राजस्थान विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव का ऐलान –

31 अगस्त को होगे  छात्र संघ चुनाव –

जयपुर, 20 अगस्त। प्रदेश की 14 विश्वविद्यालय और उनसे संबंद्ध महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। जोधपुर संभाग में 10 सितंबर को वहीं संपूर्ण प्रदेश में 31 अगस्त को चुनाव करवाए जाएंगे। प्रदेश भर में मतगणना 11 सिंतबर को एक साथ करवाई जाएगी।
उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने सोमवार को बताया कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार प्रदेश की सभी महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में चुनाव करवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जोधपुर संभाग को छोड़कर समस्त प्रदेश भर में मतदाता सूचियों का प्रकाशन 23 अगस्त को किया जाएगा। 24 अगस्त को मतदाता सूचियों पर आपत्ति प्राप्त करना और मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। 25
अगस्त को उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल कर पाएंगे। इसी दिन उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। वैद्य नामांकन सूची का प्रकाशन, उम्मीदवारों द्वारा नाम वापसी और उम्मीदवारों की अंतिम नामांकन सूची का प्रकाशन 27 अगस्त को होगा जबकि 31 अगस्त को सुबह 8 बजे से अपरान्ह 1 बजे तक मतदान प्रक्रिया सम्पादित की जाएगी।

इसी तरह जोधपुर संभाग की महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में मतदाता सूचियों का प्रकाशन 01 सितंबर को किया जाएगा। 4 सितंबर को मतदाता सूचियों पर आपत्ति प्राप्त करना और मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। 5 सितंबर को उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल कर पाएंगे। इसी दिन उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। वैद्य नामांकन सूची का प्रकाशन, उम्मीदवारों द्वारा नाम वापसी और उम्मीदवारों की अंतिम नामांकन सूची का प्रकाशन 6 सितंबर को होगा जबकि 10 सितंबर को सुबह

 8 बजे से अपरान्ह 1 बजे तक मतदान प्रक्रिया सम्पादित की जाएगी। प्रदेश भर की सभी महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों 11 सितंबर को चुनाव परिणामों की घोषणा और उम्मीदवारों को शपथ दिलवाई जाएगी।
श्रीमती माहेश्वरी ने कहा कि आगामी छात्रसंघ चुनाव लिंगदोह समिति की अनुशंषाओं के आधार पर ही होंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कुलपति और महाविद्यालयों में प्राचार्य यह सुनिश्चित करें कि समिति की सिफारिशों का किसी भी स्तर पर  उल्लंघन ना हो।

अजमेर लोकसभा उपचुनाव BJP और कांग्रेस दोनों के लिए ही आसान नहीं –

राजस्थान। अजमेर लोकसभा उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ही आसान नहीं है। केंद्र और राज्य की सत्ता के दम पर भाजपा चुनावी मैदान  पार करने में पूरा दम लगाएगी, लेकिन सत्ता विरोधी स्वभाविक माहौल उसके लिए बड़ी परेशानी का कारण बनेगा। कांग्रेस सिर्फ सत्ता विरोधी माहौल की नाव पर सवार होकर चुनावी नैया पार नहीं कर  सकती, उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती अंदरूनी कलह और बिखरा संगठन ही रहेगा।

 

भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग दांव पर

 

केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार होने से भाजपा काे कुछ हद तक इसका लाभ मिलेगा लेकिन यह चुनाव उतना आसान नहीं है। हाल ही में गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बयान दिया कि भाजपा के सामने कोई चुनौती नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। राजनीति के मामलों के जानकारों का है कि सांवर लाल जाट के निधन के बाद अजमेर लोकसभा क्षेत्र में उप चुनाव भाजपा के लिए एक मुश्किल मामला हो सकता है, क्योंकि पार्टी जिस सोशल इंजीनियरिंग को लेकर चल रही है उसकी सफलता संदेहास्पद है। पिछले कुछ समय से जातिगत राजनीति के कई रंग अजमेर में देखने काे मिले हैं।

 

भाजपा के खिलाफ नाराजगी

 

आनंदपाल के मामले में राजपूत समाज की भाजपा के खिलाफ नाराजगी सड़कों पर सामने आ गई। यह नाराजगी अब तक तक कायम है। सांवर लाल जाट राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी थे और लेकिन अब भाजपा को कोई दूसरा जाट नेता उनके आसपास भी नहीं है। ऐसे में जाटों को भाजपा के पक्ष में लामबंद रखना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। सचिन पायलट खुद गुर्जर है और अगर पायलट मैदान में आ जाते हैं तो गुर्जर वोट कांग्रेस को मजबूती देंगे।अनुसूचित जाति वर्ग पहले कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक था, लेकिन पिछले कुछ सालाें में इस वोट बैंक की स्थिति काफी हद तक बदल गई है।

 

अनुसूचित जाति वोट बैंक इस बार किसके साथ रहेगा यह देखना दिलचस्प होगा। ये वर्ग इस उप चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएगा। रासा सिंह रावत ने भी इस बार चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन उनका नाम पैनल तक में शामिल नहीं हुआ। लोकसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में रावत हैं और अब तक भाजपा का वोट बैंक माने जाते थे लेकिन अपने ही समाज से जुड़े भाजपा नेताओं से रावत नाराज हैं और यह नाराजगी वोटों में तब्दील हुई तो भाजपा के लिए मुश्किल बढ़ेगी।

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