भारत बंद: जयपुर में भाजपा और कांग्रेसी कार्यकर्ता भीड़े, दिल्ली के सीएम नजरबंद!

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ देश की कई विपक्षी पार्टियों ने किसान के भारत बंद का समर्थन किया है। लेकिन खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने नजरबंद कर दिया है और इस बात की जानकारी आम आदमी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसे जारी किया गया है। हालाकि दिल्ली पुलिस ने AAP के दावे को गलत करार दिया है।

वहीं बात करें राजस्थान की राजधानी जयपुर की तो यहां पर भारत बंद के दौरान बीजेपी और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में हाथपाई की नौबत आ गयी। इसके बाद पुलिस ने बीचबचाव करते हुए दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को दूर किया।

यूपी में भी सपा के कार्यकर्ताओं ने किसानों से ज्यादा योगी सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया और कई जगह सड़के बंद करने के साथ ट्रेने रोक दी। इसके साथ योग सरकार ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी कि अगर कोई जोर—जबरदस्ती से बंद करने का काम करता है तो उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी।

किसान संगठनों ने पहले ही कह दिया था कि हमारे मंच ​से किसी भी राजनीतिक पार्टी को राजनीति नहीं करने दिया जाएगा। लेकिन इसके बाद भी इस आंदोलन में किसानों की हितों की कम और अपनी राजनीति करने का ज्यादा दिखावा हो रहा है।

 

 

किसानों के भारत बंद को मिला विपक्षी दलों का साथ

कृषि कानूनों के खिलाफ लगभग देश के सभी राज्यों किसान आंदोलन कर रहे किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का फैसला किया है। किसानों के भारत बंद को समर्थन करने के लिए विपक्षी दल भी एक होकर किसानों के साथ खड़े हो रहे है। अब तक 11 से ज्यादा विपक्षी दल और दस ट्रेड यूनियन भारत बंद का सफल बनाने के लिए इसका समर्थन कर चुकी हैं।

विपक्षी दलों ने कहा, संसद में बिना वोटिंग व चर्चा के जल्दबाजी में पास कराए गए कृषि कानून भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इसके कारण देश के किसानों व कृषि पूरी तरह से नष्ट होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।


किसानों के साथ पांचवें दौर की वार्ता भी असफल रहने के बाद कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को राज्यमंत्री कैलाश चौधरी व पुरुषोत्तम रुपाला के साथ बैठक करके 9 दिसंबर को होने वाली बैठक की रणनीति बनाई है। इस आंदोलन के बारे में बीजेपी ने कहा कि देश के असली किसान कानूनों से चिंतित नहीं है और अपने खेतों में काम कर रहे हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक दलों ने राजनीतिक फायदे के लिए
किसानों को गलत जानकारी देकर आंदोलन करने के लिए उकसाया है।

किसानों को लेकर हमेश राजनीति होती रही है लेकिन आज तक किसी भी पार्टी ने इनका भला नहीं किया अगर आजादी के 70 साल बाद भी किसान को कोई पहचान नहीं मिली तो इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनो ही जिम्मेदार है। पीएम मोदी ने भी किसानों से अपील की है कि वह किसी के बहकावे में नहीं आवे कुछ लोग अपने फायदे के लिए किसानों का सहारा लेकर अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए है।

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