म्यांमार में तख्तापलट से चीन को लगा बड़ा झटका

चीन दुनिया का एक ऐसा देश है जो दुनिया से अलग रहकर अपना वजूद कायम करना चाहता है लेकिन इसके कारण उसको दुनियाभर के देशों से खरी खोटी सुननी पड़ती है। चीन अपने पड़ौसी देशों पर अपना अधिकार जमाने के लिए वहां जमकर पैसा कर्ज के रूप में लूटाता है और इसी कारण उसके पड़ौसी देशों के साथ रिश्ते बनते और बिगड़ते रहते है। हाल ही में म्‍यांमार में तख्‍तापलट की घटना के बाद चीन ने एक बार दुनिया के सामने अपला असली रंग दिखा दिया है कि उसकी लोकतंत्र या लोकतांत्रिक मूल्‍यों में कोई आस्था नहीं है। पूरी दुनिया जहां म्यांमार के साथ वहां पर लोकतंत्र की वापसी की बात कर रही है तो चीन इसके विपतिर अपने बयान दे रहा है। सभी देशों ने म्‍यांमार सेना की निंदा की तो दूसरी तरफ चीन ने म्‍यांमार के संविधान का हवाला देकर पूरे मामले से पल्‍ला झाड़ लिया है।

खबरों के अनुसार बताया जाता है कि म्‍यांमार की सेना के प्रमुख जनरल मिन का चीन के साथ करीबी संबंध है लेकिन वह पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख की तरह गुलामी नहीं करते है। लेकिन अब सेना के कमांडर इन चीफ मिन आंग लाइंग के हाथों में देश की बागडोर आ गई है और चीन इसी बात से डरा हुआ है कि उसने अपने फायदे के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया था लेकिन इसके बाद भी वह म्यांमार पर अपनी पकड़ नहीं बना सका।


म्यांमार के भारत के साथ अच् संबंध है और सेना प्रमुख को अब लोकतंत्र बहाली को लेकर जल्द ही बड़ा कदम उठाया होगा क्योंकि इस मामले में पूरी दुनिया म्यांमार की जनता के साथ खड़ी है। लेकिन म्‍यांमार में चीनी निवेश और चीनी आर्थिक क्रियाकलाप के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है क्योंकि अब चीन को दुनिया भर में जवाब देना पड़ेगा की वह लोकतंत्र के साथ है या फिर सेना के साथ। म्यांमार मामले पर संयुक्त राष्ट संघ की नजर बनी हुई है और इस मामले में जल्द ही अमेरिका का हस्तक्षेप देखने को मिल सकता है।

परेड खत्म होने के बाद राजपथ पर किसान निकाल सकेंगे ट्रैक्टर रैली

पिछले 2 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है और किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन किसान संगठन 3 नये कृषि कानूनों का खत्म करने की मांग को लेकर अड़े है और हर दिन नये नये तरीके से विरोध प्रदर्शन कर सरकार को अपनी मांगे पूरी करवाने के लिए मजबूर कर रहे है। हाल ही में किसानों को दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर शर्तों के साथ ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति प्रदान कर दी है। लेकिन किसान संगठन इस अनुमति को लेकर भी अपनी नाराजगी जता चुके है किसान संगठनों को कहना है कि ट्रैक्टर रैली की टाइमिंग और जो रूट दिया है वह सही नहीं है।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा को लेकर रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था लेकिन अब कुछ शर्तों के साथ मंजूरी प्रदान की है। ट्रैक्टर रैली निकालने का समय 12 बजे का दिया है जिसका कोई तुक नहीं है और इसके साथ ही किसान संगठनों ने रूट को लेकर भी सवाल उठाया है। किसानों ने बताया है कि रैली को जिन इलाकों से इजाजत दी गई है वह ज्यादातर हरियाणा का भाग है।किसानों की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी दी जाए और तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए और इसी बात को लेकर किसानों का प्रदर्शन 61 दिनों से जारी है।

गणतंत्र की परेड में हिंसा फैलाने की पाकिस्तान की साजिश का भी खुलासा हुआ है और बताया जा रहा है कि हिंसा फैलाने के लिए पड़ोसी देश इंटरनेट मीडिया का सहारा ले रहा है। इसके उन्होंने 300 से ज्यादा ट्विटर अकाउंट बनाए हैं, जिसकी जानकारी इंटेलिजेंस को मिल गई है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के बेहद कड़े बंदोबस्त किए जा गये हैं।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में जानकारी दी गयी कि  गाजीपुर बार्डर पर 46 किलोमीटर सिंघु बार्डर पर 62 किलोमीटर व टीकरी बार्डर पर 63 किलोमीटर के दायरे में परेड निकालने की अनुमति प्रदान की गयी है और इसके साथ तीनों बार्डरों से परेड का 100 किलोमीटर से ज्यादा का रूट दिल्ली में होगा।

कुर्सी संभालते ही एक्शन मोड़ में दिखे जो बाइडेन, बदल दिये ट्रंप के फैसले

अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में जो बाइडेन ने शपथ ली है तो भारतीय मूल की कमला हैरिस ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली है। शपथ लेने के बाद बाइडेन डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बड़े फैसले पलट दिये है और ऐसी बात उनके चुनाव जीतने से पहले की जा रही थी। जो बाइडेन को भारत के साथ दुनिया भर के सभी राष्ट्रध्याक्षों ने बधाई दी है। भारत को अब जो बाइडेन से उम्मीद है कि वह तेल खरीदने को लेकर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाएगे वह इसके कारण भारत को कम कीमत पर सउदी अरब से तेल मिल सकेंगा।

बाइडेन के महत्वपूर्ण फैसले

बाइडेन ने कोरोना को रोकने लिए मास्क को जरूरी कर दिया
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अमेरिका की वापसी
विश्व स्वास्थ्य संगठन से हटने के फैसले पर रोक
बॉर्डर पर दीवार बनाने पर रोक
मुस्लिम देशों से आने वाले लोगों पर रोक हटाई
आर्थिक मदद का ऐलान
स्टूडेंट लोन की किस्त को सितंबर तक टाल दी है

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शपथ के दौरान बाइडेन ने अपने भाषण में नस्लीय भेदभाव को खत्म करने और लोकतंत्र को मजबूत करते हुए अब एकता के साथ आगे बढ़ने की बात कहीं।

किसान आंदोलन को लेकर पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार

45 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है और किसान अपनी मांगों लेकर लगातार सरकार के साथ वार्ता कर रहे है लेकिन इसके बाद भी अभी तक कोई उचित समाधान नहीं निकल पाया है। इस आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार ने कई बार किसान संगठनों से आग्रह किया है वह सरकार पर विश्वास करें और आंदोलन खत्म करे लेकिन किसान संगठन ​कृषि बिलों को समाप्त करने की मांग को लेकर अड़े हुए है।

इस बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर आज सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से पूछा है कि क्या वह कानून को स्थगित करती है या फिर वह इस पर रोक लगा दे। भीषण ठंड को देखते हुए अदालत ने कहा कि किसानों की चिंता करनी चाहिए और उनकी समस्या का समाधान करने के लिए एक कमिटी बनानी चाहिए। इसके साथ कोर्ट ने किसान आंदोलन पर सरकार के विवाद निपटाने के लिए जो तरीका अपनाया उसे लेकर भी सख्त टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने किसान कानून समाप्त करवाना चाहते हैं जबकि सरकार मुद्दों पर बात करना चाहती है लेकिन हम एक विशेषज्ञ लोगों की एक कमिटी बनाकर कानूनों पर विचान करेंगे। किसान कमिटी के पास जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि हमने केंद्र सरकार को कहा था कि क्यों नहीं इस कानून को कुछ दिन के लिए स्थगित कर दें और उचित समाधान होने पर इस पर फैसला करें। कोर्ट किसान आंदोलन को हैंडल करने के तरीके से बहुत ज्यादा नाराज है।

मुख्य न्‍यायाधीश एसए बोबडे वाली बेंच किसाना आंदोलन से जुडी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। केंद्र और किसान संगठनों के बीच अगली बैठक 15 जनवरी को होनी है, ऐसे में SC की टिप्पणी बहुत अहम साबित हो सकती है। आज नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों का आंदोलन का 47वां दिन है केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत फेल होने के बाद, किसान संगठनों के नेता आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाने में लगे हैं। कोर्ट की इस बात पर विपक्ष पर केन्द्र सरकार पज जमकर हमला बोल दिया है।

 

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना है कि वह तब तक आंदोलन करेंगे जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाएंगी और सरकार जितनी देर करेगी आंदोलन उतना ही तेज होता जाएगा।

कांग्रेस सभी राज्यों में 15 जनवरी को ‘किसान अधिकार दिवस’ मनाएगी और राजभवनों का घेराव करेंगे। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि ‘अब देश के किसान काले कानून खत्म करवाने के लिए करो या मरो की राह पर चल पड़े हैं।’

 

किसानों आंदालोन को लेकर सर्वोच्च अदालत ने दिया यह सुझाव

किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि कोरोना महामारी के खतर को देखते हुए केंद्र से पूछा कि किसान आंदोलन में कोविड नियमों का ध्यान रखने की जरूरत है। मुख्य न्याया​धीश एस ए बोबडे ने कहा कि ‘हमें नहीं पता कि किसान कोरोना से सुरक्षित हैं या नहीं? अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो तबलीगी जमात की तरह कोरोना का बड़ा विस्फोट होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अगर समय रहते किसाना आंदोलन में कोविड—19 के नियमों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह देश के लिए नई मुशिबत खडी हो सकती है।

केंद्र की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वहां नियमों का पालन नहीं हो रहा है और कोरेाना का खतरा होने का डर बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी निजामुद्दीन मरकज में जमातियों के जुटने की CBI जांच की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही याचिकाकर्ता का कहना था कि मोहम्मद साद कोअभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

यह याचिका जम्मू की रहने वाली वकील सुप्रिया पंडिता ने दायर कहा कि कोरोना के समय बड़े पैमाने पर लोगों के एकत्र होने कि अनुमति कैसे दी गई, जबकि उस समय कोरोना महामारी का खतरा मंडरा रहा था।

किसानों का आंदोलन अभी खत्म होता हुआ नजर नहीं आ रहा है और आने वाले दिनों में अगर किसानों और सरकार के मध्य समझौता नहीं हुआ तो आंदोलन लंबा चल सकता है। कोरोना की खतरे को देखते हुए सरकार ने भी किसानों से अपील की वह अपने बच्चों को घर भेजे व ज्यादा उम्र के लोग बॉर्डर पर नहीं रहे। कल किसानों और सरकार के बीच वार्ता होगी अगर उसमें कोई नतीजा नहीं निकलता है तो किसान इस आंदोलन देशव्यापी करने का काम करेंगे।

कई राज्यों में बरपा बर्ड फ्लू का कहर: जानें राजस्थान का हाल

कोरोना वायरस के टीके की खबर से देश को थोड़ी राहत मिली ही थी कि अब कई राज्यों में बर्ड फ्लू ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक सप्ताल में कई राज्यों में भारी तादाता में पक्षियों की तेजी से मौत हो रही है। राजस्थान में कई जिलों में कौवों की बड़ी संख्या में मौते होने की खबर से सरकारी और प्रशासन की चिंता बढ़ गयी है। अगर बात करें हरियाणा के पंचकुला की तो यहां 1 लाख से अधिक पोल्ट्री पक्षियों की मौत की खबरें सामने आ रही है। इस खबर के बाद प्रशासन ने व्यापक फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

राजस्थान में 100 से ज्यादा पक्षियों की मौत
राजस्थान में भी कई जिलों में पक्षियों की मौत की खबरे आना शुरू हो गया है राज्य के विभिन्न जिलों में 150 से ज्यादा पक्षियों की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 425 से अधिक कौवों, बगुलों और अन्य पक्षियों की मौत हुई है इसके बाद पक्षियों के नमूनों को जांच के लिये भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भेजा गया है।

केरल में 40,000 पक्षियों को मारना पड़ा है।
केरल के कुछ जिलों में बर्ड फ्लू फैलने की जानकारी सामने आई है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के एक किलोमीटर के दायरे में बत्तख, मुर्गियों और अन्य घरेलू पक्षियों को मारने का आदेश जारी किया है। अधिकारियों ने कहा कि वायरस को रोकने के लिए करीब 40,000 पक्षियों को मारना पड़ेगा।

हिमाचल में 1500 से ज्यादा प्रवासी पक्षियों की मौत
हिमाचल प्रदेश में पोंग बांध झील अभयारण्य में अब तक 1500 से ज्यादा प्रवासी पक्षी मृत मिले हैं । अभी तक यहां बर्ड फ्लू की पुष्टि की बात नहीं कही जा रही है।


अगर बर्ड फ्लू के कारण इन पक्षियों की मौत हो रही है तो यह बहुत ज्यादा चिंता का विषय है जो कोरोना काल में प्रशासन के लिए नई परेशानी खड़ी कर सकता है। राजस्थान में पहले भी सांभर जिले में प्रवासी पक्षियों की बड़ी तादाद में मौत हुई थी और इसको लेकर काफी राजनीति भी देखने को मिली थी। लोगों को इस समय ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत है और अब कोरोना के साथ बर्ड फ्लू से भी अपना बचाव करना होगा।

आज नहीं बनी बात तो 6 जनवरी को निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च, जानें आगे का प्लान

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 40वां दिन है और अब किसानों ने देश भर में आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी भी कर रखी है। 40 दिन के आंदोलन के दौरान सरकार और किसानों के बीच कई बार वार्ता हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है आज किसानों की सरकार के साथ 8वें राउंड की बातचीत होने जा रही है जिसमें दोनों के मध्य समझौता होने के कुछ आसार नजर आ रहे है। अगर किसी कारण के चलते वार्ता सफल नहीं होती है तो सरकार के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है लेकिन सरकार को उम्मीद है कि आज आंदोलन खत्म हो सकता है।

 

 

 

हालाकि इसके पहले यानी 30 दिसंबर की वार्ता दोनों पक्षों के मध्य 2 मुद्दों पर सहमति बनी थी

1. पराली जलाने पर केस दर्ज नहीं होंगे और 1 करोड़ रुपए जुर्माना और 5 साल की कैद की सजा नहीं होगी।
2. किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी बंद नहीं होगी।

किसान संगठनों ने इस वार्ता से पहले अपनी राय साफ कर दी है कि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो प्रदर्शन और तेज किया जाएगा। इसके बाद हर दिन अलग—अलग प्रकार से आंदोलन को तेज करने का प्रयास किया जाएगा जिसको लेकर रणनीति बन चुकी है।

इन मुद्दों पर नहीं बनी सहमति

1. तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग पर नहीं मिला आश्वासन।

2. MSP पर अलग कानून बने, ताकि किसानों सही और उचित दाम मिलता रहें।

 

अब तक मिली जानकारी के अनुसार आज की बैठक में किसानों के बड़े मुद्दों का हल भी निकल सकता है और इसके चलते आंदोलन खत्म हो सकता है। किसानों के तेज होते आंदोलन को देखते हुए सरकार समर्थन मूल्य और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी के मुद्दों पर लिखित में आश्वासन देगी। इसके लिए सभी प्रकार की तैयारियां कर ली गयी है। ​अगर सहमति नहीं बनती है तो किसान 6 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च करेंगे और 13 जनवरी को कृषि कानूनों की कॉपी जलाकर लोहड़ी मनाने का ऐलान किया है।

 

 

केन्द्र सरकार के तेवर नहीं पड़े नरम, किसान भी अपनी मांग पर अड़े

30 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन केन्द्र सरकार और किसान दोनों के तेवर अभी नरम नहीं पड़े है और दोनों किसी भी कीमत पर झुकने के लिए तैयार नहीं है। 30 दिन में लगभग केन्द्र और आंदोलनकारी किसान संगठन के बीच 5 बार वार्ता हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। दोनों ही एक दूसरे से वार्ता करने के लिए तैयार लेकिन इसके बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हो रहा है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है 29 दिसंबर यानि कल 7वें दौर की बातचीत होगी जिसमें अगर दोनों के बीच सहमति बनती है तो कुछ हल जरूर निकल सकता है। हालांकि दोनों पक्ष अभी भी अपने पुराने रुख पर अड़े हुए हैं और ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार और किसानों के बीच बात कैसे होगी।

किसान संगठन लगातार केन्द्र सरकार से तीनों कृषि कानून रद्द करने की प्रक्रिया पर सबसे पहले चर्चा हो, MSP की कानूनी गारंटी की प्रक्रिया और प्रावधान पर बात हो, पराली जलाने पर दंड के प्रावधानों पर उनकी मांगे मानने पर ही आंदोलन खत्म करने की बात पर अड़े है अगर ऐसा नहीं होता है यह आंदोलन जारी रहेगा।

 

29 दिसंबर को बातचीत करने से पहले आज किसानों की चिट्ठी पर जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्रियों की बैठक हो सकती है लेकिन सरकार के रूख को देखकर लग रहा है कि वह किसानों के आगे झुकेगी नहीं। पिछले कई दिनों से देश के कई राज्यों से किसान संगठन दिल्ली जा रहे है और सिंधु बॉर्डर पर किसानों का साथ देने की बात कह रहे है।

इस आंदोलन के कारण कई किसानों की सर्दी के कारण जान चली गयी है तो कई किसानों पर कोरोना का भी खतरा मंडराने लगा है। किसान जिस तहर से अपनी मांगो को लेकर आर—पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है क्योंकि आजादी के बाद से अब तक किसानों का भला किसी भी पार्टी ने नहीं किया जबकि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड़ी खेती को माना जाता है फिर भी किसानों को आज सड़कों पर उतरकर अपने हक की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

 

जयपुर में पहले चरण में 3 लाख 50 हजार लोगों को लगेगा कोरोना का टीका, जानें अपना नाम

जयपुर: प्रदेशवासियों को नये साल की शुरूआत में ही कोरोना का टीका लगना शुरू हो जाएगा और इसके लिए राज्य सरकार ने लगभग 3 लाख 50 हजार लोगोंं की लिस्ट भी तैयार कर ली है। इस टीके को लेकर केन्द्रीय स्थावस्थ्य मंत्री ने भी बता दिया था कि आने वाले नये साल में भारत में कोरोना का टीका लगने की पूरी पूरी उम्मीद है और यह बात अब सही साबित होती नजर आ रही है।

कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर प्रदेश के चिकित्सा विभाग सभी तैयारियां लगभग पूरी करने में जुटा है और इसके लिए प्रदेश के राजकीय, निजी चिकित्सा और महिला-बाल विकास के विभाग के कार्मिकों को कोविड-19 वैक्सीन लगाकर सुरक्षित किया जायेगा। राज्य सरकार इस वैक्सीन को बड़ी आसानी से और तेजी से लोगों तक पहुंचाने के लिए एक योजना भी तैयार कर ली है जिसके माध्यम से यह टीकाकरण किया जाएगा।

 

 

इस वैक्सीन को सुरक्षित रखने के​ लिए 2 हजार 444 कोल्ड चैन वैक्सीनेशन पाॅइन्ट्स चयनित जिला अस्पतालों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तैयार किये गये है। कोल्ड चैन तक वैक्सीन पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग परिवहन विभाग की सहायता भी ले रहा है अगर आने वाले दिनों इस दवा को रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की जरूरत पड़ती है तो उसकी भी तैयारी की जा रही है।

प्रदेश के लोगों के लिए बहुत राहत भरी खबर है जिसके कारण अब लोगों को कोरोना के कारण अपनी जान नहीं गवानी पड़ेगी और समय पर उनका सही इलाज हो सकेगा। अगर बात करें कोरोना काल की तो कोरोना की रोकथाम और अन्य फैसने करने राजस्थान सरकार पूरे देश में पहले स्थान पर रहीं है जिसके चलते पीएम मोदी ने भी कई बार राज्य सरकार की प्रशंसा की है

 

किसान दिवसः 28 दिन से सड़कों पर रात गुजार रहा है किसान

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर भारत में हर साल 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह को अगर किसानों का महिसा कहा जाये तो इसमें कोई शंका नहीं होगी क्योंकि उन्होंने बहुत कम समय तक पीएम का पद संभाला लेकिन इस छोटे से कार्यकाल में ही उन्होंने किसानों के लिए इतने अच्छे काम करने के साथ कई योजनाएं भी शुरू की जो आज तक कोई दूसरा प्रधानंमत्री नहीं कर सका है। इसी वजह से 23 दिसंबर 2001 से चरण सिंह के जन्मदिन को किसान दिवस के रूप में मनाना शुरू किया गया।

भारत हमेशा से कृषि प्रधान देश रहा है लेकिन इसके बाद भी यहां के किसानों की हालात इतनी खराब है कि हर दिन एक किसान अपने कर्ज या फसल खराब होने के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहा है। सभी राजनीतिक पार्टिया किसान दिवस के दिन अपने आपको किसानों की सबसे बड़ी हितेषी बताने का प्रयास करती है लेकिन जब किसान अपना हक मांगते है तो वह उन पर ध्यान नहीं देती है। इन दिनों भी देश में किसानों के साथ ऐसा ही देखने को मिल रहा है

केन्द्र सरकार ने किसानों के अच्छे भविष्य के लिए 3 नये कृषि कानुन बना दिये लेकिन इसको लेकर देशभर के किसानों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। किसानों ने इस तीनों को बीलों किसान के लिए एक शोषण का नया रास्ता बताया है और इन बिलों को खत्म करने के लिए कई राज्यों के किसान लगभग 28 दिनों से दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे है।

किसानों के आंदोलन को खत्म करने के लिए केन्द्र सरकार ने उनसे कई बार बातचीत की लेकिन अभी तक कोई उचित समाधान नहीं निकल पाया है। अगर देश का किसान इस तहर सड़कों पर आकर अपना हक मांगने लगेगा तो यह भारत के लिए अच्छा नहीं होगा क्योंकि भारत के सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था खेती के कारण जानी जाती है और अगर यह कड़ी कमजोर होती है देश को बहुत ज्यादा नुकसान उठाया पड़ सकता है।