कोविड 19 को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सतर्क – समीक्षा बैठक में दियें यह निर्देश , कर्फ्यू बढ़ा

कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा  माइक्रो कंटेनमेंट जोन में जीरो मोबिलिटी 
सुनिश्चित कर संक्रमण की चेन तोड़ें – मुख्यमंत्री   10 नगरीय क्षेत्रों में रात्रिकालीन कफ्र्यू का समय बढ़ा
जयपुर 10  अप्रेल। कोरोना संक्रमण की रफ्तार को रोकने के लिए राज्य सरकार ने 30 अप्रेल तक प्रदेश के 9 शहरी क्षेत्रों में शाम 8 से सुबह 6 बजे तक तथा उदयपुर में शाम 6 बजे से नाइट कफ्र्यू लागू कर इसकी कड़ाई से पालना तथा सभी जिलों में कंटेनमेंट जोन चिन्हित कर उनमें जीरो मोबिलिटी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही शहरी इलाकों से लगते ग्रामीण क्षेत्रों में 9वीं कक्षा तक के स्कूलों में नियमित कक्षाओं का संचालन बंद रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में ये निर्णय किए गए। प्रदेश स्तर पर कोरोना स्टेट वॉररूम तथा सभी जिलों में जिला स्तरीय कंट्रोल रूम सहित 181 हेल्पलाइन को चौबीसों घंटे फिर से कार्यशील करने, संक्रमण की पांच प्रतिशत से अधिक पॉजीटिविटी रेट वाले क्षेत्रों में टेस्टिंग बढ़ाने, हैल्थ प्रोटोकॉल की पालना के लिए एनसीसी, एनएसएस, स्कॉउट एण्ड गाइडस की वॉलन्टियर के रूप में सेवाएं लेने, कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर संयुक्त टीमों की कार्रवाई बढ़ाने तथा सीमावर्ती जिलों में राज्य के बाहर से आने वाले व्यक्तियों की नेगेटिव आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट के लिए बनाई गई चेकपोस्टों को अधिक सुदृढ़ करने जैसे कडे़ कदम उठाए गए हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए माइक्रो कंटेनमेंट जोन में जीरो मोबिलिटी, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग तथा होम आइसोलेशन की पालना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संक्रमण की रफ्तार बीते कुछ दिनों में तेजी से बढ़ी है और हम संक्रमण की पहली लहर के सर्वोच्च स्तर को पीछे छोड़ चुके हैं। इसे देखते हुए जमीनी स्तर पर कोविड प्रोटोकॉल तथा एसओपी के उल्लंघन को सख्त उपायों से रोका जाना बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना हॉट-स्पॉट बन रहे क्षेत्रों की पहचान कर इनको नियमानुसार माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि ऎसे क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को रोकने पर विशेष फोकस करना होगा। इसमें स्थानीय स्वायत्त शासन और सार्वजनिक निर्माण सहित अन्य विभागों की मदद ली जाए। उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकॉल की पालना में सख्ती के साथ-साथ समझाइश पर भी जोर दें और अधिकारियों का आम लोगों के साथ व्यवहार संयत हो। उन्होंने कहा कि कोरोना की लड़ाई में जनसहयोग आवश्यक है।
चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में देश के साथ-साथ राजस्थान प्रदेश में भी संक्रमितों की संख्या में तेजी से हुए इजाफे का बड़ा कारण लोगों में कोविड अनुशासन के प्रति लापरवाही बरतना है। उन्होंने इस ढिलाई को रोकने के लिए एक बार फिर समाज के सभी वर्गाें का सहयोग लेने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य सचिव  निरंजन आर्य ने कहा कि कोरोना संक्रमण की पहली लहर के समय अलवर, जयपुर तथा भीलवाड़ा में जिस प्रभावी तरीके से कंटेनमेंट किया गया था। अब दूसरी लहर के दौरान भी अधिकारियों को उसी गम्भीरता से काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर कोरोना गाइडलाइन की पालना को सुनिश्चित करें।
प्रमुख सचिव गृह अभय कुमार ने कोरोना की दूसरी लहर के प्रसार को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, चित्तौडगढ़, डूंगरपुर, जयपुर, जोधपुर, कोटा एवं आबूरोड की नगरीय सीमा में रात्रि 8 बजे से प्रातः 6 बजे तक रात्रिकालीन कफ्र्यू रहेगा। इसके लिए बाजार एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान रात्रि 7 बजे बंद कर दिए जाएंगे। उदयपुर में बाजार एवं प्रतिष्ठान शाम 5 बजे बंद होंगे।
उन्होंने बताया कि माइक्रो कंटेनमेंट जोन में धारा-144 के तहत शून्य मोबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। सभी नगरीय क्षेत्रों में पांच से अधिक लोगों के एकत्रित होने पर रोक के साथ-साथ भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में मास्क पहनने और सामाजिक दूरी की पालना कराई जाएगी।
शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य  सिद्धार्थ महाजन ने बताया की सेम्पलिंग को बढ़ाकर प्रतिदिन 55 हजार तक कर दिया गया है। इस महीने के अंत तक 1 लाख तक करने का लक्ष्य है। उन्होंने ऑक्सीजन की उपलब्धता, कोविड केयर अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं, दवाओं, टीकाकरण, भर्ती रोगियों की संख्या तथा संक्रमण रोकने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. राजाबाबू पंवार, डॉ. सुधीर भंडारी, डॉ. वीरेन्द्र सिंह सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण की स्थिति पर गम्भीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दूसरी लहर अपेक्षाकृत तेज गति से बढ़ रही है और युवा आबादी भी संक्रमित हो रही है। उन्होंने बताया कि कोविड अनुशासन, अधिक टेस्टिंग और टीकाकरण पर जोर देकर स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
बैठक के दौरान विभिन्न जिला कलेक्टरों, पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षकों ने कोविड नियंत्रण की स्थिति और किए जा रहे उपायों से अवगत कराया। वीडियो कॉन्फेंस के दौरान संभागीय आयुक्त, रेंज आईजी और सीएमएचओ भी उपस्थित रहे।
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग, पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर, प्रमुख सचिव वित्त अखिल अरोरा, शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा  वैभव गालरिया, आयुक्त परिवहन श्री महेन्द्र सोनी, आयुक्त सूचना प्रौद्योगिकी  वीरेन्द्र सिंह, निदेशक स्थानीय निकाय  दीपक नंदी सहित अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित थे।

फोन टैपिंग को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने झूठ बोला, नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें, सीबीआई जाँच हो: डाॅ. सतीश पूनियां 

मुख्यमंत्री बतायें कि यह परम्परा किसने तोड़ी थी और इसकी वजह क्या रही: डाॅ. पूनियां

प्रदेश में बहन-बेटियां असुरक्षित, राजा सो रहा है,  जनता खौफ में जी रही है: डाॅ. पूनियां

 

जयपुर, 15 मार्च। भाजपा प्रदेश कार्यालय में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए राजस्थान की राजनीति में अनेक अवसरों पर अनेक किस्म की सियासी चर्चाएं होती हैं, लेकिन राजस्थान में जबसे कांग्रेस की सरकार बनी है तभी से तमाम मुद्दों पर यह सरकार घिरी हुई है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि यह सरकार जब भी अपने पाप छुपाने की कोशिश करती है तो कोई ना कोई नई बात सरकार के खिलाफ उजागर होती है। सरकार की स्टेबिलिटी, कांग्रेस पार्टी की अंतकलह  जैसी कुछ बातों से आप अच्छी तरह से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले एक सियासी एपिसोड के दौरान राजस्थान में सियासी पारा बहुत ऊँचा था और सरकार अपना अस्तित्व बचाने के लिए मशक्कत कर रही थी और वो परिस्थितियां भी इनके अपने लोगांे के कारण ही थी। उस दौरान भाजपा पर अनेकों बार झूठी तोहमत लगाने की कोशिश हुई, लेकिन उस पूरे नाटक के नायक, खलनायक मुख्यमंत्री गहलोत थे।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि 15वीं विधानसभा के 5वें सत्र के दौरान भाजपा विधायक द्वारा एक प्रश्न पूछा गया, जो गोपनीयता से सम्बन्धित है। आमतौर पर जो प्रश्न पूछे जाते हैं उनका एक माह के भीतर जवाब आ जाता है। यह प्रश्न अगस्त, 2020 में पूछा गया और अब उसका जवाब आया है। भाजपा विधायक ने यह प्रश्न पूछा था कि, क्या यह सही है कि विगत दिवसों में फोन टेप किए जाने के प्रकरण सामने आए हैं? यदि हाँ तो किस कानून के अन्तर्गत एवं किसके आदेश पर? पूर्ण विवरण सदन की मेज पर रखें।

 

सरकार ने इसका जवाब दिया कि, लोक सुरक्षा या लोक व्यवस्था के हित में या किसी ऐसे अपराध को प्रोत्साहित होने से रोकने के लिए जिससे लोक सुरक्षा या लोक व्यवस्था को खतरा हो टेलीफोन अन्तावरोध भारतीय तार अधिनियम 1885 की धारा 5(2) भारतीय तार अधिनियम (संशोधित) नियम 2007 के नियम 419ए व सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69 में वर्णित प्रावधान के अनुसार सक्षम अधिकारी की स्वीकृति उपरान्त किया जाता है। राजस्थान पुलिस द्वारा उपरोक्त प्रावधानों के अन्तर्गत टेलीफोन अन्तावरोध सक्षम अधिकारी से अनुमति प्राप्त करने के उपरान्त ही किए गए हंै।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि सियासी घटनाक्रम के समय भी प्रश्न यह था कि क्या कोई फोन टैपिंग हुई है? और उस समय इस बात की चर्चा हुई तो सक्षम अधिकारियों ने, मुख्य सचिव एवं उनके निचले स्तर तक के अधिकारियों ने इस बारे में मना कर दिया। तब मुख्यमंत्री ने सदन में इस बात के लिए साफ-साफ इंकार किया कि राजस्थान में कभी ऐसी परम्परा रही नहीं। सदन में कही गई बात, अधिकारियों द्वारा कही गई बात और अनेक बार चर्चा हुई और अनेक प्रसंगों में यह साबित हुआ कि कहीं ना कहीं फोन की टैपिंग जरूर हुई है। उस दौरान भी इस तरह की टैपिंग के मसले आये तो हमने कई बार पूछा कि इसका साॅर्स क्या है?

डाॅ. पूनियां ने कहा कि अब सरकार ने फोन टैपिंग की बात को स्वीकार कर लिया है। यह स्वीकारोक्ति है राजस्थान पुलिस की, जो विधानसभा के प्रश्न का जवाब आया है। इस तरह की खबरें मीडिया के माध्यम से पहले भी आई हैं। जनवरी, 2020 से अगस्त, 2020 तक कितने फोन टेप किये गये? इस बारे में सरकार इंकार करती रही, लेकिन इस बारे में जानकारी मिलेगी तो मुझे लगता है कि सारी चीजें स्पष्ट हो जायेगी।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि फोन टैपिंग का यह सामान्य मसला नहीं है, राजस्थान के मुख्यमंत्री स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश में इस प्रकार की परम्परा नहीं है, तो मुख्यमंत्री बतायें कि यह परम्परा किसने तोड़ी और इस परम्परा को तोड़ने की वजह क्या है? मुख्यमंत्री खुद इसके दोषी हैं और उस समय जब मीडिया में आॅडियो टेप सामने आने की खबरें आई थी तो कांग्रेस के कई विधायकों ने इस मामले की एनआईए से जाँच कराने की मांग की थी।

 

डाॅ. पूनियां ने कहा कि सदन में भी इस बारे में भी झूठ बोला गया, तथ्यों के बारे में भी भ्रांतियां फैलायी गई, तो स्पष्ट तौर पर मुख्यमंत्री इसके दोषी हैं, उनको नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, जो खुद गृहमंत्री भी हैं, इस मामले की सीबीआई से जाँच करवानी चाहिए। आमतौर पर सरकारों में पूर्णकालिक गृहमंत्री कार्य करते रहे हैं, लेकिन इस सरकार मंे पूर्णकालिक गृहमंत्री नहीं है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि प्रदेश में बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं है, अब तक 6 लाख 14 हजार से अधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें 80 हजार से अधिक महिला अपराधों से सम्बन्धित हैं और 12 हजार से अधिक रेप एवं गैंगरेप के मामले हैं। आमतौर पर जनता बेखौफ होकर सोती है और राजा उसकी सुरक्षा के लिए जागता है, लेकिन प्रदेश में अराजक हालात बने हुए हैं, ऐसे में राजा सो रहा है और जनता खौफ में जी रही है, सो नहीं पा रही है। कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री लीपापोती करने के अलावा कुछ नहीं कर रहे, जनघोषणा पत्र में बहन-बेटियों को सुरक्षा देने का वादा किया था, जिसे वो पूरा नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में नैतिक आधार पर उनको पद पर बने रहना का कोई अधिकार नहीं है |

राजस्थान में नया सियासी संकट, BTP विधायकों ने छोड़ा गहलोत सरकार का साथ

राजस्थान में गहलोत सरकार को अपना समर्थन देकर उसकी सहायता करने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने अब अपना समर्थन वापस ले लिया है। भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने कई मौको पर कांग्रेस का साथ देकर उसकी नैया पार करवाने में मदद की है चाहे वह राज्यसभा का चुनाव हो या विधानसभा में विश्वास मत साबित करना हो। लेकिन पंचायत चुनावों में पहली बार बीजेपी और कांग्रेस के गंठबधन ने सभी को चौका दिया और इस बात से नाराज बीटीपी ने गहलोत सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का फैसला किया है।

पंचायत चुनाव में मिली हार के बाद एक बार भी राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया है कि वह भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) को जिला प्रमुख नहीं बनने दिया जिसके कारण समर्थन वापस ले लिया है। भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) के 2 विधायकों ने जब विधानसभा में गहलोत सरकार ने अपना बहुमत साबित किया था, तब दोनों विधायकों ने अशोक गहलोत का समर्थन किया था।

डूंगरपुर जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में बीटीपी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थी, लेकिन कांग्रेस और बीजेपी के हाथ मिलाने के चलते बीटीपी का जिला प्रमुख नहीं बन सका। इसके कारण डूंगरपुर में बीजेपी ने अपना जिला प्रमुख बना लिया इसी बार से नाराज होकर भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने अपना समर्थन वापस लिया है।


हालांकि, मौजूदा समय में दो विधायकों के समर्थन वापस लेने से अशोक गहलोत सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन आने वाले समय में यह कांग्रेस के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। बीते दिनों खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आशंका जताई थी कि राज्य में फिर एक बार सरकार गिराने कोशिश हो सकती है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि राजस्थान में कांग्रेस दो गुटो में बटी हुई है और एक पक्ष में गहलोत तो दूसरे पक्ष में सचिन पायलट है। पंचायत चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा नहीं रहा है और कई विधायक और मंत्रियों के क्षेत्रों में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

राजस्थान की राजनीति में आया – लव जिहाद , इस्लामिक आतंकवाद के घोषित एजेण्डे में हैं ‘‘लव जिहाद’’ – सतीश पूनियां

मुख्यमंत्री गहलोत का ‘‘लव जिहाद’’ पर बयान उनकी  वोट बैंक की ओछी मानसिकता को दर्शाता है: डाॅ. सतीश पूनियां

 

इस्लामिक आतंकवाद के घोषित एजेण्डे ‘‘लव जिहाद’’ का शिकार होकर हमारी अबोध बच्चियां देश में उत्पीड़न की शिकार होती हैं: डाॅ. पूनियां

 

विश्वास नहीं होता कि वोट बैंक की राजनीति के लिए  मुख्यमंत्री गहलोत आप इतना गिर जाओगे: डाॅ. पूनियां

 

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जयपुर, 20 नवम्बर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दिये गये ‘‘लव जिहाद’’ के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत का ‘‘लव जिहाद’’ पर बयान उनकी वोट बैंक की ओछी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की देशभर में हो रही दुर्दशा से वह इतना विचलित हो जाएंगे यह विश्वास नहीं होता, हम सब जानते हैं कि सनातन भारत की परम्परा में विवाह एक धार्मिक और सामाजिक मान्यता प्राप्त संस्कार है यह केवल व्यक्ति की स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत का यह बयान शर्मनाक है, भारत विश्व का पुरातन सनातन देश है, जहाँ विवाह एक नैसर्गिक संस्कार है, ‘‘लव जिहाद’’ इस्लामिक आतंकवाद का घोषित एजेण्डा है, विश्वास नहीं होता वोट बैंक की राजनीति के लिए आप इतना गिर जाओगे, कांग्रेस की दुर्दशा से विचलित होकर मानसिक सन्तुलन यूँ गड़बड़ होना स्वाभाविक ही है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने भाजपा पर लगाया गया आरोप बेबुनियाद है, इस्लामिक आतंकवाद के एजेण्डे ‘‘लव जिहाद’’ का शिकार होकर हमारी अबोध बच्चियाँ देश में उत्पीड़न का शिकार होती हंै, यह जगजाहिर है। ऐसी परिस्थिति में गहलोत का यह बयान निश्चित तौर पर ओछी मानसिकता का परिचायक है।

 

 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने   ” लव जिहाद ” कानून पर क्या कहा था जानें –

एक ट्वीट में गहलोत ने लिखा कि ‘लव जिहाद बीजेपी की ओर से देश को विभाजित करने और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए बनाया गया एक शब्द है। विवाह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है, उस पर अंकुश लगाने के लिए कानून लाना पूरी तरह से असंवैधानिक है और यह कानून किसी भी अदालत में नहीं टिकेगा। प्यार में जिहाद की कोई जगह ही नहीं है।’

राजस्थान सियासत के दंगल के बीच – मुख्यमंत्री गहलोत ने निकाली भर्तिया – बेरोजगारों को राहत – आप भी कर सकते हैं आवेदन 

राजस्थान सरकार आयुर्वेद विभाग में 450 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती करेगी, पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी के 326 पदों पर होगी सीधी भर्ती
जयपुर। शुक्रवार को राजस्थान सरकार की तरफ से दो अच्छी खबर सामने आई। जहां दो अलग-अलग विभागों में भर्ती को स्वीकृति दी गई। इनमें पहली आयुर्वेद विभाग में 450 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती को मंजूरी दी गई। वहीं, दूसरी पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 326 रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरे जाने के प्रस्ताव को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने शुक्रवार को आयुर्वेद विभाग में 450 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती को स्वीकृति जारी की
मुख्यमंत्री गहलोत ने पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 326 रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरे जाने के प्रस्ताव को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति दी 
चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने शुक्रवार को आयुर्वेद विभाग में 450 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती को स्वीकृति जारी की। उन्होंने कहा कि इन पदों पर यथाशीघ्र भर्ती की जायेगी। साथ ही 125 आयुष औषधालयों में बिजली एवं पानी के कनेक्शन हेतु 18 लाख 75 हजार रुपये की राशि भी स्वीकृत की गयी है। पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी के 326 पदों पर होगी सीधी भर्ती मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 326 रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरे जाने के प्रस्ताव को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति दी है। गहलोत ने आरएसी बटालियनों की कंपनियों, प्लाटूनों एवं सैक्शन के मोबलाइज रहने के दौरान बटालियन एवं कंपनी मुख्यालय पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, स्वीपर, धोबी, कुक, मोची आदि तथा नवगठित मेवाड भील कोर बांसवाड़ा, महाराणा प्रताप आरएसी इंडिया रिजर्व बटालियन, आरएसी की चौदहवीं बटालियन तथा जिला पुलिस भिवाड़ी के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के विभिन्न संवर्गों के इन पदों पर भर्ती की मंजूरी दी है।
गहलोत ने पुलिस विभाग में कुक 72, स्वीपर के 58, धोबी के 51, तीर्थ श्रेणी कर्मचारी के 31,जलधारी/जलवाहक के 30, नाई के 26, दर्जी एवं सईस के 10-10, मोची के 8, खाती के 7, कैनल बॉय के 6, फिटर के 2 तथा बागवान एवं फर्राश के एक-एक पद तथा वर्ष 2020-21 में पदोन्नति से रिक्त होने वाले 13 और पदों सहित कुल 326 रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरे जाने की स्वीकृति दी है

बसपा विधायकों को सम्मन तामील – गहलोत का जादू बरक़रार और भी बाकी हैं जादू अभी तो देखे –

गहलोत सरकार पर कोई संकट नहीं . बसपा विधायकों को सम्मन तामील, अब सत्र से पहले भाजपा की बाड़ाबंदी – गुजरात में 
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे दिल्ली में – सियासी उठापटक तेज 
जयपुर। राजस्थान में चल रही सियासी घमासान पर अब ब्रेक लगते नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को उच्च न्यायालय के सम्मन बसपा विधायकों को तामील होने के बाद अब संभावना जताई जा रही है, कहीं सत्र से पहले भाजपा विधायकों की बाड़ेबंदी ना हो जाए। उधर चर्चा इस बात की भी जोरों पर है कि सरकार और महामहिम के बीच कोई गुप्त समझौता हो चुका है। गौरतलब है विधायक दल की बैठक के बाद
सरकार की ओर से राज्यपाल को 21, 24 और 27 जुलाई को 15 वीं विधानसभा के पंचम सत्र बुलाए जाने के पत्र दिए गए। हर पत्र में कुछ सवाल खड़े कर राज्यपाल सचिवालय की ओर से वापस सरकार को लौटा दिए गए। उधर 29 जुलाई को जो गोविंद सिंह डोटासरा को पीसीसी चीफ का पदभार ग्रहण कार्यक्रम चल रहा था तभी मुख्यमंत्री गहलोत के पास राजभवन से बुलावा आया और वे तत्काल वहां से राजभवन की ओर चल दिए थे। राज्यपाल से उनकी करीब आधे घंटे चर्चा हुई। उसके बाद राजभवन से विधानसभा सत्र आहूत करने की स्वीकृति जारी हो गई। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पहले जो सवाल उठाए जा रहे थे, सभी गौण हो गए। सचिवालय की गलियारों में चर्चाएं जोरों पर है, ‘दोनों के बीच कोई गुप्त समझौता हो गया। सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को बसपा विधायकों को उच्च न्यायालय का सम्मन भी तामील हो गया। इससे एक बात के संकेत मिल रहे हैं कि बसपा विधायक टेंशन फ्री हैं वैसे भी उनका तर्क है कि उन्होंने पार्टी का विलय नहीं किया है, विधायक दल का विलय किया है।
सूत्रों ने बताया कि अब मामला सुलझता नजर आ रहा है। उधर बसपा विधायकों पर आंच आती है, जिसकी संभावना शून्य है, तो भी सरकार पर कोई संकट नहीं है। उसका कारण है सरकार ने राज्यपाल को दिए किसी भी पत्र में बहुमत साबित या फ्लोर टेस्ट की बात नहीं कही है। यह बात कहनी चाहिए थी तो भाजपा को, लेकिन भाजपा चुप है। अंदर खाते भाजपा रणनीति तैयार कर रही थी, लेकिन भाजपा की कावर नेता वसुंधरा राजे के दिल्ली जाने के बाद भाजपा नेताओं के सपनों पर पानी फिर गया। भाजपा को तो अब नए सिरे से रणनीति तैयार करनी होगी, वह भी यह सोच कर कि पार्टी विधायकों का एक बड़ा धड़ा उनके साथ ही न खड़ा हो। कहीं ऐसा ना हो विधानसभा अध्यक्ष किसी बिल पर ‘हां पक्ष’-‘न पक्ष’ का मत लें और यह धड़ा ‘ना’ बोलने की जगह मात्र नारेबाजी करते नजर आए।
केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले.. विधायकों को भेड़ बकरियों की तरह हांक कर कौन से लोकतंत्र को बचाने की नौटंकी कर रहें हैं गहलोत जी
 राजस्थान का सियासी घमासान खत्म नहीं हो रहा है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट कर गहलोत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- चुने हुए विधायकों को भेड़ बकरियों की तरह हांक कर, डरा-धमका कर, निगरानी में रख कर, उनकी जासूसी कर कौन से लोकतंत्र को बचाने की नौटंकी कर रहें हैं गहलोत जी? गजेंद्र सिंह शेखावत ने आगे कहा- जैसलमेर के होटल में बंद विधायकों के फोन टैपिंग, इंटरकॉम टैपिंग, होटल में मोबाइल जैमर लगाना  गहलोत जी, इतना भी  अविश्वास अगर आपस में इतना अविश्वास है तो एक बात स्पष्ट है कि राजस्थान में सरकार का कोई अस्तित्व नहीं है। यहां सिर्फ गहलोत जी के सत्ता लालच में तानाशाही चल रही है।
सूत्रों की मानें तो पार्टी में वसुंधरा के कद को दिल्ली वाले भी हल्के में नहीं लेते। कहीं ऐसा ना हो कांग्रेस की तर्ज पर सत्र से पहले भाजपा विधायकों की बाड़ेबंदी हो जाए। वैसे भी कहा जाता है जैसे गहलोत को, ठीक उसी तरह राजे को समझना भी आसान ही नहीं नामुमकिन है। यह भी तय है सत्र के बाद गहलोत देश में एक बड़े नेता के रूप में उभर कर आएंगे, हालांकि वे अपना खेल पहले भी दिखा चुके हैं और अभी बाकी हैं  |

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का विधायको के साथ राजभवन कूच – सियासत तेज 

अशोक गहलोत ने विधानसभा सत्र बुलाने का दबाब बना रहें हैं – राज्यपाल पर 

मंत्री प्रताप सिंह ने कहा – संविधान व् लोकतंत्र बचाने की लड़ाई हैं 

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जयपुर | राजस्थान की राजनीति में चल रहें सियासी उठापटक के बीच आज अशोक गहलोत ने हाईकोर्ट के फेसले के बाद  बड़ा दावं चल दिया | दोहपर 12 बजे के बाद प्रेस कांफ्रेस कर राजपाल कलराज मिश्र को संवेधानिक पद की दुहाई दी और कहा की राज्यपाल का पद संवेधानिक होता हैं वह किसी के दबाब में काम ना करें और राजस्थान विधानसभा का सत्र आहूत करने का आदेश दे , लोकतंत्र की सुने अन्यथा राजस्थान की जनता राजभवन का घेराव कर सकती हैं जिसकी जिम्मेदारी मेरी ( गहलोत ) की नहीं होगी

101 विधायकों को लेकर राजभवन मार्च – 

अशोक गहलोत बाडेबंदी में रुके कांग्रेस व् मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे के विधायको के साथ मीटिंग कर आज दोहपर 2 बजें 2 बड़ी बस व् एक छोटी बस को लेकर राजभवन कूच कर दिया जिसमे राज्यपाल ने अकेले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वार्ता की वही दूसरी और गहलोत गुट के विधायक ”   वी वोन जस्टिस  ” विधानसभा का सत्र आहूत करो . अशोक गहलोत तुम संघर्ष करो हम आपके साथ हैं के नारेबाज़ी करते रहें |

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अब राज्यपाल के फेसले का इंतजार –

आज के इस घटनाक्रम के बाद अब यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा की राजस्थान की राजनीति किस और जायेगी फिलहाल अभी तक अशोक गहलोत के विधायक राज्यपाल भवन के गार्डन में बेठे हैं

गोरतलब हैं की राज्यपाल में कहा था की कोरोना महामारी के बीच अभी विधान सभा का सत्र बुलाना मुश्किल हैं जिसके बाद अशोक गहलोत को 2 बजे समय दिया गया था लेकिन वह अपनी सभी विधायको को लेकर राज भवन कूच कर चुके हैं

मंत्री रघु शर्मा ने कहा – 

राज्यपाल के कोरोना बयाना कर चिकित्सया मंत्री रघु शर्मा ने कहा की वह ” 200 विधायको का कोरोना टेस्ट करवा सकते हैं और हालिमें में राज्यसभा के चुनावों में भी 200 विधायको ने वोट डाला था |

राजस्थान सियासत – मुख्यमंत्री V / S उपमुख्यमंत्री ,अब हाईकोर्ट V / S सुप्रीम कोर्ट

राजस्थान में सियासी घटनाक्रम – 
विधानसभा अध्यक्ष  सी.पी. जोशी ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती – संवेधानिक अधिकारों के बीच टकराव – 
जयपुर। राजस्थान में सियासी घमासान थमने का नाम ही नहीं ले रहा अब  विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है .
विधानसभा अध्यक्ष की और से वकील कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे से इस पर बुधवार को ही सुनवाई करने को कहा हैं  लेकिन सीजेआई ने याचिका को रजिस्ट्रार के सामने मेंशन करने को कहा हैं  इससे पहले सीपी जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि स्पीकर को बागी विधायकों को कारण बताओ नोटिस भेजने का हक है .स्पीकर होने के नाते मैंने कारण बताओ नोटिस दिया हैं अगर अथॉरिटी कारण बताओ  नोटिस जारी नहीं करेगी तो उसका काम क्या होगा |

मंगलवार को 19 विधायकों को जारी योग्यता नोटिस मामले में हाईकोर्ट ने लगातार दूसरे दिन सुनवाई की थी। बहस पूरी होने के बाद 24 जुलाई तक फैसला सुरक्षित रख लिया। तब तक स्पीकर इन विधायकों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर सकते है।
जोशी ने 14 जुलाई को नोटिस दिया था
गौरतलब हैं  कांग्रेस के चीफ व्हिप महेश जोशी को शिकायत पर स्पीकर ने 14 जुलाई को इन विधायकों को दल बदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता खारिज करने का नोटिस दिया था। स्पीकर से शिकायत में कहा गया था कि विधायक दल की बैठक के लिए पार्टी ने व्हिप जारी किया था, लेकिन पायलट खेमे ने इसका पालन नहीं किया। उधर, पायलट खेमे का कहना है कि विप विधानसभा सत्र के दौरान लागू होता है ना कि पार्टी बैठक के लिए।

राजस्थान की राजनीति में आया भूचाल – ऑडियो वायरल – हॉर्स ट्रेडिंग में सचिन पायलट मुख्य भूमिका में

Sachin Pilot in lead role in Bhuschal in Rajasthan politics Audio Viral –

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केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने रची थी राजस्थान सरकार को गिराने की साज़िश कथित ऑडियो वायरल 

जयपुर | राजस्थान की राजनीति में आया भूचाल – ऑडियो वायरल  कथित ऑडियो में हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिश की जा रहीं हैं सबसे ख़ास कांग्रेस सरकार में उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की भूमिका मुख्य मानी जा रही हैं सबसे ख़ास बात बीते दिन ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कह दिया था की उनके  पास सबूत है जिसमे यह साफ़ हो जायेगा की ( बीना नाम लियें ) सचिन पायलेट इस हॉर्स ट्रेडिंग में मुख्य भूमिका में हैं और आज एक ऑडियो वायरल हो गया जिसमे कथित तौर पर 

केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत व् संजय जैन नामक व्यक्ति का नाम सामने आ रहा हैं जिसमे विधायको के लिस्ट , पैसों का जिक्र सामने आ रहा हैं|

इस ऑडियो वायरल  के बाद अब सचिन पायलेट और उनके समर्थन विधायक घिरते नज़र आ रहे हैं 

 

वायरल ऑडियो के कुछ अंश –

संजय जैन ने कहा- सचिन पायलट को कहकर उनकी लिस्ट में अपना और गिरधारी का नाम अलग करवा  लेना
मैं आपका गजेन्द्र सिंह जी से भंवरलाल द्वारा अमाउन्ट डायरेक्ट करा दूंगा भंवरलाल शर्मा ने पूछा कितना अमाउन्ट मिलेगा
संजय जैन ने कहा इस बारे में कल कर लेंगे बात आपकी वरिष्टता का पूरा रखा जाएगा ध्यान
वायरल ऑडियो में कहा जा रहा हैं की सचिन पायलट के पद का पूरा ख्याल रखा जायेगा  
नोट – यह वायरल ऑडियो के आधार में लिखी गई न्यूज़ हैं जो आज तेजी से वायरल हो रही हैं इस की सत्यत्ता की पुष्टि अभी हमारी टीम नहीं करती यह एक जाँच का विषय हैं लेकिन सूचना है तो आप तक पहूँचाना हमारी जिम्मेदारी हैं हमारी टीम के पास वायरल ऑडियो सुरक्षित हैं |

राजस्थान की राजनीति में अब सिर्फ अब बयानबाज़ी –  ” रगड़ाई पॉलिटिक्स “

राजस्थान की राजनीति में सिर्फ अब बयानबाज़ी – गहलोत ने कहा सचिन पायलट की ” रगड़ाई ” नहीं हुई
राहुल गांधी ने कहा – जिसे जाना है वो जाएगा, युवाओं के लिए खाली हो रहे रास्ते 

नई दिल्ली. राजस्थान में चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जिसे जाना है, वो जाएगा। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि बाद में कांग्रेस और एनएसयूआइ की राष्ट्रीय प्रभारी ने ऐसे बयान से इनकार किया है। सूत्रों ने बताया कि एनएसयूआइ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में राहुल ने सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम लिए बिना कहा कि पार्टी छोड़कर जाने वालों से घबराने की जरूरत नहीं है। उल्टे यह लोग युवा पीढ़ी के लिए रास्ते खाली कर रहे हैं। इस बैठक में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन, प्रभारी रुचि गुप्ता मौजूद रहीं। बयान पर हंगामा मचने के बाद रुचि ने कहा कि राहुल ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। बैठक को लेकर मीडिया में चल रही  रिपोर्ट्स आधारहीन हैं।

सचिन पायलेट व् अशोक गहलोत
अच्छी इंग्लिश, हैंडसम होना सब कुछ नहीं – सीएम
 मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पायलट की ओर इशारा करते हुए कहा, अच्छी इंग्लिश-हिंदी बोलना, अच्छी बाइट देना और हैंडसम दिखना ही सबकुछ नहीं होता। वे सरकार के खिलाफ साजिश में शामिल थे। पायलट भाजपा से बात कर रहे थे, मेरे पास इसके सबूत हैं। बीस से 35 करोड़ तक में सौदा हो रहा था, पैसों की एक किस्त पहुंच गई थी। अब जो मानेसर व गुरुग्राम में हो रहा है, वह राज्यसभा चुनाव से पहले रात 2 बजे होने वाला था। पैसे लेने वालों के नाम पूछे गए। नंबर मांगे गए। दलालों के नाम पूछे गए। हमारे कुछ साथी अति महत्त्वाकांक्षी बन गए। हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल हो गए।
सोने की छौरी पेट में खाने के लियें नहीं होती – समझ जाओं 
गहलोत ने कहा देश के लिए आपके दिल में क्या है, कमिटमेंट क्या है? पार्टी की विचारधारा देखी जाती है। सोने की छुरी पेट में खाने के लिए नहीं होती, अब समझ जाओ। चालीस साल हो गए राजनीति करते, नई पीढ़ी को सीखना चाहिए। इनकी रगड़ाई होती तो अच्छा काम करते। नई पीढ़ी को हम पसंद नहीं करते, यह कहना गलत है।
राहुल गांधी, सोनिया और प्रियंका सहित सब पसंद करते हैं। मैं सरकार पर खतरा नहीं आने दूंगा। मेरे पास बहुमत है। लोकतंत्र खत्म करने वाले दिल्ली में बैठे हैं।
सियासी संग्राम कहा-पूर्व सीएम का बंगला बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट गई गहलोत सरकार
वसुंधरा की मदद करने में व्यस्त हैं सीएम – पायलट
 राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ खुलकर सियासी तलवार निकाल ली है। यहां तक आरोप लगाया है कि गहलोत जनता से किए वादे पूरे करने की बजाय भाजपा की पिछली सीएम वसुंधरा राजे की मदद में व्यस्त हैं। पायलट ने कहा, राजे ने 2017 में जयपुर का  सरकारी बंगला जीवनभर के लिए खुद को आवंटित कर लिया था।
पिछले साल राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने की बजाय राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। हमने राजे सरकार के दौरान दी गई खनन की अवैध लीज के बारे में अभियान चलाया। उन सभी आवंटन को रद्द करने के लिए मजबूर किया। सत्ता में आने के बाद गहलोत ने कुछ नहीं किया बल्कि उसी रास्ते पर चल पड़े। पायलट ने कहा, में भाजपा के किसी भी नेता से नहीं मिला हूं। छह महीने से ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी नहीं मिला। अब अपने साथियों के साथ चर्चा करूंगा कि आगे क्या करना |