कोविड 19 को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सतर्क – समीक्षा बैठक में दियें यह निर्देश , कर्फ्यू बढ़ा

कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा  माइक्रो कंटेनमेंट जोन में जीरो मोबिलिटी 
सुनिश्चित कर संक्रमण की चेन तोड़ें – मुख्यमंत्री   10 नगरीय क्षेत्रों में रात्रिकालीन कफ्र्यू का समय बढ़ा
जयपुर 10  अप्रेल। कोरोना संक्रमण की रफ्तार को रोकने के लिए राज्य सरकार ने 30 अप्रेल तक प्रदेश के 9 शहरी क्षेत्रों में शाम 8 से सुबह 6 बजे तक तथा उदयपुर में शाम 6 बजे से नाइट कफ्र्यू लागू कर इसकी कड़ाई से पालना तथा सभी जिलों में कंटेनमेंट जोन चिन्हित कर उनमें जीरो मोबिलिटी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही शहरी इलाकों से लगते ग्रामीण क्षेत्रों में 9वीं कक्षा तक के स्कूलों में नियमित कक्षाओं का संचालन बंद रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में ये निर्णय किए गए। प्रदेश स्तर पर कोरोना स्टेट वॉररूम तथा सभी जिलों में जिला स्तरीय कंट्रोल रूम सहित 181 हेल्पलाइन को चौबीसों घंटे फिर से कार्यशील करने, संक्रमण की पांच प्रतिशत से अधिक पॉजीटिविटी रेट वाले क्षेत्रों में टेस्टिंग बढ़ाने, हैल्थ प्रोटोकॉल की पालना के लिए एनसीसी, एनएसएस, स्कॉउट एण्ड गाइडस की वॉलन्टियर के रूप में सेवाएं लेने, कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर संयुक्त टीमों की कार्रवाई बढ़ाने तथा सीमावर्ती जिलों में राज्य के बाहर से आने वाले व्यक्तियों की नेगेटिव आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट के लिए बनाई गई चेकपोस्टों को अधिक सुदृढ़ करने जैसे कडे़ कदम उठाए गए हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए माइक्रो कंटेनमेंट जोन में जीरो मोबिलिटी, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग तथा होम आइसोलेशन की पालना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संक्रमण की रफ्तार बीते कुछ दिनों में तेजी से बढ़ी है और हम संक्रमण की पहली लहर के सर्वोच्च स्तर को पीछे छोड़ चुके हैं। इसे देखते हुए जमीनी स्तर पर कोविड प्रोटोकॉल तथा एसओपी के उल्लंघन को सख्त उपायों से रोका जाना बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना हॉट-स्पॉट बन रहे क्षेत्रों की पहचान कर इनको नियमानुसार माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि ऎसे क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को रोकने पर विशेष फोकस करना होगा। इसमें स्थानीय स्वायत्त शासन और सार्वजनिक निर्माण सहित अन्य विभागों की मदद ली जाए। उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकॉल की पालना में सख्ती के साथ-साथ समझाइश पर भी जोर दें और अधिकारियों का आम लोगों के साथ व्यवहार संयत हो। उन्होंने कहा कि कोरोना की लड़ाई में जनसहयोग आवश्यक है।
चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में देश के साथ-साथ राजस्थान प्रदेश में भी संक्रमितों की संख्या में तेजी से हुए इजाफे का बड़ा कारण लोगों में कोविड अनुशासन के प्रति लापरवाही बरतना है। उन्होंने इस ढिलाई को रोकने के लिए एक बार फिर समाज के सभी वर्गाें का सहयोग लेने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य सचिव  निरंजन आर्य ने कहा कि कोरोना संक्रमण की पहली लहर के समय अलवर, जयपुर तथा भीलवाड़ा में जिस प्रभावी तरीके से कंटेनमेंट किया गया था। अब दूसरी लहर के दौरान भी अधिकारियों को उसी गम्भीरता से काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर कोरोना गाइडलाइन की पालना को सुनिश्चित करें।
प्रमुख सचिव गृह अभय कुमार ने कोरोना की दूसरी लहर के प्रसार को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, चित्तौडगढ़, डूंगरपुर, जयपुर, जोधपुर, कोटा एवं आबूरोड की नगरीय सीमा में रात्रि 8 बजे से प्रातः 6 बजे तक रात्रिकालीन कफ्र्यू रहेगा। इसके लिए बाजार एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान रात्रि 7 बजे बंद कर दिए जाएंगे। उदयपुर में बाजार एवं प्रतिष्ठान शाम 5 बजे बंद होंगे।
उन्होंने बताया कि माइक्रो कंटेनमेंट जोन में धारा-144 के तहत शून्य मोबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। सभी नगरीय क्षेत्रों में पांच से अधिक लोगों के एकत्रित होने पर रोक के साथ-साथ भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में मास्क पहनने और सामाजिक दूरी की पालना कराई जाएगी।
शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य  सिद्धार्थ महाजन ने बताया की सेम्पलिंग को बढ़ाकर प्रतिदिन 55 हजार तक कर दिया गया है। इस महीने के अंत तक 1 लाख तक करने का लक्ष्य है। उन्होंने ऑक्सीजन की उपलब्धता, कोविड केयर अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं, दवाओं, टीकाकरण, भर्ती रोगियों की संख्या तथा संक्रमण रोकने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. राजाबाबू पंवार, डॉ. सुधीर भंडारी, डॉ. वीरेन्द्र सिंह सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण की स्थिति पर गम्भीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दूसरी लहर अपेक्षाकृत तेज गति से बढ़ रही है और युवा आबादी भी संक्रमित हो रही है। उन्होंने बताया कि कोविड अनुशासन, अधिक टेस्टिंग और टीकाकरण पर जोर देकर स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
बैठक के दौरान विभिन्न जिला कलेक्टरों, पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षकों ने कोविड नियंत्रण की स्थिति और किए जा रहे उपायों से अवगत कराया। वीडियो कॉन्फेंस के दौरान संभागीय आयुक्त, रेंज आईजी और सीएमएचओ भी उपस्थित रहे।
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग, पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर, प्रमुख सचिव वित्त अखिल अरोरा, शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा  वैभव गालरिया, आयुक्त परिवहन श्री महेन्द्र सोनी, आयुक्त सूचना प्रौद्योगिकी  वीरेन्द्र सिंह, निदेशक स्थानीय निकाय  दीपक नंदी सहित अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित थे।

आज से 2.0 कोविड वैक्सीनेशन शुरू , 150 रुपये वैक्सीन कीमत हैं और 100 रुपये निजी अस्पताल का सर्विस शुल्क

प्रदेश में कोविड वैक्सीनेशन नए चरण की शुरुआत आज से,
निजी अस्पताल में भी हो सकेगा टीकाकरण
जयपुर, 1 मार्च । चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया के प्रदेश में 1 मार्च से प्रदेश में 2.0 कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम की शुरुआत होने जा रही है। नए चरण में सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में कोविड वैक्सीनेशन कराया जा सकेगा।
डॉ. शर्मा ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निजी अस्पतालों के लिए कोविड-19 टीकाकरण की प्रति डोज की दर 250 रुपए निर्धारित की है, जो निजी अस्पतालों में कोविड-19 का टीका लगवाने वाले व्यक्ति द्वारा सम्बंधित अस्पताल को चुकानी होगी।
चिकित्सा मंत्री ने बताया कि जिसमे 150 रुपये वैक्सीन कीमत और 100 रुपये निजी अस्पताल का सर्विस शुल्क शामिल है। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों को कोविड वैक्सीन सरकार द्वारा उपलब्ध करवायी जाएगी और अन्य सभी टीकाकरण सम्बन्धी व्यवस्थाये निजी अस्पताल की रहेगी।
चिकित्सा विभाग के शासन सचिव  सिद्धार्थ महाजन ने रविवार को 2.0 वैक्सीनेशन प्रोग्राम के सबंध में राज्य के सभी सीएमएचओ व आरसीएचओ के साथ वीसी के माध्यम से बैठक की। उन्होंने बताया कि सभी जिलों के करीब एक हजार संस्थाओं व 88 निजी चिकित्सालयों में टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने वीसी में अधिकारियों को निर्देशित किया कि लाभार्थी अधिक से अधिक संख्या में टीकाकरण कराएं इसके लिए एसडीएम सहित सरपंच, टीचर, राशन डीलर्स का भी सहयोग लिया जाए। चिकित्सा सचिव ने कहा कि कोविड वैक्सीनेशन सेंटर पर दूसरी डोज के अतिरिक्त प्रथम डोज भी लगायी जाएगी। उन्होंने बताया कि एक मार्च को प्रदेश में एक से डेढ़ लाख लाभार्थियों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है।
चिकित्सा सचिव ने बताया कि 45 से 59 वर्ष की उम्र के जटिल बीमारियों से ग्रसित उन्हीं व्यक्तियों के टीके लगाए जा सकेंगे जो कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध 20 बीमारियों में से ग्रस्त होंगे। ऎसे मरीज को रजिस्टर्ड मेडिकल प्रक्टिनर्स (आरएमपी) स्तर से जारी चिकित्सकीय प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। इन अनिवार्य चिकित्सकीय डॉक्यूमेंट के बिना व्यक्ति को इस चरण में टीकाकरण की सुविधा नही मिलेगी।
जिला कलक्टर अन्तर सिंह नेहरा ने बताया –
 1 मार्च से व्यापक स्तर पर प्रारम्भ किए जा रहे कोविड-19 टीकाकरण के तृतीय चरण में जयपुर जिले में 78 सरकारी एवं 20 निजी संस्थानों पर अर्थात कुल 98 संस्थानों में कोविड वैक्सीनेशन किया जाएगा।
जिला कलक्टर अन्तर सिंह नेहरा ने बताया कि तृतीय चरण में 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों और 45 से 59 वर्ष तक के को-मोरबिड(अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त) लाभार्थियों को वैक्सीन लगाया जाएगा। सीएमएचओ प्रथम के क्षेत्र में 42 सरकारी एवं 12 निजी संस्थानों में एवं सीएमएचओ द्वितीय के क्षेत्र मेें 36 सरकारी एवं 8 निजी संस्थानों में कोविड-19 वैक्सीनेशन की व्यवस्था रहेगी।
सभी निजी संस्थानों पर केंद्रीय सरकार के आदेशानुसार अधिकतम 250 रुपए वैक्सीन लगाने के चार्ज लिए जाएंगे। इसमें 100 रुपए निजी संस्थान का सर्विस चार्ज एवं 150 रुपए वैक्सीन के चार्ज होंगे। निजी संस्थानों को 150 रुपए प्रति डोज केंद्र सरकार के खाते में जमा कराने होंगे। वहीं राजकीय संस्थानों में कोविड 19 का वैक्सीनेशन पूर्णय निःशुल्क होगा।
जिला कलक्टर नेहरा ने बताया कि दिनांक 1 जनवरी 2022 की आधार दिनांक मानते हुए 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों को अपने वैरिफिकेशन के लिए वोटर आईडी कार्ड या आधार कार्ड जैसे दस्तावेज साथ लाने होंगे।
इसी प्रकार 45 वर्ष से अधिक एवं 60 वर्ष से कम उम्र के को-मोरबिटी वाले व्यक्तियों को वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिश्नर (आरएमपी) से उनकी बीमारी के सम्बन्ध में प्रमाणपत्र साथ लाना होगा। वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन रजिस्टे्रशन के साथ ही ‘ऑन द स्पॅाट’ रजिस्टे्रशन भी किया जा सकेगा।
जिला कलक्टर ने बताया कि इन संस्थानों पर हैल्थकेयर वर्कर्स एवं फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोविड-19 वैक्सीनेशन की द्वितीय डोज भी लगाई जाएगी। कोविड-19 वैक्सीनेशन के सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिए सीएमएचओ प्रथम कार्यालय की हैल्प लाइन 0141-2605858 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

किसानों आंदालोन को लेकर सर्वोच्च अदालत ने दिया यह सुझाव

किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि कोरोना महामारी के खतर को देखते हुए केंद्र से पूछा कि किसान आंदोलन में कोविड नियमों का ध्यान रखने की जरूरत है। मुख्य न्याया​धीश एस ए बोबडे ने कहा कि ‘हमें नहीं पता कि किसान कोरोना से सुरक्षित हैं या नहीं? अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो तबलीगी जमात की तरह कोरोना का बड़ा विस्फोट होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अगर समय रहते किसाना आंदोलन में कोविड—19 के नियमों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह देश के लिए नई मुशिबत खडी हो सकती है।

केंद्र की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वहां नियमों का पालन नहीं हो रहा है और कोरेाना का खतरा होने का डर बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी निजामुद्दीन मरकज में जमातियों के जुटने की CBI जांच की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही याचिकाकर्ता का कहना था कि मोहम्मद साद कोअभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

यह याचिका जम्मू की रहने वाली वकील सुप्रिया पंडिता ने दायर कहा कि कोरोना के समय बड़े पैमाने पर लोगों के एकत्र होने कि अनुमति कैसे दी गई, जबकि उस समय कोरोना महामारी का खतरा मंडरा रहा था।

किसानों का आंदोलन अभी खत्म होता हुआ नजर नहीं आ रहा है और आने वाले दिनों में अगर किसानों और सरकार के मध्य समझौता नहीं हुआ तो आंदोलन लंबा चल सकता है। कोरोना की खतरे को देखते हुए सरकार ने भी किसानों से अपील की वह अपने बच्चों को घर भेजे व ज्यादा उम्र के लोग बॉर्डर पर नहीं रहे। कल किसानों और सरकार के बीच वार्ता होगी अगर उसमें कोई नतीजा नहीं निकलता है तो किसान इस आंदोलन देशव्यापी करने का काम करेंगे।

केन्द्र सरकार के तेवर नहीं पड़े नरम, किसान भी अपनी मांग पर अड़े

30 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन केन्द्र सरकार और किसान दोनों के तेवर अभी नरम नहीं पड़े है और दोनों किसी भी कीमत पर झुकने के लिए तैयार नहीं है। 30 दिन में लगभग केन्द्र और आंदोलनकारी किसान संगठन के बीच 5 बार वार्ता हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। दोनों ही एक दूसरे से वार्ता करने के लिए तैयार लेकिन इसके बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हो रहा है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है 29 दिसंबर यानि कल 7वें दौर की बातचीत होगी जिसमें अगर दोनों के बीच सहमति बनती है तो कुछ हल जरूर निकल सकता है। हालांकि दोनों पक्ष अभी भी अपने पुराने रुख पर अड़े हुए हैं और ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार और किसानों के बीच बात कैसे होगी।

किसान संगठन लगातार केन्द्र सरकार से तीनों कृषि कानून रद्द करने की प्रक्रिया पर सबसे पहले चर्चा हो, MSP की कानूनी गारंटी की प्रक्रिया और प्रावधान पर बात हो, पराली जलाने पर दंड के प्रावधानों पर उनकी मांगे मानने पर ही आंदोलन खत्म करने की बात पर अड़े है अगर ऐसा नहीं होता है यह आंदोलन जारी रहेगा।

 

29 दिसंबर को बातचीत करने से पहले आज किसानों की चिट्ठी पर जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्रियों की बैठक हो सकती है लेकिन सरकार के रूख को देखकर लग रहा है कि वह किसानों के आगे झुकेगी नहीं। पिछले कई दिनों से देश के कई राज्यों से किसान संगठन दिल्ली जा रहे है और सिंधु बॉर्डर पर किसानों का साथ देने की बात कह रहे है।

इस आंदोलन के कारण कई किसानों की सर्दी के कारण जान चली गयी है तो कई किसानों पर कोरोना का भी खतरा मंडराने लगा है। किसान जिस तहर से अपनी मांगो को लेकर आर—पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है क्योंकि आजादी के बाद से अब तक किसानों का भला किसी भी पार्टी ने नहीं किया जबकि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड़ी खेती को माना जाता है फिर भी किसानों को आज सड़कों पर उतरकर अपने हक की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

 

कोरोना के खत्म होने के बाद आ सकती है दूसरी महामारी: जाने पूरी खबर

कोरोना महामारी को लेकर जहां दुनिया भर के लोगों की जान खतरे में पड़ गयी है तो वहीं दूसरी तरफ WHO ने भविष्य में नयी महामारी आने को लेकर एक बयान दिया है जिसके कारण सबको हैरानी हो रही है। कोरोना महामारी के कारण कई लोगों की जान चली गयी है लेकिन अभी तक इस बीमारी को खत्म करने वाली कारगर वैक्सीन भी नहीं बन पायी है। WHO के इस बयान के बाद लोगों ने अभी से कयास लगाने शुरू कर दिये है कि हो सकता है कि कोरोना के खत्म होने के साथ ही कोई नयी महामारी दुनिया भर में फैल सकती है।

WHO के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कोरोना महामारी के बीच 26 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कोरोना वायरस अंतिम महामारी नहीं है अगर आने वाले समय में हम जलवायु परिवर्तन और पशु कल्याण का उचित समाधान नहीं कर सकें तो हमे किसी ना किसी नई महामारी का सामना करन पड़ सकता है।

वर्तमान में कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर के स्वास्थ्य विभाग और इनके जानकार अभी तक इस वायरस को जड़ से खत्म करने में सफल नहीं हुए है जबकि इसके लिए पानी की तरह पैसे बहा दिया गया है। अगर दुनिया के सभी देश मिलकर पर्यावरण का खयाल नहीं रखेंगे तो हमें आने वाले भविष्य में किसी ना किसी नई बीमारे से लड़ना पड़ सकता है। टेड्रोस ने कहा कि लोगों को कोरोना महामारी से सीख लेनी चाहिए क्योंकि इसके आने के बाद से लोगों में डर पैदा हुआ है अगर इसका इलाज जल्द मिल जाता तो शयद लोगों को इस बीमारी का डर कभी नहीं लगता है।

कोरोना महामारी के कारण वे देश आज अपने आप को इतना असहाय महशुस कर जो अपने आप को दुनिया का सबसे अच्छा स्वास्थ्य सेवा ढाचा माना करते थे। भारत आज उन देशों से आगे है जो इस महामारी में कई देशों की सहायत करने के साथ आने वाले दिनों में उनको दुनिया की सबसी सस्ती और कारगर वैक्सीन देगा। भारत में स्वदेशी कोरोना वैक्सीन के अंतिम चरण का प्रशिक्षण चल रहा है और इसके परिणाम अभी तक सही आये है जो भारत के लिए बहुत बड़ी कामयाबी होगी। भारत में नये साल के शुरूआती हफ्तों में कोरोना का टीका लगना शुरू हो सकता है।

जयपुर में चल रहा कोरोना वैक्सीन का तीसरा ट्रायल, जानें पूरी खबर

राजस्थान में एक तरफ कोरोना का ग्राफ लगातार नीचे की ओ जा रहा है तो दूसरी तरफ कोरोना वैक्सीन के तीसरे ट्रायल के नतीजे भी अभी तक अच्छे संकेत दे रहे हैं। प्रदेश की राजधानी जयपुर के महाराजा अग्रसेन अस्पताल में देशी कोविड वैक्सीन का तीसरा ट्रायल चल रहा है जो सफल होता दिख रहा है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि इस ट्रायल में 500 से ज्यादा वॉलिंटियर्स पर इस वैक्सीन का ट्रायल किया गया और इसके बाद किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट अभी तक देखने को नहीं मिला है। अगर आने वाले दिनों में इसका परिणाम अच्छा और कारगार साबित होता है तो यह प्रदेश के साथ पूरे देश के लिए अच्छी खबर होगी।

ट्रायल में कई लोगों बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहे है जिसमें पूर्व मंत्री भी शामिल है। इस ट्रायल में प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह के चिकित्सक भी इस काम को करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस वैक्सीन के आने के साथ कोरोना के नये प्रकार के वायरस की खबर से एक बार फिर दुनिया को परेशानी में डाल दिया है और ब्रिटेन में इस नये वायरस की वैक्सीन बनाने के साथ इसको रोकने के लिए कड़े कदम उठाये जा रहे हैं।

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अगर बात करें राजस्थान में कोरोना वायरस की तो अन्य राज्यों की तुलना प्रदेश हर क्षेत्र में दूसरे राज्यों से आगे है। प्रदेश में कोरोना के मरने वालों का आंकड़ा कम होने के साथ मरीजों के ठीक होने की दर भी बहुत ज्यादा है। राज्य सरकार ने समय समय पर कोरोना को रोकने के लिए जो कदम उठाये है जिसके कारण प्रदेश में कोरोना का ज्यादा प्रसार नहीं हो सक हो और इसका ग्राफ लगातार कम होता जा रहा है।

राजस्थान में तेजी से घट रहा कोरोना का ग्राफ

नये साल के शुरू होने से पहले प्रदेशवासियों के लिए राहतभरी खबर मिलने जा रही है कोरोना काल के 8 महीनों में पहली बार प्रदेश में कोरोना का ग्राफ सबसे नीचले पायदान पर पहुंच गया है। आने वाले दिनों प्रदेश में कोरोना मरीज का आंकडा केवल दहाई के आंकडे से भी कम हो सकता है। सर्दी के मौसम की शुरूआत में कोरोना मरीजों का ग्राफ बहुत तेजी से बड़ा था जिसके कारण सरकार और प्रशासन को बहुत ज्यादा परेशानी में डाल दिया था।

नवबंर माह में दिवाली के बाद से लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बड़ रही थी। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार सोमवा को केवल प्रदेश में सिर्फ 913 नए मामले सामने आए हैं। राजधानी जयपुर को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना मरीजा को आंकड़ा 100 से कम आया है।

 

 

प्रदेश में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल भी किया जा रहा है और इसके परिणाम सही आते है तो नये साल की शुरूआत से कोरोना की वैक्सीन प्रदेशवासियों को मिलनी शुरू हो जाएगी। अगर बात करे राजधानी की तो यहां कोरोना मरीजों का आंकड़ा अभी कम है लेकिन यह आंकडा 100 से 250 के बीच रह रहा है। सोमवार को भी जयपुर में 180 नए कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

जोधपुर में 64, अजमेर में 22 , अलवर में 59, बांसवाड़ा में 26, बाड़मेर में 15 , भरतपुर में 34 , भीलवाड़ा में 57, बूंदी में 34, चित्तौड़गढ़ में 36 , चुरू में 10 , दौसा में 5 और डूंगरपुर में 52 नये मरीज मिले है। प्रदेश में कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट में भी इजाफा देखने को मिल रहा है तो मृत्युदर अभी भी दूसरे राज्य़ों की तुलना में कम है।

 

 

सीएम गहलोत ने केन्द्र सरकार से कहा कि वह कोरोना की वैक्सीन के उपलब्ध होने को लेकर स्थिति स्पष्ट करे क्योंकि राज्य के पास इतना पैसा नहीं ​है कि वह ज्यादा पैसे देकर यह दवा खरी सके। इसके साथ दुनिया भर में कोरोना के नये रूप को लेकर जो चर्चा चल रही है उसको ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने सावधनी बरतनी शुरू कर दी है।

निजी स्कूल ले सकेंगे 70 फीसदी फीस, जाने पूरा मामला

राजस्थान हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की फीस को लेकर बड़ा फैसला दिया है हाईकोर्ट के निर्देशानुसार ऑनलाइन पढ़ाने वाले सीबीएसई स्कूल 70 फीसदी फीस ले सकते है। कोरोना काल में कई स्कूलों ने आॅनलाइन पढ़ाना जा रहा था इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। राजस्थान सरकार के शिक्षा निदेशालय के फैसले के खिलाफ निजी स्कूलों के अभिभावक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन अब हाईकोर्ट ने 28 अक्टूबर का शिक्षा निदेशालय बीकानेर की सिफारिशों को जारी रखा है।

इस फैसले के बाद निजी स्कूलों को राहत मिली है तो अभिभावकों को निराश हुई है लेकिन स्कूल नहीं जाकर घर से पढ़ाई करने से कोरोना का प्रकोप इतना नहीं फैला जितना दूसरे देशो में देखा गया है।

जाने पूरा मामला

कोरोना काल में राज्य सरकार ने स्कूल फीस को स्थगित कर दिया था इसके बाद निजी स्कूलों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस पर हाई कोर्ट की एकलपीठ ने स्कूलों को ट्यूशन फीस का 60 प्रतिशत हिस्सा बतौर फीस लेने के आदेश दिये थो इसके बाद सिंगल बैंच के फैसले पर रोक लगा दी थी।

जयपुर में होगा कोरोना की देशी वैक्सीन के थर्ड फेज का ट्रायल

नेशनल इंस्टीट्यृट ऑफ वायरलॉजी और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ तैयार की गयी वैक्सीन तीसरा और अन्तिम ट्रायल जयपुर में किये जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि इस ट्रायल के लिए राजधानी जयपुर के विधाधर नगर मेंं स्थित मणिपाल अस्पताल को चुना गया है। इससे पहले इस अस्पताल में जायडस कैडिला कंपनी की बनाई वैक्सीन का भी ट्रायल किया जा चुका है।

इस ट्रायल को लेकर प्रदेश सरकार ने वैक्सीन आने की संभावना को देखते हुए पूरे प्रदेश में लगभग सभी प्रकार की तैयारियां करने में जुट गयी है। बताया जा रहा है कि वैक्सीनेशन सेंटर बनाने के लिए प्रदेश के 3 प्रमुख शहरों को चुना गया है जिसमें जयपुर उदयपुर व जोधपुर शामिल है।

अब तक मिली जानकारी के अनुसार जयपुर में कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन के थर्ड फेज का ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा। इस ट्रायल में हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने नेशनल इंस्टीट्यृट ऑफ वायरलॉजी और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा तैयार की गई वैक्सीन की डोज लगभग 500 से ज्यादा वॉलिटियर्स को दी जाएगी।

इससे पहले जयपुर में जायडस कैडिला कंपनी की बनाई वैक्सीन का भी ट्रायल किया गया था लेकिन कंपनी का ये ट्रायल दूसरे चरण का था जिसके परिणाम आना अभी ​बाकी है। इस वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री तापमान में रखा जाएगा। वैक्सीन के जल्द आने की संभावना को देखते हुए राजस्थान सरकार ने प्रदेश में मेडिकल कॉलेज,जिला अस्पताल व सैटेलाइट अस्पताल में इसको रखने की तैयारी में लग गयी है। सबसे पहले डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्मिकों को टीका लागाये जाने की बात सामने आ रही है।

कोरोना और सियासी संकट के बीच गहलोत सरकार के दो साल पूरे, जानें उपलब्धियां

राजस्थान की कांग्रेस सरकार आज अपने दो साल पूरे करने के मौके पर प्रदेश के सभी जिलों में अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने पेश करेगी। दो साल के कार्यकाल में सीएम गहलोत को सियासी संकट के साथ कोरोना से निपटने के लिए जो प्रयास किये है वह तारीफ के काबिल है। दो साल के मौके पर अपने चुनावी घोषणा पत्र में जो वादे किये थे उनको अभी तक 50 प्रतिशत पूरा करने की बात कही जा रही है।

दो साल के कार्यकाल में सरकार ने बेरोजगारी को कम करने के लिए जो वादे किये थे उन पर अभी तक किसी प्रकार की कोई बड़ी उपलब्धी हासिल करने में कामयाब नहीं हुई है। राज्य सरकार का दूसरा वर्ष पूर्ण होने पर राज्य स्तरीय समारोह 18 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के कार्यक्रम रखें गये है।

गहलोत ने दो-दो मंत्रियों के समूह में 19 एवं 20 दिसम्बर को जिलों का दौरा करने एवं राज्य सरकार की योजनाओं तथा कोरोना प्रबंधन की समीक्षा करने के भी निर्देश जारी किये है। गहलोत सरकार ने बंद पड़ी रिफाइनरी और मेट्रो प्रोजेक्ट को फिर से नई गति देने के साथा कोविड की चुनौती को जिस तरह से निपटा है वह देश और दुनिया के लिए एक नजीर बनी है।

सरकार के सबसे महत्वपूर्ण फैसले जिससे प्रदेश की जनता को लाभ मिला

महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य में 24/ 7 महिला हेल्पलाइन
किसानों के 7692 करोड़ रुपए के अल्पकालीन फसली ऋण माफ किए
मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना में निःशुल्क दवाइयों की संख्या 607 से बढ़ाकर 709 की गई

सबसे महत्वपूर्ण वादे जो आज भी अधूरे

राजस्थान में लगभग दो लाख से ज्यादा संविदा कर्मियों को स्थाई करने का वादा पूरा नहीं हुआ है।
विभिन्न विभागों की लंबित भर्तियों का मामला अभी तक हल नहीं हुआ है।
रोजगार के लिए हर साल 75 हजार भर्तियां करने का वाद भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है।