कांग्रेस 50 साल में नहीं कर सकी हमारी सरकार ने वह काम किया – मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

राजस्थान। बिजौलिया पीजी कॉलेज खोलकर सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है। जेतपुरा बांध का 50 साल में जीर्णोद्धार नहीं हो सका था। कीर्ति बाईसा ने इस काम काम को चार साल में करवाया है। भाजपा सरकार ने चार साल में प्रदेश में इतने काम किए जो कांग्रेस 50 साल में नहीं कर सकी। यह बात मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मंगलवार को कही।

विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी शक्तिसिंह हाड़ा के समर्थन में हुई सभा में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विकास के और काम कराए जाएंगे। लेकिन इसके लिए अपना विधायक होना चाहिए। आपको पार्टी के हाथ मजबूत करने होंगे तभी विकास के काम हो सकेंगे।

उन्होंने बाड़मेर में रिफाइनरी लगाने और उससे होने वाले विकास की चर्चा भी की। वसुंधरा राजे ने कहा कि प्रदेश में भाजपा चाहती है कि शांति और किसी भी जाति का झगड़ा न हो लेकिन कांग्रेस सोचती है कि उसे वोट कैसे मिलेंगे इसके लिए वे जोड़ तोड़ कर परिवार में घुसने की कोशिश करते हैं।

BJP सरकार का बोरिया बिस्तर बंधना तय: सचिन पायलट

राजस्थान। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने बुधवा को श्रीनगर रोड पर आयोजित सभा में कहा कि राजस्थान में आमजन जिस तरह सरकारी नीतियों व कामकाज से त्रस्त है उसे देखते हुए कांग्रेस न केवल उपचुनाव में जीतेगी बल्कि आने वाले विस चुनाव में भारी बहुमत के साथ जीत हासिल करेगी। 10 महीने बाद भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार का राजस्थान से बोरिया-बिस्तर बंधना तय है। रघु शर्मा की जमानत सचिन पायलट ले रहा है। अजमेर की लोक सभा सीट कांग्रेस जीतेगी और दिल्ली का सिंहासन भी डोलेगा।

दरअसल प्रदेश में अजमेर, अलवर एवं मांडलगढ़ सीट पर नामांकन के आखिरी दिन गहमागहमी रही। अजमेर लोस सीट पर भाजपा-कांग्रेस सहित निर्दलीय व अन्य पार्टियों के 22 प्रत्याशियों ने 27 नामांकन दाखिल किए। कांग्रेस के डा. रघु शर्मा व भाजपा के रामस्वरूप लांबा ने बुधवार को नामांकन दाखिल किया। नाम वापसी तक प्रत्याशियों की संख्या 15 से कम नहीं हुई तो यहां एक बूथ पर दो-दो ईवीएम लगानी पड़ेंगी। नाम वापसी की अंतिम तिथि 15 जनवरी है।

अलवर लोकसभा सीट

भाजपा के डा. जसवंत यादव ने नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस के डाॅ. करण सिंह यादव पहले ही नामांकन भर चुके हैं। यहां से 15 प्रत्याशी मैदान में है।

मांडलगढ़ विधानसभा सीट

भाजपा के शक्ति सिंह हाड़ा ने बुधवार को नामांकन भरा। कांग्रेस प्रत्याशी विवेक धाकड़ ने मंगलवार को नामांकन दाखिल किया था। यहां से 18 प्रत्याशी मैदान में हंै। कांग्रेस के बागी गोपाल मालवीय ने भी पर्चा भरा, जिनका नामांकन वापस कराने के लिए कांग्रेसी जोर लगा रहे हैं। सभी सीटों पर 29 जनवरी को मतदान होना है।

अलवर में एक बार फिर से दो यादवों के बीच मुकाबला लेकिन कुछ ख़ास होगा इस बार –

जयपुर. अलवर में एक बार फिर से दो यादवों के बीच मुकाबला होगा। भाजपा से डॉ. जसवंत यादव और कांग्रेस से डॉ. करण सिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों यादव पहले 2008 में बहरोड़ विधानसभा से आमने-सामने हो चुके हैं। इसमें जसवंत ने करण यादव को करीब 20 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। पिछले 40 सालों में इस सीट पर 11 चुनाव हुए हैं। इसमें 8 बार यादव प्रत्याशी जीते हैं। इनमें भी छह चुनाव में भाजपा व कांग्रेस दोनों ने यादव प्रत्याशियों को ही टिकट दिया। जसवंत यादव पहले भी अलवर सीट से तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें दो बार हारे व एक बार जीते।

 

साल 1996 में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष डॉ. जसवंत सिंह को भाजपा ने कांग्रेस से इस्तीफा दिलवाकर रातों-रात भाजपा ज्वाइन करवाई। कांग्रेस ने सीट बचाने के लिए अपने दिग्गज नेता नवल किशोर को जसवंत सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा। नवल किशोर 2 हजार वोटों से जीते। 1998 में कांग्रेस ने घासीराम यादव को उतारा। महेंद्र कुमारी निर्दलीय मैदान में उतरीं। वहीं भाजपा ने डॉ. जसवंत यादव पर दांव लगाया। घासीराम यादव ने महेंद्र कुमारी को 25 हजार वोटों से हराया। वहीं जसवंत यादव तीसरे नंबर पर रहे। साल 1999 में भाजपा ने डॉ.जसवंत यादव को उतारा तो कांग्रेस ने इस बार महेंद्र कुमारी को टिकट दिया। यादव ने महेंद्र कुमारी को लगभग 57 हजार वोटों के अंतर से हराया। वहीं 2009 में कांग्रेस से भंवर जितेंद्र सिंह व भाजपा से डॉ. जसवंत यादव की पत्नी डॉ. किरण यादव चुनाव लड़े। भंवर जितेंद्र डेढ़ लाख वोटों से जीते।

डॉ. करण सिंह यादव कांग्रेस के टिकट पर एक बार अलवर लोक सभा व तीन बार बहरोड़ विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। 2004 में कांग्रेस ने डॉ. करण सिंह यादव को तो भाजपा ने महंत चांदनाथ को टिकट दिया। करण सिंह ने चांदनाथ को 8 हजार वोटों से हराया। यानी दोनों यादवों में करण सिंह भारी रहे। इसके अलावा 1998, 2003 में बहरोड़ विधानसभा चुनाव लड़े और जीते लेकिन 2008 में जसवंत यादव के सामने बहरोड़ विधानसभा में हार गए।

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