अब पश्चिमी राजस्थान में दलित रखेगें – स्टाइलिश मूंछ व् बाल

पश्चिमी राजस्थान –   जहाँ मूंछ रखने पर सवर्णों को दिक्कत होती थी अब वहां दलित समुदाय सैलून का बिजनेस शुरू कर रहें  
किशन मेघवाल – प्रदेश संयोजक  ,DSMM राजस्थान  ने मुहीम शुरू की –
*********************
जयपुर | पश्चिम राजस्थान में दलितों पर अत्याचार की घटना अधिक होती हैं राजस्थान के सामंतशाही लोगों को दलित समाज के युवाओं को स्टाइलिश मूंछ व् बालों में देखना बर्दाश्त नहीं हो पाता जिसके चलते वह अन्य कारणों से स्थानीय नाई व् दलित समाज के युवाओं से उलझते हैं जिस की ख़बरें हमें कम ही सुनाई देती हैं लेकिन घटना अधिक होती हैं |
“नाई-दलित” के मुद्दे पर हमारी बात….
हर गांव में नाई की एक दूकान खोलने के लिए आर्थिक संसाधन और ट्रेनिंग के लिए कार्ययोजना –
किशन जी से ख़ास बातचीत –
 काफी वर्षों से हम देख रहे हैं कि अछूत समझी जाने वाली जातियों के लोग गांवों में नाई द्वारा बाल कटवाने के जद्दोजेहद में लगे रहते हैं, कई बार पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न गांवों में तनाव की स्थिति बनने से सौहार्द बिगड़ जाता है, ऐसे मामलों में अक्सर नाई तो केवल मोहरा होता हैं, वह तो चाहता है कि उसकी आमदनी बढे परंतु गांवों में उच्च जातियों का वर्चस्व इस नाइयों को स्वतंत्र रुप से काम करने की इजाजत नहीं देता है अतः मेरा आपसे अनुरोध है कि इन गरीब नाइयों के पीछे नहीं पड़े
मेरा अनुरोध है कि सभी समस्याओं का समाधान पुलिस और कानून की पोथियां में ढूंढने की कोशिश मत करिए, हमारी सामाजिक बुनावट ऐसी हैं कि आप इसमें उलझ-उलझ कर मर जाएंगे परंतु इससे बाहर निकलने का रास्ता आपको नहीं मिलेगा।
पिछले दिनों मेरे पास दर्जनों आॅडियो-वीडियों आए, जहर उगलते, ललकारते और फुंफकारने लहजे में नफ़रत की बयारों से हम एक-दूसरे के ऊपर अपना अभिमान थौपने की ज़ंग में कूद पड़े , जिसका कभी कोई सृजनात्मक परिणाम अपेक्षित नहीं है।
इस संबंध में मेरा आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि आप प्रत्येक गांव में अछूत समझी जाने वाली किसी भी जाति के व्यक्ति की एक-दो दुकानें खुलवा दीजिए और कुछ समय बाद देखना कि आपको बड़े ही आदर-सम्मान के साथ बाल काटने के लिए बुलाया जाएगा।
हमने यह तय किया है कि ऐसा कोई भी दलित व्यक्ति जो पश्चिमी राजस्थान के किसी भी गांव में बाल-कटिंग्ग का व्यवसाय करना चाहता है, वह संपर्क करें आपको पूरी सहायता मिलेगी, वैसे हमारे पास कोई रिजर्व फंड नहीं है परंतु हमारे पास वह खजाना है जो किसी के पास नहीं है,  जिस गांव में कोई भी साथी आगे आएगा, उसी गांव में मौजूद हमारे संपर्कों वाले साथी आपकी पूरी मदद करेंगे और ट्रेनिंग के लिए हम जिला स्तर पर ट्रेनिंग-कैंप शुरू करेंगे जिसमें राष्ट्रीय स्तर के केश-सजा एक्सप्रट आपकों सेवाएं देंगे।
यह सुझाव हम इसलिए दे रहे हैं क्योंकि DSMM एक वैचारिक आंदोलन हैं, हम केवल जुल्मों के खिलाफ सड़कों पर ही नहीं लड़ना चाहते हैं, जबकि सामाजिक असमानता के कारणों का गहनता से अध्ययन करने के साथ साथ इसके समाधान के वैज्ञानिक तरीके भी इजाद करना चाहते हैं ताकि हमारी ऊर्जा का इस्तेमाल सही दिशा में हो सके।
बाल काटने के सवाल पर मेरे सुझाव को अपने अपने स्तर पर लागू करना शुरू कर दीजिए, हमारे सुझाव को सरकारी योजना की तरह मत लेना कि कोई बजट स्वीकृत होगा तो आधा इसमें लगाएंगे और आधे से जरूरत की दूसरी चीजें खरीदेंगे।
अपने अपने गांव के नौजवान साथियों से चर्चा कीजिए, व्यवसाय की दृष्टि से स्थान चिन्हित कीजिए और एक बोर्ड टांग दीजिए कि यहां सुंदर बाल काटे जाते हैं, बहुत ही आकर्षक फ्लेक्स-होर्डिंग लगाकर हजारों बेरोजगार नौजवानों के लिए मार्ग प्रशस्त कर दीजिए।
(नोट– पश्चिमी राजस्थान के अस्सी प्रतिशत गांवों में नाई द्वारा दलितों वर्ग से संबंध रखने वाले व्यक्तियों के बाल नहीं काटे जाते हैं अतः कानूनी कार्यवाहियों के अलावा सामाजिक बदलाव की दिशा में अहम सुझाव)