भारत : 24 घंटों के दौरान 43 लाख से अधिक टीके लगाए गए , कुल टीकाकरण कवरेज 8 करोड़ से अधिक जानें ख़ास रिपोर्ट

भारत ने एक दिन में सर्वाधिक टीकाकरण की उपलब्धि हासिल की, पिछले 24 घंटों के दौरान 43 लाख से अधिक
टीके लगाए गए

कुल टीकाकरण कवरेज 8 करोड़ से अधिक हुई

कोविड 19 के परीक्षण की कुल संख्या 25 करोड़ के पार पहुंची

 

नई दिल्ली |

कोविड 19 के खिलाफ लड़ाई में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पिछले 24 घंटों के दौरान 43 लाख से अधिक लोगों को टीके की खुराक दी गई। यह एक दिन में देश में अब तक का सबसे बड़ा टीकाकरण कवरेज है।

टीकाकरण अभियान के 80वें दिन (05 अप्रैल, 2021), 43,00,966 टीके लगाए गए। इनमें से 48,095 सत्रों के माध्यम से 39,00,505 लाभार्थियों को टीके की पहली खुराक दी गई जबकि 4,00,461 लाभार्थियों ने टीके की दूसरी खुराक प्राप्त की।

 

दिनांक 05 अप्रैल, 2021
एचसीडब्ल्यू एफएलडब्लूएस गंभीर बीमारियों के साथ 45 से <60 वर्ष से अधिक 60 साल से अधिक कुल उपलब्धि
पहली खुराक दूसरी खुराक पहली खुराक दूसरी खुराक पहली खुराक दूसरी खुराक पहली खुराक दूसरी खुराक पहली खुराक दूसरी खुराक
29,819 27,117 83,159 1,28,453 23,33,147 45,189 14,54,380 1,99,702 39,00,505 4,00,461

 

एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत, देश में आज कोविड 19 टीकाकरण की संख्या 8.31 करोड़ से अधिक हो गई है। पहली खुराक के टीकाकरण ने 7 करोड़ (7,22,77,309) खुराक के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर लिया है।

प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में कोविड-19 टीकाकरण के आज सुबह 7 बजे तक 12,83,816 सत्रों के माध्यम से कुल 8,31,10,926  टीके की खुराक दी गई। इनमें 89,60,061 स्वास्थ्यकर्मी (एचसीडब्ल्यू) शामिल हैं जिन्हें पहली खुराक लगी और 53,71,162 वो स्वास्थ्यकर्मी हैं जिन्हें दूसरी डोज दी गई है। 97,28,713 फ्रंटलाइन वर्कर्स (एफएलडब्ल्यू) को पहली, जबकि 42,64,691 फ्रंटलाइन वर्कर्स दूसरी डोज दी जा चुकी है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के 3,41,06,071 लाभार्थियों को पहला टीका तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र के 8,12,237   लाभार्थियों को दूसरा टीका लग चुका है। 45 वर्ष से अधिक उम्र के 1,94,82,464 लाभार्थियों को पहला टीका तथा 45 वर्ष से अधिक उम्र के 3,85,527 लाभार्थियों को दूसरा टीका लग चुका है।

 

एचसीडब्ल्यू एफएलडब्लूएस 45 साल से अधिक 60 साल से अधिक  

कुल

पहली खुराक दूसरी खुराक पहली खुराक दूसरी खुराक पहली खुराक दूसरी खुराक पहली खुराक दूसरी खुराक
89,60,061 53,71,162 97,28,713 42,64,691 1,94,82,464 3,85,527 3,41,06,071 8,12,237 8,31,10,926

 

नीचे दिया गया ग्राफ देश में कोविड 19 के खिलाफ दैनिक टीकाकरण खुराक में वृद्धि को इंगित करता है।

देश में कोविड 19 के परीक्षण की संख्या ने 25 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। पॉजिटिव मामलों की दर मामूली रूप से बढ़कर 5.07% हो गई है।

पिछले 24 घंटों में 96,982 नए मामले दर्ज किए गए हैं।

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित आठ राज्यों में कोविड के दैनिक नए मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। इन 8 राज्यों से  80.04% नए मामले सामने आए हैं।

महाराष्ट्र में सबसे अधिक दैनिक नए मामले 47,288 दर्ज किए गए हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 7,302 और कर्नाटक में 5,279 नए मामले सामने आए हैं।

 

जैसा कि नीचे दर्शाया गया है, बारह राज्य दैनिक नए मामलों में वृद्धि प्रदर्शित कर रहे हैं।

 

 

भारत में कुल सक्रिय मामले 7,88,223 तक पहुंच गए हैं। इन मामलों में अब देश में कुल पॉजिटिव मामलों का 6.21 प्रतिशत शामिल है। पिछले 24 घंटों में कुल सक्रिय मामलों में से 46,393 मामलों की कमी दर्ज की गई।

देश के कुल सक्रिय मामलो में महाराष्ट्र का योगदान 57.42 फीसदी है।

भारत की कुल ठीक होने वाले मामलों की संख्या (रिकवरी) आज तक 1,17,32,279 हो गई है। राष्ट्रीय रिकवरी दर 92.48 प्रतिशत है।

पिछले 24 घंटों में 50,143 रिकवरी दर्ज की गई हैं।

पिछले 24 घंटों में 446 मौतें हुई हैं।

नई मृत्यु का 80.94 प्रतिशत हिस्सा 8 राज्यों से दर्ज किया गया है। महाराष्ट्र में अधिकतम मृत्यु की संख्या(155) है। पंजाब में प्रतिदिन 72 मौतें दर्ज की गई हैं।

 

 

भारत की कुल ठीक होने वाले मामलों की संख्या (रिकवरी) आज तक 1,17,32,279 हो गई है। राष्ट्रीय रिकवरी दर 92.48 प्रतिशत है।

पिछले 24 घंटों में 50,143 रिकवरी दर्ज की गई हैं।

पिछले 24 घंटों में 446 मौतें हुई हैं।

नई मृत्यु का 80.94 प्रतिशत हिस्सा 8 राज्यों से दर्ज किया गया है। महाराष्ट्र में अधिकतम मृत्यु की संख्या(155) है। पंजाब में प्रतिदिन 72 मौतें दर्ज की गई हैं।

पिछले 24 घंटों में तेरह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से कोई भी कोविड-19 मृत्यु की सूचना नहीं मिली है। इनमें ओडिशा, असम, पुदुचेरी, लद्दाख (केन्द्र शासित प्रदेश), दमन और दीव तथा दादरा और नागर हवेली, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, लक्षद्वीप, मिजोरम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

 

छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर में हुए नक्सली  हमले में 22 जवान शहीद , 9 नक्सली भी मारे गयें – अमित शाह का दौरा रद्द 

नक्सली हमलें के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने रद्द किया अपना असम दौरा समीक्षा बैठक जल्द –

 

Naxalite attack in Sukma-Bijapur in Chhattisgarh killed 22 jawans,

9 Naxalites also killed – Amit Shah’s visit canceled

 

 छत्तीसगढ़ नक्सली हमले के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने अपना असम दौरा रद्द कर दिया , असम में अभी विधानसभा चुनाव हो रहें हैं वहां अमित शाह को 2 चुनावी रैलियां करनी थीं लेकिन वह दिल्ली लौट आयें हैं और जल्द हमलें की समीक्षा बैठेंक करने वाले हैं |

 

 

दो चुनावी रैलिय रद्द – 

गृह मंत्री अमित शाह की असम में आज दो चुनावी रैलिय प्रस्तावित थी लेकिन नक्सली हमलें के चलते दोनों चुनावी रेलिया रद्द कर दी गई हैं अभी छतीसगढ़ में सुकमा – विजापुर में सर्च आपरेशन चल रहा हैं घटना पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा हैं की वह अभी दिल्ली लौट रहें हैं और छतीसगढ़ मुख्यमंत्री से बात चल रही हैं और  डीजीपी से मौके पर जाने को कहा है  सभी हमलें की जांच के आदेश दे दियें गयें हैं जांच

राजस्थान विधानसभा उपचुनाव –  कांग्रेस भाजपा का समीकरण बिगाड़ रहें हैं हनुमान बेनीवाल 

राजस्थान विधानसभा उपचुनाव 20 21 
कांग्रेस भाजपा का समीकरण बिगाड़ रहीं हैं हनुमान बेनीवाल की पार्टी रालोपा – 
पवन देव 
जयपुर |  राजस्थान में विधानसभा के उपचुनाव हो रहें हैं यह चुनाव जहाँ कांग्रेस भाजपा के लियें बहुत ख़ास हैं वर्तमान कांग्रेस सरकार की सरकार गिराने के घटनाक्रम के बाद तो कांग्रेस में गुटबाज़ी सचिन पायलट , अशोक गहलोत के बीच रह रह आग के बाद दुआ उठ ही रहा हैं राजस्थान प्रभारी अजय माकन भी एक सूत्र का संदेश देने की कोशिश कर हैं लेकीन सच्चाई और कुछ ही हैं जो जग ज़ाहिर हैं सुजानगढ़ में मनोज मेघवाल की नामांकन रैली भी ही स्टेज बैनर से सचिन पायलट की फोटो गायब थी  और सभा से पहले उनकी फ़ोटो को स्टेज पर लगाया गया था आलम यह हैं कांग्रेस पार्टी की आपसी फुट का |
भाजपा की नैया  क्या वसुंधरा राजे के  बीना तट तक पहुँच पायेगीं  – दबी जुबा ही सही यह बात सत्य हैं राजस्थान में भाजपा में वसुंधरा राजे से बड़ा कोई चेहरा नहीं हैं उनकी राजनीति के तरीके से सब अवगत हैं उनके कार्यकाल में ही संघ की कसमें खाने वाले पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी की तो यह स्थिति हो गई थी उन्होंने ने कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली थी ऐसे कई उदाहरण हैं जो राजस्थान में वसुंधरा राजे और कांग्रेस में अशोक गहलोत के शासन काल में अव्यस्थित हुयें हैं |
क्यों खास हैं हनुमान बेनीवालराजस्थान की राजनीति में अगर अंगद की तरह अगर कोई नेता स्थापित हुआ हैं तो वह हैं हनुमान बेनीवाल 
बेनीवाल अपने छात्रसंघ जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहें हैं और आज भी उनका काम करने का तरीका युवा नेता जैसा ही हैं इसलिए युवाओं में उनकी पकड़ मजबूत हैं और वह मंजे हुयें राजनेता की तरह राजस्थान में जमें हैं आज वह भाजपा से समर्थन से सांसद हैं और अभी उनकी पार्टी रालोपा के आज तीन विधायक हैं
hanuman beniwal
जाट और दलितों को साधने की कोशिश – सूत्रों की मानें तो बेनीवाल इस वक्त पश्चिमी राजस्थान में जाट वोटो के साथ दलितों को साधने की कोशिश कर रहें हैं यह कड़ी थोड़ी मुश्किल हैं क्योंकि पश्चिमी राजस्थान में जाटों द्वारा दलितों पर ज्यादा अत्याचार    मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं अगर बेनीवाल जाट और दलितों को साधने में कामयाब हो जाते हैं तो यह समीकरण भजपा और कांग्रेस दोनों के लियें ही मुश्किल रहने वाला हैं |
सुजानगढ़ में क्या हैं जातीय समीकरण –
रालोपा पार्टी के जयपुर जिला प्रवक्ता राजेश बुनकर ने कहा हैं हमारी पार्टी हमारें राष्टीय नेता सांसद हनुमान बेनीवाल जी के  नेतृत्व में राजस्थान की तीनों सीटों पर मजबूती से जनसंपर्क कर रही हैं हमारे सभी नेता – कार्यकता यहाँ जनता के बीच हैं और हम क्षेत्र में पहले भी काम कर रहें थे इसलियें जनता हम पर विश्वास कर रही हैं और हम तीनों सीटों पर विजय हासिल कर रहें हैं |

बेरोजगारों के लियें अवसर – मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विभिन्न विभागों के लिए 209 पदों के सृजन को दी मंजूरी – जानें यहाँ

इन विभागों के लिए 209 पदों का होगा सृजन –
जयपुर, 3  अप्रेल। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने तथा राजकार्य के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न विभागों, प्राधिकरण तथा न्यायालयों के लिए अलग-अलग संवर्गों के 209 नवीन पदों के सृजन को मंजूरी दी है।
40 नए न्यायालयों के लिए 120 नए पद –
 मुख्यमंत्री  ने विधि एवं विधिक कार्य विभाग की ओर से 31 अक्टूबर, 2020 को जारी अधिसूचना से सृजित 40 नवीन न्यायालयों के लिए 120 विभिन्न पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। इनमें अभियोजन अधिकारी के 12, सहायक अभियोजन अधिकारी के 28, वरिष्ठ सहायक के 12, कनिष्ठ सहायक के 28 तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 40 पद शामिल हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती सेवानिवृत्त कार्मिक या रेक्सको के माध्यम से की जाएगी। मुख्यमंत्री की इस मंजूरी से नवीन न्यायालयों में अभियोजन पैरवी का कार्य सुचारू रूप से संपादित हो सकेगा।
ashok gehlot
वन्यजीवों की देखभाल के लिए 50 पदों का सृजन
मुख्यमंत्री ने वन विभाग द्वारा संधारित वन्य जीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व, चिडियाघर एवं बायोलॉजिकल पार्क में वन्य जीवों की चिकित्सा तथा देखरेख के लिए 17 पशु चिकित्सकों तथा 33 पशुधन सहायक / पशु चिकित्सा सहायक के नवीन पदों के सृजन को मंजूरी दी है। वन विभाग में सृजित किए जाने वाले ये पद पशुपालन विभाग की कैडर स्ट्रेंथ में शामिल होंगे।
रेरा और ट्रिब्यूनल के लिए 31 पद
मुख्यमंत्री  ने राजस्थान रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथोरिटी (रेरा) मं  19 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। इनमें चेयरमेन का एक, सदस्यों के दो पद, डिप्टी रजिस्ट्रार तकनीकी, जूनियर ड्राफ्टमेन, डिप्टी रजिस्ट्रार कंप्लेंट एवं कोर्ट, लॉ ऑफिसर, सहायक लेखाधिकारी द्वितीय, कनिष्ठ सहायक कैशियर, प्रवर्तन अधिकारी, अभियोजक, ड्राइवर के एक-एक पद तथा सूचना सहायक व कनिष्ठ सहायक के दो-दो पद एवं स्टेनोग्राफर के तीन पदों की स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री ने राजस्थान रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल में 12 नवीन पदों के सृजन की भी स्वीकृति दी है। इनमें रजिस्ट्रार, सहायक लेखाधिकारी द्वितीय, रीडर तथा गार्ड का एक-एक पद तथा शीघ्रलिपिक, सूचना सहायक, कनिष्ठ सहायक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के दो-दो पद शामिल हैं।
अजमेर मेडिकल कॉलेज के लिए चिकित्सक शिक्षकों के 8 पद
श्री गहलोत ने चिकित्सा महाविद्यालय अजमेर में स्नातक सीटों में वृद्धि के कारण एमसीआई के नियमों के अनुरूप आठ नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इनमें एनाटॉमी विभाग में सहायक आचार्य का एक, वरिष्ठ प्रदर्शक के दो, फार्माकोलॉजी विभाग में सहायक आचार्य का एक, वरिष्ठ प्रदर्शक का एक तथा कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में सह-आचार्य, सहायक आचार्य एवं वरिष्ठ प्रदर्शक का एक-एक पद शामिल है।

कोटा के 2 लाख विद्यार्थी ( इंजीनियरिंग, मेडिकल ) का होगा डेटाबेस तैयार – मुख्यमंत्री ने दियें आदेश

मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी  कोचिंग विद्यार्थियों का ऑनलाइन रजिस्टर  तैयार करेगी सरकार
जयपुर, 2 अप्रेल। देशभर में कोचिंग हब के रूप में विख्यात कोटा शहर में इंजीनियरिंग एवं मेडिकल की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का एक ऑनलाइन रजिस्टर तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। स्टूडेंट रजिस्टर बनाने का काम राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड (आरआईएसएल) द्वारा किया जाएगा। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 68 लाख रूपए है।
 गहलोत के इस निर्णय के बाद कोटा शहर में कोचिंग कर रहे लगभग दो लाख विद्यार्थियों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा, ताकि राज्य सरकार के पास प्रदेश में रह रहे इन प्रवासियों की सही संख्या तथा व्यक्तिगत विवरण का रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
विद्यार्थियों का विवरण उपलब्ध होने पर कोविड-19 के संक्रमण जैसी परिस्थितियों में इन प्रवासियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का प्रबंधन करना आसान हो सकेगा। इसी तरह के स्टूडेंट रजिस्टर प्रदेश के कोचिंग संस्थानों वाले अन्य शहरों के लिए भी तैयार किए जाएंगे।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग की ओर से प्राप्त प्रस्ताव के अनुसार, स्टूडेंट डेटाबेस तैयार करने का उद्देश्य सभी कोचिंग विद्यार्थियों के लिए वेब पोर्टल और मोबाइल ऎप तैयार करना है, जिसमें विद्यार्थियों के स्थायी पते एवं परिजनों के विवरण के साथ-साथ, कोचिंग संस्थान, हॉस्टल, पेइंग गेस्ट, प्राइवेट स्टे-होम, मेस आदि सुविधाओं की जानकारी भी दर्ज होगी। इस पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थियों को कोचिंग, आवास एवं खाने-पीने से जुड़ी समस्याओं तथा शिकायतों को दर्ज करने एवं इनके निस्तारण की सुविधा दी जाएगी।
स्टूडेंट रजिस्टर का उपयोग अभिभावकों को विद्यार्थियों के क्लास शेड्यूल तथा कोचिंग संस्थान में उनकी उपस्थिति एवं अनुपस्थिति के बारे में सूचित करने के लिए किया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में डेटाबेस में दर्ज फोन नंबर पर आवश्यक सूचनाएं और संदेश भेजे जा सकेंगे। स्थानीय प्रशासन इस डेटाबेस का उपयोग संबंधित शहर में संपूर्ण कोचिंग व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन और शहर तथा क्षेत्र विशेष की विकास योजनाओं की प्लानिंग के लिए भी करेगा।
उल्लेखनीय है कि कोटा शहर में लगभग 50 छोटे और 10 बडे़ कोचिंग संस्थान हैं, जहां लगभग 2 लाख विद्यार्थी इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। यहां लगभग 25 हजार पेइंग गेस्ट सुविधाएं, 3 हजार हॉस्टल तथा 1800 मेस संचालित हैं। कोटा में इस व्यवसाय का वार्षिक कारोबार 3 हजार करोड़ से अधिक का है। 

राजस्थान विधानसभा उप चुनाव – कांग्रेस प्रत्याशियों ने भरें नामांकन , 4 बड़े नेता रहें मोजूद , सचिन पायलट की मुख्य भूमिका

 

 

 

राजस्थान विधानसभा उप चुनाव में कांग्रेस का सन्देश हम एक लेकिन जाजम में अभी भी भेद –

 

राजस्थान विधानसभा उप चुनाव – कांग्रेस प्रत्याशियों ने भरें नामांकन , 4 बड़े नेता रहें मोजूद 

 

राजस्थान में होने जा रहें विधानसभा उप चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं इस के लियें  राजस्थान प्रभारी अजय माकन , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोडासरा , एक जाजम का सन्देश देने की कोशिश कर रहें हैं आज नामांकन का आखरी दिन था तो कांग्रेस पार्टी ने अपने तीनों प्रत्याशियों के पक्ष में नामांकन रेली को संबोधित किया लेकिन घटनाक्रम पर आपसी रार दिख रही हैं

सुजानगढ़ से कांग्रेस उम्मीदवार मनोज मेघवाल ने अपना  नामांकन भरा हैं तो सहाड़ा से गायत्री त्रिवेदी ने अपना नामांकन भरा हैं राजसमंद में कांग्रेस उम्मीदवार तनसुख बोहरा की नामांकन भरा हैं 

सूत्रों की माने तो सुजानगढ़ सीट पर पायलट ग्रुप की पकड़ अच्छी हैं तो कांग्रेस पार्टी यहाँ सचिन पायलट को मुख्य चेहरा बनाना चा रही हैं 

 

राजस्थान विधानसभा

 

क्यों ख़ास हैं कांग्रस के लियें यह उप चुनाव – 

 

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी अंत कलह जग जाहिर हैं अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व् प्रभारी अजय माकन यह सन्देश देने की कोशिश कर रहें हैं की कांग्रेस पार्टी में सब सही हैं लेकिन आज भी दोनों गुटों में मन मुटाव साफ़ देखने का मिल जाता हैं अब कांग्रेस सत्ता में रहते हुयें तीनो सीट जीत जाती हैं तो 2022  में आने वाले चुनावों में कांग्रेस का मनोबल बद जायेगा वही अगर भाजपा ने 2 सीटो पर जीत दर्ज कर ली तो भाजपा और प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया मजबूत हो कर कांग्रेस को घेरेगे सूत्रों की मानें तो 3 सीट में से 2 कांग्रेस और एक भाजपा के खाते में जाती नज़र आ रही हैं लेकिन इन सीटों पर हनुमान बेनीवाल की रालोपा भी वोटों का समीकरण बिगाड़ने का दम रखती हैं हनुमान बेनीवाल जाट वोटों के दलित वोटों को साधने में लग रहें हैं बाकी राजनीति में समीकरण पल पल बदलते रहते हैं |

 

 

 

प्रधानमंत्री मोदी का बांग्लादेश दौरा – हिंसा में 12 लोगों की मौत , ममता बेनर्जी ने उठायें सवाल , चुनाव आयोग चुप – ख़ास रिपोर्ट 

कट्टरपंथीयों ने बांग्लादेश को किया आग के हवाले – शेख हसीना की मुश्किलें बढ़ी 

 

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बाद बांग्लादेश में भारी हिंसा हो रही हैं और अभी तक 12 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी हैं देश में भी उठ रहें हैं सवाल – 

 

 

प्रधानमंत्री मोदी के बांग्लादेश  दौरे का विरोध रुकने का नाम ही नहीं ले रहा –  कट्टरपंथीयों ने एक बड़े मंदिर को बनाया निशाना माँ काली और भगवान कृष्‍ण की मूर्ति तोड़ी धार्मिक उन्माद चरम पर 

 

 

  • प्रधानमंत्री मोदी के बांग्लादेश से वापस जाते ही चटगांव क्षेत्र में स्थित ब्राह्मनबरिया में जमकर हिंसा
  • बांग्‍लादेश के मुस्लिम कट्टरपंथी गु‍ट हिफाजत-ए-इस्‍लाम के हथियार बंद समर्थकों ने भारी हिंसा की
  • इन कट्टरपंथियों ने एक मंदिर को तहस-नहस कर दिया और मां काली और श्रीकृष्‍ण की मूर्ति को तोड़ा

 

 

 

 

पवन देव 

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी के बांग्लादेश दौरे का बांग्लादेश के चरमपंथी लोग जमकर विरोध कर रहें  हैं बांग्लादेश हिंसा अब  धार्मिक हिंसा का रूप ले रही हैं कई जगह तोड़फोड़ , लूट हो रही हैं तो चरमपंथी और पुलिस के बीच भी हिंसा देखने को मिल रही हैं कई ट्रेने रोक दी गई हैं तो कई ऑफिस में भी तोड़फोड़ हो चुकी हैं |

 

हिफाजत-ए-इस्‍लाम के समर्थकों ने पुलिस स्‍टेशन, पब्लिक ऑफिस, प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी के कार्यालय और बसों को जमकर निशाना बनाया जा रहा हैं  इन लोगों ने एक ट्रेन के 15 डिब्‍बों को तहस नहस कर डाला और उसकी 117 खिड़क‍ियों को तोड़ दिया इसके साथ  इन कट्टरपंथियों के आतंक का असर यह रहा कि ऑफिस, पुलिस स्‍टेशन जल रहे थे लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम चाहकर भी वहां तक जाने की हिम्‍मत नहीं जुटा पाई यह हिंसात्मक  मंजर बांग्लादेश में साफ़ दिख रहा हैं हिंसा की मुख्य वजह प्रधानमंत्री मोदी को निमन्त्रण देना हैं क्योकिं मुस्लिम समुदाय के लोग मोदी का विरोध कर रहें थे लेकिन दौरे को टाला नहीं गया |

 

ममता बेनर्जी ने उठायें सवाल – 

पश्चिम बंगाल में चल रहें चुनावों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के बांग्लादेश दौरे पर  ममता बेनर्जी ने सवाल उठायें हैं की प्रधानमंत्री चुनाव को प्रभावित करने के लियें आंचार संहिता लगने के बाद बांग्लादेश देश दौरा करते हैं और उनके भाषण और कार्यक्रम सीधे सीधे मतदाता को प्रभावित कर रहें हैं  दीदी ने तो यह तक कह दिया हैं की मोदी जी का वीजा रद्द होना चाहियें |

 

 

भाजपा और मोदी की पुरानी रणनीति हैं चुनावों को प्रभावित करने की – 

 

ऐसा पहली बार नहीं हुआ हैं की चुनाव समय में प्रधानमंत्री मोदी अन्य देशों की यात्रा करते हो गौरतलब हैं की जब गुजरात में चुनाव हो रहें थे और चुनाव प्रचार थम चूका था मोदी जी ने नेपाल का दौरा किया था और धार्मिक स्थलों की यात्रा की थी जिसका भारत के तमाम बड़े टीवी चेनलों ने लाइव प्रसारण किया था कुल मिलाकर भाजपा का हिन्दू एजेंडा साफ़ वोटरों को प्रभावित कर रहा हैं |

 

 

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव – पहले चरण में 79 .79 % हुई वोटिंग , कई जगह विवाद

 

 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहलें चरण के मतदान बूथ कैप्चरिंग की कोशिश   ई वी एम्  पर फिर उठे सवाल –

 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 30 सीटों पर वोटिंग हुई। असम में 47 सीटों पर भी वोट डाले गए। बंगाल में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बीजेपी में माना जा रहा है। इस चरण में 73 लाख से अधिक मतदाताओं ने 191 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला किया। पहले चरण में पुरुलिया जिले की सभी नौ सीटों, बांकुड़ा की चार सीटों, झारग्राम की चार सीटों, पश्चिम मेदिनीपुर की छह और पूर्व मेदिनीपुर की सात सीटों पर मतदान हुआ।

 

 

 

कोविड-19 के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए मतदान हुआ। जानें मतदान से जुड़े लाइव अपडेट्स

 

प्रथम चरण के चुनाव में कुछ जगह बूथ कैप्चरिंग की शिकायत के साथ ही कुछ अन्य विवाद सामने आई हैं

 

मुख्य बातें – 

ममता बनर्जी रविवार से अगले पांच तक नंदीग्राम में ही रहकर चुनाव प्रचार करेगी इसके साथ ही एक्टर मिथुन चक्रवती , अमित शाह आगामी दो दिन तक रोड शो करेगें , दुसरे चरण का चुनाव प्रचार मंगलवार को खत्म हो जायेगा – गुरुवार को मतदान पड़ेगें

 

केलाश विजयवर्गीय ने कहा – 6 साल से बंगाल से पहला चुनाव हुआ जिसमे हिंसा और धांधली की कम घटनायें हुई , दुसरे चरण में एसी 10 फीसदी घटनायें भी न हो , उसके लियें हमने चुनाव आयोग से असामाजिक तत्वों पर करवाई करने की मांग की |

 

 

 

 

 

राजस्थान के हालातों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग चिंतित,  गहलोत सरकार संवेदनहीन: डाॅ. सतीश पूनियां

प्रदेश में कानून व्यवस्था के हालात भयावह, मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग के बाद जरूरत हुई तो राष्ट्रपति, राज्यपाल का दरवाजा खटखटाएंगे: डाॅ. पूनियां

जयपुर, 27 मार्च। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने भाजपा के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा राज्य सरकार को जारी किए गए नोटिस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रदेश के बिगड़े हालातों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग चिंतित हैं, पर राज्य की कांग्रेस सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि कोटा जिले के सुकैत में 15 साल की एक दलित बालिका से 9 दिन तक 3 दर्जन से ज्यादा अपराधियों द्वारा बलात्कार किए जाने की घृणित घटना के बाद भाजपा का एक जांच दल पीड़िता से मिलने भेजा था, जिसमें पार्टी की राष्ट्रीय मंत्री डाॅ. अलका गुर्जर, प्रदेश मंत्री जितेंद्र गोठवाल, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अलका मूंदड़ा, पूर्व प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज शामिल थे। इन्होंने कांग्रेस सरकार के राज में अपराधियों द्वारा एक 15 साल की दलित लड़की के साथ हुए घिनौने अत्याचार और पुलिस की भूमिका पर रिपोर्ट दी।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि इस रिपोर्ट और प्रदेशभर में सामने आ रही घटनाओं के बाद प्रदेश भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें डाॅ. अलका गुर्जर,  सांसद दीया कुमारी, जसकौर मीणा, विधायक अनिता भदेल, डाॅ. अलका मूंदड़ा और लक्ष्मीकांत भारद्वाज को भेजा, उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा से मुलाकात कर उन्हें प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ घट रही घटनाओं से अवगत करवाया, इस पर संज्ञान लेने का आग्रह किया।

रेखा शर्मा ने घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वे खुद 6 अप्रैल को राजस्थान का दौरा करेंगी और डीजीपी और मुख्य सचिव से रिपोर्ट लेंगी, आवश्यकता हुई तो पीड़ितों से मुलाकात करेंगी। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के वरिष्ठ सदस्य जस्टिस पी.सी. पंत से भी मुलाकात की, उन्हें भी राजस्थान की परिस्थितियों से अवगत करवाकर यहां घट रही प्रमुख घटनाओं का ब्यौरा दिया और संज्ञान लेने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने राज्य सरकार के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि कांग्रेस राज में प्रदेश के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। महिलाओं, छोटी बच्चियों, दलितों पर अत्याचार की शर्मनाक घटनाएं बेतहाशा बढ़ रही हैं। कई शहरों में व्यापारियों की हत्या व लूट जैसी गंभीर अपराध घटित हो रही हैं। प्रदेश की जनता खुद को डरा हुआ महसूस कर रही है, अपराधियों के हौसले बुलंद है, सरकार इन पर अंकुश लगाना तो दूर, एक पुलिस अधिकारी, जिसने डीसीपी के आॅफिस में बलात्कार पीड़ित महिला के साथ रेप किया, उसको सरकार सदन में बयान देकर बर्खास्त करने की बात कहती है, किंतु सदन के बाहर उसी आरोपी अधिकारी को आवश्यक सेवानिवृत्ति देकर पुरस्कृत कर देती है।

 

 

डाॅ. पूनियां ने कहा है कि भाजपा सड़क से सदन तक इन मुद्दों को उठा रही है, रोज जनता पर हो रहे अत्याचार की घटनाओं पर भाजपा चुप नहीं रहेगी, सरकार ने कानून व्यवस्था नहीं सुधारी तो लोगों की जान-माल की सुरक्षा और बहन-बेटियों पर हो रहे अत्याचार की घटनाओं पर राज्यपाल और राष्ट्रपति से मिलकर उनसे दखल का आग्रह करेंगे।

Lok Sabha Passes Bill to Enhance Delhi LG’s Powers – Or Is BJP Taking Unconstitutional Control of Delhi?

Delhi v/s LG 

 

The Lok Sabha has passed the Government of National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2021 to enhance the powers of Lieutenant Governor of Delhi. The Bill amends the GNCT of Delhi Act, 1991, a legislation that provides framework for functioning of the (LG). Delhi Legislative Assembly and re-defines Delhi Government as the Lieutenant Governor It also provides that the opinion of the LG “shall be obtained on all such matters as may be specified by the LG, before taking any executive action on decisions of the Council of Ministers.

The Bill has been perceived as an attempt to circumvent the interpretation made by the Supreme Court in the Delhi v. LG case, holding that the LG is an administrative head in the limited sense” and that he is “bound by the aid and advise” of the Council of Ministers of Delhi Government, except in matters of land, police and public order. Many members apprehend that the Bill will subvert the elected Government of Delhi from functioning autonomously and will affect cooperative federalism.

Salient features of the Bill –

 

The Bill curbs the Delhi Assembly’s power to conduct its proceedings as per the rules of procedure made by it. It provides that the Rules made by the Delhi Legislative Assembly to regulate the procedure and conduct of business in the Assembly must be consistent with the Rules of Procedure and Conduct of Business in the Lok Sabha.

The Bill also prohibits the Legislative Assembly from making any rule to enable itself or its Committees to:

  • consider the matters of day-to-day administration of the NCT of Delhi and
  • conduct any inquiry in relation to administrative decisions. Further, any provision in force having the above said effect will be void. This means that the Executive will not be accountable to the Legislature in Delhi.

Further, the Bill provides that the opinion of the LG must be obtained before taking any executive action on decisions of Delhi Government, on such matters as may be specified by the LG.

Comparing Bill with Supreme Court judgment

 

This last leg of the Bill, requiring the Government to mandatorily seek the Lieutenant Governor’s on the matters so specified by him may be contrasted with the observations made by the Supreme Court in GNCT of Delhi v. Union of India & Anr. (commonly known as Delhi v. LG case).

(Left) Delhi CM Arvind Kejriwal (Right) Anil Baijal, Lieutenant Governor Delhi

Delineating the boundaries of power between the Lieutenant-Governor and Delhi Government in the said judgment, the Supreme Court had held that the LG cannot interfere in each and every decision of the Delhi Government, and that the LG is bound by the aid and advise of the council of ministers of Delhi Government, except in matters of land, police and public order. The Constitution Bench comprising Chief Justice Dipak Misra, Justice A.K. Sikri, Justice A.M Khanwilkar, Justice D Y Chandrachud and Justice Ashok Bhushan had ruled that “LG is an administrative head in the limited sense, and is not a Governor. He is bound by the aid and advise of NCT Government in areas other than those exempted”,

The Top Court observed that the elected representatives and the Council of Ministers of Delhi, being accountable to the voters of Delhi, must have the appropriate powers so as to perform their functions effectively and efficiently. It was held that the Parliamentary form of government is based on principle of “collective responsibility of the cabinet.

“If a well deliberated legitimate decision of the Council of Ministers is not given effect to due to an attitude to differ on the part of the Lieutenant Governor, then the concept of collective responsibility would stand negated,” the Supreme Court had held.

The Constitution bench added that the real purpose behind the Constitution (Sixty-ninth Amendment) Act, 1991, which inserted Section 239AA (Special provisions with respect to Delhi) and paved way for setting up an elected Government in the Union Territory was “to establish a democratic setup and representative form of government wherein the majority has a right to embody their opinion in laws and policies pertaining to the NCT of Delhi subject to the limitations imposed by the Constitution.”

 

 S – Digpu news network