केन्द्र सरकार के तेवर नहीं पड़े नरम, किसान भी अपनी मांग पर अड़े

30 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन केन्द्र सरकार और किसान दोनों के तेवर अभी नरम नहीं पड़े है और दोनों किसी भी कीमत पर झुकने के लिए तैयार नहीं है। 30 दिन में लगभग केन्द्र और आंदोलनकारी किसान संगठन के बीच 5 बार वार्ता हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। दोनों ही एक दूसरे से वार्ता करने के लिए तैयार लेकिन इसके बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हो रहा है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है 29 दिसंबर यानि कल 7वें दौर की बातचीत होगी जिसमें अगर दोनों के बीच सहमति बनती है तो कुछ हल जरूर निकल सकता है। हालांकि दोनों पक्ष अभी भी अपने पुराने रुख पर अड़े हुए हैं और ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार और किसानों के बीच बात कैसे होगी।

किसान संगठन लगातार केन्द्र सरकार से तीनों कृषि कानून रद्द करने की प्रक्रिया पर सबसे पहले चर्चा हो, MSP की कानूनी गारंटी की प्रक्रिया और प्रावधान पर बात हो, पराली जलाने पर दंड के प्रावधानों पर उनकी मांगे मानने पर ही आंदोलन खत्म करने की बात पर अड़े है अगर ऐसा नहीं होता है यह आंदोलन जारी रहेगा।

 

29 दिसंबर को बातचीत करने से पहले आज किसानों की चिट्ठी पर जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्रियों की बैठक हो सकती है लेकिन सरकार के रूख को देखकर लग रहा है कि वह किसानों के आगे झुकेगी नहीं। पिछले कई दिनों से देश के कई राज्यों से किसान संगठन दिल्ली जा रहे है और सिंधु बॉर्डर पर किसानों का साथ देने की बात कह रहे है।

इस आंदोलन के कारण कई किसानों की सर्दी के कारण जान चली गयी है तो कई किसानों पर कोरोना का भी खतरा मंडराने लगा है। किसान जिस तहर से अपनी मांगो को लेकर आर—पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है क्योंकि आजादी के बाद से अब तक किसानों का भला किसी भी पार्टी ने नहीं किया जबकि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड़ी खेती को माना जाता है फिर भी किसानों को आज सड़कों पर उतरकर अपने हक की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

 

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