राजस्थान उपचुनाव : जानिए कांग्रेस की रिकॉर्ड जीत की 3 अहम वजह….

नई दिल्ली। राजस्थान उपचुनाव में भाजपा को तीनों सीटों पर करारी हार मिली है। अजमेर, अलवर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की है। इस जीत से कांग्रेस का होशला और बढ़ गया। उधर, वसुंधरा के लिए ये हार वॉर्निंग की तरह रही। कहा जा रहा है कि इस बार कांग्रेस में नेताओं ने ये चुनाव एकजुटता और स्ट्रैटजी बनाकर लड़े है।

जानिए BJP हार-जीत की 3 बड़ी वजहें….

1. राजपूतों की नाराजगी:- आनंदपाल और पद्मावत फिल्म के मुद्दे पर राजपूतों की नाराजगी को सरकार नहीं भांप सकी। कांग्रेस ने इसे अपने वोट में कैश किया। सरकार के पास 24 राजपूत विधायक हैं।

2. अंदरूनी संघर्ष:- टिकटों को लेकर पार्टी में आखिर तक विवाद बना रहा। अलवर में कैबिनेट मंत्री जसवंत यादव को टिकट दिया। उनकी छवि अच्छी नहीं थी। पार्टी के विधायक नाराज थे।

3. एंटी-इनकमबेंसी: केन्द्र और राज्य की नीतियों के खिलाफ जनता नाराज है। इस वजह से शहरी वोटर भी बीजेपी से दूर हुए। जिन 17 विधानसभा सीटों पर पोलिंग हुई, वहां सभी जगह बीजेपी हारी।

  • संघ ने भी इन चुनावों में प्रचार से खुद को दूर रखा। कर्मचारियों और डॉक्टरों की हड़ताल से लोग परेशान हुए। सरकार इन मुद्दों को नहीं सुलझा सकी। इससे सरकार के खिलाफ माहौल बना।

राजस्थान -उपचुनाव दिग्गजों ने छोड़ा चुनाव क्षेत्र –

अजमेर। अजमेर संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव के प्रचार का शोर शनिवार शाम 6 बजे थम गया। अंतिम दिन भाजपा और कांग्रेस के रोड शो के बाद शाम 6 बजे से पहले शहर में आए बाहरी नेता भी यहां से रवाना हो गए। अब प्रत्याशी और कार्यकर्ता घर-घर जाकर पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील कर पाएंगे। प्रत्याशियों का जोर अब मतदाताओं की देहरी धोक कर वोट मांगने पर रह गया है।दोनों पार्टियों के प्रत्याशियों और नेताओं ने वार्ड स्तर पर मतदाताओं को निकाल कर पाेलिंग बूथ पर पहुंचाने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। अब तक चुनावी रैलियों व सभाओं के बाद अब जनसंपर्क के लिए कार्यकर्ता अब घर-घर पहुंचेंगे और इसके साथ ही मतदान केंद्रों पर उपस्थित रहने वाले कार्यकर्ता और बूथ पर बैठने वाले एजेंट को अंतिम रूप देने का भी काम शुरू कर दिया है।

 

अजमेर लोकसभा उप चुनाव का प्रचार समाप्त होने के साथ ही प्रचार के लिए आए भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने शहर छोड़ना शुरू कर दिया है, लेकिन दोनों ही पार्टियों के छोटे नेता अभी भी डेरा डाले हुए हैं। प्रशासन को अब इन नेताओं और कार्यकर्ताओं जिला बदर करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। पिछले दस दिनों से दोनों दलों ने प्रदेश स्तरीय नेता और कार्यकर्ताओं बड़ी फौज प्रचार के लिए संसदीय क्षेत्र में झोंक रखी थी। इनकी संख्या ढाई हजार से अधिक होगी। मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार 27 फरवरी को चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद जिले के बाहर से आए नेता और कार्यकर्ता जिले में प्रवास नहीं कर सकते हैं। इसके तहत शाम को प्रचार का समय समाप्त होने के बाद नेताओं ने स्थानीय कार्यकर्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर रवाना होना शुरु कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार दोनों ही पार्टियों के बड़े नेता देर सात तक शहर अथवा जिला छोड़ देंगे। शहर छोड़ने वाले बड़े कांग्रेसी नेताओं में सचिन पायलट, विवेक बंसल, प्रताप सिंह खाचरियावास, प्रमोद जैन भार्य सहित अन्य नेता शामिल हैं। यह लंबे समय स अजमेर में प्रवास कर पार्टी की रणनीति को अंजाम दे रहे थे। इसी प्रकार भाजपा में मंत्री यूनिस खान, अरुण चतुर्वेदी, केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी सहित अन्य विधायकों ने शहर छोड़ना प्रारंभ कर दिया। सूत्रों का कहना है कि बड़े नेताओं ने तो शहर छोड़ रहे हैं, लेकिन कई छोटे नेता और कार्यकर्ता अभी जिले में डटे हुए हैं। जिनको जिला बदर करने के लिए प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन दोनों ही पार्टियों के इन नेताओं को पहचानता नहीं है। इधर यह नेता स्थानीय कार्यकर्ताओं के घर में मेहमान बनकर रह रहे हैं। वहीं, से चुनाव का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में शिकायत होने पर प्रशासन को इन नेताओं की पहचान हो सकती है।

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