” चंद्र शेखर आज़ाद ” ( भीम आर्मी ) दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में शामिल – जानें ख़ास रिपोर्ट , जमीन से आसमां तक का सफ़र

Chandra Shekhar Azad of Bhim Army was included in the list of 100 influential people by

Time magazine –

 

भीम आर्मी के चंद्र शेखर आज़ाद को टाइम मैगजीन ने 100 प्रभावशाली लोगों की सूचीं में शामिल किया –

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्र शेखर आज़ाद उर्फ़ ” रावण ” को अंतरराष्टीय मैगजीन ” टाइम ” ने 100 दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया हैं यह चंद्र शेखर आज़ाद और पूरी वंचित जमात के लियें यह गर्व की बात हैं चंद शेखर जो अभी 34 वर्ष के है के संघर्ष के के दम आज वह दुनिया 100 प्रभावशाली लोगों की सूचि में शामिल हैं |

चंद्र शेखर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं स्थानीय गाँव में जहाँ दलित समाज के युवाओं के साथ राजपुत और सवर्ण समाज के दबंगों द्वारा जो अत्याचार , मारपीट आदी घटनाओं को रोकने के लियें भीम आर्मी ” भारत एकता मिशन ” के नाम से यह संगठन सामने आया था और साहरनपुर जातीय हिंसा में चंद्र शेखर आज़ाद का नाम देश के सामने आया था उसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था उसके बाद चंद्रशेखर के अन्य साथी कमल वालिया सहित अन्य भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने संगठन के कमान संभाली थी  |

 

 

 

 

चंद्र शेखर आज़ाद अपना आदर्श बाबा साहब अम्बेडकर और उसके बाद  डॉ अम्बेडकर के सपनों को जमीन तक उतारने का काम करने वाले मान्यवर कांशी राम को मानते हैं चंद्र शेखर ने अपने  संगठन को राजनीति रूप देने के उदेश्य से राजनीति पार्टी ” आज़ाद समाज पार्टी ” भी मार्च 2020 में बनाई हैं अब भीम आर्मी व् आज़ाद समाज पार्टी दोनों के संस्थापक चंद्र शेखर आज़ाद हैं दलित समाज में जहाँ भी कहीं जातीय हिंसा होती हैं भीम आर्मी संगठन  पीड़ित के पक्ष में अपनी आजाज उठाते हैं और प्रशासन से कार्यवाही की मांग करते हैं |

टाइम मैगजीन ने अपने आर्टिकल में लिखा हैं चंद्र शेखर आज़ाद व् उनका संगठन भीम आर्मी जहाँ भी जातीय हिंसा होती हैं दलितों के पक्ष में अपनी आवाज़ पीड़ित के पक्ष में उठाते हैं और यह युवाओं का संगठन हैं तो युवा अपनी मोटर साइकिलो के खाफिलें के साथ आंदोलन करते हैं |

आज जिस प्रकार चंद्र शेखर काम कर रहें हैं लगता है दलित समाज को एक लम्बे समय बाद अपना  लीडर मील रहा हैं नेता नहीं |

संविधान की प्रस्तावना से “समाजवाद व धर्मनिरपेक्ष” शब्द हटाया जाये – सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका

संविधान की प्रस्तावना से”समाजवाद व धर्मनिरपेक्ष” शब्द हटाया जाये’
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है किसी देश के लोग धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकते केवल सरकार ‘सेक्युलर’ हो सकती है 
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नई दिल्ली | जब से केंद्र में भाजपा की मोदी सरकार आई हैं सवर्ण समाज के लोग संविधान में वर्णीत मूल्यों को चुनोती दे रहें हैं जिसमे अधिकतर याचिका ख़ारिज भी हो रहीं हैं लेकिन हिन्दू राष्ट्र व् विवादित मनुवाद को मानने वाले लोग देश में कटर पंथी सोच को बढ़ावा देने में लगे हैं और वह भारत देश के संविधान में बदलाव करने की कोशिश विभिन्न तरिकों से करते रहते हैं जिसका ताजा उदाहरण देखने को मिल रहा हैं |
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है जिसमें संविधान की प्रस्तावना में बाद में जोड़े गए दो शब्द समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष को हटाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट घोषित करे कि प्रस्तावना में दिये गये समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा लोकतंत्र की प्रकृति बताते हैं और ये सरकार की संप्रभुता शक्तियों और कामकाज तक सीमित हैं, ये आम नागरिकों, राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनों पर लागू नहीं होता। इसके साथ ही याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29ए (5) में दिये गये शब्द समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष को भी रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 14,15 और 27 सरकार के धर्मनिरपेक्ष होने की बात करता है यानि सरकार किसी के साथ धर्म,भाषा,जाति,स्थान या वर्ण के आधार पर भेदभाव नहीं करेगी लेकिन अनुच्छेद 25 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है जिसमें व्यक्ति को अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ मानने और उसका प्रचार करने की आजादी है  कहा गया है कि लोग धर्मनिरपेक्ष नहीं होते, सरकार धर्मनिरपेक्ष होती है।
याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 में 15 जून 1989 को संशोधन कर जोड़ी गई  धारा 29ए (5) से भी सेकुलर और सोशलिस्ट शब्द हटाने की मांग है। यह याचिका तीन लोगों ने वकील विष्णु शंकर जैन के जरिये दाखिल की है। याचिकाकर्ता बलराम सिंह और करुणेश कुमार शुक्ला पेशे से वकील हैं।
याचिका में प्रस्तावना से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटाने की मांग करते हुए कहा गया है कि ये दोनों शब्द मूल संविधान में नहीं थे। इन्हें 42वें संविधान संशोधन के जरिये 3 जनवरी 1977 को जोड़ा गया। जब ये शब्द प्रस्तावना में जोड़े गए उस समय देश में आपातकाल लागू था। इस पर सदन में बहस नहीं हुई थी, ये बिना बहस के पास हो गया था। कहा गया है कि संविधान सभा के सदस्य केटी शाह ने तीन बार धर्मनिरपेक्ष (सेकुलर) शब्द को संविधान में जोड़ने का प्रस्ताव दिया था लेकिन तीनों बार संविधान सभा ने प्रस्ताव खारिज कर दिया था।

दलितों को भावनात्मक रूप से लुट रही है बसपा सुप्रीमो मायावती – आखिर क्यों जानें ख़ास

BSP supremo Mayawati is emotionally looting Dalits – why know special

जयपुर | बसपा सुप्रीमो मायावती आज अपना भव्य जन्मदिवस 64 वां बना रही है और इस दिन दलित समाज के ग़रीब मेहनत – मजदूरी करने वाले या कहे वो सम्मानीय स्वाभिमानी लोग विशेष रूप से  { चमार , वाल्मीकि, धोबी ,खटिक ,बलाई , बैरवा , रैगर , } समस्त वंचित वर्ग 15 जनवरी के दिन अपनी  कठोर मेहनत कर मामूली से कुछ रूपए कमाने वाले यह मेहनतकश लोग मायावती को चंदा देते है और इस ले लियें यह विशेष रूप से वर्ष भर पैसे एकत्रित करते है |

आख़िर यह वंचित वर्ग – इस दिन बसपा को चंदा क्यों देते है – 

बसपा के इतिहास को देखे तो आप को भारत के इतिहास के पन्ने भी पलटने होगे – गौरतलब है भारत में  वर्ण व्यवस्था थी जिसके चलते दलितों -शुद्रो की स्थिति मानवीय द्रष्टिकोण से बहुत ही दयनीय थी  – इस सामाजिक कुरूतियो को ख़त्म करने का प्रयास सर्व प्रथम महात्मा बुद्ध ने सामाजिक द्रष्टिकोण से किया जिसके बाद ” भारत रत्न डॉ बाबा साहब अम्बेडकर ” ने  दलितों – शुद्रो को सामाजिक ,आर्थिक , राजनेतिक क्षेत्र  में मुख्यरूप से वंचित वर्ग – महिलाओं के लियें काम किया जो की मील का पत्थर साबित हुआ ,  गौरतलब है डॉ बाबा साहब विद्वान व्यक्ति थे उनकी ख्याति विश्वभर में थी उन्होंने कई महत्पूर्ण आंदोलन तो इन वंचित वर्ग { दलितों – शुद्रो – महिलाओं } के लियें कियें ,

गोलमेज सम्मलेन में ब्रिटिश सरकार के समक्ष दलितों की छुआछूत , भेदभाव आदी समस्या से रूबरु कराया और कहा की यह वर्ग हिन्दू नहीं है क्योकिं जो सम्मान अन्य हिन्दू लोगों को मिलता है वही इस वर्ग की परछाई से भी अन्य हिन्दू लोग  नफरत करते है जिसके बाद आरक्षण का प्रावधान हुआ , जिसे भारत के संविधान में भी शामिल किया गया और वहा दलितों -शुद्रो को ” मूलनिवासी शब्द से वर्णित किया गया है |

कांशीराम का संघर्ष –

डॉ बाबा साहब के प्रयासों से कानूनी रूप से तो दलितों को संवेधानिक अधिकार प्राप्त हो गयें लेकिन सामाजिक रूप से दलितों की स्थिति में कुछ सुधार ख़ास नहीं हुआ और डॉ अम्बेडकर के मिशन को कांशीराम ने साइकिल से घूम-घूम कर आगे बढाया और उनका सपना था की इन शोषितों को एक दिन हुक्मरान बना के रहूँगा – जिसके लियें उन्होंने ” बहुजन समाज पार्टी ” बसपा का गठन किया और दलित महिला – मायावती को भारत के एक बड़े राज्य उत्त्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया वो भी चार बार – यह ताकत थी कांशीराम की |

मायावती – 

बसपा की स्थापना में काशीराम ने जो मेहनत की और दलित महिला मायावती को सूबे का चार बार मुख्यमंत्री बनाया आज वह मायावती कांशीराम के सपने को मतियामेल कर रही है आज मायावती ने कांशीराम , डॉ अम्बेडकर के सपनो को भुला कर मात्र एक सधे हुयें राजनेता के रूप में काम कर रही इसके कई उदहारण देखने को मिलते है आज दलितों पर कहीं हिंसा या दलितों महिला – बच्चियों पर बलात्कार जैसी घटना पर भी मायावती उनसे मिलने तक नहीं जाती जिसके कारण आज दलित वर्ग के लोग बसपा – मायावती से दूर हो रहे है यह स्थिति हो गई है दलितों की आयरन लेडी मायावती की – आज उन के समक्ष भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावन दलितों के बड़े नेता या यु कहे यूथ आइकोन के रूप में उभर रहे है |

राजस्थान में बसपा पर लगे है – दलाली के आरोप – 

राजस्थान में बसपा पार्टी को कांग्रेस की B पार्टी और बीजेपी के लियें वोट काटने वाली मशीन के रूप में देखा जाता है  आज राजस्थान में वह लोग जो कभी कांशीराम के साथ आंदोलन करते थे राजस्थान में विरोधी मोर्चा बना दिया है उनका कहना है की बसपा में आज दलितों को मात्र वोट बैंक के रूप में देखा जाता है राजस्थान में मायावती उत्तर प्रदेश से ही प्रभारी भेजती है तो विधानसभा चुनावों से पहले राजस्थान में आकर विधानसभा का टिकट मोटे पैसों में बाहरी प्रत्याशियों को कई करोड़ो में बेचते है आज राजस्थान में तो उत्तर प्रदेश से आकर लोग चुनाव लड़कर विधायक बन जाते है दलितों की वजह से और गरीब कार्यकर्ता बेचारे दरी उठाते रहे है हालिमें में राजस्थान में 6 बसपा विधायक या यो कहे बसपा के सभी विजेता 6 विधायक लगभग 7 लाख़ दलित वोटरों को धोखा देकर दलाली करते हुयें कांगेस में शामिल हो गयें – कहीं ना कहीं इन में मायावती की भी सहमती हो सकती है जिसके विरोध में बसपा के जमीनी कार्यकर्ता ओं ने बसपा प्रदेश अध्यक्ष सीताराम मेघवाल – रामजी गोतम नेशनल कोर्डिनेटर का काला मुहँ कर गधे पर बैठाकर विरोध प्रदर्शन किया था |

राजस्थान  में बसपा  के कार्यकर्ता लम्बे समय से उत्तर प्रदेश के लोगो का विरोध कर रहे है उनका कहना है की राजस्थान के जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहियें ताकि बसपा मजबूत हो सके |

story by – pawan  dev

jaipur { news team politico}

 

AJAK – डॉ बाबा साहब अम्बेडकर की 128 वीं जयंती – बड़े हर्ष व् धूमधाम से मनाई जायेगी

AJAK’s affection on the 128th birth anniversary of Dr. Babasaheb Ambedkar –

डॉ बाबा साहब अम्बेडकर  की 128 वीं जयंती  पर AJAK का स्नेह -मिलन समारोह  –

जयपुर | भारत के संविधान निर्माता – भारत रत्न डॉ . भीम राव अम्बेडकर की जयंती पर प्रत्येक वर्ष के  भांति इस वर्ष भीअजाक { डा. अम्बेडकर अनुसूचित जाति अधिकारी कर्मचारी एसोसिएशन } संस्था द्वारा बड़े स्तर पर 14 अप्रैल 19 को राजस्थान विधानसभा के पास स्थित यूथ होस्टल में मनाया जायेगा |

संस्था का उदेश्य –

AJAK  –  भारत के अनुसूचित जाति अधिकारी कर्मचारी एसोसिएशन के लोगों को एकजुट कर भारत के संविधान में वर्णित मूल्यों के आधार पर  सशक्त देश का निर्माण , डॉ बाबा साहब अम्बेडकर के विचारो व् उनके द्वारा दलित – गरीब वंचित ,शोषित महिला वर्ग को दिये गए अधिकारों को जन – जन तक पंहुचा कर अन्तिम छोर पर खड़े व्यक्ति के अधिकारों को सुनिश्चित कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है   |

मुख्य कार्यक्रम –

जयपुर स्थित यूथ होस्टल में { 14 अप्रैल 19 } सांय 6 बजें  बाबा साहब डॉ अम्बेडकर की वंदना की जायेगी जिसके बाद केंडल मार्च , आतिशबाज़ी , बाबा साहब पर चित्रकला व् निबंध प्रतियोगिता , भीम डिनर आदी कार्यक्रम किये जायेंगे |

इस कार्यक्रम की अधिक जानकारी के लियें –  सम्पर्क करें –

AJAK मीडिया प्रवक्ता – GL VARMA : 9829688869

 

 

 

https://politico24x7.com/india-closed-tampering-of-constitution-and-reservation-is-not-tolerated-pawan-dev/

जिग्नेश मेवाणी को पुलिस ने किया गिरफ्तार – जिग्नेश ने कहा –

जयपुर | दलित युवा नेता  जिग्नेश मेवाणी को आज जयपुर एयरपोर्ट पर  पुलिस ने  गिरफ्तार कर लिया |  पुलिस ने  जिग्नेश को 
करीब 4 घंटे  के बैठाया रखा | एक बार तो जिग्नेश मेवाणी समझ नहीं पाए आखिर हो क्या रहा है  – गोरतलब है की जिग्नेश डॉ . बाबा साहब की जयंती के उपलक्ष्य में मेड़ता में हो रहे कार्यक्रम में शिरकत होने नागौर के मेड़ता जा रहे थे  , जिग्नेश जेसे ही गाडी में बेठने लगे सादा वर्दी में पुलिस कर्मी ने उन्हें नागौर में प्रवेश करने से रोकने का फरमान दे दिया , जिस पर जिग्नेश से बल पूर्वक साइन करने  का दबाब पुलिस बनाने लगी. जिसको लेकर पुलिस व् जिग्नेश में तीखी बेहस शुरू हो गई |  करीब 4 घंटे तक पुलिस निगरानी में रखने के बाद जिग्नेश मेवाणी को वापस गुजरात के लिए रवाना कर दिया गया | 
जिग्नेश मेवाणी की यात्रा को देखते हुए शनिवार रात से ही मेड़ता में धारा 144 लागू करने के साथ ही उनके नागौर जिले में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। नागौर के पुलिस अधीक्षक पारिस देशमुख के निर्देश पर पुलिस उप अधीक्षक विघाप्रकाश चौधरी के नेतृत्व में सादी वर्दी में पुलिसकर्मी जयपुर के सांगानेर हवाई अड्डे पर पहुंच गए थे। मेवाणी जैसे ही हवाई अड्डे के बाहर आकर मेड़ता जाने के लिए गाड़ी में बैठे तो उन्हे नागौर जिले के प्रवेश नहीं करने को लेकर पाबंद करने का नोटिश थमा दिया गया। काफी देर तक जिग्नेश और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस होती रही। मामला बढ़ने की आशंका को देखते हुए आस पास के पुलिस थानों से अतिरिक्त पुलिस बल मंगवा लिया गया। इस बीच, केशकला बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष गोपाल सिंह केसावत सहित कई लोग जिग्नेश मेवाणी से मिलने हवाई अड्डे पर पहुंच गए। पुलिस ने यहां केसावत को गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि आंबेडकर जयंती समारोह के दौरान माहौल बिगड़ सकता है। इस कारण से पुलिस ने जिग्नेश को कार्यक्रम स्थल पर जाने से रोकने के साथ ही धारा 144 लागू कर दी, जिससे भीड़ एकत्रित नहीं हो सके।
मेवाणी ने हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि उन्हें बेवजह जबर्दस्ती रोका गया है। बंदी बनाने का प्रयास किया गया। राज्य सरकार उनके यहां आने से डर गई है। जिग्नेश ने ट्वीट किया है कि मैं जयपुर एयरपोर्ट पर उतरा तो कुछ पुलिस अधिकारी एक ऐसे पत्र पर हस्तारक्ष कराने लगे थे, जिसमें लिखा था कि नागौर में एमएलए जिग्नेश के प्रवेश पर पाबंदी है। मैं एक जनसभा संबोधित करने जा रहा था, जिसमें भारतीय संविधान और डॉ. आंबेडकर के बारे में संबोधन था। उन्होंने कहा कि मुझे रोकने के परिणाम भुगतने होंगे।
मेवाणी ने ट्वीट करते हुए यह आरोप लगाया है और राज्य सरकार से सवाल किया है कि अगर विधायक के साथ ऐसा किया गया है तो जनता के साथ क्या किया जाता होगा। गौरतलब है कि मेवाणी गुजरात के वडगाम से विधायक हैं।
मेवाणी ने लिखा है कि वह अहमदाबाद से जयपुर फ्लाइट से पहुंचे ही थे कि एयरपोर्ट पर ही उन्हें रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनसे एक पत्र पर दस्तखत कराए जिस पर लिखा था कि वह राजस्थान के नागौर जिले में दाखिल नहीं हो सकते। मेवाणी ने बताया है कि वह संविधान और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर पर बात करने वहां गए थे। 
इसके कुछ ही देर बाद उनसे कहा गया है कि वह जयपुर में भी नहीं जा सकते। उन्होंने ट्वीट किया- ‘अब डीसीपी कह रहे हैं कि मैं जयपुर में भी नहीं घूम सकता और वह मुझसे अहमदाबाद वापस जाने के लिए कह रहे हैं। मुझे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की इजाजत भी नहीं मिली है। यह हैरान करने वाला है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेआखिर तोड़ी चुप्पी –

बाबा साहेब ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को, लोकतांत्रिक बने रहने का रास्ता दिखाया था- मोदी

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर जी की 127 वीं जयंती की पूर्व संध्या देश को ” डॉक्टर आंबेडकर नेशनल मेमोरियल के तौर पर एक अनमोल उपहार दिया |

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की –

आज बाबा साहेब की स्मृति में बने इस नेशनल मेमोरियल को राष्ट्र को समर्पित करते हुए, मैं खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार कठुआ और उन्नाव गैंगरेप मामले में चुप्पी तोड़ दी है. गैंगरेप की दोनों घटनाओँ पर पीएम मोदी ने कहा कि ऐसी घटनाओँ से पूरा देश शर्मसार है. बेटियों को न्याय मिलकर रहेगा. न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है.

पीएम मोदी नई दिल्ली में डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक के लोकार्पण के अवसर पर बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि जिस तरह की घटनाएं हमने बीते दिनों में देखीं हैं, वो सामाजिक न्याय की अवधारणा को चुनौती देती हैं. पिछले 2 दिनो से जो घटनायें चर्चा में हैं वो निश्चित रूप से किसी भी सभ्य समाज के लिये शर्मनाक हैं. एक समाज के रूप में, एक देश के रूप में हम सब इसके लिए शर्मसार हैं|

खास नज़र –

  • इस स्मारक को एक किताब की शक्ल में तैयार किया गया है। जो की  हमारे देश का वो संविधान, जिसके शिल्पकार डॉक्टर आंबेडकर थे।

  • म्यूजियम को पूर्ण रूप से आधुनिक तकनीक व् डॉ बाबा साहब के जीवन के अहम पड़ावों को दिखाया गया है

-बाबा साहेब ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को, लोकतांत्रिक बने रहने का रास्ता दिखाया था।

 

 

 

 

 

 

जयपुर में आयोजित होगा – भीम बिजनेस एक्सपो

सामाजिक कुरीतियों और बंदिशों को दर किनार करते  हुए बिजनेस क्षेत्र में नए आयाम स्थापित  करता  – भीम बिजनेस एक्सपो

 समय बड़ा परिवर्तनशील है डॉ बाबा साहब आंबेडकर के अथक प्रयास से आज बहुजन समाज सामाजिक रूप से सभी क्षेत्रो में अपनी मुख्य भूमिका निभा रहा है और इसी कड़ी में ” भीम बिजनेस एक्सपो ” का नाम भी जुड़ने जा रहा है |

जी हाँ  हम बात कर रहे है जयपुर में आयोजित होने वाले  ” भीम बिजनेस एक्सपो ” की  जो 23 से 25 दिसम्बर 2017 को जयपुर में आंबेडकर सर्किल यूथ होस्टल में आयोजित होने जा रहा है |amzn_assoc_ad_type =”responsive_search_widget”; amzn_assoc_tracking_id =”politico24x7-21″; amzn_assoc_marketplace =”amazon”; amzn_assoc_region =”IN”; amzn_assoc_placement =””; amzn_assoc_search_type = “search_widget”;amzn_assoc_width =”auto”; amzn_assoc_height =”auto”; amzn_assoc_default_search_category =”Books”; amzn_assoc_default_search_key =”baba saheb ambedkar”;amzn_assoc_theme =”light”; amzn_assoc_bg_color =”FFFFFF”; //z-in.amazon-adsystem.com/widgets/q?ServiceVersion=20070822&Operation=GetScript&ID=OneJS&WS=1&Marketplace=IN

यह बिजनेस एक्सपो दलित समाज के छोटे -बड़े उधमियो को एक नेटवर्किंग प्लेटफार्म उपलब्ध करवायेगा जिसके माध्यम से सभी उधमी अपने  बिजनेस को बढ़ा सकते है |

डॉ .बाबा साहब आंबेडकर जी ने सामाजिक रूप से हासिये पर पड़े दलित समाज को मुख्य धारा में लाने और सामाजिक ताने -बाने को व्यवस्थित करने हेतु भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की थी  जिसके परिणाम स्वरूप आज दलित समाज अपने को सामाजिक रूप से मुख्यधारा में लाने हेतु प्रयासरत है  इसमें भीम बिजनेस एक्सपो मुख्य भूमिका निभा सकता है |

डॉ बाबा साहेब का आर्थिक सपना था कि उनकी कौम के दबे कुचले लोग व्यवसाय क्षेत्र में उतरे , न्याय संगत तरीके से धन कमा कर पूंजी पति बने और आर्थिक आजादी हासिल करे ,बाबा साहब महान अर्थशास्त्री थे | बाबा साहब कहते थे की आर्थिक समर्धि  के बिना हमारा उद्दार  नहीं हो सकता है | दलित समाज के छोटे बड़े उधमी आज बिना आरक्षण  तथा सामाजिक भेदभाव का मुकाबला करते हुए हर   बिजनेस में आगे बढ़ रहे है | और अब इस ही कड़ी में दलित वर्ग के लघु ,मध्यम, व् बड़े उद्योग का ” भीम  बिजनेस एक्सपो जयपुर में आयोजित  किया जा रहा है|

 

ज़ेल जा सकते है आप नेता कुमार विश्वास –

यूपी के बुलंदशहर में कुमार विश्वास उर्फ मनीष शर्मा पर बाबा साहब पर टिप्पणी करने पर हुआ मुकदमा दर्ज-

आप नेता कुमार विश्वास उर्फ मनीष शर्मा ने सविंधान निर्माता, भारत रत्न बाबा साहेब डॉ०भीमराव अंबेडकर जी पर आपत्ति जनक व जाति सूचक टिप्पणी कर बुरे फ़स गए है | राजस्थान में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कुमार विश्वास ने कहा था की   “एक आदमी आरक्षण के नाम पर आंदोलन कर गया था एक आदमी (अम्बेडकर) यहाँ  आकर जाति का बीज बो गया था ।
उससे पहले यहां जाति वाद नहीं था । सब मिलकर रहते थे ।  आप नेता कुमार विश्वास ने कहा मेरे गाँव में  एक मेहतरानी मेरी दादी के साथ ब्याह कर साथ आई थी  वह मेहतरानी हमारे घर की बहू को घूंघट न करने पर हजार गालियां सुनाकर चली जाती थी और हम उसे कुछ नहीं कहते थे । यानी इतनी इज्जत थी उसकी। ”

कुमार विश्वास की कही हुई बातो से सम्पूर्ण दलित समुदाय और विभिन्न सामाजिक संघटनो ने आपत्ति दर्ज कराई है | उ

नका का कहना है की आप नेता कुमार विश्वास सस्ती लोकप्रियता के लिए डॉ बाबा  साहब जैसे महापुरुष पर ऐसे अपशब्द का प्रयोग कर गठिया राजनीती  कर रहे है आज बुलंदशहर में कुमार विश्वास उर्फ मनीष शर्मा पर बाबा साहब पर टिप्पणी करने पर मुकदमा दर्ज कराया है

सामाजिक कार्यकर्त्ता कपिल गोतम प्रेम ने कहा है की – डॉ बाबा साहब आंबेडकर पर टिप्पणी कर आप नेता कुमार विश्वास  ने अपने कुंठित मानसिकता का परिचय दिया है , ऐसे असामाजिक तत्व ( कुमार विश्वास  ) को ज्ञात नहीं है की आज जो वह सस्ती लोकप्रियता के लिए महान सामाजिक ,देश व् संविधान निर्माता व् बाबा साहब को लेकर जाती -सूचक शब्दों का प्रयोग कर रहे है  इससे यह पता लगता है की कुमार विश्वास भारत देश की सांस्करतिक विरासत से अंजान है , उन्हें ( कुमार विश्वास ) बाबा साहब और देश के बारे में पढ़ना चाहिए और अपने ज्ञान के स्तर में बढ़ना चाहिए |

डॉ बाबा साहब आंबेडकर को बोध धर्म की दीक्षा देने वाले गुरु भन्ते प्रज्ञानंद नहीं रहे |

डॉ . बाबा साहब आंबेडकर को बोध धर्म की दीक्षा देने वाले गुरु भन्ते प्रज्ञानंद लम्बी बीमारी के बाद उनका परि

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निर्वाण आज प्रातः 11 बजे किंग ज्योर्ज मेडीकल युनिवर्सिर्ट (के.जी.एम.यू.) लखनऊ में हो गया है उनका पार्थिव शरीर आज रिसालदार बुद्धविहार, लखनऊ में दर्शनार्थ रखा गया है ।

गुरु भन्ते प्रज्ञानंद जी ने  14 अक्टूबर, 1956  को डॉ .बाबा साहब आंबेडकर को  धम्म-दीक्षा दी थी

14 अक्टूबर, 1956 को डॉ बाबा साहेब आंबेडकर ने हिंदू धर्म की कुरीतियों व्  जात -पात

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का विरोध करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया था। नागपुर स्थित दीक्षाभूमि में बौद्ध भिक्षु चंद्रमणि और प्रज्ञानंद समेत सात अन्य बौद्ध भिक्षुओं ने बाबा साहब आंबेडकर को  दीक्षा दिलायी थी। इन सभी में अब मात्र प्रज्ञानंद ही जीवित थे जो की 90 साल के थे , यह लम्बे समय से बीमार  चल रहे थे |

कोन थे ज्ञानंद-

मूल रूप से श्रीलंका के निवासी प्रज्ञानंद लखनऊ के रिसालदार पार्क के बुद्ध विहार में रह रहे थे। बाबा साहेब ने 1948 और 1951 में लखनऊ का दौरा किया था। इसी दौरान उन्होंने प्रज्ञानंद से बौद्ध धर्म अपनाने की इच्छा भी जाहिर की थी। बाद में उन्होंने नागपुर जाकर अपनी पत्नी के साथ बौद्ध धर्म को अपना लिया था।