राजाराम मील बनें – भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष . 26 मार्च 21 को भारत बंद 

राजाराम मील बनें – भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष , के सी घुमरिया बने महासचिव राजस्थान में किसान 

आंदोलन तेज –

 

 

जयपुर | जयपुर में आयोजित किसान महापंचायत में  “ भारतीय किसान यूनियन ”  के महासचिव युद्धवीर सिंह एवं किसान आंदोलन के राष्टीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने राजाराम मील को राजस्थान का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया हैं | चौधरी राकेश टिकैत ने कहा की राजाराम मील जी लम्बे समय से किसान के हक्क व् अधिकारों के लियें संघर्ष कर रहें हैं किसान आंदोलन में मील साहब की सक्रिय भूमिका रही हैं केंद्र सरकार के तीनों क्रषि काले कानून को वापस लेने के लियें मजबूती काम कर रहें हैं हमें आशा और पूर्ण विशवास हैं की राजस्थान के किसान संगठनो को साथ लेकर किसान आंदोलन को मजबूत करेंगें इसके साथ ही के सी घुमरिया को राजस्थान का महासचिव नियुक्त किया गया हैं |

 

 

 

के सी घुमरिया ने कहा 26 मार्च को 21 – को भारत बंद 

 

राजस्थान में भारतीय  किसान यूनियन के महासचिव के सी घुमरिया ने सभी व्यापारियों से निवेदन किया हैं की किसानों के सम्मान में और केंद्र सरकार की गलत नीतियों के विरोध में अपनी दूकान प्रतिष्टान बंद कर केंद सरकार की गलत नीतियों को विरोध करें |

 

युवा नेता धर्मेन्द्र आँचरा  –  किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहें युवा नेता धर्मेन्द्र आँचरा ने कहा की राजस्थान में शाहजापुर में चल रहें किसान आंदोलन में हम युवा किसान सक्रिय भूमिका  निभा रहें हैं अब किसान आंदोलन को आगें ले जाने का समय हैं 26 मार्च 2021 भारत बंद को सफल बनानें के लियें हमे युवा शक्ति , किसान व् सभी संगठनो को एक साथ आकर केंद सरकार की नीतियों का विरोध करना हैं |

 

2 अक्टूबर से शुरू होगा प्रशासन शहरों के संग अभियान, कच्ची बस्ती के पट्टों पर भी मिल सकेगा ऋण

नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित
जयपुर का जेएलएन मार्ग बनेगा रेड लाइट फ्री, पशुपालकों के लिए देवनारायण योजना,  शहरों में ग्रीन स्पेस डवलपमेंट के होंगे कार्य
– नगरीय विकास मंत्री
जयपुर, 13  मार्च। नगरीय विकास मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के नगरीय विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने न केवल बॉयलॉज में संशोधन किया है, बल्कि नई नीतियां बनाकर आमजन को राहत देने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले प्रशासन शहरों के संग अभियान में प्रदेश की जनता को बड़ी राहत दी जायेगी। जयपुर में जेएलएन मार्ग को रेड लाइट फ्री बनाया जायेगा, वहीं चारदीवारी में पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए रामनिवास बाग में अंडर ग्राउंड पार्किंग बनायी जायेगी।
 शांति कुमार धारीवाल शुक्रवार को विधानसभा में मांग संख्या 29 (नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास) की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास की 73 अरब 58 करोड़ 25 लाख 19 हजार रूपये की अनुदान मांगों को ध्वनिमत से पारित कर दी।
नगरीय विकास मंत्री ने बताया कि आगामी 2 अक्टूबर, 2021 से प्रशासन शहरों के संग अभियान आरंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2012 में चला ये अभियान काफी सफल रहा था। इस बार तब की दी गई छूटों के अतिरिक्त अब नगरीय निकायों के पट्टे सशर्त नहीं होंगे। इससे आम जन को बैंक ऋण लेने में आसानी होगी। कच्ची बस्ती और अन्य सभी पट्टों पर भी ऋण मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि भूखंडों के उपविभाजन पश्चात पट्टे मिल सकेंगे और स्टेट क्राउन एक्ट के अलावा पुरानी आबादी में आवासीय व दुकान होने पर भी पट्टे मिल सकेंगे।
 धारीवाल ने बताया कि मास्टर प्लान की क्रियान्वति के संबंध में गुलाब कोठारी केस में उच्च न्यायालय के आदेश की पालना में जोनल प्लान तैयार करने के आदेश पारित किए जा चुके हैं। हाल ही में जारी की गई लैंड पूलिंग नीति और टाउनशिप नीति से विकास कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि 193 नगरीय निकायों में से 184 के मास्टर प्लान को राज्य सरकार अनुमोदित कर चुकी है।
उन्होंने बताया कि टाउनशिप पॉलिसी 2010, स्लम विकास नीति 2010, अफॉर्डेबल हाउसिंग नीति 2009 जैसी नीतियों में बदलाव कर इन्हें समयानुकूल और उपयोगी बनाया गया है। भवन विनियम, 2020 में हरित क्षेत्र के मानदंड को दुगुना कर दिया गया है। अब 1 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के स्थान पर 750 वर्ग मीटर पर 10 प्रतिशत हरित क्षेत्र कर दिया गया है।
इंदिरा रसोई में अब सीसीटीवी –
नगरीय विकास मंत्री ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार की अन्नपूर्णा रसोई योजना में नाश्ते के लिए 18.95 रुपये प्रति प्लेट और खाने के लिए 19.95 रुपये प्रति थाली का अनुदान देय था। वर्तमान में इंदिरा रसोई योजना में सिर्फ 12 रुपये प्रति थाली का अनुदान ही दिया जा रहा है। इससे आमजन को लाभ हो रहा है। इंदिरा रसोई में निगरानी रखने के लिए सीसीटीवी लगाये जायेंगे। लाभार्थियों से ऑनलाइन फीडबैक के लिए रिस्पांस सिस्टम लगवाये जा रहे है।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए भौतिक सत्यापन बंद –
उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए नाम हस्तांतरण, विक्रय स्वीकृति और ऋण स्वीकृति के लिए भौतिक सत्यापन बंद कर दिया गया है। अब स्थानीय निकायों को केवल दस्तावेजों के आधार पर 10 दिन के अंदर मंजूरी के प्रावधान बनाए गए हैं।
जल्द पूरा होगा झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड कार्य – 
 धारीवाल ने बताया कि जयपुर में स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत लगभग 750 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। रामनिवास बाग में भूमिगत पार्किंग की निविदा जारी की जा चुकी है। झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड को शीघ्र पूरा किया जाएगा। इससे प्रभावित होने वाली 600 दुकानों और मकानों को निवारू रोड पर विस्थापित करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जयपुर मेट्रो के बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर और सीतापुरा से अंबाबाड़ी रूट पर केंद्र सरकार से सहयोग और वित्तीय अनुकूलता को देखते हुए काम किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आवासन मंडल को मरणासन्न अवस्था से उभारकर पुनः ऊर्जा दी है। ई-ऑक्शन और बुधवार नीलामी के जरिये 1100 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया गया है। वहीं, मंडल की ओर से विकास को गति देने के लिए कोचिंग हब, चौपाटी योजना जैसे कार्य किये जा रहे है। वहीं, कर्ज में डूबे जयपुर विकास प्राधिकरण को गति देकर कोरोना काल में भी 1000 करोड़ का राजस्व प्राप्त कराया।
जयपुर स्मार्ट सिटी के तहत स्कूल विकास –
नगरीय विकास मंत्री ने बताया कि जयपुर स्मार्ट सिटी के तहत 16.50 करोड़ रूपये की लागत से कंवर नगर स्कूल परिसर का विस्तार, नये स्नातक महाविद्यालय का निर्माण और  खेलकूद की सुविधायें मिलेगी। उन्होंने बताया कि जेडीए की ओर से चंदलाई बांध को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित भी किया जायेगा।
जेएलएन मार्ग बनेगा रेड लाइट फ्री –
उन्होंने बताया कि जयपुर के जवाहर लाल नेहरू मार्ग को रेड लाइट फ्री बनायेंगे। इसके लिए डीपीआर बन चुकी है। इसमें 700 करोड़ रूपये लागत आयेगी। मई-जून 2021 में कार्य शुरू होकर 2 वर्ष में पूरा हो जायेगा।
कोटा में पशुपालकों को घर और ऑक्सीजन पार्क –
उन्होंने बताया कि देवनारायण योजना के तहत पशुपालकों के लिए कोटा में 1250 मकान बनाये जायेंगे। इनमें 900 डेयरी संचालकों को शिफ्ट करेंगे। पशुपालकों के लिए अस्पताल, स्कूल, पशु चिकित्सालय और पशुओं के लिए तालाब और बायोगैस प्लांट भी बनेगा। उन्होंने बताया कि कोटा में ही 100 करोड़ रूपये लागत से ऑक्सीजन पार्क बनाया जायेगा। चंबल रिवर फ्रंट विकास कार्य पर भी 800 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे। 
लेगेसी वेस्ट का होगा निस्तारण –
अजमेर स्मार्ट सिटी में 8.75 करोड़ और कोटा स्मार्ट सिटी के अंतर्गत 20 करोड़ रूपये की लागत से लेगेसी वेस्ट का निस्तारण किया जायेगा। जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय अजमेर में 6.78 करोड़ रूपये व्यय कर 100 शैय्याओं का आइसोलेशन विंग का निर्माण होगा। सात करोड़ से 128 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन लगेगी। साथ ही 300 टन प्रतिदिन क्षमता का सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया जा रहा है।
उदयपुर स्मार्ट सिटी के तहत ब्रह्मपोल से चांदपोल झील के ऊपर सड़क का निर्माण कार्य 11.78 करोड़ की लागत से होगा। आईटी समाधान एवं निगरानी नेटवर्क कार्य 15 करोड़ की लागत से होगा। वहीं, 1.43 करोड़ से आयुर्वेद विभाग और राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के लिये उपकरणों की खरीद की जायेगी।
शहरों में ग्रीन स्पेस डवलपमेंट के होंगे कार्य –
स्वच्छ भारत मिशन शहरी में एक लाख से अधिक आबादी वाले नगरीय निकायों में एसटीपी और सीवरेज ट्रीटमेंट के कार्य होंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में जयपुर, जोधपुर, एवं कोटा को एयर क्वालिटी इम्प्रूवमेंट के लिए प्रथम किस्त के अनुदान की 140 करोड़ 50 लाख की स्वीकृति जारी की गयी है। इससे शहरों में ग्रीन स्पेस डवलपमेंट, आधुनिक मशीनों द्वारा रोड़ की सफाई, सड़कों की मरम्मत कार्य, एंटी स्मोग गन से वायु प्रदूषण को रोकने के उपाय किये जायेंगे। साथ ही अलवर, भिवाड़ी नगर परिषद को एक-एक एंटी स्मोक गन उपलब्ध करायी जायेगी।
निजी कॉलोनाइजर्स को रोकने के लिए एटीपी की नियुक्ति –
उन्होंने बताया कि निजी कॉलोनाइजर्स को रोकने के लिए अब 150 असिस्टेंट टाउन प्लानर्स की नियुक्ति की जायेगी। उनकी ड्यूटी उन्हें रोकने की होगी। उन्होंने बताया कि नगरपालिकाओं को सीमा बढ़ाने के लिए सिवायचक जमीन लेने की प्राथमिकता मिलेगी।
रियायती दरों पर जमीन पर निर्माण नहीं तो कार्यवाही –
नगरीय विकास मंत्री ने बताया कि रियायती दरों पर आवंटित भूमि को संस्थाओं द्वारा 4 वर्ष में निर्माण करना आवश्यक होगा। नहीं करने पर राशि जब्त की जाकर भूमि आवंटन निरस्त किया जायेगा। वहीं, सरकार की ओर से 1426 संस्थाओं की जांच की गई। इनमें से 150 को नोटिस जारी किया गया है।
भवन निर्माण के लिए वास्तुविदों से अनुमोदन ही काफी – 
उन्होंने बताया कि भवन निर्माण उद्योग को प्रोत्साहन व आमजन को राहत देने के लिए नये भवन विनियम-2020 जारी किये गये है। अब 250 वर्गमीटर की जगह 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल तक के भूखंड पर विस्तृत भवन मानचित्र प्रस्तुत करने की अनिवार्यता को समाप्त की गयी है। वहीं, 500 वर्गमीटर से अधिक 2500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर 18 मीटर की उंचाई के भवनों को पंजीकृत वास्तुविदों से अनुमोदन कराकर निर्माण शुरू किया जा सकता है। अब 15 मीटर के स्थान पर 18 मीटर के भवनों को बहुमंजिला भवन माना गया है।

हैरिटेज नगर – निगम 1449 कर्मचारियों को स्थायीकरण , क्या सच में सुधरेगी सफाई व्यवस्था

 हैरिटेज निगम की शहरवासियों के लिए सफाई व्यवस्था के लिए 56 हूपर और 13 आरसी की मिलें –
1449 कर्मचारियों को स्थायीकरण का लाभ दिया  , 150 वायरलैस सैट से मजबूत होगी समस्या समाधान व्यवस्था
जयपुर 11, मार्च ।  नगर निगम जयपुर हैरिटेज में गुरूवार को आयोजित कार्यक्रम में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास मुख्य सचेतक महेश जोशी, महापौर मुनेश गुर्जर, विधायक आदर्श नगर रफीक खान, उपमहापौर मोहम्मद असलम फारूकी, आयुक्त नगर निगम लोकबंधु ने 1449 सफाई कर्मचारियों को स्थायीकरण की सौगात देते हुए स्थायीकरण आदेश प्रदान किये। इसके साथ ही शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए 56 नये हूपरों तथा 13 रिफ्यूज्ड कॉम्पेक्टरों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।
 परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि नये हूपर और आरसी निगम के बेडे में शामिल होने से कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अब हर वार्ड में निगम का एक हूपर अलग से होगा। आरसी की मदद से कचरे को हूपर से सीधे एकत्रित करके डम्पयार्ड तक पंहुचाना आसान होगा। इससे सडक पर कचरा नही फैलेगा और शहर की सफाई व्यवस्था मजबूत होगी। सफाई कर्मचारियों के स्थायीकरण से उनका मनोबल मजबूत होगा। उन्हाेंने सफाई कर्मचारियों से अपील की कि पूर्ण मनोयोग से शहर  की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ कर जयपुर शहर को स्वच्छता में नम्बर-1 बनाये।
सभी समस्याओं का निराकरण किया- जोशी
मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि सरकार सफाई कर्मचारियों की सभी समस्याओं का निराकरण किया है। यदि कोई समस्या शेष है तो उसका शीघ्र निराकरण किया जायेगा। उन्होने कहा कि सरकार सफाई कर्मचारियों के प्रति सवेंदनशील है इसका प्रमाण यह है कि आज तक इतनी जल्दी सफाई कर्मचारियों का स्थायीकरण नही किया गया।  वर्ष 2018 में भर्ती सफाई कर्मचारियों को स्थायीकरण का लाभ देकर सरकार ने कर्मचारियों और उनके परिवारों के मनोबल को मजबूत किया है।
सफाई कर्मचारी व्यवस्था की रीढ है- महापौर मुनेश 
महापौर मुनेश गुर्जर ने कहा कि सफाई कर्मचारी निगम की सम्पूर्ण व्यवस्था की रीढ है। यह हमारे आधार स्तम्भ है। सफाई कर्मचारी जितने मजबूत होगें शहर की सफाई व्यवस्था उतनी ही सुदृढ होगी। हम सफाई कर्मचारियों के हितों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उसी कडी में निश्चित समय पर सफाई कर्मचारियों का स्थायीकरण किया गया है। उन्हाेंने कहा कि मुझे विश्वास है कि हम सब मिलकर शहर को सफाई में नंबर वन बनायेगें।
विधायक रफीक खान ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिस काम मे बरसों लग जाते है उसे निगम महापौर और निगम प्रशासन ने समय पर पूरा किया इसके लिए सभी बधाई के पात्र है।
इस अवसर पर 150 वायरलेस सैट भी वितरित किये गये। इन वायरलेसों की मदद से निगम के फील्ड के अधिकारी/कर्मचारी आपस में त्वरित संवाद कर सकेगें और समस्या समाधान की गति तीव्र होगी। इससे पूर्व सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष नन्द किशोर डंडोरिया एवं अन्य प्रतिनिधियों ने अतिथियों का स्वागत किया एवं कार्यक्रम के अंत में सभी का आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त मुकुट बिहारी  जांगिड, उपायुक्त स्वास्थ्य आशीष कुमार सहित मुख्यालय एवं जोन उपायुक्त, अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

सामाजिक सुरक्षा और कल्याण की 103 अरब 44 करोड़ 8 लाख 6 हजार रुपये की अनुदान मांगे ध्वनिमत से पारित – जानें किस योजना में किसे क्या मिला

सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित  बजट घोषणाओं से सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी – सामाजिक
न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री
जयपुर, 11  मार्च। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह यादव ने कहा है कि डीएनटी पॉलिसी, देवनारायण योजना में 200 करोड़ का पैकेज,  विशेष योग्यजन के लिए छात्रवृति में वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना के लाभान्वितो को बीपीएल का दर्जा देने जैसे कदमों से राज्य में सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और समाज के अन्य सताए हुए लोगों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर संवेदनशील है।
यादव ने विधानसभा में मांग संख्या 33 (सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण) की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने सामाजिक सुरक्षा और कल्याण की 103 अरब 44 करोड़ 8 लाख 6 हजार रुपये की अनुदान मांगों को ध्वनिमत से पारित कर दी।
बजट घोषणाओं से सामाजिक सुरक्षा मजबूत –
राज्यमंत्री यादव ने कहा कि अम्बेडकर डीबीटी वाउचर से 5 हजार छात्र लाभान्वित होगें। एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के समावेशी विकास हेतु प्रत्येक वर्ग के लिये 100 करोड रूपये से विकास कोष और ट्रान्सजेण्डर्स के लिए 10 करोड़ के उत्थान कोष बनाया जायेगा।
उन्होंने कहा कि वाल्मिकी समाज के बच्चो एंव युवाओं के प्रशिक्षण के लिए 20 करोड़ का वाल्मिकी कोष बनाया जाएगा। राजकीय छात्रावासों एंव आवासीय विद्यालयों में पात्रता की सीमा 8 लाख रूपये वार्षिक पारिवारिक आय रखी गई है।
उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था और विशेष योग्यजन पेंशन में 250 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी से लगभग 58 लाख पेंशनर्स को लाभ मिला है। राजस्थान सरकार ने सिलिकोसिस पीड़ितों के लाभ के लिए राजस्थान न्यूमोकोनोसिस (सिलिकॉसिस) नीति, 2019 लागू की है। इसके तहत 19,361 सिलिकोसिस पीडितों को  1500 रुपये प्रतिमाह की पेंशन राशि का भुगतान किया जा रहा है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री ने कहा कि 1 जुलाई, 2019 से पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। इससे दिसबंर, 2018 के मुकाबले राज्य में 19.50 लाख पेंशनर्स को ज्यादा लाभ मिला है। वर्तमान में लगभग 84 लाख 86 हजार पेंशनर्स हैं और लंबित पेंशन आवेदन पत्रों की संख्या शून्य हो गई है। अब पेंशनर्स को हर महीने भौतिक सत्यापन की बजाय प्रति वर्ष केवल नवंबर और दिसंबर में ही भौतिक सत्यापन कराए जाने का प्रावधान किया है। कोविड-19 की विषम परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए इस वर्ष भौतिक सत्यापन की अवधि 31 मार्च, 2021 तक बढा दी गई है।
उन्होंने बताया कि कोविड-19 की विषम परिस्थितियों में राज्य के 33 लाख जरूरतमंद परिवारों को विभाग के माध्यम से 877 रूपये की राशि समेत कुल 1,155 करोड की सहायता राशि उपलब्ध करवाई गई है।
पेंशनर्स को ग्राम पंचायत पर स्थित राजीव गांधी सेवा केन्द्रों पर हर महीने पेंशन वितरण किया जायेगा। इससे पेंशनरों को अपने नजदीकी स्थान पर ही पेंशन राशि उपलब्ध हो सकेगी।
विभाग द्वारा अप्रेल, 2020 से पेंशन की केन्द्रीकृत भुगतान प्रणाली प्रारंभ की गई है। अब विभाग के निदेशालय स्तर पर ही एक आहरण एवं वितरण अधिकारी बनाया गया है। राज्य के एक ही कोषालय के माध्यम से समस्त पेंशनर्स को भुगतान किया जा रहा है।
लघु एवं सीमान्त वृद्धजन कृषक योजना उन्होंने बताया कि लघु एवं सीमान्त वृद्धजन कृषक पेंशन योजना लागू की गई है। इससे 2 लाख 68 हजार किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
पालनहार योजना
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में पालनहार योजना के अन्तर्गत फरवरी 2021 तक 495 करोड रूपये व्यय किए गए। योजना के तहत 4 लाख 92 हजार 271 बच्चों को लाभान्वित किया गया।
उत्तर मेट्रिक छात्रवृति योजना
 यादव ने बताया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक पिछड़ा वर्ग, विमुक्त घुमंतू एवं अर्धघुमंतू वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग के 2 लाख 48 हजार 958 छात्र-छात्राओं को फरवरी 2021 तक 422.77 करोड रूपये की छात्रवृत्ति प्रदान कर लाभान्वित किया गया।
आवासीय विद्यालयों से मिल रहा लाभ
उन्होंने बताया कि सत्र 2020-21 में 722 राजकीय और 84 अनुदानित विद्यालय स्तरीय और महाविद्यालय स्तरीय 806 छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इनमें छात्र-छात्राओं की स्वीकृत क्षमता 38 हजार 486 है। उन्होंने बताया कि अन्य पिछडा वर्ग, अति पिछडा वर्ग और आर्थिक पिछडा वर्ग राजकीय छात्रावासों की मैस भत्ते की राशि 2 हजार  से बढ़ाकर 2500/- रूपये प्रति विद्यार्थी प्रतिमाह की गयी है।
महिला कल्याण के कार्य
उन्होंने बताया कि महिला पुनरूत्थान,  सुरक्षा और जीविकोपार्जन के लिए संभाग स्तरीय नारी निकेतनों/राज्य महिला सदन में आवासित महिलाओं की सुविधाओं हेतु वर्ष 2020-21 में प्रति माह प्रति आवासी राशि 1900/-रूपये से बढाकर 2500/- रुपये किया गया है।
वृद्धजन कल्याण के कार्य 
 यादव ने बताया कि स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से राज्य के 13 जिलों में 20 भक्त श्रवण कुमार कल्याण सेवा आश्रम (डे-केयर सेन्टर) और 23 जिलों में 42 वृद्धाश्रम केन्द्र संचालित किए जा रहे है। वर्तमान में इनकी स्वीकृत क्षमता 1275 है। इनमें 60 वर्ष या अधिक आयु के पुरूष और 55 वर्ष या अधिक आयु की निःसहाय, सन्तानहीन, परित्यक्त महिलाएओं को प्रवेश दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में फरवरी 2021 तक 1.94 करोड रुपये की राशि वृद्धाश्रम एवं डे-केयर सेन्टरों पर व्यय की गई है।
नवजीवन योजना
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री ने बताया कि अवैध शराब के निर्माण,  भण्डारण और विक्रय में लिप्त लोगों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए नवजीवन योजना चलाई जा रही है। वर्ष 2020-21 में इसके लिए 5.11 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान रखा गया। फरवरी 2021 तक योजना के तहत 3.81 करोड रूपये का व्यय कर 4,293 व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया।
देवनारायण योजना
उन्होंने बताया कि वर्तमान में संपूर्ण राज्य में देवनारायण योजना चलाई जा रही है। इसके तहत अति पिछडे वर्ग के विद्यार्थियों के शैक्षणिक उत्थान के लिए उत्तर मैट्रिक छात्रवृति योजना,  पूर्व मैट्रिक छात्रवृति योजना, अनुप्रति योजना,  छात्रावास,  आवासीय विद्यालय संचालित है। देवनारायण योजनान्तर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के लिए वर्ष 2020-21 में 222 करोड़ 36 लाख  रूपये का बजट प्रावधान रखा गया। फरवरी 2021 तक 131 करोड़ 44 लाख रूपये का व्यय हो चुका है। वर्ष 2021-22 में योजना के तहत 213 करोड़ 76 लाख रूपये का बजट प्रावधान रखा गया है।
अनुसूचितजाति/जनजाति अत्याचार निवारण के लिए तत्काल सहायता
 यादव ने बताया कि अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्तियों पर गैर अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्तियों द्वारा अत्याचार करने पर पीड़ित/आश्रित को न्यूनतम राशि 85 हजार रु. से अधिकतम 8 लाख 25 हजार रुपये तक की राहत राशि प्रदान की जाती है। ये राशि जल्द दिलाने के लिए विभागीय वेबपोर्टल को सीसीटीएनएस से जोड़ा गया है।
विशेष योग्यजन का बढ़ाया आरक्षण उन्होंने बताया कि विशेष योग्यजनों को सरकारी सेवाओं में आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है
बाल मित्र योजना करेगी पीड़ितों की सहायता
उन्होंने बताया कि लैंगिक हिंसा/दुर्व्यवहार से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों की सहायता के लिए बाल मित्र योजना लागू की गई है। योजना के अन्तर्गत बाल मित्र को बच्चों के केस प्रबंधन के लिये पारिश्रमिक के रूप में 9 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।

मीना माँ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गणगौरी अस्पताल में कार्यक्रम आयोजित

#अन्तर राष्टीय महिला दिवस 

 

Meena Maa Charitable Trust organized a program at Gangauri Hospital on the occasion

of International Women’s Day

 

 

 

मीना माँ  चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गणगौरी बाजार स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में पोषाहार  किट का वितरण किया गया संस्था अध्यक्ष प्रिया सोनी ने बताया कि महिलाओं के प्रसव के पश्चात आने वाली कमजोरी से बचाव के लिए संस्था द्वारा पोषाहार वितरण किया गया हैं इसके साथ ही महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुयें सेनेटरी नैपकिन  का भी वितरण किया गया हैं |

 

 

 

कोविड 19 की गाइड लाइन को ध्यान रखते हुयें अस्पताल परिसर में उपस्थित 500 से अधिक लोगों को मास्क भी वितरण किया गया हैं इसके साथ भी  महिलाओं का बेहतर स्वास्थ्य  के प्रति जागरूक भी किया गया |

कार्यक्रम में डॉ अरविन्द गुप्ता , रेनू सेनी ,ट्रस्टी दीपक वर्मा सहित अन्य संस्था व् अस्पताल प्रशासन लोग उपस्थित रहें |

 

 

सूचना आयोग की लोक अदालत 23 अप्रेल से शुरू , 17 हजार से अधिक अपीलें हैं लंबित

लंबित अपीलों के त्वरित निस्तारण हेतु  सूचना आयोग की लोक अदालत 23 अप्रेल से शुरू होगी   – मुख्य सूचना आयुक्त 
जयपुर, 5  मार्च। राज्य में न्यायिक अदालतों व राजस्व अदालतों द्वारा लोक अदालत फार्मूले को सफलतापूर्वक अपनाये जाने के बाद अब राज्य सूचना आयोग ने भी आमजन के प्रकरणों को त्वरित गति से निस्तारण के उद्देश्य से लोक अदालत आरंभ करने का निर्णय किया है।
राजस्थान राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त  डी.बी. गुप्ता ने बताया कि आयोग में लगभग 17 हजार से अधिक अपीलें लंबित है, जिनके त्वरित निस्तारण की दिशा में यह पहल की जा रही है।
मुख्य सूचना आयुक्त ने बताया कि आगामी 23 अप्रेल को जयपुर विकास प्राधिकरण, 6, 7 एवं 8 मई को उदयपुर संभाग (जिला उदयपुर, चित्तौड़गढ़ एवं बांसवाड़ा), एवं 27 और 28 मई को नगर निगम के लंबित प्रकरणों हेतु लोक अदालत आयोजित की जायेगी।
जयपुर विकास प्राधिकरण एवं नगर निगम के प्रकरणों की सुनवाई आयोग में, उदयपुर संभाग के प्रकरणों की सुनवाई उदयपुर एवं बांसवाड़ा में की जायेगी। समस्त पक्षकारों को इसकी विधिवत सूचना के लिए आयोग द्वारा नोटिस जारी किये जायेंगे।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत के प्रथम चरण में जयपुर महानगर के उन विभागों को लिया जायेगा, जिनकी अपीलें अपेक्षाकृत अधिक संख्या में है, साथ ही दूर दराज के जिलों को इसमें सम्मिलित किया जायेगा।

सचिन पायलट के शक्ति प्रदर्शन ” महापंचायत ” से अशोक गहलोत आउट

हेमराज बैरवा ( चाकसू ) 
सचिन पायलट आख़िर क्यों कर रहें हैं शक्ति प्रदर्शन – राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के बैनर के तले पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट किसान महापंचायत के नाम पर अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं खास तौर पर देखा जाए तो इनके कोटखावदा गाँव  में जो महापंचायत हुई है उसमें बड़े-बड़े होर्डिंग कटआउटस लगे थे जिसमें एक तरफ सचिन पायलट और तो दूसरी तरफ राहुल गांधी  के फोटो लगें थे |
अशोक गहलोत जो कि राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं लगभग उन्हें अदृश्य रखा गया कार्यक्रम में  मुख्य बैनर ,पोस्टर से भी लगभग वह नारारद रहें |
 मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सभी नेताओं में छोटा सा स्थान मिला जबकि बैनर में एक तरफ राहुल गांधी एक तरफ सचिन पायलट बड़े-बड़े फोटो में साफ दिखाई दे रहे हैं आखिर कांग्रेस की यह नीति क्या साबित कर रही है क्या सचिन पायलट कांग्रेस में रहते हुयें  कांग्रेस को विभाजित कर रहे हैं |
किसान महापंचायत के चाकसू विधानसभा में हुए कार्यक्रम में सचिन पायलट उनके ख़ेमे के विधायक वेद प्रकाश सोलंकी भरतपुर से विधायक विश्वेंद्र सिंह प्रशांत बैरवा मंच पर आसीन थे अब यह साफ नजर आ रहा है कि आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट कोई बड़ा खेल खेलने जा रहे हैं उनका भी पार्टी में समय-समय पर अपमान होता रहा है |
कांग्रेस पार्टी को जो लगग राजस्थान में सिमट चुकी थी सचिन ने मेहनत करके 99 में लेकर आए और सरकार बनाई और अब  102 के विधायक है तो सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच 2018 के चुनाव में मुख्यमंत्री बनने के लिए लंबा संघर्ष चला था रोड से लेकर सोनिया गांधी राहुल गांधी प्रियंका गांधी तक गुहार लगाई थी उसके बाद सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ एक रिसोर्ट में जाकर बैठ गए थे और सरकार का तख्तापलट करने की कोशिश करे थे उसके बाद आलाकमान से बात होने के बाद सचिन पायलट राहुल गांधी पार्टी में शामिल हो चुके हैं इस पूरे घटनाक्रम के बीच में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें पार्टी के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया था उप  मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था लेकिन सचिन पायलट को देखकर लगता है कि मुख्यमंत्री बनने के चक्कर में है जनाधार तैयार करने में लग रहे हैं या कांग्रेस पार्टी उन्हें मौका देगी या वे नए विकल्प तलाश कर मुख्यमंत्री बनेंगे सभी समीकरण कांग्रेस के लिए चिंताजनक है |

बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से 85 से अधिक लोग मरें – प्रधानमंत्री मोदी ने शोक व्यक्त किया 

More than 85 people die due to lightning strikes in Bihar – PM Modi condole

आकाशीय बिजली साभार

नई दिल्ली | बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से 85 से अधिक लोगों के मरे जाने की जानकारी आपदा प्रबंधन टीम के द्वारा जारी की गई हैं  | इस प्राक्रतिक दुर्घटना में राज्य सरकार ने आर्थिक सहायता की घोषणा की हैं |

आपदा प्रबन्धन विभाग के सूचना अनुसार आकाशीय बिजली गिरने का केंद्र बिंदु गोपालगंज जिला रहा हैं वहा सबसे अधिक मौते हुई हैं  इस दुखद घटना पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया हैं |

मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये  की सहायता घोषणा की हैं आकाशीय बिजली गिरने की सबसे अधिक मौते गोपालगंज में हुई है वही मधुबनी ,भागलपुर ,चंपारण ,समस्तीपुर आदी क्षेत्रो में मौते हुई हैं |

मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने दियें दिशा निर्देश – 

मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की है वही शासन – प्रशासन को दिशा निर्देश दिया हैं ख़राब मौसम के चलते सभी लोग घरो में सुरक्षित रहें वही प्रशासन आपदा प्रबन्धन की टीम सभी मौर्चो के लियें तैयार रहे

 क्या लोकतंत्र आज भारत में सिर्फ एक मिथक मात्र हैं

 

आज के दौर में – भारत का लोकतंत्र और उसके मायने 

डाॅ‌. सत्य प्रकाश वर्मा 

(लेखक एक अर्थशास्त्री, संविधान विशेषज्ञ, उद्यमी एवं डिक्की के राजस्थान अध्यक्ष हैं )

आज भारतीय लोकतंत्र की एक ऐतिहासिक अविस्मरणीय घटना – आपातकाल – को 45 वर्ष बीत गये हैं। वो संवैधानिक घोषित आपातकाल था। आज इतने वर्षों बाद भी हालात यही सवाल पूछ रहे हैं कि क्या भारतीय लोकतंत्र आज एक अघोषित आपातकाल के दौर से गुज़र रहा है, जहां लोकतंत्र एक मिथक मात्र बनकर रह गया है ? लोकतंत्र का मतलब केवल आज वोट देना ही रह गया है, ऐसा प्रतीत होता है। किंतु जब जनता के एक बडे़ धडे़ में राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, वोटिंग मशीनों की प्रामाणिकता, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली आदि की विश्वसनीयता पर देशव्यापी गर्म बहस होती है, तो यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया का दावा ही लोकतंत्र को संदिग्ध मिथक की ओर ले जाता है। ऐसे में लोकतंत्र के अन्य स्तंभ क्या हैं? लोकतंत्र निस्संदेह -लोगों का, लोगों के लिए, लोगों द्वारा शासन’ के रूप में परिभाषित किया गया है। ज़ाहिर है, यह सही है। लोकतंत्र लोगों की भागीदारी को लागू करता है और इसके लिए हमारे पास लोकतंत्र के चार स्तंभ हैं। लोकतंत्र के ये चार स्तंभ हैं |

विधान –

विधायी स्तंभ मूल रूप से कानून बनाने के लिए जिम्मेदार है जो एक राज्य या राष्ट्र को नियंत्रित करता है। ये कानून या तो सीधे लोगों (प्रत्यक्ष लोकतंत्र) या लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों (अप्रत्यक्ष लोकतंत्र) द्वारा बनाए जाते हैं। भारत अप्रत्यक्ष लोकतंत्र का अनुसरण करता है और इसीलिए एक सवाल उठता है कि क्या ये प्रतिनिधि भारत के लिए या अपने राजनीतिक जीवन के लिए और अपनी पार्टियों के भविष्य के लिए कानून बना रहे हैं? प्रभुत्व वाले दलों के निहित राजनीतिक हितों के आधार पर कानून बनाए जा रहे हैं या सुधार किए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के निहित स्वार्थ नहीं हैं। हालही में बने कुछ कानून या संशोधन धर्म विशेष या क्षेत्र विशेष या वर्ग विशेष को संविधान सम्मत संरक्षण स्वरूप दिए गए अधिकारों में राजनैतिक हस्तक्षेप से ज्यादा कुछ नहीं दिखते। राजनैतिक कुशलता में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना और वर्षों से सत्ता से बाहर रहने की भड़ास भी कई फैसलों में देखी गई जिसमें लोकतंत्र का हित गौण रहा।

कार्यपालक –

लोकतंत्र का यह स्तंभ विधायी खंड द्वारा गठित कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार है, और उनके उचित कार्यान्वयन के लिए आदेश जारी करता है। कार्यकारी खंड का चयन चुनाव प्रणाली, बिगड़ी प्रणाली या योग्यता प्रणाली या ऊपर के मिश्रण के आधार पर किया जाता है। हम भारत में निष्पादन में कितने निष्पक्ष और सक्षम हैं ? काले धन, अघोषित संपत्ति, काम के बदले एहसान जैसे राष्ट्रीय कचरे के नीचे दब कर कार्यदायी संस्थाएं बहुत पहले ही मर चुकी हैं और अपनी विश्वसनीयता खो चुकी हैं चाहे वो संवैधानिक संस्थाएं ही क्यूं ना हों। पक्षपात या आराम या सुविधा के आधार पर निष्पादन भी एक भारतीय लोकतंत्र की एक प्रवृत्ति बन चुकी है। दुर्भाग्य से यह स्तंभ कभी पैरों पर नहीं खड़ा होकर निष्पक्ष हो ही नहीं पाया।

न्यायपालिका –
यह फिर से लोकतंत्र का बहुत महत्वपूर्ण स्तंभ है और यह कानूनों (विधायी द्वारा दिए गए) और आदेशों (कार्यकारी द्वारा जारी) पर एक जांच रखता है और यह सुनिश्चित करता है कि ये कानून और आदेश किसी देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कम नहीं करते हैं। लेकिन जब लोकतंत्र के 4 सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली को ही पक्षपाती और अपारदर्शी बताते हुए सर्वोच्च न्याय तंत्र पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया तो लोकतंत्र सदमे से नहीं मरेगा? स्थानीय न्यायविदों तक पहुँच के कारण विभिन्न स्तरों पर निचली न्यायपालिकायें गाहे बगाहे संदेह के घेरे में रही हैं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय अमीर लोगों और सत्तारूढ़ सरकारों के लिए भी सुलभ हो गया है, ऐसा अंदेशा भी चिन्तित करता है। इसे संविधान में आस्था के नाम पर हम सरासर झूठ भी मान लें तो भी इस तरह की प्रेस कॉन्फ्रेंस इस स्तंभ को हिला देने के लिए काफी है। उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सार्वजनिक रूप से कई और घटनाओं की रिपोर्ट की गई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश पर यौन शौषण के फर्जी आरोप, उन्हें कठोर एवम् महत्वपूर्ण निर्णय लेने से रोकने के लिए धमकाना, कोलेसियम प्रणाली के नाम पर न्यायाधीशों के चयन का पक्षपात आदि प्रमुखता से शामिल हैं।

प्रेस / अखबार –
लोकतंत्र का यह आधार सुनिश्चित करता है कि देश के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले सभी लोग इस बात से अवगत हों कि इसके बाकी हिस्से में क्या हो रहा है। यह उपरोक्त सभी तीन प्रणालियों के काम में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। केवल एक बात आप कह सकते हैं- मीडिया का मतलब है सत्ताधारी सरकार की कठपुतली। यहां तक ​​कि भारतीय लोकतंत्र में इस गैर मौजूदा स्तंभ के बारे में एक शब्द भी लिखना पूरी तरह से अयोग्य है।

ये लोकतंत्र के चार स्तंभ हैं और यदि इनमें से कोई भी स्तंभ ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो कहा जा सकता है कि कहीं न कहीं लोकतंत्र अभी भी पूरी तरह से निहित नहीं है। उस स्थिति में, इसका तात्पर्य यह है कि हाँ लोकतंत्र हमारे भारत में एक मिथक मात्र सा प्रतीत होता है। भारत में किसी भी स्तंभ को बहुत मजबूत नहीं बनाया गया है। अमेरिकी संविधान में, न्यायालय को शक्तिशाली बनाया गया है जबकि ब्रिटेन में न्यायपालिका पर विधायी हावी है।

मेरा दर्द इन स्तंभों के अस्तित्व या मजबूती पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र-जनता की नींव है। मेरी चिंता है कि क्रूर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं द्वारा इन चार स्तंभों का दुरूपयोग करके जनता की रचनात्मक तार्किक सोच को सांप्रदायिक कट्टरता, क्षेत्रीय विभाजन, छद्म राष्ट्रवाद, सामाजिक विद्वेष आदि में उलझा कर वास्तविक राष्ट्रीय जमीनी मुद्दे से ध्यान भटका कर लोकतंत्र की नींव को कमजोर किया जा रहा है जिसमें फर्जी खबरों, गलत एवं भ्रामक तथ्यों का सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रचार इसमें उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहा है। स्वस्थ लोकतंत्र में पत्रकार सरकारों की आलोचना करते थे और सरकारें या तो आलोचनाओं को सकारात्मकता से लेकर कार्य व्यवस्था में सुधार करती थी या उसका दमन कर देती थी। दोनों ही परिस्थितियां जनता का परिचय सत्य से करवाती थी‌ । किंतु आज पत्रकारिता को भय सरकारों से ज्यादा उन आक्रामक आलोचकों से जिनकी भाषा और अभद्र शब्दों का चयन पत्रकारिता के साथ-साथ पत्रकार तक की आत्मा को ब्रह्म विलीन करने का सामर्थ्य रखता है। आज यहाँ ‘लोकतंत्र मिथक है’ से बहुत बड़ा यक्ष प्रश्न यह निकल कर आया है कि कहीं हम लोकतन्त्र के भुलावे में छिपे हुए राजतन्त्र में तो नहीं जी रहे जहां प्रजा के पास -महाराज की जय करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं (चाहे दिल से कहें, लोभ से या भय से या भीड़ तंत्र बनकर या फिर बेवजह, शायद इसलिये कि क्या फर्क पड़ेगा)? राजा कहे रात है, रानी कहे रात है। मंत्री कहे रात है, संतरी कहे रात है। प्रजा भी कहने लगी रात है, ये सुबह सुबह की बात है… बस, यही भारत के लोकतंत्र के हालात हैं।

डाॅ‌. सत्य प्रकाश वर्मा

(लेखक एक अर्थशास्त्री, संविधान विशेषज्ञ, उद्यमी एवं डिक्की के राजस्थान अध्यक्ष हैं।)