रामलीला मैदान पहुंचे लाखों लोग, प्रियंका गांधी का मोदी सरकार के खिलाफ करारा हमला

नई दिल्ली। कांग्रेस की भारत बचाओं रैली में हिस्सा लेने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता रामलीला मैदान पहुंच रहे हैं। प्रियंका गांधी ने रामलीला मैदान की रैली में अपने भाषण की शुरुआत मेरे नेता राहुल गांधी से की। प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में मोदी सरकार के खिलाफ करारा हमला बोला है।

प्रियंका ने कहा ये देश एक आंदोलन से उभरा है। भाजपा के 6 वर्षो के राज के बाद जीडीपी पाताल पर है। छोटा व्यापारी नाखुश है। बीजेपी है तो 4 करोड़ नौकरियां नष्ट हैं। फिर भी हर बस स्टॉप हर इश्तेहार में मोदी मुमकिन है।

गांधी ने कहा कि भाजपा है 100 रुपये प्याज़ मुमकिन है। 4 करोड़ नौकरी नष्ट होना मुमकिन है। 15000 किसानों की आत्महत्या मुमकिन है। भाजपा है जो कानून देश के खिलाफ है मुमकिन है। भाजपा है तो हमारे पीएसयू का बिकना मुमकिन है।

प्रियंका ने अपने भाषण में उन्नाव की घटना को याद दिलाया। पीड़ित परिवार का दुखड़ा सुनाया. उन्होंने कहा कि जब मैंने एक छोटी सी बच्ची से पूछा कि बड़ी होकर तुम क्या बनोगी तो पहले तो उसने कुछ नहीं किया लेकिन बाद में उसने कहा कि जो वकील से बड़ा होता है।

भारत बचाओ’ रैली का मकसद बीजेपी सरकार की विभाजनकारी नीतियों को उजागर करना है। पार्टी के शीर्ष नेता रैली को संबोधित कर मोदी सरकार की विफलताओं और देश के नागरिकों को बांटने के कथित प्रयासों को जनता के सामने उजागर करेंगे।

भारत बचाओ रैली को ऐतिहासिक बनाने में जुटी कांग्रेस, आर्थिक मंदी-बेरोजगारी के होगें अहम मुद्दे

दिल्ली। कांग्रेस की ‘भारत बचाओ’ रैली आज रामलीला मैदान में हो रही है। भारत बचाओ’ रैली का मकसद बीजेपी सरकार की विभाजनकारी नीतियों को उजागर करना है। पार्टी के शीर्ष नेता रैली को संबोधित कर मोदी सरकार की विफलताओं और देश के नागरिकों को बांटने के कथित प्रयासों को जनता के सामने उजागर करेंगे।

बता दें कि भारत बचाओ रैली में हिस्सा लेने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता रामलीला मैदान पहुंच रहे हैं। कांग्रेस पार्टी आर्थिक मंदी, किसान विरोधी नीतियों, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, बेरोजगारी और संविधान पर हमले को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ आज दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली कर रही है. इसमें कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं।

सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार जिस नीति के तहत काम कर रही है, उसमें जनता के प्रति जवाबदेही बिल्कुल भी नहीं है।देश की जनता चाहती है कि कांग्रेस पार्टी देश के चहुंमुखी विकास के लिए देश का नेतृत्व करे, उन्होंने कहा कि यह रैली देश को एक नई दिशा देगी।

राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि आज देश में जैसी परिस्थितियां हैं और केंद्र की बीजेपी सरकार जिस प्रकार से अराजकता के साथ राज कर रही है, उससे जनता परेशान है। बढ़ती मंहगाई, गिरती अर्थव्यवस्था व बेरोजगारी के कारण जनता को मूलभूत आवश्यक वस्तुओं के लिए भी समझौता करना पड़ रहा है।

एससी-एसटी आरक्षण बिल राज्यसभा में पारित, बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस को बताया दलित विरोधी

दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने उच्च सदन में बिल पारित करने के दौरान बाधा डालने के लिए कांग्रेस पार्टी को लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ये हरकत दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाती है।

आपको बता दें कि एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने वाला 126वां संशोधन बिल गुरुवार को राज्यसभा से पास हो गया। साथ ही एंग्लो इंडियन कोटे से होने वाली सांसद की 2 सीटों को भी खत्म करने का प्रावधान है।

बता दें कि संविधान के 126वें संशोधन बिल में एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने की व्यवस्था है, जिसके राज्यसभा में पारित होने में कांग्रेस ने बाधा डालने की कोशिश की। हालाँकि सभापति की आग्रह पर वे सदन में वापस आए और तब विलम्ब से यह बिल पास हो पाया।

मायावती ने ट्वीट किया, ‘संविधान के 126वें संशोधन बिल में एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने की व्यवस्था है, जिसके राज्यसभा में पारित होने में बाधा डालकर कांग्रेस ने अपनी दलित विरोधी सोच का परिचय दिया है।

बता दें कि आरक्षण को आर्टिकल 334 में शामिल किया गया है। बिल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को 10 साल तक बढ़ाने का प्रावधान है. एंग्लो-इंडियन समुदाय, एससी, एसटी को दिए जाने वाला आरक्षण 25 जनवरी, 2020 को समाप्त हो रहा है. आगे के दस वर्षों के लिए, यानी 25 जनवरी, 2030 तक सीटों के आरक्षण को बढ़ाने के लिए विधेयक है।

वर्तमान समय में दलित समाज की होती – दुर्दशा आखिर क्यों –

At the present time, falling level of dalit politics – spark era

वर्तमान समय में दलित राजनीति का गिरता स्तर – चमचायुग शुरू –

भारतीय संविधान के शिल्पकार भारत रत्न  बाबा साहब डॅा. बी.आर. अंबेडकर की यह दूरदर्शिता ही थी कि उनके द्वारा गोलमेज़ सम्मेलन में भारत के दलितों (अनु.जाती / अनु. सूचित जन जाती /तथा पिछडा वर्ग ) के व्यस्क मतदाता के लिए दो मतों की मांग करना कितनी अहमियत रखती ,यदि मिस्टर गांधी द्वारा उसका आमरण अनशन के द्वारा प्रतिरोध नहीं किया जाता तो आज अधिकारों से वंचित मूलनिवासियो के अधिकारों से इस कदर खिलवाड़ नहीं किया जाता .

जो हम आज देखने को मजबूर हैं। कारण यह है कि बाबा साहब यह भली -भांति जानते थे कि दोहरे मतदान

का अधिकार यदि मूल -निवासियो को मिल गया होता तो भारत की लोकसभा और तमाम विधानसभाओं  में वास्तविक रूप से हमारे ही जनप्रतिधियो का प्रतिनिधित्व होता,जो आज देखने को भी नहीं मिलता है – और यहीं इस समाज का दुर्भाग्य भी है कि सुरक्षित सीटों से चुनकर जाने वाले जनप्रतिनिधि अपने समाज से अधिक अपनी स्वयं तथा अपने राजनीतिक दलों और उनके आंकाओ के तलवे  चाटने में अपनी बहादुरी समझने में संकोच नहीं करते हैं |

आज सत्ता के लालच में समाज के गणमान्य लोग बाबा साहब के सिद्धांतो के विपरीत जाकर मनुवादियों के षड्यंत्र में फंस गये है जिसका खामियाजा आज समाज अपने शोषण से दे रहा है अर्थार्त मनुवादी लोग हमेशा हमारे समाज के गरीब ,वंचित लोगों के शोषण हमारे समाज के पथ विहीन लोगों द्वारा ही करवा रहे है आज युवा पीड़ी बाबा साहब के सपनो के भारत के निर्माण के लीये वचनबद्ध है इस सकारात्मक मुहीम में हमारे युवा कामयाब ही हो रहे है |

बीजेपी का आंबेडकर प्रेम –

क्या बाबा साहब की इन 22 प्रतिज्ञाओँ से सहमत होंगे – मनुवादी 

14 अप्रैल को संविधान निर्माता आंबेडकर की जयंती पूरे देश में धूमधाम से मनाई गई। तमाम राजनैतिक दलों में बाबा साहब की जयंती के अवसर पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने की होड़ मची हुई थी। आश्चर्य की बात यह है कि बाबा साहब जिस हिंदुत्व और जातिवाद के खिलाफ ताउम्र लिखतें-लड़ते रहें उसी अमानवीय व्यवहार के पैरवीकार माने जाने वाले और बाबा साहब के विचारों से घोर असहमति रखने वाले तमाम राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन भी इस अवसर को मनाने के बहाने अपना उल्लू सीधा करते नज़र आए। अब मनाने और मान्यताओं में फर्क करना बहुत ज़रूरी हो गया है।
हैं 1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
2.मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा ।
3.मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
4.मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ।
5.मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ।
6.मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा।
7.मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा।
8.मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा।
9.मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ।
10.मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा।
11.मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा।
12.मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा।
13.मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा।
14.मैं चोरी नहीं करूँगा।
15.मैं झूठ नहीं बोलूँगा।
16.मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा।
17.मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा।
18.मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा।
19.मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हा
निकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप
मैं बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ।
20.मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है।
21.मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ।
22. मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा।

 


यह लेखक के निजी विचार है |

लेख़क – मोहन लाल बैरवा – { सोशलिस्ट एक्टिविस्टएवं  एवं टीवी डिबेटर } जयपुर राजस्थान

OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक संगठनो का निर्णय – लोकसभा चुनावों में मनुवादी प्रत्याशियों का करेंगे -बहिष्कार

95% समाज ने कहा – लोकसभा चुनावों में करेंगे – मनुवादि प्रत्याशियों का बहिष्कार —

OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों ने  सर्व सहमती से निर्णय लिया की आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में सभी पार्टियों के मनुवादी प्रत्याशियों का वह विरोध करंगे और किसी भी कीमत पर इन मनुवादी प्रत्याशियों को वोट नहीं देंगे |

 

जयपुर | OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज के  वरिष्ट संगठनों ने आज जयपुर में आयोजित “संयुक्त स्वाभिमान बैठक ” में भाजपा और कांग्रेस द्वारा मूलनिवासियों के अधिकारों का जो हनन किया जा रहा है उस पर विस्तार से चर्चा की गई |

स्वाभिमान बैठक में सभी समाजों के वरिष्ट , बुद्धिजीवी व् युवा वर्ग शामिल हुवें जिसमे वर्तमान भाजपा मोदी सरकार द्वारा जो कुठाराघात OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज पर किये जा रहे है जैसे – मोदी की भाजपा सरकार द्वारा आरक्षण के खत्म करने की साजिश – 13 पॉइंट रोस्टर , evm की विश्वसनीयता पर सवाल , बिन मांगे सवर्णों को दिये गए – 10% आरक्षण आदी गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई |

क्या कहा बुद्धिजीवियों ने –

अध्यक्ष्य – आरक्षण अधिकार मंच के राजाराम मील साहब –

ने कहा की आज वर्तमान भाजपा सरकार ने आरक्षण को मजाक बना दिया है आज तक आरक्षण सही तरीके से लागू भी नहीं हुआ है

जबकि भाजपा आरक्षण विरोधी सरकार साबित हुई है आज देश का शिक्षित युवा बेरोजगार घूम रहा है मोदी सरकार आज पूरी तरह से विफल साबित हुई है आज जिन गरीब ,वंचित शोषित वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए था उन्हें तो सही तरह से मिला भी नहीं है और सवर्णों को बिन मांगे 10 % आरक्षण लाभ दे दिया गया है जो की इस मनुवादी सरकार के पक्षपात को उजागर करता है |

दलित – मुस्लिम एकता मंच अध्यक्ष – आरको साहब 

अब्दुल लतीफ़ आरको साहब ने कहा की आज देश को कुछ मुठ्टी भर लोग अपने अनुसार चला रहे है उन्हें सिर्फ अपने चहीते मित्रमण्डली { अडानी -अम्बानी } को लाभ केसे पहुँचाया जाये इस पर अधिक ध्यान रहता है जबकि देश के 40% बेरोजगार लोग  प्रतिदिन रोजगार की तलाश में शहरों की और जाते है आज देश में साम्प्रदायिक ताकते फन उठाये हुए है आज देश के हालत चिन्त्ता जनक है आज  OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज के लोग इस विषम परिस्थितियों में है की कांग्रेस – भाजपा में से कौन सही है जबकि वर्तमान में दोनों पार्टिया सांप नाथ – नाग नाथ से कम नज़र नहीं आती है जो कि हमारे बहुसंख्यक समाज के लिए बड़ी चिंता का विषय है |

भीम संसद – पवन देव 

भीम संसद के मीडिया प्रवक्ता पवन देव ने कहा की आज देश की सत्ता में हर स्तर पर मनुवादियों का कब्ज़ा है आज इन मनुवादियों ने संविधान को मजाक बना दिया है आज देश का संविधान ख़तरे में है भारत का संविधान विश्व का सबसे मजबूत संविधान है क्योकिं संविधान निर्माता डॉ बाबा साहब अम्बेडकर ने इस संविधान के माध्यम से देश के सभी वर्गों – दलित ,पिछड़ा ,वंचित अल्पसंख्यक , महिला वर्ग आदी सभी के अधिकारों को सुरक्षित व् संरक्षित किया है जिससे यह पिछड़ा वंचित समाज – मुख्य समाज के साथ मुख्यधारा में आ सके लेकिन आज इस भाजपा मनुवादी सरकार ने बहुसंख्यक 95 % समाज के लोगों पर षड्यंत्र द्वारा कुठाराघात कर अपने चहितों को लाभ देने में मशगूल है जो की देश की जनता के साथ धोखा है  |

युवा सामाजिक कार्यकर्ता – धर्मेन्द्र आँचर –

युवा सामाजिक कार्यकर्ता आँचर ने कहा की आज देश में 5 प्रतिशत सवर्ण समाज के लोगों ने सभी संसाधनों पर कब्ज़ा कर रखा है जबकि मूलनिवासी OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज आज हाशिये पर खड़ा है आज देश में 5 % लोगों को 10 % आरक्षण  बिन मांगे यह  मनुवादी सरकार ने गिफ्ट कर दिया है जबकि देश की 95 %  जनसंख्या को आज अपने संविधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया है आज देश का युवा बेरोजगारी से तंग आ कर आत्महत्या कर रहा है और देश के यह मनुवादी नेता विदेशी दौरों में मस्त है आज हम इन दोनों भाजपा – कांग्रेस के मनुवादी प्रत्याशियों को लोकसभा में वोट नहीं देंगे – यह निर्णय है हमारा |

OBC /SC/ST एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों ने सर्वसहमति से कहा है की आगामी लोकसभा चुनावों में वह मनुवादी प्रत्याशियों  को किसी भी कीमत पर वोट नहीं देंगे व् उनका विरोध करेंगे |

5 मार्च के भारत बंद का समर्थन – 

‘‘संविधान बचाओ संघर्ष समिति’’ द्वारा घोषित दिनांक 5 मार्च 2019 को राष्ट्रव्यापि भारत बंद व राष्ट्रीय आंदोलन को पूर्णतया समर्थन करने का निर्णय लिया गया।

इस “संयुक्त स्वाभिमान बैठक में विभिन्न संगठनों जिसमें आरक्षण अधिकार मंच, सामाजिक अधिकार न्याय मंच, दलित मुस्लिम एकता मंच, श्री कृष्ण यादव विकास संस्थान, अम्बेडकर वेलफेयर सोसाईटी, भीम संसद आदि के प्रमुखों ने भाग दिया

 

डा. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय – जयपुर विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित –

डा. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, 

जयपुर विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित

जयपुर, 13 फरवरी। राज्य विधानसभा ने बुधवार को डा. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित कर दिया।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री भंवर सिंह भाटी ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पर हुई बहस पर जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसी को ध्यान मेें रखते हुए यह विधेयक लाया गया है।
श्री भाटी ने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 5 करोड़ रूपये का शुरूआती प्रावधान किया गया है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के माध्यम से शोध कार्याेंं का संचालन, समान शैक्षणिक कैलेण्डर, विधि शिक्षा में एकरूपता, विधि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्यों की पूर्ति हो सकेगी। इस विश्वद्यिालय की स्थापना से विधिक चेतना के नये दौर की शुरूआत होगी तथा स्वरोजगार तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि शुरूआत में शैक्षणिक व अशैक्षणिक पदों को संविदा या पर््रतिनियुक्ति से भरा जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में 15 राजकीय तथा 66 निजी विधि महाविद्यालय है, जिनमें 30 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और इन सभी महाविद्यालयों को एक ही विश्वविद्यालय से संबद्धता मिले, ऎसे प्रयास किये जायेंगे।

 

उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रहा है। वर्तमान में राज्य में उच्च शिक्षण संस्थाओं में 18 लाख नियमित एवं स्वयंपाठी विद्यार्थी नामांकित है। उन्होंने बताया कि राज्य का सकल नामांकन अनुपात 21.7 है जबकि राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 25.8 है। राज्य का सकल नामांकन अनुपात अभी भी राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात से कम है। इसलिए उच्च शिक्षा में विस्तार की आवश्यकता है।
श्री भाटी ने बताया कि वर्ष 2012 में 7 राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालय खोले गये थे। यह देश में पहला उदाहरण था जब इतनी संख्या में वित्त पोषित विश्वविद्यालय एक साथ खोले गये। इनमें डा. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर भी शामिल था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा कुलपति की नियुक्ति की गई, कुलसचिव के पद पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को पदस्थापित किया गया तथा अन्य स्टाफ संविदा व प्रतिनियुक्ति पर लगा दिये गये थे।
विश्वविद्यालय में 53 स्थाई पद सृजित किये गये थे और भूमि आवंटन प्रक्रियाधीन था। इस विश्वविद्यालय के लिए भवन निर्माण व अनावृति मद के प्रावधान किये गये थे, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार द्वारा इस विश्वविद्यालय को बंद कर दिया गया। इस विधेयक के माध्यम से विश्वविद्यालय को पुनःस्थापित किया जा रहा है।

गहलोत सरकार के खिलाफ़ – मुस्लिम

मुख्यमंत्री गहलोत के रवैये से मुसलमानों में कङा रोष –

मुस्लिम थिंक टैंक का मानना है कि राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता की चौखट तक पहुंचाने में प्रमुख योगदान मुस्लिम वोटर का रहा है। यहाँ तक कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मुस्लिम वोटर की एकतरफा पोलिंग से विधायक बने हैं, इसके बावजूद गहलोत ने मुसलमानों को पूरी तरह से नजरअंदाज करने का रवैया बना रखा है। गहलोत के इस रवैये से मुसलमानों में कङा रोष है, जिसका का खामियाजा कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भुगतान पङ सकता है !
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एक मुस्लिम थिंक टैंक विधानसभा चुनाव परिणाम का अध्ययन कर रहा है। इस अध्ययन और आंकड़ों के आकलन के आधार पर थिंक टैंक का मानना है कि राजस्थान में मुस्लिम वोट करीब 90 फीसदी पोल हुआ है और कुछ सीटों को छोड़कर यह वोट एकतरफा कांग्रेसी उम्मीदवारों को मिला है। जिसके नतीजे में कांग्रेस को 100 सीटें मिली हैं और वो 

हारती हारती बची है। अगर मुस्लिम वोट 20 फीसदी भी कम पोल हो जाता, तो कांग्रेस को 60 सीटें भी नहीं मिलती !


जयपुर। दो महीने पहले राजस्थान विधानसभा चुनाव हुए। जिनमें कांग्रेस को 99 सीटें मिली। हालांकि बाद में रामगढ सीट पर हुए चुनाव में कांग्रेस जीत गई और उसकी कुल 100 सीटें हो गई, बहुमत से एक कम। मतगणना के एक सप्ताह बाद मुख्यमंत्री कौन बने ? के सवाल की जंग खत्म हुई और अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री व सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके कई दिनों बाद मन्त्रीमण्डल का गठन हुआ। मन्त्रीमण्डल में एक मुस्लिम को मन्त्री बनाया गया, जबकि पिछले तीन दशक में जब भी राजस्थान में कांग्रेस की सरकार रही है, तब तीन से कम मुस्लिम मन्त्री कभी नहीं रहे। मन्त्रीमण्डल का

गठन होते ही मुसलमानों में कङा रोष व्याप्त हो गया। जिसकी चर्चा चाय चौपालों से लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हो गई। लोगों ने गहलोत के इस रवैये की कङी आलोचना करते हुए नाराज़गी का इजहार किया।

इसके कुछ दिनों बाद विभागों का बंटवारा हुआ और मुसलमानों के नाम पर बनाए गए एकमात्र मन्त्री पोकरण विधायक सालेह मोहम्मद को अल्पसंख्यक मामलात का मामूली मन्त्रालय देकर इतिश्री कर दी। तो मुस्लिम समुदाय में व्याप्त रोष और तीव्र हो गया। फिर एएजी की नियुक्तियां हुईं और उनमें एक भी मुस्लिम एडवोकेट को शामिल नहीं किया गया। जबकि एएजी के नाम पर करीब डेढ़ दर्जन वकीलों की नियुक्ति हुई है। इसके बाद मुस्लिम बुद्धिजीवियों ख़ासकर वकीलों ने कङी नाराज़गी का इजहार किया। कांग्रेस से जुड़े हुए मुस्लिम वकीलों ने एक बैठक आयोजित करने की भी योजना बनाई, हालांकि वो किसी कारणवश आयोजित नहीं हो

सकी। एएजी की नियुक्तियों के बाद अन्दरखाने कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं ने भी मुख्यमंत्री गहलोत की आलोचना शुरू कर दी और गहलोत के इस रवैये को पार्टी नेतृत्व तक पहुंचा दिया। इसके बाद एक मुस्लिम एडवोकेट को सरकारी वकील के साथ एएजी बनाया।

सीएम गहलोत के इस रवैये से मुसलमानों में कङा रोष है और मुस्लिम समुदाय अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सियासी तौर पर जागरूक मुसलमानों का मानना है कि राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता की चौखट पर पहुंचाने वाला मुस्लिम समुदाय है। इसके बावजूद गहलोत मुसलमानों को नजरअंदाज कर रहे हैं और वो कांग्रेस को भाजपा की बी टीम बनाने पर तुले हुए हैं, जिसका खामियाजा कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भुगतान पङ सकता है। इस बीच एक मुस्लिम थिंक टैंक ने विधानसभा चुनाव परिणाम का अध्ययन शुरू किया है और इस थिंक टैंक का मानना है कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार मुस्लिम वोटर की देन है। इस थिंक टैंक ने इकरा पत्रिका से भी सम्पर्क किया और इकरा पत्रिका की टीम ने थिंक टैंक के आंकड़ों और विश्लेषण का अध्ययन किया। यह एक विस्तृत रिपोर्ट है, जो एक लेख में प्रकाशित करना सम्भव नहीं है। इसलिए आगामी अंकों में विस्तार से इस रिपोर्ट पर आधारित लेख प्रकाशित किए जाएंगे। फिर भी कुछ आंकड़े इस लेख में भी प्रकाशित किए जा रहे हैं।

इस थिंक टैंक का मानना है कि राजस्थान में मुसलमानों का वोट करीब 90 फीसदी पोल हुआ है और कुछ मुस्लिम बाहुल्य बूथों पर तो इससे भी अधिक वोट पोल हुआ है। नगर, तिजारा, उदयपुरवाटी, सीकर जैसी कुछ विधानसभा सीटों को छोड़कर यह वोट एकतरफा पूरा का पूरा कांग्रेसी उम्मीदवारों को मिला है। जिसके नतीजे में कांग्रेस को 100 सीटें मिली हैं और वो हारती हारती बची है तथा राजस्थान की सत्ता कांग्रेस की झोली में आई है। इस थिंक टैंक का मानना है कि अगर राजस्थान में मुसलमानों का वोट 20 फीसदी भी कम पोल हो जाता, तो कांग्रेस की 60 सीट भी नहीं आती और वो आज विपक्ष में बैठी होती। इस थिंक टैंक का यह भी दावा है कि कांग्रेस को मुसलमानों के अलावा किसी भी जाति या समुदाय का 65 फीसदी से अधिक वोट नहीं मिला है। कुछ जातियों का तो कांग्रेस को 20 फीसदी से भी कम वोट मिला है, फिर भी कांग्रेस सरकार ने उन जातियों से सम्बंधित नेताओं को मन्त्रीमण्डल और एएजी जैसे पदों पर मुस्लिम से ज्यादा नियुक्तियां दी हैं। इनका आकलन यह भी बता रहा है कि किसी भी जाति का 65 फीसदी से अधिक वोट कांग्रेस को उसी सीट पर मिला है, जिस सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार उसी जाति का था तथा भाजपा या अन्य पार्टी का कोई मजबूत उम्मीदवार दूसरी जाति का था। जबकि मुसलमानों का वोट न सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवार वाली सीटों पर बल्कि कमोबेश अन्य सभी सीटों पर भी 90 फीसदी के करीब पोल हुआ है तथा यह एकतरफा कांग्रेस को मिला है। इसके बावजूद सीएम गहलोत मुसलमानों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

अगर कांग्रेस के कुछ विजयी उम्मीदवारों को मिले वोट और जीत के अन्तराल का अध्ययन करें, तो मालूम होता है कि वे मुस्लिम वोट की वजह से जीते हैं, यहाँ तक के खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मुस्लिम वोटों की वजह से विधायक बने हैं। यहाँ कुछ ऐसी ही सीटों के आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, जहाँ मुस्लिम वोट 50 हजार से अधिक हैं। इनमें एक सरदारपुरा विधानसभा सीट है, जहाँ से खुद मुख्यमंत्री गहलोत विधायक बने हैं। वे यहाँ से 45 हजार 597 वोटों के अन्तर से जीते हैं और उन्हें करीब 65 हजार मुस्लिम वोटर वाली इस सीट पर एकतरफा मुस्लिम वोट मिले हैं। दूसरी सीट टोंक जहाँ से उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट 54 हजार 179 वोटों के अन्तर से विजयी हुए हैं। तीसरी सीट कोटा उत्तर जहाँ से यूडीएच मन्त्री शान्ति धारीवाल 17 हजार 945 वोटों की लीड से जीतकर विधायक बने हैं। चौथी सीट बीकानेर पश्चिम जहाँ से कैबिनेट मन्त्री बी डी कल्ला 6 हजार 190 वोटों के अन्तर से विजयी हुए हैं। पांचवी सीट झुन्झुनूं जहाँ से बृजेन्द्र ओला 40 हजार 565 वोटों की लीड लेकर विधानसभा पहुंचे हैं। यह सब वो सीट हैं जहाँ मुसलमानों के 50 हजार से अधिक वोट हैं और वे एकतरफा कांग्रेस के खाते में डले हैं।

लेख़क -एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।

मालवीय नगर – कालीचरण सराफ के किले को ढहा सकते है मात्र पवन गोयल- जाने ख़ास

मालवीय नगर विधानसभा सीट में सेंध मार सकते है मात्र ………………कांग्रेस के पवन गोयल …….जाने ख़ास 

जयपुर | आगामी राजस्थान विधानसभा चुनावओं में जयपुर शहर की हॉट सीटों में शामिल है मालवीय नगर सीट – वेसे तो इस सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता वर्तमान चिकित्सया मंत्री कालीचरण सराफ विधायक है लेकिन उनके किले को ढहाना मुश्किल लगता है गत विधानसभा चुनावों में भाजपा के वर्तमान विधायक कालीचरण सराफ के सामने कांग्रेस की वर्तमान मीडिया प्रवक्ता अर्चना शर्मा चुनावी मैदान में थी ,जिन्हें बड़े अंतर से भाजपा के विधायक के सामने हार का सामना करना पड़ा था |

क्या कहते है मालवीय नगर के समीकरण – 

वैसे तो मालवीय नगर सीट शिक्षित वर्ग की है लेकिन चुनावी समीकरण में जातीय पेच मुख्य भूमिका निभाता है कुल मतदाता 2 लाख 12 हजार 151 है इनमें से 1 लाख 9 हजार 705 पुरुष एवं 1 लाख 2 हजार 451महिला मतदाता शामिल है मतदाता सूची में प्रत्येक 1 हजार पुरुषो की तुलना 934 महिला मतदाता है जबकि सर्विस मतदाताओं की संख्या 75 है |

क्या कहते है – जातीय समीकरण –

मालवीय नगर सीट पर मुख्य दबदबा वैश्य समाज , जैन ,सिन्धी समाज का है जो की मुख्य रूप से कुल मतदाताओं का 50 % है जबकि अन्य समाजों में 26369 अनुसूचित जाति { SC }15 हजार मुस्लिम समाज व् ब्राह्मण समाज व् अन्य पिछड़ा वर्ग { OBC } है  |

 

भाजपा का गढ़ –

मालवीय नगर विधानसभा सीट को मुख्य रूप से भाजपा का गढ़ माना जाता है जिसका सीधा फायदा भाजपा प्रत्याशी को मिलता है वर्तमान में भाजपा विधायक कालीचरण सराफ इस सीट पर दबदबा

रखते है इसके साथ ही सराफ दिगग्ज नेता है जिनके सामने कोई भी प्रत्याशी ताल ठोकने से पहले एक बार संकोच ज़रूर करता है |

कांग्रेस के पवन गोयल ढहा सकते है कालीचरण सराफ का किला –

कांग्रेस पार्टी के जयपुर शहर उपाध्यक्ष पवन गोयल मालवीय नगर { भाजपा } के किले को ढहा सकते है वह इस सीट से  मात्र ऐसे कांग्रेस प्रत्याशी है जो इस परम्परागत भाजपा सीट में  सेंध मारते हुये कांग्रेस के खेमे में शामिल कर सकते है जिसका सीधा सा कारण है पवन गोयल की लोकप्रियता व् सभी समाजो में मजबूत पकड़ है इसके साथ ही गोयल सामाजिक रूप से समाज के कार्यों में मुख्य रूप से सक्रिय रहते है जिसके कारण उन्हें आम जनता का समर्थन मिलता है इसके साथ ही गोयल अग्रवाल समाज समिति के उपाध्यक्ष ,गोपालपुरा बायपास व्यापर मंडल के अध्यक्ष ,22 गौदाम व्यापर मंडल के अध्यक्ष , NGO स्वर कोकिला के अध्यक्ष ,आदी संगठनो में मुख्य पदों पर आसीन है जिसके कारण जनता से उनका सीधा संवाद रहता है जिसके कारण उन्हें जन -समर्थन मिलता है अगर कांग्रेस पार्टी उन्हें अपना उमीदवार घोषित करती है तो उनका मालवीय नगर सीट से जीत सुनिश्चित लगती है |

 

 

 

राजस्थान – भाजपा कर सकती है वापसी – जाने ख़ास रिपोर्ट

तीसरा मोर्चा गठबंधन के बंदर बाट में लगभग तय है – भाजपा की वापसी 

जयपुर | राजस्थान विधानसभा चुनावों में अभी एक महीने का वक्त है लेकिन आज https://politico24x7.com की टीम ने   जमीन स्तर और आकड़े जांचे तो चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे है ,जिसके आधार पर भाजपा राजस्थान में वापसी कर सकती है आसानी से – जानें

तीसरा गटबंधन मात्र – बातो और मीटिंगों ने –

राज्य में भाजपा और कांग्रेस को हराने के लिए ऐसे तो लम्बी राजनेतिक पार्टियों की जम्बो लिस्ट है लेकिन उन

सभी पार्टियों में कुछ अहम देखने को मिल रहा ,वैसे तो अभी जयपुर में MI ROAD पर एक निजी होटल में कुछ पार्टियों के मीटिंग हुई है लेकिन सिफ बाते – एकजुट होने के कोई संकेत नहीं मिले |

भाजपा ने बदले – 60% से अधिक प्रत्याशी –

भाजपा के चाणक्य अमित शाह राजस्थान में मुख्य रूप से सक्रिय है प्रतिदिन की मीटिंग के मीटिंग मिनिट्स तक उन तक पहुँच रही है भाजपा कार्यलय में अभी कुछ समय पहले हुई मीटिंग में अमित शाह ने साफ कह दिया था की जिला अध्यक्षों को टिकट नहीं मिलेगा चाहे तो पार्टी छोड़ सकते है जिसके बाद सभी जिलाध्यक्ष अपने संघटन के कार्य में लग गए वेसे लगभग सभी जिलाध्यक्ष टिकट की लाइन में थे , साफ़ इशारा रहा अमित शाह का पार्टी संगठन को वो किसी भी कीमत में टूटने नहीं देखे ,

60% से अधिक प्रत्याशी होगे नये – 

सूत्रों के अनुसार इस बार भाजपा में दिग्गजों के साथ कई बड़े नेता ओं की टिकट कट रहे है तथा उनको संघटन को मजबूत करने का कार्य दे दिया है ,इसके साथ ही 34 SC तथा 25 ST सीटों पर प्रत्याशी बदल दिए गए है ,इसके बाद 70 वर्ष से अधिक उम्र के उमीदवारो को मार्गदर्शन मंडल में रखने का मूड अब भाजपा ने बना लिया है |

उपरोक्त समीकरणों को देखने पर साफ़ पता लग रहा है की कितने नए प्रत्याशी इस बार चुनावी मैदान में है |

कांग्रेस आलाकमान है चिंता में – 

राजस्थान में तीसरा मोर्चे की जितनी भी पार्टिया मैदान में है वो सब कांग्रेस के वोट बैंक को ही शेयर कर रही है अब अंदुरनी खाने में गहलोत साहब से लेकर मुख्यमंत्री का सपना देख रहे सचिन पायलेट तक इस ख़तरे से परिचित है , जबकि कुछ समय पहले सचिन पायलेट ने कहा था की कांग्रेस किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी जिसके बाद सचिन पायलेट ने कहा था की सामान विचारधारा की पार्टियों के साथ बातचीत के सभी रास्ते खुले है – यह इशारे कुछ तो संकेत दे रहे है |

ख़ास नज़र – तीसरा मोर्चा जो सिर्फ बातों में है शामिल – 

गौरतलब है राजस्थान में इस बार लगभग 50 से अधिक सिम्बल देखने को मिल सकते है हर विधानसभा सीट से ,  वही तीसरे मौर्चे की बात करे तो अनगिनत पार्टिया/ संगठन इस बार चुनावी मैदान में है जैसे – लोहियावादी ,अम्बेडकर वादी ,माक्सवादी मिलकर चुनाव लड़ने वाले है तो अन्य जैसे भाजपा से बागी घनश्याम तिवाड़ी { भारत वाहनी पार्टी },हनुमान बेनीवाल {आगामी समय में जयपुर में रैली कर घोषणा करने वाले है } चन्द्र राज सिंघवी { निर्दलीय मंच } ,बसपा , आप ,राजपा , NPF  ,IPGP  ,नया भारत पार्टी , अभिनव पार्टी DSP अधिकार दल ,SDPI  जैसी अनेक पार्टिया अपना -अपना अलाप गा रहे है लेकिन यह ख़ास बात है अब चुनावों में कम समय बचा है लेकिन सिर्फ – बाते ही नज़र आ रही है अब जिस भाजपा को हराने के लिए यह सभी पार्टिया प्रयासरत है लेकिन आपसी मन -मुटाव / मन -भेद में गठबंधन होता नज़र नहीं आ रहा है अगर अब यह सभी पार्टिया अपने 200 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारती  है तो नुकसान कांग्रेस को ही होने वाला है जबकि भाजपा का 15% वोट बैंक तो फिक्स ही है ,एक थ्योरी”  मेनुएपुलेट डेटा ” के  सिदांत को माने तो वर्तमान समीकरण के अनुसार ” भाजपा “को फायदा होता नज़र आ रहा है अगर भाजपा इस बंदर बाट में सत्ता में वापसी कर जाए तो आश्चर्यजनक नहीं होगा |