राजस्थान निकाय चुनाव में कांग्रेस का दबदबा

राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजों पर कांग्रेस पार्टी ने मतदाताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताया है। हालांकि कांग्रेस को बड़ी जीत नहीं मिली है लेकिन निर्दलियों के कारण वह बीजेपी से ज्यादा बोर्ड बनाने में सफल हो सकती है। लेकिन कई ऐसे निकायों में निराशा का भी सामना करना पड़ा है जहां मौजुदा सरकार के बड़े मंत्री आते हैं या फिर उन क्षेत्रों में कांग्रेस के विधायक हैं। लेकिन इसके बाद भी आलाकमान के नेताओं के साथ राजस्‍थान के प्रभारी अजय माकन ने खुशी जाहिर की है।

राजस्‍थान के 90 शहरों में निकाय चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और लगभग 50 से ज्यादा बोर्ड कांग्रेस के पाले में जाते हुए दिख रहे है। इस बार भाजपा के गढ़ माने जाने वाले कई बोर्डो पर कांग्रेस ने बाजी मारी है। लेकिन कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी चुनौती वहां है जहां आने वाले दिनों में चार विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं। क्योंकि यहां 4 में 3 सीटों पर बीजेपी का दबदबा रहा है। मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों को जनता ने सराहा है।

प्रदेश के 20 जिलों के 90 निकाय के चुनाव परिणाम के बाद 3034 वार्डों के चुनाव परिणाम जारी कर दिये गये है और जिसमें सबसे ज्यादा वार्डों 1197 के साथ कांग्रेस पहले स्थान पर है तो भाजपा 1140 वार्ड जीतने में सफल रही है। इस बार 634 वार्डों में निर्दलीयों ने कब्जा किया है।
चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी ने आरोप लगाया कि सत्ता में होने के बाद भी कांग्रेस को ज्यादा बड़ी जीत नहीं मिली है और नतीजों के परिणाम के बाद भी वह अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। जबकि उनके बड़े नेता इस जीत को कांग्रेस के लिए बड़ी जीत बता रहे है जबकि बीजेपी अपने दम पर कांग्रेस से ज्यादा वार्डो पर कब्जा किया है और कांग्रेस अब निर्देलियों के भरोसे अपनी जीत के सपने देख रही है।

राजस्थान सियासत – बाग़ी तो आयें सरकार बची – धागें में आई गांठ अब कैसे सुलझे , चलो सत्ता की कुर्सी के लियें लोकतंत्र का बहाना लें – 

 राजस्थान की सियासत में कांग्रेस पार्टी स्तर पर तो बाग़ी सचिन पायलट व् बागी विधायको की वापसी हो गई लेकिन जो 31 दिनों का शक्ति प्रदर्शन था जिसमे सचिन फेल हो गयें तो लोकतंत्र जनहित मुद्दें आदी का हवाला दे दिया और जनता को राजनेताओं ने एक बार फिर भावनात्मक रूप से लूट लिया
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लड़ाई के बाद भूलने-माफ करने, कसमें-वादों का दौर शुरू –  कुर्सी का खेल अभी भी नहीं हैं आसान 
गुजर गया सियासी तूफान, अब देश, प्रदेश, जनता और लोकतंत्र के हित में एक साथ काम करेंगे गहलोत-पायलट
जयपुर | राजस्थान में कांग्रेस आलाकमान के दखल से थमे सियासी घमासान के बाद अब दोनों खेमे (गहलोत पायलट) देश, प्रदेश और जनता के हित में मिल जुलकर काम करने की कसमें खा रहे हैं। मंगलवार को घर लौटे सचिन पायलट ने तो एक दिन बाद बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीती ताहि बिसार दे पर अमल करने और आगे बढ़ने की बात कही। बाड़ेबंदी से निकले अपने समर्थक विधायकों से मुलाकात के दौरान बड़ा दिल दिखाते गहलोत ने कहा कि यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है लिहाजा उन्हें भूलो और माफ करो का रास्ता अपनाना होगा। हालांकि, बागियों की वापसी से उनका खेमा नाराज दिखा जिस पर सीएम ने समझाया कि कई बार सहन करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी , उपमुख्यमंत्री सचिन पायलेट ( फ़ाइल् चित्र )
आगे बढ़कर हाथ मिलाने में पायलट गुट भी पीछे नहीं रहा। पायलट के साथ मंत्री पद से बर्खास्त किए गए विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि यह (एक माह लंबा सियासी खींचतान भरा एपिसोड) एक टेस्ट मैच था जो कि ड्रॉ हो गया है और वे लोग पैवेलियन लौट आए हैं। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे लोग बागी नहीं हैं। उन लोगों ने पार्टी के खिलाफ कभी एक शब्द भी नहीं कहा। विश्वेंद्र सिंह ने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि टेस्ट मैच ड्रॉ होने की बात कहना सिर्फ एक मजाक था लेकिन, दरअसल गहलोत को और मजबूत होकर उभरने का दम भरने वालों को दिया गया यह एक संकेत था कि इस सियासी घमासान में न कोई जीता, न कोई हारा यानी सत्ता हो या संगठन दोनों (गहलोत पायलट) बराबरी पर खड़े हैं। इससे पहले, गहलोत ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए
कहा कि इस लड़ाई में इतनी बड़ी संख्या में विधायकों ने उनका साथ दिया। हिंदुस्तान में शायद ही पहले कभी ऐसा हुआ होगा जब 100 से ज्यादा विधायक इतने लंबे समय के लिए एक साथ रुके होंगे यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है जो आगे भी जारी रहेगी। उनकी गुजारिश है कि सभी लोग मिलकर आगे बढ़ें। बात जारी रखते मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता ने बड़े भरोसे के साथ कांग्रेस की सरकार बनाई थी। अब उनकी जिम्मेदारी हमारी हैं की जनता को एक सूशासन दे |
सियासी लोगो का कहना हैं राह अभी आसन नहीं –
राजस्थान की सियासी लोगों का कहना हैं की अब कांग्रेस पार्टी के सभी विधायको में आपसी फुट पड़ चुकी हैं अब इनकी सभी विधायको की मज़बूरी हैं की सरकार चले ताकि इनका विधायक पद व् कुर्सी बची रहें इसलियें मज़बूरी में सभी विधायक बड़ी बड़ी बातें कर रहें है लेकिन आगामी समय में गुटबाजी तो तय हैं अब यह देखना हैं की इस गुटबाजी में क्या जनता का फायदा होगा यह देखना बाकी हैं |

राहुल गांधी पहले अमेठी की चिंता कर लेंः BJP

नई दिल्ली। वाराणसी से वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हारने की भविष्यवाणी संबंधी राहुल गांधी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए भाजपा ने आज कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को अमेठी की चिंता कर लेनी चाहिए और पहले वे वहां हमारी वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी का मुकाबला करके तो दिखायें। भाजपा ने दलितों के मुद्दे पर राहुल गांधी के उपवास को ‘मीडिया इवेंट’ करार दिया । पार्टी ने दावा किया कि भाजपा के दलित सांसदों में कोई असंतोष नहीं है ।

 

भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, राहुल गांधी पहले अमेठी की चिंता कर लें। पहले वह हमारी वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी से मुकाबला करके तो दिखायें, फिर प्रधानमंत्री की बात करें। और अगर फिर भी चाहें, तो वाराणसी से ही चुनाव लड़ लें। उन्होंने कहा कि जितने दल चाहें एकत्र हो लें, देश की जनता मोदीजी के साथ है। लोगों का आर्शीवाद मोदीजी को प्राप्त है । उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को कहा था कि एकजुट विपक्ष के आगे 2019 जीतना तो दूर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अपनी वाराणसी सीट भी गंवा देंगे।

विपक्षी एकता में अपना विश्वास जाहिर करते हुए राहुल ने कहा था कि भाजपा के लिए 2019 में लोकसभा चुनाव जीतना दूर की कौड़ी है और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अगर मोदी के खिलाफ एकजुट रहीं तो वह खुद वाराणसी में हार सकते हैं।दलित मुद्दे पर महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर कांग्रेस अध्यक्ष के उपवास के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में शाहनवाज हुसैन ने कहा, इसको तो उपवास नहीं कहते हैं। भला 2 घंटे का कहीं उपवास होता है। महात्मा गांधी ने देश के लिये 20-20 दिनों का उपवास रखा था। महात्मा गांधी की समाधि पर नाश्ता करके दो घंटे का उपवास वास्तव में उनका उपहास है।भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का अपमान करने वाली कांग्रेस को दलित भाई बहनों से माफी मांगनी चाहिए कि पिछले 60 वर्षों में इस पार्टी ने दलितों के लिये कुछ नहीं किया और अब कांग्रेस पार्टी और उसके नेता दलितों के मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रहे हैं।

हार्दिक किसी भी राष्ट्रीय पार्टी की ग्रहण नहीं करेगें सदस्यता

उज्जैन। गुजरात के पाटीदार एवं किसान आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि वे किसी भी राष्ट्रीय पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं करेगें। वह उनके आंदोलन में सहयोग करने वाली पार्टी का साथ देंगे। पटेल मध्यप्रदेश के अपने 2 दिवसीय दौरे पर अपने निर्धारित समय से लगभग दो घंटे देरी से यहां पहुंचे।उन्होंने यहां एक होटल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि वह अभी अलग अलग क्षेत्रों का दौरा कर अनुभव ले रहे हैं। किसान के साथ जनता की समस्यायें सुन रहें है और समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो पार्टी के नेता उनसे सम्पर्क करते हैं, वह उनके साथ हैं।

 

लेकिन जब तक किसानों और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं निकलता, तब तक वह किसी भी पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं करेगें। एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राहुल गांधी ने उनसे सम्पर्क किया। इसलिए वे उनका सहयोग कर रहे है, लेकिन बीजेपी के नाम लिए बगैर कहा कि इस पार्टी ने उनसे सम्पर्क नहीं किया है।मध्यप्रदेश के होने वालें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने के प्रश्न के उत्तर में कहा कि ज्योतिदित्य सिंधिया युवा है, कम उम्र के है, इसलिये उनका समर्थन करता हूं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्वियज सिंह से भी काफी अच्छे संबंध हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में दस साल तक सरकार चलाई है।

वह भी अनुभवी है। इसके साथ ही उन्होंने कमलनाथ को भी अच्छा बताया। जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्या विधानसभा में पाटीदार को टिकिट दिलाकर कोई समझौता करेगें। इसके जवाब में उन्होने कहा कि अच्छे कार्यकर्ता के लिए सिफारिश करेगें। कार्यकर्ता को टिकिट देना या नहीं देना पार्टी का काम है। मै सहयोग जरुर करुंगा। उनका मध्यप्रदेश से पुराना रिश्ता रहा है।

देश के अगले PM के चयन में दलितों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी: नितिन राउत

नई दिल्ली। कांग्रेस के अनुसूचित जाति (एससी) विभाग के नव नियुक्त अध्यक्ष नितिन राउत ने कहा है कि केंद्र की राजग सरकार से नाराज दलित समुदाय के लोग देश के अगले प्रधानमंत्री के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और इस पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का समर्थन करेंगे।राउत ने कहा कि एक बेहतर भविष्य के लिए दलित युवा अपने समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे लोगों सहित अन्य गैर भाजपा/राजग नेताओं की तुलना में राहुल की ओर आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए होगा कि अन्य नेताओं की अपेक्षा राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत है।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रह चुके राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार ने दलितों के मसीहा डॉ भीम राव अंबेडकर को जितना सम्मान दिया है उतना किसी अन्य सरकार ने नही दिया। उन्होंने मोदी और भाजपा पर अरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के बयान दलित समुदाय के वोटों पर नजर रखते हुए जारी किए जाते हैं।राउत ने पीटीआई भाषा से कहा कि दलित , विशेषकर युवा वर्ग राजग सरकार से नाराज है। उन्हें शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित किया जा रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ, जब कांग्रेस सत्ता में थी। उन्होंने कहा कि देश के अगले प्रधानमंत्री के चयन में दलितों की यह नाराजगी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा चुनावों के लिए उनका विभाग दलितों को एकत्र कर कांग्रेस के नेतृत्व के तहत लाने का प्रयास करेगा, ताकि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। राउत ने कहा कि पूरे देश में 84 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। बीजेपी ने 2014 के आम चुनाव में इनमें से अधिकतर सीटों पर जीत हासिल की थी। इन चुनावों में कांग्रेस को 3 चार सीटें ही मिली थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि हम अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करने की कोशिश करेंगे।

राजस्थान सरकार की नई योजना

किशनगढ़। राजस्थान वित्त निगम की ओर से वर्तमान वित्तीय वर्ष में युवाओं को स्वयं का उद्योग प्रारंभ करने के लिए पौने छह करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया है। इससे सात युवा लाभांवित हुए है। युवाओं को ये राशि वित्त निगम की युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना के तहत दी गई हैं।

इस योजना के तहत मिला युवाओं को करोड़ों रुपए का ऋण

 

राजस्थान वित्त निगम की ओर से युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 7 युवाओं को ऋण दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत 5.72 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है। इससे युवाओं ने नए उद्योग प्रारंभ किए है। इस योजना में ब्याज दर केवल मात्र 7.5 प्रतिशत वार्षिक की दर से देय है। इसमे आईटीआई, डिप्लोमा या स्नातक योग्यता वाले और 45 वर्ष तक की आयु के युवा ऋण ले सकते है। पंद्रह करोड़ तक के ऋण पर ब्याज दर साढ़े सात प्रतिशत एवं 15 करोड़ से अधिक के स्वीकृत ऋण पर निगम की सामान्य ऋण योजना में लागू ब्याज दर देना होगा। वहीं पुनर्भगतान अवधि अधिकतम 7 वर्ष रहेगी। इसके लिए आवेदनकरी को जमीन की व्यवस्था पहले से करके रखनी होगी।

बेरोजगारों को मिलेगा रोजगार

 

प्रचार एवं बजट की कमी क्षेत्र में उद्यमिता को प्रोत्साहन और रोजगार बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक युवाओं को ऋण आंवटित किए जाने की आवश्यकता है। इससे युवाओं में उद्यमिता का विकास होगा और अधिक बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इसका क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। इसके लिए बजट बढ़ाया जाना चाहिए। क्षेत्र के मात्र सात युवाओं को वर्तमान वित्तीय वर्ष में ऋण मिलना प्रचार प्रसार की कमी दर्शाता है। इसके लिए प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाना चाहिए। युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में 7 युवाओं को पांच करोड़ 72 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया है।

वसुंधरा राजे के नेतृत्व में अगला चुनाव नहीं लडूंगा: तिवाडी

जयपुर। राजस्थान में भाजपा के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में अगला चुनाव नही लड़े की घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में वो पार्टी से इस्तीफा नहीं देंगे। आज अपने आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि राजे के जनविरोधी कार्यकलापों और भ्रष्टाचार को बढावा देने की नीतियों के कारण प्रदेश के कार्यकर्ताओं में आक्रोश की भावना बढ़ती जा रही है। इस संबंध में उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर आगाह भी किया है। तिवाड़ी ने कहा कि इसके बाद भी अगर पार्टी नेतृत्व कार्यवाही नहीं करता तो यह घातक सिद्ध होगा।

राज्य में नये राजनीतिक दल के गठन के संबंध में पूछे जाने पर तिवाड़ी ने कहा कि यदि केन्द्रीय नेतृत्व राजे को राजस्थान की राजनीति से बर्खास्त कर दे तो वह इस संबंध में पुनर्विचार कर सकते है। पार्टी अध्यक्ष को लिखे पत्र के कारण उन पर होने वाली कार्यवाही के संबंध में पूछे जाने पर तिवाड़ी ने कहा कि यदि इस कारण से पार्टी मुझे बर्खास्त करती है तो यह उनकी मर्जी है लेकिन मैं पार्टी से इस्तीफा नही दूंगा। साथ ही तिवाड़ी ने यह भी कहा कि वह चुनाव तो सांगानेर की जनता से राय करके ही लडेंगे। यह अलग बात है कि वह किस पार्टी से लड़े इसका निर्णय तो बाद में किया जाएगा।

भारत वाहिनी दल के बारे में बात करते हुए तिवाडी ने काह कि चुनाव आयोग ने दल के गठन की स्वीकृति दे दी है और यह अभी प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि भारत वाहिनी दल आगामी विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारेगी और इसका निर्णय वह स्वयं करेगें। उम्मीदवारों के चयन के बारे में पूछे गये सवाल पर उन्होंने कहा कि दलों को छोडकर आने वाले प्रत्याशियों को टिकट नहीं दिया जायेगा और सिद्धांतों और नयी ऊर्जा देने वाले युवाओं को ही टिकट दिया जायगा।

द ब्रिज 2018: अरुणा रॉय ने महिलाओं की दुर्दशा को किया उजागर

नई दिल्ली। प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने राजस्थान की दलित सरपंच नेताओं के साथ राष्ट्रीय राजधानी में हाल में महिला सशक्तिकरण पर आयोजित राष्ट्रीय फोरम ”द ब्रिज 2018” में हिस्सा लेते हुए महिलाओं के लिए अधिक अधिकार दिए जाने की मांग की जिनमें रोजगार गारंटी, मनरेगा का समुचित कार्यान्वयन, महिलाओं के लिए आरक्षण के अलावा पेंशन योजना का पुनरुद्धार, महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षा दिए जाने के पर्याप्त कानून बनाया जाना तथा आधुनिक प्रौद्योगिकियों को उपलब्ध कराया जाना शामिल है। समाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने इस मौके पर कहा, कि राजस्थान में महिलाओं को न केवल लैंगिक आधार पर बल्कि जाति, समुदाय एवं धर्म जैसे अन्य कारकों के आधार पर लगातार भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

अरूणा रॉय ने कहा, महिलाएं समाज में अपनी स्थिति को पुनः प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं, जिसके कारण उन्हें लगातार सत्ता में स्थापित लोगों और मुख्य तौर पर पुरुषों द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। हालांकि महिलाओं के लिए कानून विद्यमान है, लेकिन उनके पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उपाय और जमीनी हकीकतों के अनुसार कानून के विकास पूरी तरह से अपर्याप्त है। इस मौके पर उपस्थित सभी महिला सरपंचों ने कहा कि उन्होंने 3000 रूपए खर्च करके चुनाव जीते हैं जबकि कई लोग लाखों और करोड़ों रूपए खर्च करके चुनाव जीतते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कम खर्च करने के बावजूद चुनाव जीते क्योंकि वे ईमानदार हैं और लोग उन पर भरोसा करते हैं। अरुणा रॉय ने कहा, राजस्थान में अगर महिला आरक्षण नहीं हो तो वे कभी भी किसी भी तरह से चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। इन महिलाओं के कारण, सड़कों का निर्माण, नौकरियों का सृजन और कई कल्याणकारी योजनाओं को सफलतापूर्वक जमीन पर लागू किया गया।तिलोनिया की ग्राम पंचायत सरपंच कमला ने कहा, ‘‘एक सरपंच किसी भी राजनीतिक दल के नहीं होती है।

 

सरपंच जमीनी स्तर के कार्यकर्ता होते हैं जिसका काम लोगों को प्रभावित करने वाले वास्तविक मुद्दों का समाधान करना है। हमें रोल मॉडल बनना चाहिए और लोगों को ईमानदारी से चुने जाने और भ्रष्टाचार किए बगैर लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हालांकि अधिक पैसा पंचायतों के लिए आवंटित किया गया है, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार के कारण अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है। राजनीति में भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए कमला ने कहा, ‘‘सरकार ने हाल में यह नियम बनाया है कि पंचायत चुनाव लड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम 8 वीं कक्षा तक पढ़ा-लिखा होना चाहिए। सरकार के इस प्रतिबंध के कारण वह चुनाव लड़ने में असमर्थ हैं, लेकिन बहुत से लोग मुझे फर्जी मार्कशीट के आधार पर चुनाव में खड़े होने को कहते हैं। आज की महिलाएं भ्रष्ट तरीकों को अपनाने के बजाय पात्रता मानदंडों को पूरा करने के लिए कोचिंग कक्षाएं ले रही हैं और कड़ी मेहनत कर रही हैं।अरुणा रॉय ने बताया कि राजस्थानी महिलाओं ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बेहद योगदान दिया है, जिसके कारण भारत सरकार द्वारा कई कल्याणकारी नीतियां और कार्यक्रम शुरू किए गए हैं जैसे यौन उत्पीड़न रोकने के लिए विशाखा दिशा निर्देश, बलात्कार रोधी कानून और सती विरोधी कानून आदि।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को छोड़कर सभी दलों ने महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष में सहयोग किया है।’’ हम लड़े, हम जीते। हम अपने अधिकारों की मांग कर रही हैं, हम भीख नहीं माँग रही हैं।’’ अरुणा रॉय ने कहा।”ब्रिज 2018″ भारत में लैंगिक सशक्तिकरण के विचारों के आदान-प्रदान एवं संवाद के लिए आयोजित एक दिन का कार्यक्रम था जिसमें राजनीति, थियेटर, कला और मनोरंजन जगत से 40 प्रमुख वक्ताओं ने हिस्सा लिया। इन वक्ताओं ने उन मुद्दों को उठाया जिनसे आज देष की महिलाओं को सबसे अधिक सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा इन वक्ताओं ने इस बारे में भी चर्चा की कि किस तरह से महिलाएं एवं लड़कियां दुनिया को बदल रही हैं। इस कार्यक्रम में राजनीतिक दलों, कॉर्पारेट जगत, सिनेमा, खेल और रोज़मर्रा की जिंदगी में महिलाओं की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। इसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के अभियान को हतोत्साहित करने वाले कारणों को दूर करना तथा सवालों को उठाना था ताकि नए संवाद कायम हो और सिद्धांत और कार्यान्वयन के बीच के अंतर को दूर किया जा सके।

राहुल ने अंबेडकर को लेकर मोदी पर निशाना साधा, कहा…

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संविधान निर्माता डाॅ. बी आर अंबेडकर को लेकर प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी पर आज निशाना साधा और कहा कि वह जिस दमनकारी विचारधारा से आते हैं, वह कभी दलितों एवं बाबा साहब का सम्मान नहीं कर सकती।राहुल ने आज ट्वीट कर कहा, मोदी जी, जिस दमनकारी विचारधारा से आप आते हैं, वो दलितों और बाबा साहब का सम्मान कभी नहीं कर सकती। भाजपा आरएसएस द्वारा बाबा साहब के सम्मान के कुछ उदाहरण…। उन्होंने अपने ट्वीट के साथ कुछ ऐसी तस्वीरें टैग की हैं जिनमें डाॅ. अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त दिखाया गया है या उनका असम्मान किया जा रहा है।

 

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी का एक ट्वीट भी टैग किया है, जिसमें उन्होंने कहा है, जितना सम्मान हमारी सरकार ने बाबा साहब को दिया है, शायद ही किसी सरकार ने दिया हो। राहुल गांधी ने एक अन्य ट्वीट कर वित्त मंत्री अरूण जेटली के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की है। उन्होंने जेटली के एक ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा, मैं इसे सुनकर वास्तव में दुखी हूं। मैं आपके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।

उन्होंने जेटली के उस ट्वीट को टैग किया है जिसमें वित्त मंत्री ने यह जानकारी दी है, मेरा गुर्दे संबंधित समस्याओं और कुछ संक्रमणों के लिए उपचार चल रहा है। परिणामस्वरूप वर्तमान में मैं घर पर नियंत्रित परिवेश में काम कर रहा हूं। मेरे उपचार की भावी दिशा मेरी चिकित्सा कर रहे चिकित्सक तय करेंगे।

विद्यार्थियों की प्रतिभा को लेकर कटारिया ने कही ये बड़ी बात!

जयपुर। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि देश एवं प्रदेश की उन्नति के लिए बेहतरीन शैक्षिक स्तर की जरूरत है, उन्होंने शिक्षक वर्ग का आह्वान किया है कि वे संकल्पबद्ध होकर विद्यार्थी प्रतिभा को तराशने का कार्य करें। गुलाबचंद कटारिया बुधवार को उदयपुर के रेजीडेंसी बालिका सीनियर सैकण्डरी विद्यालय में ‘सुपर क्लासेज’ संचालन में सहयोग देने वाले शिक्षकों एवं अब तक कोई छात्रवृत्ति न लेने वाली विद्यार्थी प्रतिभाओं के सम्मान समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सरकार के कारगर प्रयासों से राजस्थान शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े राज्यों की श्रेणी से ऊपर उठा है। बालिका प्रोत्साहन एवं विद्यार्थी कल्याण की योजनाओं से सरकारी विद्यालयों में शैक्षिक स्तर से बड़ा परिवर्तन आया है। उन्होंने विद्यार्थी वर्ग का आह्वान किया कि वे अपने बौद्धिक स्तर को पहचानें और श्रेष्ठ बनकर समाज व राष्ट्रसेवा में योगदान दें। उन्होंने सुंदर सिंह भण्डारी चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से राजकीय विद्यालयों में संचालित सुपर-20 क्लासेज में नि:स्वार्थ अध्यापन कराने वाले शिक्षकों के सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की।

कटारिया ने रेजीडेंसी विद्यालय के भौतिक एवं विद्यार्थी कल्याण के लिए आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आश्वस्त करते हुए तखमीना बनाने के निर्देश शाला प्रशासन को दिए।समारोह में शिक्षा उपनिदेशक भरत मेहता, समाजसेवी लोकेन्द्र सिंह राठौड़, रेजीडेंसी की प्रधानाचार्य श्रीमती उर्मिला त्रिवेदी ने अपने उद्बोधन में शैक्षिक उन्नयन, शाला विकास एवं सेवा कार्यों आदि पर विस्तार से चर्चा की।