फोन टैपिंग को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने झूठ बोला, नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें, सीबीआई जाँच हो: डाॅ. सतीश पूनियां 

मुख्यमंत्री बतायें कि यह परम्परा किसने तोड़ी थी और इसकी वजह क्या रही: डाॅ. पूनियां

प्रदेश में बहन-बेटियां असुरक्षित, राजा सो रहा है,  जनता खौफ में जी रही है: डाॅ. पूनियां

 

जयपुर, 15 मार्च। भाजपा प्रदेश कार्यालय में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए राजस्थान की राजनीति में अनेक अवसरों पर अनेक किस्म की सियासी चर्चाएं होती हैं, लेकिन राजस्थान में जबसे कांग्रेस की सरकार बनी है तभी से तमाम मुद्दों पर यह सरकार घिरी हुई है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि यह सरकार जब भी अपने पाप छुपाने की कोशिश करती है तो कोई ना कोई नई बात सरकार के खिलाफ उजागर होती है। सरकार की स्टेबिलिटी, कांग्रेस पार्टी की अंतकलह  जैसी कुछ बातों से आप अच्छी तरह से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले एक सियासी एपिसोड के दौरान राजस्थान में सियासी पारा बहुत ऊँचा था और सरकार अपना अस्तित्व बचाने के लिए मशक्कत कर रही थी और वो परिस्थितियां भी इनके अपने लोगांे के कारण ही थी। उस दौरान भाजपा पर अनेकों बार झूठी तोहमत लगाने की कोशिश हुई, लेकिन उस पूरे नाटक के नायक, खलनायक मुख्यमंत्री गहलोत थे।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि 15वीं विधानसभा के 5वें सत्र के दौरान भाजपा विधायक द्वारा एक प्रश्न पूछा गया, जो गोपनीयता से सम्बन्धित है। आमतौर पर जो प्रश्न पूछे जाते हैं उनका एक माह के भीतर जवाब आ जाता है। यह प्रश्न अगस्त, 2020 में पूछा गया और अब उसका जवाब आया है। भाजपा विधायक ने यह प्रश्न पूछा था कि, क्या यह सही है कि विगत दिवसों में फोन टेप किए जाने के प्रकरण सामने आए हैं? यदि हाँ तो किस कानून के अन्तर्गत एवं किसके आदेश पर? पूर्ण विवरण सदन की मेज पर रखें।

 

सरकार ने इसका जवाब दिया कि, लोक सुरक्षा या लोक व्यवस्था के हित में या किसी ऐसे अपराध को प्रोत्साहित होने से रोकने के लिए जिससे लोक सुरक्षा या लोक व्यवस्था को खतरा हो टेलीफोन अन्तावरोध भारतीय तार अधिनियम 1885 की धारा 5(2) भारतीय तार अधिनियम (संशोधित) नियम 2007 के नियम 419ए व सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69 में वर्णित प्रावधान के अनुसार सक्षम अधिकारी की स्वीकृति उपरान्त किया जाता है। राजस्थान पुलिस द्वारा उपरोक्त प्रावधानों के अन्तर्गत टेलीफोन अन्तावरोध सक्षम अधिकारी से अनुमति प्राप्त करने के उपरान्त ही किए गए हंै।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि सियासी घटनाक्रम के समय भी प्रश्न यह था कि क्या कोई फोन टैपिंग हुई है? और उस समय इस बात की चर्चा हुई तो सक्षम अधिकारियों ने, मुख्य सचिव एवं उनके निचले स्तर तक के अधिकारियों ने इस बारे में मना कर दिया। तब मुख्यमंत्री ने सदन में इस बात के लिए साफ-साफ इंकार किया कि राजस्थान में कभी ऐसी परम्परा रही नहीं। सदन में कही गई बात, अधिकारियों द्वारा कही गई बात और अनेक बार चर्चा हुई और अनेक प्रसंगों में यह साबित हुआ कि कहीं ना कहीं फोन की टैपिंग जरूर हुई है। उस दौरान भी इस तरह की टैपिंग के मसले आये तो हमने कई बार पूछा कि इसका साॅर्स क्या है?

डाॅ. पूनियां ने कहा कि अब सरकार ने फोन टैपिंग की बात को स्वीकार कर लिया है। यह स्वीकारोक्ति है राजस्थान पुलिस की, जो विधानसभा के प्रश्न का जवाब आया है। इस तरह की खबरें मीडिया के माध्यम से पहले भी आई हैं। जनवरी, 2020 से अगस्त, 2020 तक कितने फोन टेप किये गये? इस बारे में सरकार इंकार करती रही, लेकिन इस बारे में जानकारी मिलेगी तो मुझे लगता है कि सारी चीजें स्पष्ट हो जायेगी।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि फोन टैपिंग का यह सामान्य मसला नहीं है, राजस्थान के मुख्यमंत्री स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश में इस प्रकार की परम्परा नहीं है, तो मुख्यमंत्री बतायें कि यह परम्परा किसने तोड़ी और इस परम्परा को तोड़ने की वजह क्या है? मुख्यमंत्री खुद इसके दोषी हैं और उस समय जब मीडिया में आॅडियो टेप सामने आने की खबरें आई थी तो कांग्रेस के कई विधायकों ने इस मामले की एनआईए से जाँच कराने की मांग की थी।

 

डाॅ. पूनियां ने कहा कि सदन में भी इस बारे में भी झूठ बोला गया, तथ्यों के बारे में भी भ्रांतियां फैलायी गई, तो स्पष्ट तौर पर मुख्यमंत्री इसके दोषी हैं, उनको नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, जो खुद गृहमंत्री भी हैं, इस मामले की सीबीआई से जाँच करवानी चाहिए। आमतौर पर सरकारों में पूर्णकालिक गृहमंत्री कार्य करते रहे हैं, लेकिन इस सरकार मंे पूर्णकालिक गृहमंत्री नहीं है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि प्रदेश में बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं है, अब तक 6 लाख 14 हजार से अधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें 80 हजार से अधिक महिला अपराधों से सम्बन्धित हैं और 12 हजार से अधिक रेप एवं गैंगरेप के मामले हैं। आमतौर पर जनता बेखौफ होकर सोती है और राजा उसकी सुरक्षा के लिए जागता है, लेकिन प्रदेश में अराजक हालात बने हुए हैं, ऐसे में राजा सो रहा है और जनता खौफ में जी रही है, सो नहीं पा रही है। कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री लीपापोती करने के अलावा कुछ नहीं कर रहे, जनघोषणा पत्र में बहन-बेटियों को सुरक्षा देने का वादा किया था, जिसे वो पूरा नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में नैतिक आधार पर उनको पद पर बने रहना का कोई अधिकार नहीं है |

भारत की सड़कों पर 2030 तक 50 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहन उतारने की तैयारी शुरू – जानें क्या ख़ास हैं सरकार की निति

नीति आयोग और आरएमआई इंडिया ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वित्त जुटाने पर नई रिपोर्ट जारी

2030 में भारत का इलेक्ट्रिक वाहन वित्त पोषण उद्योग 3.7 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा

नई रिपोर्ट में लागत घटाने तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वित्त पोषण बढ़ाने के लिए सॉल्यूशन टूलकिट का प्रस्ताव

नई दिल्ली |  नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आरएमआई) इंडिया ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वित्त पोषण पर एक नई रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने में वित्त की भूमिका दिखाई गई है और यह विश्लेषण किया गया है कि इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना तथा बैट्रियों में अगले दशक में संचित रूप से 266 बिलियन डॉलर (19.7 लाख रुपए) के पूंजीनिवेश की जरूरत है।

 

रिपोर्ट में 2030 में इलेक्ट्रिक वाहनों के वित्त पोषण के लिए 50 बिलियन डॉलर (3.7 लाख करोड़ रुपए) का बाजार है जो भारत के खुदरा वाहन वित्त पोषण उद्योग के वर्तमान आकार से 80 प्रतिशत अधिक है। भारत का वर्तमान वित्त पोषण उद्योग 60 बिलियन डलर (4.5 लाख करोड़ रुपए) का है।

 

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन परिसंपत्तिंयों तथा अवसंरचना के लिए पूंजी और वित्त जुटाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से घरेलू स्तर पर अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफेक्चरिंग में वैश्विक स्पर्धा बढ़ाने और एडवांस सेल केमेस्ट्री बैट्री जैसे उपकरणों के लिए हमें बैंकों तथा अनेक वित्त पोषकों की जरूरत है ताकि लागत कम की जा सके और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पूंजी प्रवाह में वृद्धि की जा सके |

 

 

 

भारत की इलेक्ट्रॉनिक वाहन ईको सिस्टम में अभी तक टेक्नोलॉजी लागत, अवसंरचना उपलब्धता तथा उपभोक्ता विभाग से जुड़ी बाधाओं को दूर करने पर फोकस पर है। अगली गंभीर बाधा वित्त पोषण की है और इस बाधा को दूर करने की जरूरत है ताकि भारत इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी ला सके।

 

अभी एंड यूजरों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों में ऊंची ब्याज दरें, बीमा की ऊंची दरें तथा ऋण मूल्य अनुपात का कम होना है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीति आयोग और आरएमआई ने 10 सॉल्यूशनों की टूल किट चिन्हित की है जिसे बैंकों तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के साथ-साथ उद्योग तथा सरकार अपना सकती है ताकि आवश्यक पूंजी जुटाई जा सके।

रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट के सीनियर प्रींसिपल क्ले स्ट्रैंजर ने कहा कि भारत की सड़कों पर 2030 तक 50 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहन उतारने के काम में तेजी लाने के लिए वाहन वित्त पोषण की री-इंजिनिरिंग तथा सार्वजनिक और निजी पूंजी जुटाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा ये सॉल्यूशन वित्त जुटाने में लाभ प्रदान करेंगे और हम मानते हैं कि भारत से बाहर भी ये सॉल्यूशन प्रासंगिक हैं

 

 

 

रिपोर्ट में जिन 10 सॉल्यूशनों की सिफारिश की गई है उनमें प्राथमिकता क्षेत्र के लिए ऋण देने तथा ब्याज सहायता देने के उपाय शामिल हैं। अन्य उपाय उत्पाद गारंटी और वारंटी देकर ओईएम तथा वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर साझेदारी बनाने से संबंधित हैं। एक विकसित और औपचारिक द्वितीयक बाजार इलेक्ट्रिक वाहनों का रि-सेल मूल्य सुधार सकता है। नीति आयोग के वरिष्ठ विशेषज्ञ श्री रणधीर सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन वित्त पोषण की बाधाओं को नवाचारी वित्त पोषण के माध्यम से ढांचागत तरीके से निपटा जा सकता है।

वित्त पोषण से अलग सिफारिशों में डिजिटल रूप से ऋण प्रदान करना, बिजनेस मॉडल नवाचार, फ्लीट तथा एग्रिगेटर विद्युतीकरण लक्ष्य और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मुक्त डेटा भंडार बनाना शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहन अपना देश के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक, सामाजिक तथा पर्यावरण लाभ हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की अर्थव्यवस्था में सुधार जारी रहने से नए बिजनेस मॉडल और वित्तीय उपायों को स्वीकार्यता मिलती है और सरकारी कार्यक्रमों में इलेक्ट्रिक वाहनों को शीघ्र अपनाना तथा इसकी घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग करना शामिल है। आने वाले दशक में भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार बढ़ेगा।

अन्ना हजारे ने केन्द्र सरकार को दे डाली ये बड़ी धमकी, जानें पूरी खबर

पिछले एक महीने से किसान आंदोलन को कई लोगों का समर्थन मिला है और अब इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का समर्थन मिल गया है। हजारे ने साफ शब्दों में कहा दिया है कि आने वाले दिनों में अगर किसानों की मांगे नहीं मानी गयी तो वह भूख हड़ताल करेंगे। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव में अन्ना हजारे ने पत्रकारों से कहा कि वह किसानों के साथ 3 साल से प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सरकार ने इन मुद्दों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।


हजारे ने कहा कि सरकार सिर्फ दिखावा करती है इसलिए मुझे उस पर अब कोई विश्वास नहीं है। हजारे ने कहा कि उन्होंने एक महीने का समय मांगा है और मैंने उन्हें जनवरी अंत तक का समय दिया है अगर इस वक्त में उनकी मांगे नहीं मानी गयी तो वह भूख हड़ताल करेंगे। इससे पहले सरकार और किसानों के बीच वार्ता जारी है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।

 

अन्ना हजारे ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को 14 दिसम्बर को पत्र लिखकर कहा कि एम. एस. स्वामीनाथन समिति की अनुशंसाओं को लागू करने और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) को स्वायत्तता प्रदान करने संबंधी उनकी मांगों को जल्द से जल्द माने नहीं तो वह आंदोलन करेंगे। हजारे ने तीन कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग को लेकर 8 दिसम्बर को भारत बंद के समर्थन में उपवास रखा था। अब यह देखना होगा की केन्द्र सरकार किसानों की मांगे कितनी जल्दी मानती है या फिर हजारे को उपवास पर बैठना होगा।

भारत में कोरोना का जल्द खात्मा करेगी ये वैक्सीन, जानें पूरी खबर

कोरोना के कारण पूरी दुनिया के साथ भारत को भी इसकी मार झेलनी पड़ी है और लगभग 1 साल होने को जा रहा है लेकिन अभी तक इसकी कोई कारगर वैक्सीन भारत के लोगों को नहीं मिल पाई है। लेकिन खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि नये साल यानी 2021 में भारतीयों को कोरोना की सबसे कारगर वैक्सीन उपलब्ध कराने की पूरी तैयारी हो चुकी है।

इस बात पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मुहर लगाते हुए कहा कि कोरोना वैक्सीन की खुराक जनवरी में मिलने की बात कही है। सूत्रों ने अनुसार बताया जा रहा है कि भारत में लगभग 9 वैक्सीन पर काम हो रहा है और इनके नतीजे सही आते है तो भारत यह भारत के लिए बहुत बड़ी सफलता मिल सकती है।

 

 

भारतीय औषधि महानियंत्रक के अनुसार कोविड-19 के चार वैक्सीन का क्लिनिकल परीक्षण किया जा रहा है जब सुरक्षा के आंकड़े अनुकूल पाए जाएंगे और विषय विशेषज्ञ समिति इसकी समीक्षा कर लेगी तब इसकी अनुमति दी जा सकती है।

अगर बात करें कोरोना मरीजों के आंकड़ों की तो कुछ महीनों पहले तक देश में 10 लाख एक्टिव केस थे आज की तारीख में 3 लाख रह गये है। देश में अब तक कोरोना के 1 करोड़ से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं लेकिन इनमें से 95 लाख से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं। इसके साथ भारत का रिकवरी रेट दुनिया में सबसे ज्यादा है और भारत दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफी अच्छी स्थिति में है।

 

 

 

राजस्थान के कई जिले बने शिमला—मनाली, माइनस डिग्री तक पहुंचा पारा

राजस्थान में पिछले 2—3 दिन में सर्दी का प्रकोप बहुत ज्यादा बड़ गया है इसके चलते कई प्रदेश के कई जिलों का तापमान माइनस तक चला गया है। मौसम विभाग ने राजस्थान के साथ कई दूसरे राज्या में में शीतलहर चलने का अर्लट जारी कर दिया है इसकी वजह कश्मीर में लगातार हो रही बर्फबारी को बताया गया है।

राजस्थान का जैसलमेर जिला हमेशा अधिक गर्मी और सर्दी के लिए जाना जाता है कल रात को जैसलमेर के चांदन इलाके में रात का तापमान माइनस 1.5 डिग्री था जो माउंट आबू से भी कम दर्ज किया है। प्रदेश के साथ देश की राजधानी दिल्ली भी ठंड से बेहाल है और आने वाले दिनों में दिन का तापमान भी कम हो सकता है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।

राजस्थान के माउंट आबू में पारा एक बार फिर जमाव बिंदु से नीचे चला गया है और माउंट आबू में न्यूनतम तापमान शून्य से 1.0 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। प्रदेश के अन्य जिलों में पारा जमाव बिन्दु के करीब पहुच गया है बात करें सीकर में न्यूनतम तापमान 0.5 डिग्री, चुरू में 2.2 डिग्री, पिलानी में 2.5 डिग्री, गंगानगर में 2.8 डिग्री, बीकानेर में 3.1 डिग्री, के सथा बीकानेर, चुरू, नागौर, सीकर और झुंझुनू में शीतलहर चलने की बात भी कही जा रही है।

पारा जमान बिन्दु पर जाने के बाद अभी तक किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई है लेकिन इसके कारण जन—जीवन प्रभावित हुआ है। अगर बात करें पहाडी इलाकों की तो हिमाचल प्रदेश के मनाली और कल्पा में पिछले 24 घंटों में तापमान शून्य से नीचे दर्ज किए जाने के साथ शीत लहर के हालात बने हुए है।

विजय दिवस 2020 : इंदिरा गांधी ने दिखाया था अपना रूद्र रूप, 13 दिन में जीत लिया युद्ध

आज का दिन हर भारतीय के लिए गर्व का वह दिन है जब भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक ऐसा ​फैसला लिया जो इतिहास के पन्नों में विजय दिवस के रूप में जाना जाने लगा। बात करें 16 दिसंबर 1971 की तो वह दिन भारतीय सेना के साथ हर भारतीय के लिए गर्व का दिन था इस दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस, वीरता की कहानी इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गयी।

16 दिसंबर  1971 वो दिन भारत के इतिहास में एक नया अध्याय बना ​उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री इं​दिरा गांधी ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को नजरअदांज करते हुए पाकिस्तान पर आंक्रमण कर दिया और उसके दो टूकड़े करके पाकिस्तान को ऐसा घाव दिया जो सदियों तक उसको चुभता आ रहा है। इंदिरा गांधी ने अमेरिका की चेतावनी के बाद भी पाकिस्तान के दो टुकड़े किए और नया देश बनवा दिया ऐसा करना किसी महिला प्रधानमंत्री के लिए बहुत हिम्मत की बात है।

बताया जाता है कि 3 दिसंबर को पाकिस्तान ने भारत के 11 एयरफील्ड्स पर हमला किया था। इसके बाद यह युद्ध शुरू हुआ और महज 13 दिन में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान को खदेड़ दिया था। बताया जाता है कि पाकिस्तान के 93000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करते हुए सेना सामने हथियार डाल दिए थे।

इंदिरा गांधी को दुर्गा का अवतार भी कहा जाता है क्योंकि एक महिला होते हुए उन्होंने इतना बड़ा फैसला किया जो किसी चमत्कार से कम नहीं था। उस समय अमेरिका भी इंदिरा को पंसद नहीं करता था इसके बावजूद इंदिरा अमेरिका को किनारे करते हुए पाकिस्तान के दो टूकड़े कर दिये।

कोरोना मीटर: राजस्थान में घटी कोरोना रफ्तार तो जयपुर में बड़ी रफ्तार, 350 नए मरीज

राजस्थान में कोरोना की रफ्तार अब थोड़ी धीमी पड़ने लगी है और इसी वजह से प्रदेश के लगभग सभी जीलों में कोरोना के नए मरीज मिल रहे हैं। लेकिन प्रदेश की राजधानी जयपुर में कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ती नहीं दिख रही है मंगलवार को भी लगभग 350 नए कोरोना मरीज सामने आये है। जयपुर के कुछ भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मरीजों का आंकड़ा सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है।


कोरोना संक्रमितों की संख्या का आंकडा अब पूरे प्रदेश में लगभग 1000 के पास पहुंच गया है, जो सरकार के साथ लोगों के लिए राहत भरी खबर है। दिवाली के बाद से लगातार बढ़ते आंकड़े सरकार और आमजन दोनों की परेशानी बढ़ा रहे थे लेकिन पिछले कुछ माह में 3000 के पार पहुंचा नए मरीजों का यह आंकड़ा अब 1 हजार पर आ गया है।

राजधानी जयपुर की बात करें, तो यहां नए कोरोना मरीजों की संख्या का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अकेले जयपुर से 357 नए संक्रमित पाए गए हैं जबकि अन्य जिलों में 100 से कम मरीज मिले है। मंगलवार को जयपुर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा जोधपुर 76, अजमेर 60, नागौर 48, पाली 38, अलवर 38, डूंगरपुर 37, भीलवाड़ा 32, राजसमंद से 21 और बूंदी 16 मरीज मिले है। प्रदेश में जहां मृत्युदर अभी भी कई राज्य़ों के मुकाबले अभी कम है तो कुल संक्रमितों का आंकड़ा 293584 है।

राजधानी जयपुर में कोरोना मीटर
1. झोटवाड़ा और वैशाली में 34—34 नए मरीज
2. मानसरोवर में 31 नए मरीज
3. मालवीय नगर में 26 नए मरीज

आज सुप्रीम कोर्ट सुना सकता है किसान आंदोलन पर बड़ा फैसला

कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन 21वें दिन भी जारी है। किसानों और सरकार के बीच अब तक कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। एक तरफ तो सरकार कुछ संशोधन पर अड़िग है तो किसान कृषि कानूनों को खत्म कराने की मांग पर अड़े हैं।

आज कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। दायर याचिका में कहा गया है कि धरना-प्रदर्शन से आम जनता को बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है और हर दिन किसान सड़कों को बंद करके प्रदर्शन कर रहे हैं। कभी जयपुर—दिल्ली हाईव जाम किया तो आज किसानों ने चिल्ला बॉर्डर जाम करने की चेतावनी दी है।


चिल्ला बॉर्डर प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसान यूनियन के किसानों ने आज चिल्ला बॉर्डर को पूरी तरह से दिल्ली जाने के लिए बंद कर करने का एलान कर दिया है। आंदोलन कर रहे किसानों को सड़कों पर से हटाने की याचिका एक लॉ स्टूडेंट ऋषभ शर्मा ने याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट किसान आंदोलन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी हो रही इनमें दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर जाम और कोरोना वायरस संकट को लेकर भी याचिका दायर की गई है। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच इन मामलों पर सुनवाई कर रही है।

कल पीएम मोदी ने एक बार फिर कृषि कानूनों को किसानों के लिए अच्छा बताया और कहा है कि विपक्ष किसानों को डरा रहा है और भड़काने की कोशिश कर रहा है जिसके कारण किसान इस बिल को समझ नहीं पा रहा है।

किसान आंदोलन का 19वां दिन: सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देंगे किसान

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के खिलाफ देश भर के किसानों के विरोध प्रदर्शन का आज 19वां दिन है और अब यह आंदोलन धीरे—धीरे देश के सभी हिस्सों में फैल रहा है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि दिल्ली की सीमाओं पर किसान 8 बजे से भूख हड़ताल पर बैठने का फैसला करने के साथ आज देश भर में किसान सभी जिला मुख्यालयों पर धरना दिया जाएगा। इस आंदोलन पर जबरदस्त राजनीति भी देखने का मिल रही है जिसके चलते इस आंदोलन को लेकर कई प्रकार के सवाल भी खड़े किये जा रहे हैं।


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी किसानों की भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए वह खुद भूख हड़ताल पर बैठेंगे इस फैसलों को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल के उपवास को नौटंकी करार दिया है। किसानों के आंदोलन को लेकर मोदी सरकार हर प्रकार से किसानों से वर्ता करने के​ प्रयास कर रही है वहीं अब इस मुद्दे पर खुद अमित शाह लगातार बैठके कर रहे हैं।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को किसानों को मनाने के लिए अलग-अलग राज्यों और यूनियनों की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन,अमित शाह ने पंजाब के किसान नेताओं से बातचीत करने की जिम्मेदारी अपने पास रखी है। इस आंदोलन से जुड़े कई किसान नेताओं ने इससे दूरी बना ली है।


किसान दिल्ली-जयपुर हाईवे बंद करने के लिए राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर भारी संख्या में जमा होने लगे हैं। इस आंदोलन को देश के खतरा बताने के साथ इसके तार पाकिस्तान से भी जोड़ने की बाते सामने आ रही है लेकिन किसान नेता पहले ही कह चुके हैं कि हमें किसी भी राजनीतिक पार्टी की जरूरत नहीं है हम अपने अधिकार के लिए खुद लड़ सकते हैं।

राजस्थान : कोविड -19 की वैक्सीन जल्द आ सकती हैं जिला कलक्टर ने दियें वैक्सीनेशन सेन्टर बनाने के दिये निर्देश, जानें क्या रखनी होगी सावधानी

कोविड-19 वैक्सीनेशन की तैयारियों शुरू . जिला कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को वैक्सीनेशन सेन्टर बनाने के दिये निर्देश
जयपुर, 01 दिसम्बर। आगामी महीनों में आने वाली कोविड-19 वैक्सीन के संबंध में टीकाकरण की पूर्व तैयारियों को लेकर मंगलवार को जयपुर जिला कलेक्ट्रेट के सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला कलक्टर अन्तर सिंह नेहरा ने जयपुर में कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर चिन्ता जताई, साथ ही उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुये कहा कि कोरोना की वैक्सीन जल्द ही आने वाली हैं, इसके लिए हमें पहले से ही वैक्सीनेशन सेन्टर का निर्धारण कर माकूल व्यवस्थाएं करनी है। जिससे सेन्टर पर एक साथ भीड़ इक्कठी ना हो, तथा सबका वैक्सीनेशन उचित प्रकार से हो सके।
पुलिस प्रशासन का भी व्यवस्थाओं को बनाये रखने में सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुये कहा कि वैक्सीन का तापमान मेन्टेन रहे यह सुनिश्चित किया जाये साथ ही वैक्सीनेशन परिवहन व्यवस्था, पावर बैकअप और कोल्ड स्टोरेज तक पहुॅचाने और फिर टीकाकरण तक तापमान मेन्टेन रखना सुनिश्चित किया जाये। इसके साथ श्री नेहरा ने कहा कि टीकाकरण विभिन्न चरणों में प्राथमिकता के आधार पर किया जायेेगा।
इन्सीडेन्ट कमाण्डर, सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) एवं मेडिकल ऑफिसर तय करेंगे कन्टेेनमेन्ट जोन का निर्धारण
बैठक में जिला कलक्टर अन्तर सिंह नेहरा ने कहा कि कोविड-19 के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए तथा जिन स्थानों पर कन्टेनमेन्ट जोन के निर्धारण की आवश्यकता है। उस निर्धारित क्षेत्र में इन्सीडेन्ट कमाण्डर, मेडिकल ऑफिसर, सहायक पुलिस आयुक्त के द्वारा कन्टेनमेन्ट जोन का निर्धारण किया जाएगा।
कोविड-19 के संबंध में संबंधित अधिकारियों के साथ की समीक्षा
जिला कलक्टर अन्तर सिंह नेहरा ने कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर चिन्ता जताई साथ ही संबंधित अधिकारियों से विस्तारपूर्वक कन्टेनमेन्ट जोन का निर्धारण, सैम्पलिंग की क्षमता, अस्पतालों में बैड्स की संख्या, ऑक्सीजन की उपलब्धता, डे केयर सिस्टम, आईसीयू बेड्स, पोस्ट कोविड सेन्टर आदि के बारे में समीक्षा की। श्री नेहरा ने कहा कि ‘नो मास्क नो एन्ट्री‘ का कडाई से पालना करना चाहिए तथा संक्रमित व्यक्तियों के घरों के बाहर जन साधारण की सूचनार्थ कोविड-19 के नोटिस भी चस्पा किये जाने चाहिए इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश भी दिये।
बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रथम) श्री इकबाल खांन, अतिरिक्त जिला कलक्टर (दक्षिण) श्री शंकर लाल सैनी व नगर निगम, पुलिस, एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।