आर्थिक समृद्धि की और ले जाता – भीम बिजनेस एक्सपो का भव्य आगाज

 “नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनो –    डॉ  बाबासाहेब अम्बेडकर ” 

             के कथन को साकार करते हुवे  –  भीम  बिजनेस एक्सपो  

समय बड़ा परिवर्तनशील है डॉ बाबा साहब आंबेडकर के अथक प्रयास से आज बहुजन समाज सामाजिक रूप से सभी क्षेत्रो में अपनी मुख्य भूमिका निभा रहा है और इसी का ख़ास नजारा  ” भीम बिजनेस एक्सपो ” में देखने को मिल रहा है  |

जी हाँ  हम बात कर रहे है जयपुर में आयोजित हो रहे   ” भीम बिजनेस एक्सपो ” की  जो 23 से 25 दिसम्बर 2017  तक  जयपुर में आंबेडकर सर्किल यूथ होस्टल में आयोजित हो रहा है |

यह बिजनेस एक्सपो दलित समाज के छोटे -बड़े उधमियो को एक नेटवर्किंग
 प्लेटफार्म उपलब्ध करा रहा है जिसके माध्यम से सभी उधमी अपने  बिजनेस को बढ़ा सकते है |

डॉ .बाबा साहब आंबेडकर जी ने सामाजिक रूप से हासिये पर पड़े दलित समाज को मुख्य धारा में लाने और सामाजिक ताने -बाने को व्यवस्थित करने हेतु भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की थी  जिसके परिणाम स्वरूप आज दलित समाज अपने को सामाजिक रूप से मुख्यधारा में लाने हेतु प्रयासरत है  इसमें ही अब भीम बिजनेस एक्सपो मुख्य भूमिका निभा रहा है |

आज भीम बिजनेस एक्सपो में 100 से अधिक सफल युवा उद्यमी एक मंच पर आये है जिससे बहुजन समाज को बिजनेस क्षेत्र  में नए आयाम स्थापित करने में कामयाबी मिल रही है  जिनमे  ज्वेलरी , शूज, हैंडीक्राफ्टस ,ऑर्गेनिक फ़ूड ,डेयरी  ,पोल्ट्री,एग्रो बिजनेस आदि कई तरह के बिजनेस से जुड़े उद्यमीयों ने स्टॉल्स लगाई  है साथ ही  कईं सरकारी विभागों की स्टॉल भी है, जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के उद्योगों को बढ़ावा देने संबंधी सरकारी  योजनाओं की

जानकारियां दी जा रही है

डॉ बाबा साहेब का आर्थिक सपना था कि उनकी कौम के दबे कुचले लोग व्यवसाय क्षेत्र में उतरे , न्याय संगत तरीके से धन कमा कर पूंजी- पति बने और आर्थिक आजादी हासिल करे ,बाबा साहब महान अर्थशास्त्री थे | बाबा साहब कहते थे की आर्थिक समृद्धि  के बिना हमारा      उद्धार नहीं हो सकता

है | दलित समाज के छोटे बड़े उधमी आज बिना आरक्षण तथा सामाजिक भेदभाव का मुकाबला करते हुए हर  बिजनेस में आगे बढ़ रहे है | और अब इस ही कड़ी में दलित वर्ग के लघु ,मध्यम, व् बड़े उद्योग का ” भीम  बिजनेस एक्सपो जयपुर में अपने प्रोडक्ट के साथ बड़े कंपनी के प्रोडक्ट को कड़ी टक्कर दे रहे है |

उद्घाटन  सत्र में बोलते हुए स्टील मोंट,मुंबई के नत्थाराम सरेया  जी ने  कहा की आज हम व्यवसाय में जितना भी सफल हुए है उन सब के पीछे बाबासाहब डॉ अम्बेडकर ही है जिस तरह मुर्गी के अंडे देने के बाद चुजा ही उस अंडे से बाहर निकलने का प्रयास करता है और अगर वो सफल नहीं हो पाता है तो मुर्गी उसकी मदद करती है इसका अर्थ यह है कि प्रकृति भी उन्हीं की मदद करती है जो अपनी मदद स्वयं करते है लेकिन शुरुआत हमें खुद करनी होगी |

बिजली के पॉवर हाउस बनाने वाली मार्शल कम्पनी के आर के सिंह ने कहा –  कि जीवन में संघर्ष करना बहुत जरुरी है.आज हम सब

यहाँ एकत्रित हुए है वो सब महान अर्थशास्त्री डॉ. अम्बेडकर की देन है मैंने अपने व्यवसाय की शुरुआत ट्रांसफार्मर बनाने से की थी लेकिन हमने कभी गुणवत्ता से समझौता नहीं किया और इसी वजह से हमें राष्ट्पति महोदय जी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला  व्यवसाय करना मुश्किल काम नहीं है, बस आप सकारात्मक सोच रखिये और सभी वर्ग के साथ मिलजुल कर रहिये ,यही सफलता का मूल मंत्र है

बिजनेस एक्सपो के आयोजक  डॉ एम एल परिहार जी  ने कहा – कि जैसे किसान का बेटा किसान,हलवाई का बेटा हलवाई और व्यापारी का बेटा व्यापारी होता है,लेकिन कलेक्टर का बेटा कलेक्टर नहीं होता है इसलिए नौकरी से सिर्फ एक पीढ़ी तैरती है लेकिन व्यापार से आने वाली दस पीढियां तरती है ,हम केवल दूसरों पर आरोप लगाना छोड़ें कि कोई हमें व्यापार नहीं करने दे रहा बल्कि यहाँ आये हुए उद्यमियों से प्रेरणा लेते हुए स्वयम समर्थ बने , उन्होंने श्रोताओं को कोड़ी से करोडपति पुस्तक के बारे में बताते हुए कहा कि अपने घरों में क्रिकेटरों,अभिनेताओं के फ़ोटो लगाकर उनको आदर्श मानने के बजाय हमें राह दिखाने वाले गौतम बुद्ध, डॉ अम्बेडकर,फुले,कबीर,रविदास और आज के हमारे सफल उद्यमियों को अपना आदर्श बनाये |

 

भय व हिंसा मुक्त विद्यालय, संवेदनशील अध्यापक सुनिश्ति करना सरकार की जिम्मेदारीः मीमरौठ

 

            “भेदभाव व हिंसा मुक्त विद्यालयी शिक्षा  “ पर राज्य स्तरीय विचार-विमर्ष बैठक …..

दिनांक 9 मई 2017 को दलित अधिकार केन्द्र, जयपुर व राष्ट्रीय दलित न्याय आन्दोलन, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में “भेदभाव व हिंसा मुक्त विद्यालयी शिक्षा  “ पर किसान भवन, लाल कोठी, जयपुर में राज्य स्तरीय विचार-विमर्ष बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में दलित अधिकार केन्द्र के मुख्य कार्यकारी पी.एल.मीमरौठ ने बैठक के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये बताया  कि दलित बच्चों को भय व हिंसा मुक्त विद्यालय का वातावरण मिले इसके लिए विद्यालय प्रशासन, छात्रो, अभिभावको, शिक्षको, व  समाज को संवेदनशील करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रो. मानचन्द खण्डेला, ने बताया कि बच्चो व अभिावकों को इस बात पर ध्यान रखना चाहिये की किसी भी विद्यालय में छात्र को प्रताडित किया जाता है तो एक जुट होकर अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाये तथा हिंसा व अत्याचार का प्रतिकार करे। क्यों कि हिंसा के खिलाफ आवाज नही उठाने के कारण से हिंसा ज्यादा होती है विरोध करने पर कमी आती है। अत्याचार के ग्राफ में कमी लाने के लिए विरोध करना आवश्यक है।
विद्यालयों में प्रत्येक छात्र जातिगत भेदभाव का शिकार होता है । चाहे छात्र अपनी समस्या किसी के सामने रखे या नही रखे लेकिन कई अप्रत्यक्ष ऐसी घटनाऐं होती है जो देखने में जातिगत आधार पर प्रताडना दिखाई नही देती लेकिन गहराई जाने पर यह साफ पता चलता है कि दलित बच्चों को जातिगत आधार पर ही प्रताडित किया जाता है।
सतीश कुमार, एडवोकेट, निदेशक, दलित अधिकार केन्द्र, जयपुर ने विद्यालयों में जातिगत भेदभाव समाप्त करने व कानूनों की प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नागर समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुये कहा कि विद्यालयों में छात्रों के लिए बने कानून व योजना व दिशा निेर्देशों की प्रभावी क्रियान्वयन व पालना के लिए नागर समाज महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।

चन्दा लाल बैरवा, राज्य समन्वयक, दलित अधिकार केन्द्र, ने कहां कि बच्चे विद्यालय में अपना सबसे ज्यादा समय बिताते है। जहां उनके भविष्य की नींव रखी जाती है। वहां उनके लिए भरोसे व विश्वास का माहौल होना आवश्यक है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की 2016 के साल में पाॅक्सों के तहत 613 शिकायते मिली है। जिनमें दिल दहलाने वाली बाल शोषण की 92 शिकायते स्कूल की है। बच्चों की सुरक्षा के लिए 2011 में स्कूलों में ‘‘गरिमा‘‘ बाॅक्स लगाने की मुहिम शुरू की थी 2012 तक 300 स्कूलों में ऐसे बाॅक्स लगाये गये लेकिन आज वो उपेक्षित है। कोई गायब हो गये , जो बाकी है उन्हे खोला नही गया। स्कूल, पुलिस प्रशासन कोई सुध नही ले रहा है। जो बच्चों के प्रति विद्यालय प्रशासन, सरकार की उदासीनता को उजागर करता है।
बैठक में अलवर व दौसा जिले से 50 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, छात्रों ने विद्यालयों में होने वाली हिंसा यौन शोषण व छेडछाड करना। छात्राओं के साथ रस्ते में छेडछाड, छात्रावासों में घटिया खाद्य सामग्री देना, दस्तावेज विद्यालय प्रशासन द्वारा मनमानी करना, मीड डे मील में भेदभाव, दलित छात्रों को आगे बैठने पर प्रताडित करना, दलित छात्रों से सफाई करवाना, विद्यालयो में पीने के पानी में भेदभाव आदि प्रकार की घटनाऐं सामने आई। बैठक में अलवर, दौसा, अजमेर, सीकर, सिरोही, जयपुर आदि जिलो से कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

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