कृषि कानूनों पर राहुल-प्रियंका का हल्ला बोल, प्रियंका पुलिस हिरासत……..

केन्द्र सरकार द्वारा पारित 3 नये कृषि कानूनों को समाप्त करने की मांग को लेकर पिछले 1 महीने से देश भर के किसान दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे है। किसानों की मांगों को लेकर सभी विपक्ष दल उनका समर्थन कर रहे है लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्टीय अध्यक्ष राहुल गंाधी सड़क पर उतरने का फैसला किया है।

राहुल के साथ कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेता उनके साथ सड़क पर उतरेगे और केन्द्र सरकार को बिल वापस लेने के लिए दबाव बनाएंगे। राहुल राष्ट्रपति से मिले तो दूसरी तरफ पुलिस बिना अनुमति के मार्च के आरोप में प्रियंका वाड्रा को हिरासत में ले लिया गया है।

राहुल के इस मार्च से पहले उनके आवास के बाहर धारा 144 लगा दी गयी है और पुलिस प्रशासन ने कहा कि केवल राष्ट्रपति से मिलने के लिए जिन लोगों को अनुमति दी गयी है उन्हीं लोगों को अनुमति दी जाएगी। कांग्रेस के नेता आज राष्ट्रपति से मुलाकात करने के साथ उनको 2 करोड़ किसानों के हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सौपेंगे और इन बिल को निरस्त करने का आग्रह करेंगे।

यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस पार्टी ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए सड़क पर उतरे है इससे पहले भारत बंद के दौरान भी कांग्रेस ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। राहुल गांधी का यह फैसला उनके और पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि पिछले कुछ समय से कांग्रेस पार्टी में अपनों की लड़ाई के कारण वह दूसरी मुद्धों पर ध्यान केन्द्रीत नहीं कर पा रही है।

किसान आंदोलन को लेकर केन्द्र सरकार अभी तक किसी भी प्रकार से झुकने को तैयार नहीं है और किसान भी मोदी सरकार के साथ किसी प्रकार की वार्ता से हल निकलाने पर राजी नहीं है। हालाकि पीएम मोदी कल किसानों को बहुत बड़ी राशि उनके बैंक खातों में देंगे।

धारा 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर चुनावों में दिखा बीजेपी का दम, जानिए पूरी खबर

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद पहली बार जिला विकास परिषद की 280 सीटों पर हुए चुनाव के परिणाम आने शुरू हो गये है। शुरुआती रुझानों में बीजेपी और गुपकार गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है तो अन्य दोनों दलों को चुनौती दे रहे हैं। धारा 370 हटाये जाने के बाद 7 दलों ने गुपकार गठबंधन बनाकर बीजेपी के खिलाफ एक साथ चुनाव लड़ा है जो कुछ हद तक सही साबित होता नजर आ रहा है।

गुपकार गठबंधन में पीपल्स कॉन्फ्रेंस, आवामी नैशनल कॉन्फ्रेंस,नैशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, J&K पीपल्स मूवमेंट के साथ ही सीपीआई और सीपीएम शामिल हैं। राज्य चुनाव आयोग के अनुसार आठ चरणों में 450 से अधिक महिला उम्मीदवारों समेत कुल 4,181 उम्मीदवार अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। इन चुनावों को लेकर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गये थे और प्रदेश की जनता ने भी इस चुनाव में बढ़चढकर मतदान किया था।

 

आपको बता दे कि अनुच्छेद 370 को हटाये जाने से पहले जम्मू और कश्मीर में त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली (ग्राम स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय, जिला स्तरीय) नहीं थी। इन चुनाव के जरिए जम्मू के 10 और कश्मीर घाटी के 10 यानी कुल 20 जिलों में डीडीसी का गठन होगा जो वहां के विकास के लिए अहम साबित होगी।

पहले चरण का मतदान 28 नवंबर को और 8वें व अंतिम चरण का मतदान 19 दिसंबर को हुआ था। जिसमें लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ था जो एक बड़ी बात है। उम्मीद की जा रही है कि शाम तक नतीजे पूरी तरह से आ जाएंगे लेकिन इन चुनावों में कांग्रेस को ज्यादा सीटे मिलती नजर नहीं आ रही है तो दूसरी बीजेपी रिकॉर्ड सीटों से जीतने का दावा कर रही है। इन चुनावों में निर्दलीयों ने भी अपना दम दिखाया है और अब तक मिली जानकारी के अनुसार सभी पार्टियों से ज्यादा अन्य के खाते में ज्यादा सीटे जाती नजर आ रही है।

 

राजस्थान: नगरपालिका में ​कांग्रेस का दिखा जलवा तो बीजेपी को मिली करारी हार

राजस्थान की 50 नगर निकाय चुनाव के नतीजों के आने के बाद जहां बीजेपी को करारा झटका लगा है तो कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। 12 जिलों की 50 निकाय में 36 पर कांग्रेस अध्यक्ष बनाने में सफल रही तो भाजपा के केवल 12 अध्यक्ष और वहीं दो निर्दलीय अध्यक्ष का चुनाव जीत पाए हैं।

जयपुर में बीजेपी का नहीं खुला खाता
जयपुर जिले की 10 नगर पालिकाओं में से 9 नगर पालिकाओं में कांग्रेस के चेयरमैन बना तो इसके अलावा एक नगर पालिका में कांग्रेस के बागी को जीत हासिल हुई।

भरतपुर में बीजेपी का नहीं खुला खाता
भरतपुर जिले की कुल आठ नगरपालिकाओं में से भाजपा के खाते में एक भी सीट नहीं गयी और भाजपा के प्रदेश महामंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले में पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है।

इन 12 जिलों में हुए चुनावों के परिणाम 13 दिसंबर को आए थे इसमें 1775 में से कांग्रेस को 620, निर्दलीय 595 और बीजेपी को 548, बसपा को सात सीटों पर जीत मिली थी। सबसे ज्यादा बगरू नगरपालिका में चौंकाने वाले परिणाम आए जहां पर निर्दलीय मालूराम को कांग्रेस के
6 वोट की क्रॉस वोटिंग ने मालूराम को चेयरमैन बना दिया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नाराज नेताओं से मुलाकता करेगी सोनिया गांधी

देशभर में कांग्रेस पार्टी के कमजोर होने से लेकर कई प्रकार के बदलावो की मांग को लेकर पत्र लिखने वाले वरिष्ठ 23 नेताओं के साथ शनिवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकता हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोनिया गांधी के साथ इन नेताओं की मुलाकात की भूमिका तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है हाल ही में कमलनाथ ने सोनिया से मुलाकात की थी।

जो लंबे समय से पार्टी से नाराज चल रहे हैं थे इन नेतओं ने पार्टी के भविष्य के साथ नये अध्यक्ष को लेकर जो बाते कही थी उसी को ध्यान में रखते हुए यह मुलाकत हो रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी के उपस्थित होने की अभी तक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

अगस्त महीने में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल समेत कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के लिए सक्रिय अध्यक्ष होने और व्यापक संगठनात्मक बदलाव करने की मांग की थी। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद कई नेताओं ने खुलकर आलोचना कर थी।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस धीरे—धीरे अपना अस्तिव खोती जा रही है और कुछ राज्यों को छोड़ दे तो उसे किसी क्षेत्रीय दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ना पड़ रहा है। अगर समय रहते कांग्रेस इस पर ध्यान नहीं देती है तो वहआने वाले समय में अपना वजूद खोने की ओर अग्रसर होती नजर आ रही है। कांग्रेस में इतने बड़े नेता होने के बाद भी अध्यक्ष पद केवल गांधी परिवार तक ही समिति रह जाता है और इसी बात को फायदा बीजेपी उठाती रही है

भारत में कोरोना मरीजों का ग्राफ 1 करोड़ के पार फिर भी वैक्सीन का इंतजार

कोरोना मरीजों का ग्राफ दुनिया के सभी देशों के साथ भारत में भी तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगभग 99 लाख हो गया है लेकिन इनमें से 94लाख मरीज ठीक हो चुके हैं जो बहुत ही अच्छी खबर है। कोरोना के कारण 1.43 लाख की मौत हो चुकी है और 3.50 लाख कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। रविवार को देश में कुल 27 हजार 336 मरीज कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की खबर मिली है।

भारत में जल्द ही कोरोना के टीके लगने शुरू हो सकते हैं और इसके तैयारी करने के लिए केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश भी जारी कर दिये है। टीके लगाने की प्रकिया इस तहर की होगी जिसमें कोई भी व्यक्ति आसानी से यह टिका लगवा सकेंगा और इसे एक अभियान की तरह पूरे देश में लागू किया जाएगा। कोरोना की रोकथाम के लिए कई देशों में कोरोना टीके लगने का कार्यक्रम शुरू हो चुका है।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के CEO अदार पूनावाला ने कहा है कि नये साल की शुरू होने के साथ ही कोरोना वैक्सीनेशन उपलब्ध करवा दी जाएगी। अगर भारत में 20% आबादी को वैक्सीन लग जाएगी तो अगले साल के अन्त तक हालात सामान्य होने लग जाएंगे। अभी तक जितनी भी कोरोना वैक्सीन तैयार की गयी है वह 100 प्रतिशत तक कारगर साबित नहीं हो पाई उनमें किसी ना किसी प्रकार की कोई कमी पाई जा रही है।

राजस्थान में रविवार को लगभग 1300 लोग कोरोना संक्रमित पाए गये है। अब तक 2 लाख 91 हजार 289 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 16 हजार 629 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 2 लाख 72 हजार 118 लोग ठीक हो गये है। इसके साथ 2542 लोगों के कारण अपनी जान गंवा चुके है।

शहरी निकाय चुनाव: बीजेपी का सूपड़ा साफ,कांग्रेस को मिली संजीवनी तो निर्दलीय ने मारी बाजी

राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज करके अपनी साख बचाने में कामयाब रही तो दूसरी तरफ बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इन चुनावों में कांग्रेस नंबर एक पर रही तो दूसरे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी रहे हैं जबकि बीजेपी तीसरे नंबर पर पहुंच गई है। जानकरों की माने तो शहरी इलाका बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है इस चुनाव में
जनता ने सभी जानकारों को फेल कर दिया है।


राजस्थान के 12 जिलों की 50 नगर निकाय में 43 नगर पालिका और 7 नगर परिषद के 1775 वार्डों के परिणाम 2020:

1. कांग्रेस को 620 वार्डों में जीत हासिक करके नंबर की पार्टी बनी है।
2. निर्दलीयों को 595 वार्ड जीतकर दूसरे स्थान पर रहे।
3. बीजेपी को 548 वार्डों में जीत मिली, जिसके कारण वह तीसरे स्थान पर चली गयी।

इन चुनावों में कांग्रेस नबंर एक पार्टी तो लेकिन वह केवल अपने दम पर 16 निकायों में अपना अध्यक्ष बना सकती है जबकि उसके 5 विधायक के दम पर ही वह अकेली बोर्ड बनाने कामयाब रही है। हालाकि पार्टी के 18 विधायकों और 4 मंत्रियों के क्षेत्रों में निकाय चुनाव में कांग्रेस बहुमत से दूर रह गई जहां निर्दलीयों का बोलबाला ज्यादा रहा है। इसके बाद भी कांग्रेस 40 बोर्ड बनाने का दावा कर रही है।


अगर बात करें 2015 के 50 निकाय चुनाव की तो उस समय 34 शहरों में बीजेपी अपना कब्जा जमाया तो और कांग्रेस पिछले साल की तुलना में सिर्फ 4 सीटे अधिक जीतने में कामयाब हुई है। लेकिन इस बार प्रदेश के तीस ऐसे निकाय हैं, जहां निर्दलीय अहम भूमिका में दिखते हुए नजर आ रहे हैं।

राजस्थान में नया सियासी संकट, BTP विधायकों ने छोड़ा गहलोत सरकार का साथ

राजस्थान में गहलोत सरकार को अपना समर्थन देकर उसकी सहायता करने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने अब अपना समर्थन वापस ले लिया है। भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने कई मौको पर कांग्रेस का साथ देकर उसकी नैया पार करवाने में मदद की है चाहे वह राज्यसभा का चुनाव हो या विधानसभा में विश्वास मत साबित करना हो। लेकिन पंचायत चुनावों में पहली बार बीजेपी और कांग्रेस के गंठबधन ने सभी को चौका दिया और इस बात से नाराज बीटीपी ने गहलोत सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का फैसला किया है।

पंचायत चुनाव में मिली हार के बाद एक बार भी राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया है कि वह भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) को जिला प्रमुख नहीं बनने दिया जिसके कारण समर्थन वापस ले लिया है। भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) के 2 विधायकों ने जब विधानसभा में गहलोत सरकार ने अपना बहुमत साबित किया था, तब दोनों विधायकों ने अशोक गहलोत का समर्थन किया था।

डूंगरपुर जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में बीटीपी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थी, लेकिन कांग्रेस और बीजेपी के हाथ मिलाने के चलते बीटीपी का जिला प्रमुख नहीं बन सका। इसके कारण डूंगरपुर में बीजेपी ने अपना जिला प्रमुख बना लिया इसी बार से नाराज होकर भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने अपना समर्थन वापस लिया है।


हालांकि, मौजूदा समय में दो विधायकों के समर्थन वापस लेने से अशोक गहलोत सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन आने वाले समय में यह कांग्रेस के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। बीते दिनों खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आशंका जताई थी कि राज्य में फिर एक बार सरकार गिराने कोशिश हो सकती है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि राजस्थान में कांग्रेस दो गुटो में बटी हुई है और एक पक्ष में गहलोत तो दूसरे पक्ष में सचिन पायलट है। पंचायत चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा नहीं रहा है और कई विधायक और मंत्रियों के क्षेत्रों में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

बंगाल विधानसभा चुनावों में आर—पार की जंग लड़ने को तैयार है BJP और TMC

अगले साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी के साथ दूसरी पार्टियों में सुगबुगाहट तेज होती नजर आ रही है। बात करे बीजेपी की तो उसने बिहार जीत के बाद से अपना अगला लक्ष्य बंगाल को बना लिया है और 2019 के लोकसभा चुनावों में बंगाल में वोट प्रतिशत को देखकर बीजेपी ने 200 सीट जीतने का लक्ष्य भी रख लिया है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि आने वाले कुुछ दिनों में ही चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल चुनाव पर बड़ा फैसला कर सकता है।

कोरोना काल में चुनाव आयोग के लिए सफलता तब मिली जब उन्होंने बिहार में बड़ी सावधानी के साथ चुनाव कराया है, उसी मॉडल के आधार पर पश्चिम बंगाल में भी चुनाव कराए जा सकते है। ममता बनर्जी ने तीन दशक से पश्चिम बंगाल की सीएम बनी हुई है और उन्होंने कभी लेफ्ट का सफाया कर सत्ता हासिल करी थी।

लेकिन इस बार ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चिंता बीजेपी होगी क्योंकि बीजेपी बंगाल में अपनी पूरी ताकत लगा चुकी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ बीजेपी के कई बड़े मंत्री और नेता लगातार बंगाल का दौरा कर रहे है और इससे लगता है कि बीजेपी बंगाल चुनावों में जीत के लिए जबरदस्त तैयारियों में जुट गयी है।

अगर बात करें बंगाल के मौजुदा हालात की तो यंहा बीजेपी और टीएमसी के कार्यकर्ताओं में आए दिन झगड़े होते रहते है और इसमें बीजेपी के कई कार्यकर्ताओं को अपनी जान तक गवानी पड़ी है। बंगाल में टीएमसी के आने से पहले लेफ्ट के साथ इस प्रकार की धटनाएं देखने को मिलती थी अब वहीं घटनाएं बीजेपी और टीमसी के बीच देखी जा रही है।

बीजेपी का बंगाल में प्रदर्शन:—

2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी का वोट प्रतिशत 18 फीसदी तथा 2 सीटों पर जीत हासिल करी थी। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों में वोट प्रतिशत 40 फीसदी जा पहुंचा और 18 सीटों पर जीत हासिल हुई। अब बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 200 सीटों पर जीत का दावा किया है।

बंगाल के मौजूदा हालात:—

बंगाल गये भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की सुरक्षा में चूक को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा है। इस घटना के बारे में बताया जा रहा है अध्यक्ष की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे जो बड़ी चूक मानी जा रही है। इसके साथ इस दौरे के दौरान बीजेपी के नेताओं पर हमला हुआ जिसमें कई बड़े नेताओं को चोट आने के साथ गाड़ियों के शिशे तोड़ने की तस्वीरे भी वायरल हो रही है।

ममता पर परिवादवाद का आरोप:

टीएमसी छोड़कर बीजेपी आए कई बड़े नेताओं के साथ बीजेपी ममता पर परिवादवाद को बढ़ावा देना तथा केन्द्र की सरकारी योजना से बंगाल की जनता को लाभ नहीं पहुंचाने को लेकर लगातार आरोप लगाती रही है। इसके साथ ममता बीजेपी को झूठ बोलने वाली पार्टी को अमीरों की पार्टी कहकर बुलाती है।

 

भारत बंद में किसानों से ज्यादा विपक्ष उतरा सड़कों पर

मंगलवार को किसानों द्वारा भारत बंद के समर्थन में विपक्षी दलों ने ज्यादा उत्साह नजर आया और लगभग देश के सभी राज्यों में किसानों से ज्यादा विपक्ष सड़कों पर उतरकर भारत बंद को सफल बनाने का काम किया है। अगर बात करें राजस्थान की तो यहां सरकार के कई मंत्री सड़कों पर उतरे और किसानों को हक दिलाने में उनके साथ खड़े रहने का वादा किया। अगर बात करें पूरे देश की तो कई जगह आगजनी और झड़प की खबरे भी देखने ​को मिली।


बंद को समर्थन देने वाले विपक्षी दल
भारत बंद को इन दलों ने समर्थन दिया है – कांग्रेस, एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, द्रमुक और इसके घटक, टीआरएस, राजद, आम आदमी पार्टी, सपा, बसपा, वामदल, पीएजीडी।

देशव्यापी भारत बंद के दौरान किसी प्रकार की कोई घटना घटित नहीं हो इसके मध्यनजर केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुरक्षा बढ़ाने और शांति सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किये हैं।भारत बंद के दौरान आम जनता को काफी परेशानियों का भी सामान करना पड़ रहा है और शादियों के सीजन के चलते बहुत ज्यादा परेशानी होती नजर आ रही है। कई किसाने दिल्ली की सीमा पर डटे हुए है और उनको केन्द्र सरकार ने कहा कि प्रदर्शन करने या बंद करने से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होगा।

राजस्थान में गहलोत सरकार पर मंडराया ये बड़ा खतरा

कोरोना काल में राजस्थान की गहलोत सरकार पर ​खतरा एक फिर से मंडराने लगा है इस बात का खुलासा स्वंय राज्य के सीएम गहलोत ने किया है। गहलोत ने बताया कि उनकी सरकार को एक बार फिर से अस्थिर करने की तैयारी की जा रही है लेकिन इस बार भी उनको कामयाबी नहीं मिलेगी। इस खबर के बाद से यह कयास लगाये जा रहे है कि पायलट खेमा नाराज है या फिर वह अपनी मांग पूरी नहीं होने के कारण कुछ ऐसा करने का प्रयास कर रहा है। सीएम गलतोत ने ​कहा कि पिछली बार जब सरकार गिराने की रणनीति बनाई गयी थी तब अमित शाह इसके पीछे ​थे जिसके पुख्ता जानकारी हमारे पास है।

प्रदेश में कोरोना के कारण बहुत ज्यादा लोगों को परेशा​नी झेलनी पड़ रही है और ऐसे समय में अगर सरकार को गिराने की बात सामने आ रही है तो यह प्रदेशवासियों के लिए सही नहीं होगा। क्योंकि पिछले दिनों राज्य की जनता ने देखा था कि जब कोरोना फैल रहा था तो सरकार एक महीने तक होटल में रही जिसके कारण लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी थी।

गहलोत और पायलट खेमे में पिछले दिनों से कोई ज्यादा बयानबाजी नहींं हुई है लेकिन इसके बाद भी सीएम का यह बयान बहुत कुछ होने की तरफ इशारा कर रहा है। अगर इन दोनों खेमों के बीच खिचतान कम नहीं हुई तो कांग्रेस पार्टी के लिए एक बार फिर बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है जिसमें दिल्ली में बैठे नेताओं को फिर हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।

गहलोत के इए बयान के बाद बीजेपी ने कहा कि वह हर बार अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर पैसे लेने का आरोप लगाकर सरकार गिराने को आरोप बीजेपी पर मंड़ते है। अगर खुद के परिवार की लड़ाई को वह हल नहीं कर पा रहे है तो प्रदेश की जनता का ध्यान वह कैसे रखेंगे।