दोहरे झटके: झारखंड में हार से भाजपा को राज्यसभा सीटों का होगा नुकसान

नई दिल्ली। झारखंड में राज्यसभा की कुल 6 सीटें हैं, जिनमें वर्तमान में बीजेपी का तीन पर, कांग्रेस और लालू यादव की पार्टी राजद का एक-एक पर कब्जा है। साल 2020, 2022 और 2024 में दो-दो सीटों पर झारखंड में द्विवार्षिक चुनाव होंगे।

झारखंड चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा को राज्यसभा में सीटों का नुकसान हो सकता है। भले ही अगला लोकसभा चुनाव 2024 में है, मगर उससे पहले राज्यसभा के चुनावों में बीजेपी को झटका लग सकता है।

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में हार बीजेपी के लिए दोहरे झटके की तरह है। झारखंड में हार से बीजेपी को न सिर्फ सत्ता गंवानी पड़ी है, बल्कि इसका खामियाजा संसद में भी भुगतना पड़ सकता है।

बता दें कि झारखंड चुनाव में जेवीएम (प्रजातांत्रिक) ने बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, मगर अब उसने बीजेपी को समर्थन देना का फैसला लिया है।

इन सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा। क्योंकि राज्य विधानसभा में मौजूदा सियासी अंकगणित ने इसे पेचीदा बना दिया है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के विपरीत राज्य के निर्वाचित विधायक उच्च सदन के उम्मीदवार के लिए वोट करते हैं। झारखंड में 81 विधानसभा सीटें हैं।

झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में बने जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन ने 47 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लिया है। जेएमएम 30, कांग्रेस 16 और एक सीट पर आरजेडी को जीत मिली है। वहीं, बीजेपी को सिर्फ 25 सीटें मिली हैं।

हालांकि, भाजपा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार यानी एनडीए सरकार राज्यसभा में अल्पमत में है, मगर विपक्ष में भीतरघात की वजह से कई अहम विधेयक मसलन नागरिकता (संशोधन) अधिनियम और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, तीन तलाक विधेयक पास कराने में कामयाब रही है।

विधानसभा चुनाव: झारखण्ड में गठबंधन को प्रचंड बहुमत, 27 को शपथ लेंगे हेमंत सोरेन

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) गठबंधन ने बहुमत हासिल कर लिया है। 27 दिसंबर को हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। जेएमएम के 6, कांग्रेस के 5 और आरजेडी के कोटे से एक मंत्री शपथ लेंगे। यानी हेमंत सोरेन के साथ 12 मंत्री शपथ लेंगे। इसके अलावा कांग्रेस के खाते में स्पीकर पद जा सकता है।

बता दें कि बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पिछले विधानसभा चुनावों में जहां बीजेपी ने 37 सीटें जीती थीं, वहीं वह इस बार सिर्फ 25 सीटें मिल पाईं। बीजेपी की सहयोगी रही आजसू पिछली विधानसभा में सिर्फ आठ सीटें लड़कर पांच सीटों पर जीती थी, जबकि इस बार उसने 53 सीटें लड़कर महज दो सीटें जीत पाई।

झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिला है। गठबंधन ने 81 में से 47 सीटें जीती हैं। इस जीत के बाद अब गठबंधन के नेता जल्द ही सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

बता दें कि बीजेपी के लिए महतो वोटबैंक में घाटा साबित हुआ है। बिहार में जेडीयू और बीजेपी गठबंधन में हैं लेकिन झारखंड में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा जिसका घाटा दोनों को उठाना पड़ा। इससे बीजेपी के ओबीसी वोट बैंक को नुकसान बताया जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कुर्मी जाति से हैं। जेडीयू झारखंड में खाता खोलने में भी विफल रही।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि महागठबंधन सरकार राज्‍य के लोगों की आकांक्षाएं पूरी करेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्‍व वाले गंठबंधन को चुनाव में जीत पर बधाई दी है। एक ट्वीट में मोदी ने भारतीय जनता पार्टी को कई वर्षों तक राज्‍य की सेवा करने का अवसर देने के लिए राज्य की जनता को धन्‍यवाद दिया।

इस बीच, झारखंड मुक्ति मोर्चा के निर्वाचित सदस्यों की आज रांची में बैठक हो रही है, जिसमें विधायक दल का नेता चुना जाएगा। पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन बैठक की अध्यक्षता करेंगे। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को पार्टी विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है।

लालू प्रसाद यादव को मिली छह सप्ताह की अंतरिम जमानत

रांची। लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। रांची की उच्च न्यायालय ने लालू को मेडिकल ग्राउंड के आधार पर छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है। अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए 20 अप्रैल को सीबीआई से लालू यादव की चिकित्सिकीय रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा था। हालांकि देवघर मामले में लालू की नियमित जमानत याचिका 23 फरवरी को खारिज करते हुए अदालत ने कहा था कि उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की गंभीरता को देखते हुए इस मामले में उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती है।

अदालत में लालू को चिकित्सिकीय आधार पर अंतरिम जमानत देने की याचिका दायर की गयी थी जो न्यायमूर्ति अपरेश सिंह की पीठ के सामने आज सुनवाई के लिए आयी। अदालत ने आज तीनों मामलों में सुनवाई एक साथ करते हुए लालू यादव को राहत दी है। यादव को इन मामलों में रिहाई की तिथि से छह सप्ताह की राहत होगी जिससे वह अपना उचित इलाज करा सकें।

लालू यादव को रांची में बिरसा मुंडा जेल के अधिकारियों ने कल ही बेटे तेज प्रताप यादव के विवाह में शामिल होने के लिए तीन दिनों का पैरोल दिया था। पैरोल मिलने के बाद वह कल शाम अपने पटना स्थित घर पहुंचे थे। पैरोल के अनुसार उन्हें 14 मई को वापस न्यायिक हिरासत में लौटना था लेकिन अब उन्हें छह सप्ताह बाद जेल वापस लौटना होगा। अदालत से आज मिली राहत के बाद लालू यादव अपने परिवार के साथ बेटे के विवाह की रस्में आराम से पूरी कर सकेंगे।

आदिवासियों की नियति तो देखिये चूहे गिलहरी खाने को है मजबूर …

झारखंड में गरीब आदिवासियों की नियति तो देखिये चूहे गिलहरी और खरगोश हैं इनके निवाले में…..

झारखंड में गरीब आदिवासियों की नियति तो देखिये चूहे गिलहरी और खरगोश हैं इनके निवाले में

झारखंड में गरीब आदिवासियों की नियति तो देखिये
चूहे] गिलहरी और खरगोश हैं इनके निवाले में
झारखंड की कहानी ट्रायबल पिंकी की जुबानी
सोमनाथ आर्य
रांची: मैं, ट्रायबल पिंकी… मैं ब्रेकफास्ट में चूहे, लंच में गिलहरी और डिनर में खरगोश खाती हूं … ये कड़वा सच है अपने झारखंड का। सबका साथ सबका विकास के नारे इस कठोर के आगे महज मजाक बनकर रह जाती है। बड़ी हिम्मत चाहिये इस सच को स्वीकार करने के लिए, यकीं नहीं तो साहेबगंज के राजमहल पहाड़ी के निकट उत्क्रमित मध्यविद्यालय चुआ चले जायें। जहां आपको मिलेंगी उम्मीद और नाउम्मीदी की दर्जनों लकीरें लिये महज नौ साल की पिंकी पहाड़िन। यही टाइटल है और यही नाम स्कूल के रजिस्टर में है दर्ज। अपनी मां की गुलाबी रंगीन दुपट्टा ओढ़े पिंकी के चेहरे पर हलांकि मुस्कान तो है, लेकिन यह मासूम बचपन का सहज श्रृंगार नजर आता है। पिंकी जब अपनी जुबान से स्कूल में कभी नहीं मिलने वाली मिड डे मिल के बारे में कहती है, तो कोई खास अचरच नहीं होता, लेकिन जब कहती है कि वह खाने के लिए चूहे, गिलहरी और खरगोशों का शिकार करती है तो रूह कांप जाती है और धीरे -धीरे मौजूदा सरकार ,सरकारी मशीनरी और व्यवस्था का नकाब उतरने लगता है।
झारखंड के साहेबगंज जिले में राजमहल पहाड़ी के ऊपर स्थित नौ-वर्षीय पिंकी पहाड़न छू पहाड़ में एक पृथक आदिवासी गांव चुआ में रहती है। उसके गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है, जहां उसका नाम 5 वर्ष की उम्र के बाद से पंजीकृत किया गया है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, उनके नाम के मुकाबले पैसा नियमित रूप से जारी किया जाता है, ताकि उसे पौष्टिक मध्यान भोजन मिल सके जिसमें चावल, हरी पत्तेदार सब्जियां और दाल शामिल हैं। वास्तव में, हालांकि, पिंकी को यह भोजन नहीं मिलता है। जिसके बाद पिंकी अपनी गरीबी से जंग लड़कर जंगलों की, खाक छानती है और चूहे, गिलहरी और खरगोश का शिकार अपने दोस्तों के साथ करती है। हालांकि इस काम में उनके परिजन पहले से जुटे होते हैं। इस साल के बजट आवंटन में 11.5 लाख स्कूलों में 10.03 करोड़ बच्चों के लिए 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। केंद्र और राज्य सरकार के बीच, एक पौष्टिक भोजन के लिए हर दिन प्रति बच्चा 4 रुपये 6 रुपये दिया जा रहा है।
इलेक्ट्रोनिक खेल के जरिये यहां बच्चों का जीवन दांव पर
स्थिति का पता लगाने के लिए साहेबगंज के पहाड़ी इलाकों में स्कूलों का दौरा किया। कक्षाएं रिक्त हो गईं। ग्रामीणों ने शिकायत की कि शिक्षक स्कूलों में आने से इनकार करते हैं क्योंकि इन गांवों को मुख्य शहर को जोड़ने वाली कोई मोटर योग्य सड़क नहीं है। सोरिया पहाड़ी आदिवासी समुदाय का घर, राजमहल पहाड़ियों के गांव पत्थर खनन खदानों से घिरे हैं। एक तरफा यात्रा पैदल चलने में एक घंटे से अधिक लग सकती है। महज कागजी और अब इलेक्ट्रोनिक खेल के जरिये यहां बच्चों का जीवन दांव पर है।
हालांकि सरकार ने एसएमएस-आधारित निगरानी प्रणाली पिछले साल सरकार द्वारा कमियां चलाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगाई गई थी। जिसके तहत भोजन की खपत के आधार पर सूची बनाए रखने के लिए भोजन का प्रबंधन करना था, लेकिन इस सेवा को मेवा बना दिया गया है।
शिक्षक केवल राष्ट्रीय छुट्टियों के दौरान आते हैं स्कूल
रिपोर्टिंग टीम को पूर्व सूचना मिली कि शिक्षक केवल राष्ट्रीय छुट्टियों के दौरान स्कूल में आते हैं । शिक्षकों को बड़ा ही सरल काम मिला है, वे बच्चों को राष्ट्रीय गान गवाते हैं, मिठाई खिलाते हैं, साक्ष्य के रूप में तस्वीरें अपने मोबाईल में कैद कर ले जाते हैं। शिक्षक इन साक्ष्यों को शिक्षा विभाग में जमा कर देते हैं। इस मसले पर जब एक शिक्षक से संपर्क कर पूछा कि उनकी उपस्थिति स्कूलों में कम क्यों है, तो उन्होंने दूरी, उसका वेतन और आदिवासी भाषा को बोलने में असमर्थता के बारे में शिकायत , स्कूल में कार्यरत एक शिक्षक की मोहम्मद फासी-उद-जामा ने कहा, मैं हिंदी में बोलता हूं, और बच्चे पहाड़ी भाषा का प्रयोग करते हैं। वे जो कुछ पढ़ाते हैं, वे बहुत कम समझते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने इन चिंताओं को अधिकारियों से साझा किया है, तो उन्होंने जवाब में न कहा।
गांव के बच्चे तीव्र संक्रमण और कुपोषण से पीड़ित
टीम को यह भी पता चला कि भ्रष्टाचार, चोरी और गांव में निगरानी की कमी के कारण, पिंकी पहाड़न जैसे कई बच्चे भूखे हैं और उन्होंने अब तक परंपरागत विकल्प को ही आधार बना रखा है। गांव के बच्चे तीव्र संक्रमण और कुपोषण से पीड़ित है झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2015-16, हालांकि, इसके विपरीत बताता है। यह कहता है कि राष्ट्रीय स्तर की तुलना में राज्य के अधिक छात्रों को शिक्षा की प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तरों में नि:शुल्क शिक्षा और मिड-डे मील जैसी सुविधाओं तक पहुंच है। सरकार ने घोषणा की है कि वैध आधार कार्ड के साथ जुलाई, बच्चों और माता-पिता के शुरुआत के दिन में भोजन दिया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता उदय कहते हैं कि सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर प्रतिवर्ष 10,000 करोड़ रुपये की निगरानी क्यों नहीं करती है? और कौन पिंकी पहाड़न के लिए जवाबदेह है, जो उसके लिए पोषण का वादा नहीं करता?
महज सरकारी आंकड़ें भरते हैं भूखे बच्चों के पेट
मिड डे मिल 1995 में शुरू किया गया। योजना का लक्ष्य स्कूल की उपस्थिति को बढ़ावा देने और पोषण प्रदान करने के लिए था। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के लिए समर्पित पोषण लक्ष्यों (450-700 कैलोरी और 12 से 20 ग्राम प्रोटीन) के साथ, इस कार्यक्रम का पुराना कुपोषण और भुखमरी समाप्त होने की संभावना के लिए स्वागत किया गया। केंद्र और राज्यों के बीच 60-40 के अनुपात में वित्त पोषण साझा किया जाता है। 8 पूर्वोत्तर राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) और तीन हिमालयी राज्यों (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) को छोड़कर जहां यह  है।