” चंद्र शेखर आज़ाद ” ( भीम आर्मी ) दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में शामिल – जानें ख़ास रिपोर्ट , जमीन से आसमां तक का सफ़र

Chandra Shekhar Azad of Bhim Army was included in the list of 100 influential people by

Time magazine –

 

भीम आर्मी के चंद्र शेखर आज़ाद को टाइम मैगजीन ने 100 प्रभावशाली लोगों की सूचीं में शामिल किया –

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्र शेखर आज़ाद उर्फ़ ” रावण ” को अंतरराष्टीय मैगजीन ” टाइम ” ने 100 दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया हैं यह चंद्र शेखर आज़ाद और पूरी वंचित जमात के लियें यह गर्व की बात हैं चंद शेखर जो अभी 34 वर्ष के है के संघर्ष के के दम आज वह दुनिया 100 प्रभावशाली लोगों की सूचि में शामिल हैं |

चंद्र शेखर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं स्थानीय गाँव में जहाँ दलित समाज के युवाओं के साथ राजपुत और सवर्ण समाज के दबंगों द्वारा जो अत्याचार , मारपीट आदी घटनाओं को रोकने के लियें भीम आर्मी ” भारत एकता मिशन ” के नाम से यह संगठन सामने आया था और साहरनपुर जातीय हिंसा में चंद्र शेखर आज़ाद का नाम देश के सामने आया था उसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था उसके बाद चंद्रशेखर के अन्य साथी कमल वालिया सहित अन्य भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने संगठन के कमान संभाली थी  |

 

 

 

 

चंद्र शेखर आज़ाद अपना आदर्श बाबा साहब अम्बेडकर और उसके बाद  डॉ अम्बेडकर के सपनों को जमीन तक उतारने का काम करने वाले मान्यवर कांशी राम को मानते हैं चंद्र शेखर ने अपने  संगठन को राजनीति रूप देने के उदेश्य से राजनीति पार्टी ” आज़ाद समाज पार्टी ” भी मार्च 2020 में बनाई हैं अब भीम आर्मी व् आज़ाद समाज पार्टी दोनों के संस्थापक चंद्र शेखर आज़ाद हैं दलित समाज में जहाँ भी कहीं जातीय हिंसा होती हैं भीम आर्मी संगठन  पीड़ित के पक्ष में अपनी आजाज उठाते हैं और प्रशासन से कार्यवाही की मांग करते हैं |

टाइम मैगजीन ने अपने आर्टिकल में लिखा हैं चंद्र शेखर आज़ाद व् उनका संगठन भीम आर्मी जहाँ भी जातीय हिंसा होती हैं दलितों के पक्ष में अपनी आवाज़ पीड़ित के पक्ष में उठाते हैं और यह युवाओं का संगठन हैं तो युवा अपनी मोटर साइकिलो के खाफिलें के साथ आंदोलन करते हैं |

आज जिस प्रकार चंद्र शेखर काम कर रहें हैं लगता है दलित समाज को एक लम्बे समय बाद अपना  लीडर मील रहा हैं नेता नहीं |

आपका ज़मीर आख़िर जिन्दा क्यों है – 21 वीं सदीं में इंसान मलमूत्र में अपना मुहँ दे रहा है

Why is your conscience alive – in the 21st century man is giving his mouth in excreta

राजस्थान . जयपुर | भारत देश आज परमाणु सम्पन्न है और विश्व पटल पर अपनी एक साख रखता है लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी कुछ ऐसे अमानवीय द्रश्य हमारी आखों के सामने आ जाते है की हम अपने आप से ही कई सवाल कर बैठते थे आख़िर ऐसा क्यों – आज़ादी के 70 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी हमारे समाज के कर्णधार समाज ” वाल्मीकि ” जिन्हें अलग – अलग राज्यों में अलग -अलग नाम से जानते है जैसे राजस्थान में में वाल्मीकि .भंगी .मेहतर .झडमाली . हलालखोर . चुह्दा ,राउत ,हेमा . डोम .डोमर .हाड़ी ,लालबेग आदी तमाम नाम लेकिन इनका काम सिर्फ – सफाई करना है चाहे रोड पर हो या गटर – सीवरेज |

आज़ादी के बाद इस वंचित समाज को क्या मिला –

भारत देश 15 अगस्त 1947 में आज़ाद हो गया देश की सत्ता अब देश के नेताओं के पास आ गई देश के पहले प्रधानमंत्री बनने का गौरव पंडित जवाहर लाल नेहरु को मिला ,उनका पहला देश को संबोधित करने वाला भाषाण एक विजनरी था जिसकी चर्चा आज भी होती है | देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी और 26 जनवरी 1950 को डॉ बाबा साहब अम्बेडकर के अध्यक्ष्यता में ” भारत के संविधान का निर्माण हुआ और लागू हुआ जिसके अंतर्गत देश के सभी व्यक्तियों को सामाजिक ,आर्थिक और राजनेतिक न्याय ,विचार अभिव्यति , धर्म , प्रतिष्टा ,अवसर की समानता आदी अधिकार मिले लेकिन यह वाल्मीकि समाज के लियें उधार सा प्रतीत हो रहा है आज भी |

sabir kureshi pic – shashtri nagar . jaipur .

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भारी – सामाजिक व्यवस्था

भारत देश में एक अभिशाप व्यवस्था है जिसे वर्ण व्यवस्था कहते है इस व्यवस्था ने वंचित वर्ग की जातियों को अद्रश्य गुलामी की बेड़ियों में इस कदर जकड़ रखा हैं की संवेधानिक रूप से SC जातिया जिन्हें अनुसूचित जातियों की श्रेणी में रखा गया है इनका जीवन आज भी चौनोतीपूर्ण है जैसे – वाल्मीकि , रेगर , बलाई ,चमार ,मेघवाल ,खटिक, बैरवा ,आदी इन जातियों का जीवन आज भी संवेधानिक अधिकार होने के बावजूद भी प्रतिदिन अपने स्वाभिमान के लियें संघर्ष करती नज़र आती है आज भी इन्हें अपनी शादी में घोड़ी पर नहीं बैठने दिया जाता , मूंछ नहीं रखने दिया जाता , आज भी इन जातियों को छुआ -छुत का शिकार होना पड़ता है जहाँ ग्रामीण क्षेत्रो में यह प्रत्यश होता है तो शहरी क्षेत्रो शाररिक कम और मानसिक छुआ छुत अधिक होने लगी है जबकि सरकार ने इन वंचित समाज की सुरक्षा के लियें ” SC/ST ACT – 1989 बना रखा है फिर भी असामाजिक लोगों द्वारा इन गरीब वंचित लोगो का शोषण करते रहते है जैसे – राजस्थान में डांगावास कांड , नागौर – पेचकस कांड ,अलवर कांड ,सीकर आदी तमाम जघन्य अपराध राजस्थान के इतिहास में दर्ज है – वैसे राजस्थान दलितों पर हत्याचार के मामले में प्रथम स्थान पर है जो की राज्य के लियें – शर्मनाक है |

सीवरेज वर्कर को लेकर लम्बे समय से काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता हेमलता कांसोटिया ने कहा की –

आज भी वाल्मीकि समाज के लोगों को समाज में सम्मानजनक काम अन्य जातियों द्वारा नहीं करने दिया जाता उनका विभिन्न तरिकों से बहिष्कार किया जाता हैं क्या आप ने अभी तक “वाल्मीकि मिष्ठान भण्डार , भंगी पवित्र भोजनालय , चमार फुटवियर , रेगर महाविधालय देखा है नहीं देखा होगा जबकि – शर्मा पवित्र भोजनालय आप ने अधिकतर हर जगह देखा होगा , शर्मा फुटवियर भी नहीं देखा होगा जबकि यही अंतर है उच्च जाती व् दलित जातियों में |

जब व्यक्ति को उचित काम नहीं मिलेगा तो वह मज़बूरी के कारण मलमूत्र में मुहँ देने को मजबूर है क्योकि उसे अपने बच्चे ,परिवार जो पालना है

उच्च न्यायलय ने सीवरेज वर्कर को लेकर 2005 में में दिशा – निर्देश दियें थे की सीवरेज से संबंधित सभी कार्य मशीनों के माध्यम से होगा लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आया |

में { हेमलता कांसोटिया } ने 2007 में दिल्ली उच्च न्यायलय में सीवरेज वर्कर को लेकर जनहित याचिका डाली गई जिसके परिणाम स्वरूप 2008 में दिल्ली न्यायलय व् सर्वोच्च न्यायलय द्वारा ने सीवरेज लाइन में व्यक्ति को उतरने पर पाबंदी लगा दी गई और सभी राज्यों को आदेश प्रेषित कर दियें . लेकिन आज भी सीवरेज वर्कर की स्थिति वही है की उसे आज भी अन्य व्यक्तियों के मलमूत्र में मुहँ देना पड़ रहा है | अब तो राज्यों सरकारों को इस अमानवीय काम पर पूर्ण रूप से रोक लगाना चाहियें और साथ ही सीवरेज वर्कर को सभी जरुरी सुरक्षा उपकरण देकर मशीनों की सहायता से काम किया जायें |

गाँधी जी 150 वीं वर्ष जयंती और वाल्मीकि समाज –

महात्मा गांधी और दलित समाज –

आजादी के समय से पूर्व ही महात्मा गाँधी दलित समाज और विशेष वाल्मीकि समाज के उद्धार के लियें काम कर रहे थे और उस वक्त सम्पूर्ण देश व् कांग्रेस पार्टी में गाँधी का विशेष स्थान था लेकिन जमीनी स्तर पर जबकि लगभग 100 साल से अधिक समय बीत चूका है लेकिन इस दलित समाज का विकास नहीं हो पाया और यह समाज आज भी मलमूत्र में मुहँ देने को मजबूर है

अब देश महात्मा गांधी की वर्ष भर 150 वीं जयंती मना रही है तो क्या महात्मा गाँधी को आदर्श मानने वाले बड़े नेता प्रधानमंत्री मोदी ,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत क्या इन दलित समाज के लोगों को इस अमानवीय काम से दूर नहीं कर सकते क्या यह महात्मा गांधी व् डॉ अम्बेडकर को सच्चा सम्मान नहीं दे सकते

 

story by – pawan dev 

{ news team – politico }

उत्तर प्रदेश में उठी नए राज्य की मांग – बुद्धालैंड हो नया राज्य –

बुद्धालैंड ” राज्य के लिए सड़को पर जन सैलाब –

‘’पूर्वांचल सेना ने सड़क पर उतारा बुद्धालैंड जनांदोलन ” – अभियान तेज ,
बीस करोड़ की भारी आबादी वाले  प्रदेश में रहकर पूर्वांचल का विकास नहीं हो सकता, बुद्धालैंड प्रदेश बनाकर देश के सबसे पिछड़े हिस्से पूर्वी उत्तर प्रदेश का विकास किया जायेगा यह बाते पूर्वांचल सेना के अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप ने रानी लक्ष्मीबाई पार्क (नगर निगम) में बुद्धालैंड राज्य निर्माण को लेकर आयोजित प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कही I उन्होंने कहा की उत्तर प्रदेश का बटवारा होकर इस क्षेत्र को बहुत पहले अलग राज्य का दर्जा मिल जाना चाहिए था परन्तु साजिश के तहत  क्षेत्र को पिछड़ा बनाये रखने क लिए इसे अलग राज्य नहीं बनाया जा रहा I उन्होंने कहा पूर्वी उत्तर प्रदेश का यह क्षेत्र प्रतिभाओ , संसाधनों

 से भरपूर है और इनके उचित दोहन और नियोजन के लिए इसे अलग राज्य का दर्जा मिले बिना संभव नहीं है I उन्होंने कहा कि वुद्ध के रूप में यहाँ की सांस्कृतिक विरासत, दुनिया भर के लोगो की इस क्षेत्र में आने की चाहत और जन भावनाओ को देखते हुए जन जन को अलग राज्य आन्दोलन से जोड़ने के लिए “बुद्धालैंड” अलग राज्य का आन्दोलन छेडा गया है I उन्होंने कहा की समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय की आधारशिला पर जातिवाद , गरीबी, बेरोजगारी मुक्त बुद्धालैंड प्रदेश के निर्माण का हमारा लक्ष्य है जिसे लिए हम हर हाल में हासिल करेंगे
 पूर्वांचल समग्र विकास के लिए इसे अलग राज्य का दर्जा  दिलाने के लिए वर्ष 2006 से संघर्ष कर रही पूर्वांचल सेना ने अलग राज्य आदोलन को नए तेवर और नए कलेवर में शुरू करते हुए आज सड़को पर प्रदर्शन किया तथा अपनी मांगो से अवगत करते हुए नगर म

जिस्ट्रेट के माध्यम  से माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश व माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार को ज्ञापन भेजा I
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूर्वांचल सेना ने आज नार्मल ग्राउंड से पदयात्रा निकली जो बेतियाहाता, शास्त्री चौक, अम्बेडकर चौक इंदिरा बालविहार, कलेक्ट्रेट चौक होकर नगर निगम स्तिथ रानी लक्ष्मीबाई पार्क पहुची I
इस प्रदर्शन रैली में प्रमुख रूप से डा. डी के गौतम, भंते उत्तरानन्द, अयोद्ध्या प्रसाद, सु

नील कुमार, इंदु वर्मा, रणविजय,वसीम अहमद, राज कुमारी बौद्ध, उदय राज विध्यार्थी, कमलेश कुमार, अख्तर हुसैन, एडवोकेट अनिल कुमार, रविन्द्र कुमार, हितेश सिंह, धीरज कुमार भारती, विजय कपूर, योगेश चंद, आनंद प्रकाश राव, वेद प्रकाश, उमेश कुमार, विनोद वर्मा, वीरेन्द्र मौर्या, कृष्ण मुरारी, अमित सिंघानिया, सुनील चौहान, प्रणय कुमार श्रीवास्तव , सुधीर मोदनवाल,अमर सिंह पासवान समेतबुद्धालैंड के 27 जिलो से आये प्रतिनिधियों के साथ हजारो की संख्या में लोग उपस्थित रहे I
story – yogendr bodth 
gorakhapur { uttar pradesh } 
politico24x7.com / news 

आर्थिक समृद्धि की और ले जाता – भीम बिजनेस एक्सपो का भव्य आगाज

 “नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनो –    डॉ  बाबासाहेब अम्बेडकर ” 

             के कथन को साकार करते हुवे  –  भीम  बिजनेस एक्सपो  

समय बड़ा परिवर्तनशील है डॉ बाबा साहब आंबेडकर के अथक प्रयास से आज बहुजन समाज सामाजिक रूप से सभी क्षेत्रो में अपनी मुख्य भूमिका निभा रहा है और इसी का ख़ास नजारा  ” भीम बिजनेस एक्सपो ” में देखने को मिल रहा है  |

जी हाँ  हम बात कर रहे है जयपुर में आयोजित हो रहे   ” भीम बिजनेस एक्सपो ” की  जो 23 से 25 दिसम्बर 2017  तक  जयपुर में आंबेडकर सर्किल यूथ होस्टल में आयोजित हो रहा है |

यह बिजनेस एक्सपो दलित समाज के छोटे -बड़े उधमियो को एक नेटवर्किंग
 प्लेटफार्म उपलब्ध करा रहा है जिसके माध्यम से सभी उधमी अपने  बिजनेस को बढ़ा सकते है |

डॉ .बाबा साहब आंबेडकर जी ने सामाजिक रूप से हासिये पर पड़े दलित समाज को मुख्य धारा में लाने और सामाजिक ताने -बाने को व्यवस्थित करने हेतु भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की थी  जिसके परिणाम स्वरूप आज दलित समाज अपने को सामाजिक रूप से मुख्यधारा में लाने हेतु प्रयासरत है  इसमें ही अब भीम बिजनेस एक्सपो मुख्य भूमिका निभा रहा है |

आज भीम बिजनेस एक्सपो में 100 से अधिक सफल युवा उद्यमी एक मंच पर आये है जिससे बहुजन समाज को बिजनेस क्षेत्र  में नए आयाम स्थापित करने में कामयाबी मिल रही है  जिनमे  ज्वेलरी , शूज, हैंडीक्राफ्टस ,ऑर्गेनिक फ़ूड ,डेयरी  ,पोल्ट्री,एग्रो बिजनेस आदि कई तरह के बिजनेस से जुड़े उद्यमीयों ने स्टॉल्स लगाई  है साथ ही  कईं सरकारी विभागों की स्टॉल भी है, जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के उद्योगों को बढ़ावा देने संबंधी सरकारी  योजनाओं की

जानकारियां दी जा रही है

डॉ बाबा साहेब का आर्थिक सपना था कि उनकी कौम के दबे कुचले लोग व्यवसाय क्षेत्र में उतरे , न्याय संगत तरीके से धन कमा कर पूंजी- पति बने और आर्थिक आजादी हासिल करे ,बाबा साहब महान अर्थशास्त्री थे | बाबा साहब कहते थे की आर्थिक समृद्धि  के बिना हमारा      उद्धार नहीं हो सकता

है | दलित समाज के छोटे बड़े उधमी आज बिना आरक्षण तथा सामाजिक भेदभाव का मुकाबला करते हुए हर  बिजनेस में आगे बढ़ रहे है | और अब इस ही कड़ी में दलित वर्ग के लघु ,मध्यम, व् बड़े उद्योग का ” भीम  बिजनेस एक्सपो जयपुर में अपने प्रोडक्ट के साथ बड़े कंपनी के प्रोडक्ट को कड़ी टक्कर दे रहे है |

उद्घाटन  सत्र में बोलते हुए स्टील मोंट,मुंबई के नत्थाराम सरेया  जी ने  कहा की आज हम व्यवसाय में जितना भी सफल हुए है उन सब के पीछे बाबासाहब डॉ अम्बेडकर ही है जिस तरह मुर्गी के अंडे देने के बाद चुजा ही उस अंडे से बाहर निकलने का प्रयास करता है और अगर वो सफल नहीं हो पाता है तो मुर्गी उसकी मदद करती है इसका अर्थ यह है कि प्रकृति भी उन्हीं की मदद करती है जो अपनी मदद स्वयं करते है लेकिन शुरुआत हमें खुद करनी होगी |

बिजली के पॉवर हाउस बनाने वाली मार्शल कम्पनी के आर के सिंह ने कहा –  कि जीवन में संघर्ष करना बहुत जरुरी है.आज हम सब

यहाँ एकत्रित हुए है वो सब महान अर्थशास्त्री डॉ. अम्बेडकर की देन है मैंने अपने व्यवसाय की शुरुआत ट्रांसफार्मर बनाने से की थी लेकिन हमने कभी गुणवत्ता से समझौता नहीं किया और इसी वजह से हमें राष्ट्पति महोदय जी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला  व्यवसाय करना मुश्किल काम नहीं है, बस आप सकारात्मक सोच रखिये और सभी वर्ग के साथ मिलजुल कर रहिये ,यही सफलता का मूल मंत्र है

बिजनेस एक्सपो के आयोजक  डॉ एम एल परिहार जी  ने कहा – कि जैसे किसान का बेटा किसान,हलवाई का बेटा हलवाई और व्यापारी का बेटा व्यापारी होता है,लेकिन कलेक्टर का बेटा कलेक्टर नहीं होता है इसलिए नौकरी से सिर्फ एक पीढ़ी तैरती है लेकिन व्यापार से आने वाली दस पीढियां तरती है ,हम केवल दूसरों पर आरोप लगाना छोड़ें कि कोई हमें व्यापार नहीं करने दे रहा बल्कि यहाँ आये हुए उद्यमियों से प्रेरणा लेते हुए स्वयम समर्थ बने , उन्होंने श्रोताओं को कोड़ी से करोडपति पुस्तक के बारे में बताते हुए कहा कि अपने घरों में क्रिकेटरों,अभिनेताओं के फ़ोटो लगाकर उनको आदर्श मानने के बजाय हमें राह दिखाने वाले गौतम बुद्ध, डॉ अम्बेडकर,फुले,कबीर,रविदास और आज के हमारे सफल उद्यमियों को अपना आदर्श बनाये |

 

साहित्य को नई दिशा देता, बहुजन लेखकों का महाकुम्भ – बहुजन लिट फेस्ट 

बहुजन लिट फेस्ट का भव्य आयोजन –

जयपुर | कहा जाता है की साहित्य समाज का दर्पण होता है लेखक वर्ग समाज की यथा स्तिथि

को साहित्य के जरिये बयां करते है लेकिन जब साहित्य हो और वो भी दलित साहित्य तो सामाजिक उत्पीड़न और सामाजिक अवस्था का चित्रण यथार्थ हो उठता है और ऐसा ही मंच जयपुर में देखने को मिला –  बहुजन साहित्य महोत्सव में |

बहुजन समाज के देश -विदेश से लेखक जयपुर में आयोजितamzn_assoc_ad_type =”responsive_search_widget”; amzn_assoc_tracking_id =”politico24x7-21″; amzn_assoc_marketplace =”amazon”; amzn_assoc_region =”IN”; amzn_assoc_placement =””; amzn_assoc_search_type = “search_widget”;amzn_assoc_width =”auto”; amzn_assoc_height =”auto”; amzn_assoc_default_search_category =”Books”; amzn_assoc_default_search_key =”dr ambedkar “;amzn_assoc_theme =”light”; amzn_assoc_bg_color =”FFFFFF”; //z-in.amazon-adsystem.com/widgets/q?ServiceVersion=20070822&Operation=GetScript&ID=OneJS&WS=1&Marketplace=IN

बहुजन साहित्य महोत्सव में हिस्सा लिया , साथ ही  समाज के प्रत्येक पहलुओं और राजनेतिक घटना क्रम , समाज में फैली कुरीतियों ,जात -पात ,ऊँच -नीच , छुआछूत  पर खुले मंच पर चर्चा की और मनुवादी व्यवस्था को धिक्कारा |

समारोह के मुख्य अतिथि  पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान एवम अरविंद नेताम एवं ,पद्मश्री कल्पना सरोज ,बहराइच की सांसद सावित्री बाई फुले सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे |

कुल आठ सत्र में आयोजित साहित्य  महोत्सव   में समकालीन साहित्य में बहुजन चेतना ,बहुजन स्त्री ,सफाई कर्मियों की स्थिति ,घुमन्तू विमुक्त  जातियों की समस्याएं ,आर्थिक सशक्तिकरण ,आदिवासी अधिकार ,सद्भाव सौहार्द की उभरती चुनोतियों और सिनेमा व मीडिया में बहुजनों की भागीदारी पर गहन चर्चा हुई |

साहित्य महोत्सव में  22 राज्यों के 200 से अधिक लेखक ,कवि ,कलाकार ,संस्कृतिकर्मी एवम सामाजिक कार्यकर्ता शिरकत की ।

 

 

 

 

 

डॉ०आंबेडकर के बिना अधूरा है भारत –

डॉ०आंबेडकर के बिना अधूरा है भारत,महापरिनिर्वाण दिवस पर आदरांजलि

20वीं शताब्दी के श्रेष्ठ चिन्तक, ओजस्वी लेखक, तथा यशस्वी वक्ता एवं स्वतंत्र भार

त के प्रथम कानून मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माणकर्ता हैं। विधि विशेषज्ञ, अथक परिश्रमी एवं उत्कृष्ट कौशल के धनी व उदारवादी, परन्तु सुदृण व्यक्ति के रूप में डॉ. आंबेडकर ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. आंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक कहा जाता है।

डॉ. आंबेडकर ने कोलम्बिया विश्वविद्यालय से पहले एम. ए. तथा बाद में पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की । उनके शोध का विषय “भारत का राष्ट्रीय लाभ” था। इस शोध के कारण उनकी बहुत प्रशंसा हुई। 1923 में बम्बई उच्च न्यायालय में वकालत शुरु की अनेक कठनाईयों के बावजूद अपने कार्य में निरंतर आगे बढते रहे।

डॉ. आंबेडकर की लोकतंत्र में गहरी आस्था थी। वह इसे मानव की एक पद्धति (Way of Life) मानते थे। उनकी दृष्टी में राज्य एक मानव निर्मित संस्था है। इसका सबसे बङा कार्य “समाज की आन्तरिक अव्यवस्था और बाह्य अतिक्रमण से रक्षा करना है।“ परन्तु वे राज्य को निरपेक्ष शक्ति नही मानते थे। उनके अनुसार- “किसी भी राज्य ने एक ऐसे अकेले समाज का रूप धारण नहीं किया जिसमें सब कुछ आ जाय या राज्य ही प्रत्येक विचार एवं क्रिया का स्रोत हो।“
अनेक कष्टों को सहन करते हुए, अपने कठिन संर्घष और कठोर परिश्रम से उन्होंने प्रगति की ऊंचाइयों को स्पर्श किया था। अपने गुणों के कारण ही संविधान रचना में, संविधान सभा द्वारा गठित सभी समितियों में 29 अगस्त, 1947 को “प्रारूप-समिति” जो कि सर्वाधिक महत्वपूर्ण समिति थी, उसके अध्यक्ष पद के लिये बाबा साहेब को चुना गया। प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. आंबेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। संविधान सभा में सदस्यों द्वारा उठायी गयी आपत्तियों, शंकाओं एवं जिज्ञासाओं का निराकरण उनके द्वारा बङी ही कुशलता से किया गया। उनके व्यक्तित्व और चिन्तन का संविधान के स्वरूप पर गहरा प्रभाव पङा। उनके प्रभाव के कारण ही संविधान में समाज के पद-दलित वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के उत्थान के लिये विभिन्न संवैधानिक व्यवस्थाओं और प्रावधानों का निरुपण किया ; परिणाम स्वरूप भारतीय संविधान सामाजिक न्याय का एक महान दस्तावेज बन गया।

अपनी अंतिम पांडुलिपि बुद्ध और उनके धम्म को पूरा करने के तीन दिन के बाद 6 दिसंबर 1956 को अम्बेडकर इह लोक त्यागकर परलोक सिधार गये।भारत रत्न से अलंकृत डॉ. भीमराव अम्बेडकर का अथक योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।

लेखक : कपिल गोतम प्रेम  { सम्यक शिक्षक संघ , स्वत्रन्त्र पत्रकार }