Chief Minister Virtually Dedicates First Underground Metro Train to Public – chandpol to badi choupad

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया पहली भूमिगत मेट्रो ट्रेन का ई-लोकार्पण फेज वन-बी में चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक
 चलेगी मेट्रो – 
जयपुर, 23 सितम्बर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की पहली भूमिगत मेट्रो ट्रेन का बुधवार को वीसी के माध्यम से ई-लोकार्पण किया और वर्चुअल हरी झंडी दिखाकर मेट्रो रवाना की। जयपुर शहर के परकोटे में मेट्रो फेज वन-बी के तहत चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक 2.12किलोमीटर तक यह मेट्रो ट्रेन चलेगी।
लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक मेट्रो चलने से जयपुर आने वाले पर्यटकों को परकोटे के अन्दर आवागमन में आसानी होगी और यातायात पर दबाव भी कम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 21 सितंबर 2013 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मेट्रो फेज वन-बी शिलान्यास किया था तब यह इस फेज के ढाई साल में पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद काम की गति धीमी हो गई और मार्च 2020 में यह पूरा हुआ।
मेट्रो चलाने में हमने घाटा या मुनाफा नहीं देखा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपुर में 2010 में मेट्रो का काम शुरू हो गया था। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार मेट्रो ट्रेन चलाने में घाटा या मुनाफा नहीं देख रही है क्योंकि लोगों को सस्ती और सुलभ परिवहन सेवा उपलब्ध कराना सरकारों की सामाजिक जिम्मेदारी है।
मेट्रो लाइट प्रोजेक्ट की संभावनाएं तलाशी जाएं
मुख्यमंत्री ने मेट्रो फेज-वन बी को पूरा करने में दिए गए सहयोग के लिए केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय को धन्यवाद दिया। उन्होंने कम लागत वाले मेट्रो लाइट प्रोजेक्ट को प्रदेश में शुरू किए जाने की संभावनाएं देखने का भी आग्रह किया। साथ ही स्मार्ट सिटी परियोजना में जोधपुर एवं बीकानेर जैसे शहरों को जोड़ने की भी मांग की ताकि वहां भी शहरी विकास के काम हो सकें।
ट्रेन ऑपरेटर शैफाली की हौसला अफजाई की
मुख्यमंत्री गहलोत ने जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन एवं डीएमआरसी को जयपुर शहर के परकोटे का हैरिटेज लुक बनाए रखते इस भूमिगत रेल लाइन का काम पूरा करने के लिए बधाई दी। परियोजना में योगदान देने वाले अधिकारियों, इंजीनियरों को भी बधाई दी। उन्होंने प्रदेश की पहली भूमिगत मेट्रो ट्रेन की ऑपरेटर सुश्री शैफाली से बात कर उनकी हौसला अफजाई की।
सस्ती एवं आरामदायक यात्रा सुलभ होगी
नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि जयपुर में जब मेट्रो की शुरूआत हुई तब किसी भी टू-टियर शहर में मेट्रो ट्रेन नहीं थी। पिछली सरकार के समय मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की इच्छा शक्ति से ही यह संभव हो पाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भूमिगत मेट्रो शुरू होने से जयपुर के लोगों के साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों को सुरक्षित, प्रदूषण रहित, सस्ती एवं आरामदायक यात्रा सुलभ होगी। इससे परकोटे में ट्रैफिक जाम से भी काफी हद तक निजात मिलेगी।
हैरिटेज को संरक्षित रखते हुए किया भूमिगत लाइन का काम
जयपुर मेट्रो के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भास्कर सावंत ने बताया कि हैरिटेज में किसी तरह का बदलाव नहीं करते हुए यह विश्व स्तरीय परियोजना पूरी की गई है। उन्होंने बताया कि मानसरोवर से बड़ी चौपड़ तक 12 किमी की यात्रा अब 26 मिनट में पूरी हो जाएगी। महत्वपूर्ण कलाकृतियों को संरक्षित करने के लिए छोटी चौपड़ मेट्रो स्टेशन पर आर्ट गैलेरी भी बनाई गई है। भूमिगत लाइन में अत्याधुनिक टनल वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है। बड़ी चौपड़ एवं छोटी चौपड़ स्टेशनों पर सभी खंदों से स्टेशन में प्रवेश के लिए द्वारा बनाए गए हैं। दोनों स्टेशनों को राजस्थान की वास्तुकला के अनुरूप भव्य एवं आकर्षक रूप दिया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए दोनों स्टेशनों पर कुल 18 एस्केलेटर एवं 6 लिफ्ट लगाई गई हैं। परियोजना की कुल लागत 1126 करोड़ रही।
वीसी के माध्यम से लोकार्पण कार्यक्रम से जुड़े केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने कहा कि केन्द्र सरकार शहरी यातायात के विकास के साथ ही अफोर्डेबल एवं लो-कोस्ट मेट्रो परियोजनाओं पर फोकस कर रही है। इसका लाभ टू-टियर शहरों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि देशभर में 910 किलोमीटर से अधिक मेट्रो लाइन का काम चल रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी डॉ. मांगू सिंह ने उम्मीद जताई कि मेट्रो फेज वन-बी शुरू होने से जयपुर शहर का परिदृश्य बदलेगा और यहां आने वाले पर्यटकों को अच्छी यातायात सुविधा मिलेगी। जयपुर मेट्रो के निदेशक (ऑपरेशन) मुकेश कुमार ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ यात्रा के लिए समस्त इंतजाम किए गए हैं। 
 कार्यक्रम में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, जयपुर मेट्रो के निदेशक (वित्त) श्री हरीश लड्ढा तथा बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन एवं मानसरोवर मेट्रो डिपो पर जेएमआरसी के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे।

 हेरिटेज कन्जर्वेशन एंड प्रोटेक्शन बॉयलॉज-2020 लागू – अब अनुमति के बाद ही होगा निर्माण

जयपुर चारदीवारी क्षेत्र के लिए नए बिल्डिंग बायलॉज लागु
परकोटे में अनुमति के बाद हो सकेगा कार्य
हेरिटेज कन्जर्वेशन एंड प्रोटेक्शन बॉयलॉज-2020 का बजट में नोटिफिकेशन जारी 
 जयपुर। वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के चारदीवारी क्षेत्र की हेरिटेज इमारतों व हवेलियों को बचाने के लिए नए बिल्डिंग बायलॉज लागू  कर दिए है। सरकार ने नगर निगम जयपुर हैरिटेज (वॉल्ड सिटी) हैरिटेज कन्जर्वेशन एंड प्रोटेक्शन बॉयलॉज-2020 का बजट नोटिफिकेशन कर दिया है। परकोटे में अब नए निर्माण की अनुमति मिल सकेगी।
नए निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति तकनीकी कमेटी दे सकेगी। हालांकि फसाड पर अस्थाई होर्डिंग, साइन बोर्ड नहीं लगाया जा सकेगा। हवेलियों के चौक में कोई निर्माण नहीं हो सकेगा। पेटिंग, पारम्परिक कला, नक्काशी आदि को नहीं बदला जा सकेगा। नए बिल्डिंग बायलाज  के अनुसार परकोटे में नॉन कमर्शियल जोन से बनी निजी हवेलियों में कर्म सीरियल गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है हालांकि यह अनुमति भुतल और प्रथल तल पर भी दी जा सकेगी इसके लिए हेरिटेज स्वरूप को बरकरार रखना पडेगा। नए बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार हवेलियों व इमारतों को इन श्रेणियों में बांटा गया है।
पहली श्रेणी में नेशनल  लेवल और स्टेट लेवल की हेरिटेज इमारते शामिल की गई है। इनमें किसी तरह के बदलाव पर पूर्ण पाबंदी रहेगी इन्हें सिर्फ संरक्षित रखा जाएगा दूसरी श्रेणी में चारदीवारी क्षेत्र की कलात्मक हवेलियां शामिल है। इनमें तकनीकी कमेटी की अनुमति के बाद छोटे-मोटे निर्माण की अनुमति मिलेगी, हालांकि यह अनुमति इमारत के अंदर की ही मिलेगी।
इमारत के बाहर कोई बदलाव नहीं किया जाएगा इनमें पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां (गेस्ट हाउस, होटल, क्राफ्ट सेंटर आदि) संचालित हो सकेगी अभी तक इन हवेलियों का केवल आवासीय उपयोग ही किया जा सकता था वहीं तीसरी श्रेणी में पुरानी हवेलियां आदि को शामिल किया गया है इसके बाहर प्रसाड वर्क गाइड लाइन के अनुसार ही होगा अंदर बदलाव की अनुमति दी जा सकेगी
मुख्य बाजार में ये होगा
मुख्य बाजार व मुख्य सड़क में 15 मीटर जी प्लस 3 गलियों में 12 मीटर जी प्लस 2 तक ही निर्माण रहेगा बेसमेंट की अनुमति नहीं होगी हालांकि सार्वजनिक पार्किंग में बेसमेंट में छूट रहेगी
यूडी टैक्स में भी मिलेगी छूट
हैरिटेज हवेलियों का संरक्षण करने वाले मालिकों को यूडी टैक्स आदि में भी छूट दी जाएगी। इन हवेलियों को पर्यटन संबंधी इन्फास्ट्रक्चर भी उपलब्ध करवाया जाएगा। अगर हवेली को संरक्षित रखते है और संरक्षित रखने के लिए शपथ पत्र देते है तो उन्हें छूट लाभ मिलेगा।
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