा-आउट होती है। समानीकरण के नाम पर 17 हजार स्कूलों को बन्द कर दिया जिसमें बन्द किये जाने वाले स्कूलों में ग्रामीण क्षेत्रों में उन स्कूलों को बन्द किया है जो दलित बाहुल्य क्षेत्रों में या उनके आस-पास थी जिसके कारण से दलित छात्र-छात्राऐं ज्यादा प्रभावित हुई है। शिक्षा  के अधिकार के तहत कानून में संशोधन  कर आर.टी.ई में सिर्फ बी.पी.एल. परिवार के बच्चों को ही प्रवेश  का प्रावधान किया है जिसके कारण से भी दलित आदिवासी परिवार के बच्चों को आर.टी.ई. से के अन्तर्गत 25 प्रतिशत  के छात्रों का प्रावधान था उन्हे इस अधिनियम से वंचित कर दिया है।
वर्ष 2015-2016 की हकीकत बयान करते आंकडे इस बात को सिद्व करने के लिए पर्याप्त है कि शिक्षा  से दलित आदिवासी बच्चों की दूरी बढा दी है जो इस प्रकार हैः-
क्र.सं. श्रैणी आवेदन प्रवेश

1 बी.पी.एल. 20853 15883
2. सामान्य 72689 25991
3. एस.सी./एस.टी. 89855 44342
4. ओ.बी.सी./एस.बी.सी. 160989 79527
5. दिव्यांग 1623 536
6. अनाथ 739 उपलब्ध नही

स्वास्थ्य ….
स्वस्थ नागरिक देश  व समाज की मानवीय सम्पति है। व्यक्ति अस्वस्थ होता है तो उसका कुप्रभाव देश  व समाज दोनो पर पडता है जिसका नुकसान देश  व समाज दोनो का उठाना पडता है। प्रदेश  में जंचा-बच्चा के स्वास्थ्य व कुपोषण से मुक्त करने के लिए आंगन बाडी केन्द्रों पर पोषहार वितरण स्वास्थ्य जांच, स्कूलों में पोषाहार, गरम पोषहार आदि योजनाऐं संचालित है लेकिन आज भी प्रदेष में 12.2 प्रतिशत बालक 11.7 प्रतिशत बालिकाएं अति कुपोषित  की शिकार है। प्रदेष में अति कुपोशित लडके 9.4 प्रतिशत , अति कुपोषित  लडकियां 7.6 प्रतिशत, कुपोषित लडके 26.8 प्रतिषत, कुपोषित लडकियां 17.9 प्रतिषत, कम वजनी बालक 29 प्रतिषत, कम वजनी बालिका 24.9 प्रतिशत है। उक्त आंकडो से साफ पता चलता है कि बच्चों की स्थिति स्वास्थ्य के प्रति चिन्ता जनक है।
विधवा व वृद्वा अवस्था पेंषन येाजनाः-
वर्ष 2016-17 के राज्य में वृद्वजनों , विधवा, महिला तथा निःषक्त जनों के कल्याण हेतु पेंषन योजनाअें के लिए राज्य सरकार ने कुल 3682.35 करोड की राशि  प्रस्तावित की है। यह राषि वर्ष 2015-16 के बजट अनुमान में प्रस्तावित राषि 343.38 करोड रूपये कम है। परन्तु इसी वर्ष के संषोधित बजट से करीब 24 करोड रूपये ज्यादा हे। वर्ष 2015-16 के संषोधित बजट में वृद्वजनों, विधवा महिलाओं तथा निःषक्त जनों के कल्याण हेतु पेंषन येाजनाअें के लिए बजट को 368.36 करोड रूपये से घटा दिया गया है। यह कमी मुख्य रूप से वृद्वजनों के लिए पंेषन योजनाओं में की गई है।
खाद्य सुरक्षा योजना से एक करोड लोगों को बाहर कियाः- वर्तमान सरकार ने टस्क फोर्स द्वारा निर्धारित माप दण्डों की आड लेकर 1 करोड लोगों को बाहर किया और जो पात्र लोग छुट गये थे उन्हे खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल  किया गया है। परन्तु विधानसभा में प्रशन  काल के दौरान यह कहा गया है कि राज्य के एक करोड़  लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना के लाभों से वंचित कर दिया गया है। टास्क फोर्स की सिफारिषों के अन्तर्गत खाद्य सुरक्षा योजना के लाभों से वंचित किये गये लोगों में अधिकतर वंचित वर्गो के गरीब व जरूरत मंद लोग है।
इंदिरा आवास योजना:- …………….

राज्य सरकार ने इंदिरा आवास योजना को समाप्त कर इसके स्थान पर मुख्यमंत्री आवास योजना बनाई है परन्तु अभी तक मुख्यमंत्री आवास योजना धरातल पर नही आ पाई है।
पालनहार योजना:- पालनहार योजना में फण्ड का टोटा बच्चों और पालनहार के लए मुसीबत बन गया है। सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग की और से प्रदेश  में करीब 2 लाख एक हजार बच्चे और एक लाख 14 हजार 137 लाभार्थी योजना से जुडे हुए है पर बजट के अभाव में उनका भविष्य खतरे में है।
निष्कर्ष………………
राज्य सरकार के 3 वर्षो के कार्य कलापों का मूल्यांकन करने पर पता चला है कि राज्य सरकार से दलितों, व वंचित वर्ग के लोगों को जितनी आशा  थी वह इन आशा ओं के मुताबिक खरी नही उतर पाई। नई सरकार ने दलितों को जितने दिव्य स्वप्न दिखा कर सत्ता में आई वह दलितों के लिए मृग तृष्णा ही साबित हुई। आज राजस्थान का दलित अपने आप को ठंगा हुआ असहाय महसूस कर रहा है। अब सरकार के पास अग्नी परीक्षा के दो वर्ष का समय है, क्या दो वर्ष में दलितों का कुछ भला हो पायेगा ? यह प्रशन  चिन्ह सरकार के लिए चिन्तन व प्रदेष के दलितों के लिए चिन्ता का विषय है।

(पी.एल.मीमरौठ)
मुख्य कार्यकारी
दलित अधिकार केन्द्र, जयपुर
112, सूर्य नगर,
गोपालपुरा बाई पास,
जयपुर
मो. 9351317611

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की गाडी पर नहीं होगी लालबत्ती –

जयपुर। मोदी सरकार के लालबत्ती पर रोक लगाने का फैसला का मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्वागत किया है  इसके साथ ही अपनी गाड़ी से भी लालबत्ती हटाने का ऐलान कर दिया है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया से मंत्रणा करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि वे और उनकी सरकार के मंत्री लालबत्ती छोड़ेंगे। राज्य सरकार इस बारे में जल्द फैसला करेगी।

प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि हम लालबत्ती छोड़ेंगे, लालबत्ती का क्या मोह। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले पर चर्चा की है, इसके बाद फैसला लिया गया। कटारिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालबत्ती के इस्तेमाल पर रोक लगाकर  बहुत ही सराहनीय फैसला लिया है।

25 ज़िलों के 137 बांधों एवं उनकी नहरों का जीर्णोद्धार अब शीघ्र शुरू होगा

राजस्थान में जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना के माध्यम से 25 ज़िलों के 137 बांधों एवं उनकी नहरों का जीर्णोद्धार अब शीघ्र शुरू होगा। इसमें 25 ज़िलों की 92 लघु सिंचाई परियोजनाएं, 42 मध्यम सिंचाई परियोजनाएं तथा 3 वृहद सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। इस परियोजना से 4.68 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र लाभान्वित होगा। साथ ही परियोजना के तहत किसानों का क्षमता वर्द्धन किया जायेगा एवं प्रशिक्षण भी प्रदान किया जायेगा।

2018 राजस्थान विधानसभा चुनाव , वसुंधरा राजे के नेतृत्व में –

– भाजपा की कोर कमेटी की बैठक प्रदेश मुख्यालय में हुई। इस बैठक में यह बात सामने आई कि सत्ता और संगठन को लेकर अगले चुनाव के मद्देनजर अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पूरी तरह राजस्थान पर फोकस करने वाले हैं।
– वे अगले माह तीन दिन तक राजस्थान के दौरे पर रहेंगे और संगठन की मजबूती के संबंध में टिप्स देंगे।
 
वसुंधरा के नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं
– बैठक के बाद प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा कि अगला चुनाव मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे केमें लड़ा जाएगा।
– राजे को सीएम पद से हटाए जाने का मामला केवल मीडिया के द्वारा फैलाया हुआ है।
– इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
– वसुंधरा राजे को हटाए जाने जैसा कोई मामला पार्टी में नहीं चल रहा है।
ये भी हुआ बैठक में
– मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत तमाम सदस्य सत्ता और संगठन के बीच संबंध व धौलपुर उपचुनाव पर चर्चा की गई।
– बैठक में भाजपा के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना समेत बी.एल. संतोष, व्ही सतीश, ओम माथुर, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, सांसद भूपेंद्र यादव, केंद्रीय राज्य मंत्री सी.आर. चौधरी, संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मंत्री डॉ. अरुण चतुर्वेदी शामिल हुए।
– अविनाश राय खन्ना रविवार तक के लिए जयपुर दौरे पर हैं।
– सत्ता और संगठन के कामकाज पर फोकस करने वाली यह कोर कमेटी है।
– बताया जा रहा है कि पहली बार इस बैठक में सबसे ज्यादा सदस्य शामिल हुए।
– इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में धौलपुर उपचुनाव को रखा गया।
– वैसे सरकार पहले से ही धौलपुर उपचुनाव पर जोर दे रही है।
– वसुंधरा राजे अभी कुछ देर पहले धोलपुर से ही जयपुर लौटी हैं।
– अगले आम चुनाव को लेकर भी कार्यकर्ताओं को बूस्टअप करने पर बातचीत की गई है।
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