राजस्थान : तीन विधानसभाओं के लिए मतदान कल, निर्वाचन विभाग सख्त – जानें ख़ास

प्रदेश की तीन विधानसभाओं के लिए मतदान कल  स्वतंत्र-निष्पक्ष-शांतिपूर्ण के साथ ‘सुरक्षित‘ मतदान की सभी तैयारियां पूर्ण
प्रत्येक केंद्र पर थर्मल स्कैनर से मापा जाएगा तापमान  बिना मास्क मतदान केंद्र में प्रवेश नहीं
मतदाताओं को मतदान के लिए दिए जाएंगे ग्लव्स
सभी मतदान केंद्रों को किया गया सेनेटाइज   सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होगा मतदान
जयपुर, 16 अप्रेल। प्रदेश की सहाड़ा, सुजानगढ़ और राजसमंद विधानसभाओं में स्वतंत्र-निष्पक्ष-शांतिपूर्ण के साथ ‘सुरक्षित‘ चुनाव के लिए निर्वाचन विभाग ने सभी जरूरी तैयारियां पूर्ण कर ली है। तीनों विधानसभाओं के लिए 17 अप्रेल को प्रातः 7 से 6 बजे तक कोविड संबंधी सभी दिशा-निर्देशों की कड़ी पालना के साथ मतदान करवाया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी  प्रवीण गुप्ता ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों को हाइपोक्लोराइट से सेनेटाइज करवा दिया गया है। मतदान केंद्र में प्रवेश से पहले सभी मतदाताओं का तापमान थर्मल स्कैनर से मापा जाएगा। किसी भी मतदान केंद्र पर बिना मास्क के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मतदाताओं को मतदान से पहले ग्लव्ज भी उपलब्ध कराएं जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण का प्रसार ना हो सके। उन्होंने बताया कि मतदान के लिए सभी मतदान केंद्रों पर गोले बनाए गए हैं, जहां मतदाता सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अपनी बारी का इंतजार करेंगे। उन्होंने बताया स्थानीय प्रशासन कोविड संबंधी सभी दिशा-निर्देशों की पालना के साथ मतदान करवाएंगे।
27 उम्मीदवारों के भाग्य का होगा फैसला
 तीनों विधानसभाओं में प्राप्त नामांकनों की संवीक्षा और नाम वापसी के बाद 27 उम्मीदवार चुनावी समर में रह गए थे। मतदाता मतदान दिवस पर सहाड़ा (भीलवाड़ा) से 8, सुजानगढ़ (चूरू) से 9 और राजसमंद (राजसमंद) से 10 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। उन्होंने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतदान केंद्रों पर आधारभूत सुविधाएं मसलन छाया, पानी, रैंप आदि की व्यवस्था भी सुचारू करने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान विधानसभा
7 लाख से ज्यादा मतदाता कर सकेंगे मतदान
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि राजसमंद जिले की राजसंमद, भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा और चूरू जिले की सुजानगढ़ विधानसभाओं में 1145 मतदान केंद्रों पर कुल 7 लाख 45 हजार 758 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि सुजानगढ़ में 2 लाख 75 हजार 940, राजसमंद में 2 लाख 22 हजार 531 और सहाड़ा में 2 लाख 47 हजार 287 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे।
100 मतदान केंद्रों पर होगी वेबकास्टिंग
 गुप्ता ने बताया कि तीनों विधानसभाओं में कुल 1145 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें से 100 संवेदनशील मतदान केंद्रों पर वेब कैमरों के जरिए नजर रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा विधानसभा के 39, राजसमंद के 35 और चुरू जिले के सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 26 मतदान केंद्रों पर इस तकनीक के जरिए निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र-निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए 7578 पुलिस कार्मिकों को तैनात किया गया है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था मजबूत रहेगी।
कोरोना संक्रमितों के लिए अंतिम घंटों में मतदान की व्यवस्था
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि राज्य में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आयोग ने मतदान के अंतिम घंटों यानी कि सायं 5 से 6 बजे के मध्य कोरोना संक्रमित, कोरोना संदिग्ध और क्वारंटीन में रह रहे मतदाताओं को उनकी सहमति पर पूरे प्रोटोकॉल के साथ मतदान करवाने की व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि मतदान केन्द्रों पर कोरोना संक्रमितों के लिए अलग से प्रतीक्षा कक्ष बनाया जाएगा और आने वाले प्रत्येक संक्रमित मतदाता को पीपीई किट भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
निर्वाचन से जुड़ी समस्या के लिए करें नियंत्रण कक्ष में फोन
 गुप्ता ने बताया कि मतदान दिवस पर मतदाता निर्वाचन संबंधी किसी भी समस्या के लिए जिला और राज्य स्तर पर स्थापित नियंत्रण कक्ष में फोन कर मदद प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सुजानगढ़ विधानसभा के मतदाता 01568-220094, सहाडा विधानसभा के मतदाता 01481-220041, 220043 नंबर और राजसमंद के मतदाता 02952-2222585 पर फोन कर सकते हैं। राज्य स्तर पर स्थापित नियंत्रण कक्ष पर मतदाता 0141-2227550 नंबर पर फोन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मतदाता किसी भी समस्या के लिए 1950 हैल्प लाइन नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत सी-विजिल एप द्वारा भी की जा सकती है।
वोटर हैल्पलाइन एप से ढूंढे अपना नाम, लें मतदान केंद्र की जानकारी
 गुप्ता ने बताया कि मतदान से पूर्व मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में नाम, भाग संख्या, क्रमांक संख्या देखने, मतदान केंद्र सहित कई तरह की जानकारी प्राप्त करने के लिए ‘वोटर हेल्पलाइन‘ एप का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्मित इस एप को कोई भी मतदाता एंड्रायड फोन पर प्ले स्टोर से वोटर हेल्पलाइन एप को डाउनलोड कर सकता है।
दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधा
गुप्ता ने बताया कि जिन बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं ने पोस्टल बैलेट के विकल्प का चयन नहीं किया है और उनके सुलभ मतदान के लिए आयोग ने तीसरी पंक्ति की भी व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि मतदान केन्द्रों पर दिव्यांगजनों की मदद के लिए 925 व्हील चेयर की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर स्काउट गाइड, एनएसएस और एनसीसी के वोलेंटियर लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि हर दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
11 वैकल्पिक दस्तावेजों से भी हो सकेगा मतदान
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतदान के लिए प्रत्येक मतदाता भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्वाचक फोटो पहचान पत्र अपने साथ जरूर लाएं। इनके अभाव में 11 अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक को दिखाकर भी मतदाता अपना वोट डाल सकते हैं। ये दस्तावेज निम्न हैं- आधारकार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेन्स, आयकर पहचान पत्र (पीएएन), मनरेगा जॉब कार्ड, सांसदों, विधानसभा सदस्यों को जारी किए गए सरकारी पहचान पत्र, राज्य या केन्द्र सरकार राज्य पब्लिक लिमिटेड कंपनी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी फोटोयुक्त स्वास्थ्य बीमा योजना स्मार्ट कार्ड, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज जैसे कि भूतपूर्व सैनिक पेंशन बुक,  पेंशन अदायगी आदेश, भूतपूर्व सैनिक विधवा या आश्रित प्रमाण पत्र, वृद्धावस्था पेंशन आदेश या विधवा पेंशन आदेश (निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने की तिथि से पूर्व जारी), सक्षम अधिकारी द्वारा जारी फोटोयुक्त छात्र प्रमाण पत्र (निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने की तिथि से पूर्व जारी), सक्षम अधिकारी द्वारा जारी फोटोयुक्त शारीरिक विकलांगता प्रमाण पत्र (निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने की तिथि से पूर्व जारी), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक या सहकारी बैंक या डाकघरों द्वारा जारी की गई फोटोयुक्त पासबुक (निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने की तिथि से पूर्व जारी)।

साइबर अपराध समाज और पुलिस के समक्ष निरन्तर चुनौती बनते जा रहे हैं, साइबर लिटरेसी बढ़ाने की आवश्यकता – महानिदेशक पुलिस एम.एल लाठर

साइबर लिटरेसी बढ़ाने की आवश्यकता महानिदेशक पुलिस
जयपुर, 16 अप्रैल। महानिदेशक पुलिस  एम.एल. लाठर ने कहा है कि बढ़ते साइबर अपराध समाज और पुलिस के समक्ष निरन्तर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आमजन को ऑनलाईन बिहेवियर के बारे में जागरुक करने के साथ ही वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए साइबर लिटरेसी बढ़ाने की आवश्यकता है।
 लाठर शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में राजस्थान पुलिस अकादमी, यूनीसेफ और साइबर पीस फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक महीने के साइबर सेफ्टी कैम्पेन का वेबीनार द्वारा शुभारम्भ कर रहे थे। इस कैम्पेन के दौरान साइबर सुरक्षा के संबंध में व्यापक जन चेतना के लिए वर्चुअल सेमीनार सहित अन्य कार्यक्रमाें का आयोजन भी किया जाएगा।
महानिदेशक पुलिस ने कहा कि आमजन को साइबर संबंधी कानून एवं साइबर अपराधों के बारे में अवगत कराने के साथ ही साइबर अपराधों से बचने के लिए अपनाई जाने वाली सावधानियाें के बारे में अवगत कराने की आवश्यकता है। कोरोना काल के दौरान व्यापार,शिक्षा, भुगतान से लेकर अन्य गतिविधियाें में इन्टरनेट का व्यापक रुप से उपयोग किया जा रहा है। साइबर अवेयरनैस कम होने पर आमजन साइबर क्रिमीनल के शिकार हो सकते हैं।
लाठर ने बताया कि राजस्थान पुलिस ने महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्व होने वाले अपराधों की रोकथाम के बारे में एप बनाए हैं। इनके साथ ही बनाए गए राजस्थान सिटीजन व अन्य एप राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं एवं आमजन इन्हें डाउनलोड कर इनका उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले में साइबर यूनिट कार्य कर रही है एवं यह यूनिट 5 लाख रुपये तक की राशि के साइबर अपराधों के बारे में अनुसंधान करती है। इससे अधिक राशि  के साइबर अपराधों का अनुसंधान एसओजी के तहत गठित साइबर थानों द्वारा किए जा रहे हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एवं निदेशक आरपीए  राजीव शर्मा ने साइबर सेफ्टी कैम्पेन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2020 में जारी रिपोर्ट के अनुसार साइबर अपराधों में 63 प्रतिशत की वृद्वि हुई है। वितीय मामलों में नुकसान के साथ ही डेटा चोरी होने से आमजन की निजता भी प्रभावित होती है। साइबर अपराधियों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण कार्य है।
वेबीनार में यूनीसेफ के संजय निराला ने आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा के सम्बन्ध में जागरुक करने के लिए व्यापक अभियान संचालित करने पर बल दिया। साइबर पीस फाउण्डेशन के श्री विनीत कुमार ने बताया कि एक माह के इस कैम्पेन के दौरान अलग-अलग विषयों पर आठ वेबीनार आयोजित की जा रही हैं। वेबीनार में अति. महानिदेशक पुलिस, तकनीकी एवं दूरसंचार  सुनील दत्त भी मौजूद थे।

All you need to know about PCOS

All you need to know about PCOS

 

PCOS is a condition which can affect the fertility of a woman.

 

What is PCOS?

Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) is also known as PCOD. It is a group of symptoms that affects a woman’s hormone levels, ovaries, menstrual cycle and reproductive organs. Approximately 5 to 10 percent of women between the age of 12 to 44 get affected with this condition. On an average 27 percent of women suffer from this condition during their child bearing years. Women suffering with PCOS produce high amounts of male hormones which lead to irregular periods and infertility. It also causes acne and abnormal hair growth on the face and body and baldness. In PCOS small sacks filled with fluid starts growing inside the ovaries which are known as cyst that disrupt the ovulation process. Lack of ovulation lower the Estrogen and Progesterone levels, while androgen (male hormone) levels shoots up. This leads to irregular and fewer menstrual cycles. But with early diagnosis its symptoms can be controlled and the patient can live a normal and healthy life.

 

 

Symptoms of PCOS 

The most common symptoms of PCOS are irregular periods, infertility, acne, abnormal hair growth on face and body and baldness. Most symptoms begin shortly after puberty but they can develop during late teens and early adulthood also. Apart from these common symptoms there are certain other symptoms also which include:

• Frequent mood swings.

• Dark patches and skin tags (excess skin) on the neck, under the breast, in the groin and in the armpits.

• Excess weight gain.

• Difficulty in losing weight.

• Frequent pelvic pain.

• Heavy bleeding during periods.

• Headaches and fatigue.

• Thinning hair.

• Sleep apnea.

 

If you experience any of the above symptoms then consult your gynecologist.

 

Causes of PCOS

 

Although there are no known reasons for PSCOS but it is believed that high levels of male hormones disrupts the production of hormones from ovaries and making eggs normally.

• Genetic: Studies show that PCOS can be genetic. Women are likely to develop PCOS if their mother or sister has this condition. If a mother has PCOS, then there are 40% chances of her female child to develop it also.

• Obesity: According to doctors excess weight can lead to PCOS. Approximately 80% of the PCOS patients are on the higher side of weighing scale. An ideal Body Mass Index (BMI) should be 25 but when it exceeds 27-28, it become alarming. Studies also suggest that loosing 5 to 10 percent of total body weight can help in regulating periods and improve symptoms of PCOS.

• Insulin resistance: Some studies suggest that up to 70 percent of woman with PCOS have insulin resistance which means that their cells can’t use insulin completely. The pancreas starts producing more insulin which triggers the ovaries to produce more androgen. And Type 2 diabetes patients are more likely to develop it.

• Inflammation: Excess body weight can contribute to inflammation and that can lead to high levels of androgen. Women with PCOS can have increased levels of inflammation.

 

What are the risks?

Women with PCOS have a higher risk of developing other serious health complications. It can raise the risk of diabetes, high cholesterol, hypertension, anxiety, depression, heart attack, endometrial cancer, gestational diabetes, metabolic syndrome, ovarian and breast cancer, premature delivery and high blood pressure.

 

Diet and lifestyle to treat PCOS

According to Hasti Singh, Fitness and Sports Nutrition Expert Low carbohydrate diets are very effective for PCOS patients. Natural, unprocessed foods, lean proteins, fatty fish like tuna, salmon and sardines, high fiber food, whole grains, spinach, broccoli, cauliflower, blueberries, cherries, lentils olive oil, coconut, almonds, pine nuts, turmeric, cinnamon and magnesium, zinc rich foods should be added in daily diet. Whereas fried foods, sugary beverages, red meat, excess intake of caffeine and processed food should be avoided. Instead switch to herbal tea and green tea.

Lifestyle changes can also bring significant changes in PCOS conditions. Research has shown that combining PCOS diet with ample physical activity can improve the condition.

Approximately 60 percent of women with PCOS have vitamin D deficiency. So by adding it to your diet one can see a remarkable improvement in the symptoms of PCOS.

If lifestyle changes don’t work then your doctor may suggest medication to restore normal menstrual cycles and relieve its symptoms.

 

The Writer is Hasti Singh, Fitness and Sports Nutrition Expert

चाकसू : महामानव डॉ भीमराव अंबेडकर की 130 जयंती मनाई –

महामानव डॉ भीमराव अंबेडकर की 130 जयंती मनाई

सामाजिक कार्यकर्ता धर्मेंद्र तामडिया अध्यक्ष संवैधानिक अधिकार संगठन राजस्थान ने बताया कि बाबा साहब डॉक्टर बी आर अंबेडकर जयंती समारोह समिति चाकसू के अध्यक्ष जुगल किशोर बौद्ध के नेतृत्व में संविधान निर्माता विश्व रतन बोधिसत्व बाबा साहब डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी की 130 वी जयंती अंबेडकर सर्किल चाकसू में मनाई गई सुबह से ही अंबेडकर सर्किल पर भारत स्काउट गाइड के छात्रों ने रंगोली सजाई इसके बाद दीप प्रज्वलन कर एम्बस के स्टेट ऑर्गेनाइजर घनश्याम गौतम के द्वारा बुद्ध वंदना करवाई गई इसके बाद बाबा साहब के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला और कहा कि आज के युवाओं को बाबा साहब की मानवतावादी विचारधारा के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है तभी हम बाबा साहब के सपनों का भारत बना पाएंगे इसके बाद राहुल डांस ग्रुप के कलाकारों ने डांस प्रस्तुति दी |

 

 

इसके उपरांत उपस्थित सभी लोगों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और कार्यक्रम का समापन किया गया इस दौरान समिति के महासचिव गोवर्धन लाल बेरवा, कोषाध्यक्ष अभिषेक सांवरिया , पूर्व अध्यक्ष सचिन सांवरिया, नारायण लाल बेरवा जगदीश बेरवा, वरिष्ठ कार्यकर्ता लादूराम वर्मा, भूपेन्द्र गौतम ,चेयरमैन नगर पालिका चाकसू कमलेश बैरवा,व पार्षद दयाराम कुडारा , विक्रम सांवरिया , सनी नैनीवाल, दिनेश शर्मा, पुर्व पार्षद मेहराज खान, फुले बिग्रेड के प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व पार्षद हनुमान सिंह सैनी, प्रवक्ता सीताराम मंडावरिया , वरिष्ठ कार्यकर्ता छितरमल जगरवाल ,राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चाकसू के प्राचार्य रामलाल मीणा, कानूनगो संघ जयपुर जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश मीणा, पटवार संघ के तहसील चाकसू अध्यक्ष विजेंद्र मीणा, चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मधुसूदन सिंह डॉ रामअवतार सांवरिया, रोशन लाल उचैनिया , शिव शंकर उचैनिया चिरंजीलाल बौद्ध ,पूर्व पार्षद मोती लाल बेरवा ,राष्ट्रीय सेवा योजना से हरीश बेरवा, प्रचार मंत्री प्रह्लाद धामनिया, भीम आर्मी विधानसभा अध्यक्ष हेमराज बेरवा, भागचंद खोलिया, रेवाशंकर मंडावरिया, भारत स्काउट गाइड के रोवर लीडर मुकेश कुमार बडोलिया ,केशव, राहुल, चेतन आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे |

 

कोविड 19 : रात्रिकालीन कर्फ्यू अब शाम 6 बजे से प्रातः 5 बजे तक , शिक्षण संस्थाओंं, धार्मिक-सामाजिक आयोजनों, जुलूस, मेलों आदि पर 16 अप्रेल से रोक

गृह विभाग ने जारी किए नए दिशा-निर्देश- 
प्रदेश में रात्रिकालीन कफ्र्यू अब शाम 6 बजे से प्रातः 5 बजे तक
 
शिक्षण संस्थाओंं, धार्मिक-सामाजिक आयोजनों, जुलूस, मेलों आदि पर 16 अप्रेल से रोक
जयपुर, 14 अप्रेल। राज्य सरकार ने प्रदेश में कोविड-19 महामारी के संक्रमण की दूसरी लहर के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न बाजार, कार्यस्थल, व्यावसायिक, निजी एवं सार्वजनिक गतिविधियों आदि के लिए प्रतिबंधात्मक उपायों में अधिक कड़ाई करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 16 अप्रेल से 30 अप्रेल तक पूरे राज्य में सायं 6 बजे से प्रातः 5 बजे तक रात्रिकालीन कफ्र्यू रहेगा।
 मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में निर्णय के बाद गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किए। आदेश के अनुसार, कफ्र्यू की प्रभावी अनुपालना के क्रम में बाजार एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान सायं 5 बजे तथा राजकीय कार्यालय सायं 4 बजे तक बंद हो जाएंगे। यह समयावधि अनिवार्य, आपातकालीन एवं स्वास्थ्य सेवाओं, कोविड मैनेजमेंट से संबंधित राजकीय कार्यालयों, निरंतर उत्पादन तथा रात्रिकालीन शिफ्ट वाली फैक्टि्रयों, दवा की दुकानों, आईटी कम्पनियों, विवाह समारोहों, बस, रेलवे और एयरपोर्ट से आने-जाने वाले यात्रीगण, माल परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग आदि में नियोजित लोगों पर लागू नहीं होगी। इस छूट के लिए अलग से पास की आवश्यकता न

हीं होगी। इन्फोर्समेन्ट टीम को पहचान-पत्र, निमंत्रण-पत्र, यात्रा टिकट आदि दस्तावेज दिखाया जा सकेगा।
गृह विभाग के आदेश के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रोें में प्रतिबंधात्मक दिशा-निर्देशों तथा कोविड प्रोटोकॉल की अनुपालना के लिए पूर्व में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा गठित ग्राम पंचायत स्तरीय कोर गु्रप को फिर से एक्टिवेट किया जाएगा। ये समितियां समझाइश और संवाद के माध्यम से होम आइसोलेशन और क्वारेंटाइन के नियमों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर कोविड गाइडलाइन्स की पालना सुनिश्चित करवाने में स्थानीय प्रशासन का सहयोग करेंगी। जिला कलेक्टर आवश्यकतानुसार ‘वर्क फ्रॉम होम’ वाले सरकारी कार्मिकों की सेवाएं कोविड प्रबंधन कार्यों के लिए ले सकेंगे।
नई गाइडलाइन्स में निम्नलिखित निर्देश भी जारी किए गए हैं –
-राज्य में 16 अप्रेल से 31 मई तक विवाह आदि निजी आयोजनों में आमंत्रित अतिथियों की संख्या 50 से अधिक नहीं होगी। इसके लिए उपखण्ड मजिस्टे्रट को पूर्व सूचना देना आवश्यक होगा। 
-समारोह स्थल, मैरिज गार्डन आदि में कोरोना गाइडलाइन्स का उल्लंघन पाए जाने पर आयोजन स्थल को 7 दिन के लिए सीज किया जाएगा।
-अंतिम संस्कार के लिए अनुमत व्यक्तियों की संख्या 20 से अधिक नहीं होगी। 
-धार्मिक स्थलों पर केवल प्रबंधन द्वारा ही नियमित पूजा-अर्चना एवं इबादत की जा सकेगी। ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था जारी रह सकेगी। आमजन द्वारा पूजा-अर्चना, इबादत आदि घर पर ही रहकर की जाए।
-फसल खरीद केन्द्रों एवं कृषि मण्डियों में फसलों का क्रय-विक्रय के दौरान कोविड नियमों की पालना सुनिश्चित की जाएगी।
-रेस्टोरेंट से होम डिलीवरी रात्रि 8 बजे तक तथा होटल में ‘इन हाउस’ गेस्ट सर्विस अनुमत होगी।
-सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की संख्या वाहन की कुल क्षमता से 50 प्रतिशत तक ही रहेगी।
-राज्य के बाहर से आने वाले आगन्तुकों की बॉर्डर चेक पोस्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी और आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट होने पर ही प्रवेश दिया जाएगा।
-100 से अधिक कार्मिकों की संख्या वाले कार्यालयों में उपस्थिति 50 प्रतिशत रहेगी तथा शेष 50 प्रतिशत कार्मिकों को वर्क फ्रॉम होम (घर से कार्य) कर सकेंगे।
-कार्यस्थल पर किसी कार्मिक के कोविड पॉजिटिव पाए जाने पर कार्यालय कक्ष को 72 घंटे के लिए बंद किया जाएगा। 
-ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में धार्मिक मेलों, उत्सवों, जुलूस आदि पर रोक।
-समस्त शैक्षणिक एवं कोचिंग संस्थाएं तथा लाइब्रेरी आदि बंद रहेगी।
-दसवीं एवं 12वीं की परीक्षाओं अथवा प्रायोगिक परीक्षाओं से संबंधित गतिविधियों पर रोक रहेगी।
-गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों, गर्भवती महिलाओं एवं 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही घर से बाहर निकलने की अनुमति होगी। 
उक्त आदेश 16 अप्रेल से प्रभावी होंगे।

महंगी होती बिजली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन –

कच्ची बस्तियों के लोगों ने मंहगी होती बिजली के अमानवीय पहलू पर ध्यान आकर्षित करने के लिए किया प्रदर्शन
दूसरे राज्यों में चुनाव में 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा करने वाली कांग्रेस पार्टी राजस्थान में सरकार में होते हुए देश में सबसे मंहगी बिजली क्यूं देती है?
12 अप्रैल, जयपुर। बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति जयपुर ने आज मालवीय नगर सहायक अभियंता कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर बिजली बिलों में हो रही धांधली के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। विरोध प्रदर्शन में इंद्रा नगर कच्ची बस्ती, सरदार बस्ती झालाना, मालवीय नगर कच्ची बस्ती के लोग शामिल हुए। राजस्थान यूनिवर्सिटी एवं शहर के अलग-अलग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा दिहाड़ी मजदूरों सहित, आम नागरिकों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
कच्ची बस्ती से आई महिलाओं का कहना था कि बस्ती में बिजली के बिल बहुत ही ज़्यादा आता है। एक पंखा और दो बल्ब जलाने वालों का भी डेढ़-दो हज़ार का बिल आता है, बहुत लोगों का तो दस हजार तक के बिल भी आए हैं। बस्ती के लोगों के हालात ऐसे नहीं हैं कि वो इतनी महंगी बिजली की मार सह सकें। झालाना से अाई सुनीता जी ने कहा, “लोग किसी तरह पाई पाईजोड़ कर जब तक एक बिल चुकाते हैं, दूसरा बिल आ जाता है। जुड़ते-जुड़ते ये बिजली के बिल पहाड़ जैसे हो जाते हैं और फिर कनेक्शन कट जाता है, मीटर उखाड़ लेते हैं। क्या हमारे बूढ़े बुज़ुर्ग, बीमार लोग, छोटे छोटे बच्चों को गर्मी और अंधेरे में सिर्फ इसलिए रहना पड़ेगा क्यूं कि हमें काम धंधा नहीं मिल पाया? क्या गरीब के बच्चों को पढ़ने का हक नहीं? सरकार हमको अच्छा काम दे, नहीं तो महंगाई कम करे।”
बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति का कहना है कि राजस्थान सरकार बिजली को जनसेवा  के साधन से बिजली कम्पनियों के लिए एक मुनाफे के साधन में बदलना चाहती है। इसके चलते बिजली कम्पनियों ने मनमानी लूट मचा रखी है। राजस्थान देश में सबसे ज़्यादा बिजली बनाने वाले राज्यों में से एक है, फिर भी राजस्थान में बिजली देश में सबसे महंगी है। राजस्थान में सत्तारूढ़ कोंग्रेस पार्टी असम में चुनाव में 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा कर सकती है, तो फिर राजस्थान की जनता के साथ ये अन्याय क्यूं? खराब मीटर और बिजली विभाग और बिजली कम्पनियों की जनविरोधी नीतियों के चलते,  हर घर में जलने वाले उपकरणों की तुलना में, बिल में बहुत ज़्यादा स्थाई शुल्क आता है और इसके साथ साथ विद्युत शुल्क ,नगरीय कर, फ्यूल सरचार्ज आदि कई प्रकार के शुल्क और जोड़ दिए जाते हैं। लोग जितनी बिजली जलाते हैं, उस से तीन चार गुना बिल आता है। बहुत से लोगों का तो 20-20 गुना बिल देखा गया है। निजीकरण के चलते ही इन बिलों की वसूली भी जमींदारी तरीकों से की जाती है। समझौता समितियां बिना उपभोक्ताओं को समझौता प्रक्रिया में शामिल किए ही मनमाने सेटलमेंट करती है। कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए ये पूरी प्रक्रिया बहुत ही भयानक आर्थिक और मानसिक संकट का रूप ले लेती है। सरकार को लोगो के हालात को समझते हुए बिजली बिलों को काबू में लाते हुए, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को हर नागरिक की पहुंच में लाना चाहिए।
बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति जयपुर की मुख्य माँगें हैं – बिजली बिलों में की गई बढ़ोत्तरी वापस लो, कोरोना काल के बिजली बिल माफ करो, स्थाई शुल्क लेना बंद करो,पड़ोसी के बकाया बिजली बिलों के नाम पर उपभोक्ता का कनेक्शन काटना बंद करो,  हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ्त दो, खराब व तेज चलने वाले मीटर तुरंत बदलो, बिजली विभाग का निजीकरण बंद करो, बिजली(संशोधन) विधेयक 2020 खारिज करो।

महाराष्ट्र : 14 अप्रैल को रात 8 बजे से सूबे में धारा 144 लागू करने का ऐलान किया है- मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

‘ब्रेक द चेन अभियान’

मुंबई | महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते केसों की संख्या ने मुख्यमंत्री ठाकरे को बड़े सख्त कदम उठाने पर मजबूर पर दिया हैं मुख्यमंत्री ठाकरे आज राज 8 बजें मीडिया को संबोधित किया जिसमे 14 अप्रैल से  आंशिक  लॉक डाउन की घोषणा की घोषणा की हैं |

महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कोरोना संकट से निपटने के लिए कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। प्रदेश में बीते साल की तरह पूर्ण लॉकडाउन नहीं रहेगा, लेकिन सभी गैर-जरूरी सेवाएं बंद रहेंगी और बेवजह निकलने पर रोक होगी। सीएम उद्धव ठाकरे ने 14 अप्रैल को रात 8 बजे से सूबे में धारा 144 लागू करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह आपके मन-मुताबिक न हो, लेकिन तब भी ऐसा करना पड़ रहा है। पूरे राज्य में अगले 15 दिन तक संचार बंदी लागू की जाएगी। उन्होंने लॉकडाउन शब्द का इस्तेमाल न करते हुए इसे ‘ब्रेक द चेन अभियान’ करार दिया।

सीएम उद्धव ठाकरे ने साफ किया कि जरूरी सेवाओं को छोड़कर सारे दफ्तर बंद रहेंगे। ईकॉमर्स, बैंक, मीडिया, पेट्रोल पंप, सुरक्षा गार्ड जैसे लोगों को इसमें छूट दी गई है। रेस्तरां आदि खुले रहेंगे, लेकिन वहां बैठकर खाने पर रोक होगी। सिर्फ होम डिलिवरी और टेक-अवे की सुविधा रहेगी।

 

गरीबों को राशन से लेकर कैश तक की मदद का ऐलान –

कंस्ट्रक्शन के काम में लगे मजदूरों को प्रति माह 1,500 रुपये की आर्थिक मदद देने वाले हैं। अधिकृत फेरी वालों को भी मदद दी जाएगी। रिक्शे वालों को भी 1,500 रुपये और आदिवासियों को 2,00 रुपये महीने की मदद मिलेगी। 7 करोड़ लोगों को 3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल अगले तीन महीने तक देंगे। यह सुविधा राशन कार्ड होल्डर्स को सरकारी दुकानों से दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि इस आंशिक लॉकडाउन के दौरान किसी की रोजी-रोटी पर संकट न आए, ऐसा हमारा प्रयास रहेगा। हमने 3,300 करोड़ रुपये की रकम कोविड के लिए निकाले हैं, जिससे लोगों को मदद दी जाएगी। हमने कुल 5,500 करोड़ रुपये का बजट कोरोना के लिए तय किया है। उन्होंने कहा कि अब हमारे कोई चारा नहीं है, इसलिए हम ऐसा कर रहे हैं। आरोग्य सुविधाओं और वैक्सीनेशन को बढ़ाने के लिए हमने यह फैसला लिया है। मेरी सभी से हाथ जोड़कर विनती है कि इसका पालन करें।

 

मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीकरण के लिए जन आधार कार्ड आवश्यक

मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना
जयपुर, 13 अप्रैल। मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना राज्य सरकार की सम्पूर्ण देश में एक अद्वितीय जनकल्याणकारी योजना है। योजना में पंजीकरण कराने हेतु जन आधार कार्ड को आवश्यक किया गया है। योजनान्तर्गत एन.एफ.एस.ए., सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत जनगणना ¼SECC½] राज्य सरकार के संविदाकर्मी एवं लघु सीमान्त कृषकों को निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ दिया जा रहा है। इन चार श्रेणियों के अतिरिक्त राज्य के समस्त निवासी जन आधार कार्डधारी परिवार भी 850 रूपये शुल्क (कुल प्रीमीयम का लगभग 50 प्रतिशत) जमा करा कर मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीकरण करवा सकते है, उक्त प्रीमीयम का लगभग 50 प्रतिशत शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
शासन सचिव, आयोजना एवं पदेन महानिदेशक राजस्थान जन आधार प्राधिकरण श्री नवीन जैन ने बताया कि जन आधार कार्ड बनवाने एवं मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीकरण हेतु किसी भी प्रकार की न्यूनतम अथवा अधिकतम आय अथवा आयु सीमा निर्धारित नहीं है, राज्य का कोई भी निवासी जन आधार कार्ड बनवाकर मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीकरण के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ प्राप्त कर सकता है। जन आधार कार्ड नामांकन पश्चात् सत्यापन की निर्धारित प्रक्रिया उपरान्त जन आधार ई-कार्ड जारी कर दिया जाता है। मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीकरण जन आधार नामांकन की रसीद संख्या (EID) अथवा जन आधार संख्या अथवा जन आधार ई-कार्ड डाउनलोड करके भी कराया जा सकता है, इसके लिए मुद्रित कार्ड ही होने की आवश्यकता नहीं है। जन आधार कार्ड के माध्यम से न केवल मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में अपितु राज्य की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं में भी पात्रतानुसार लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
 नवीन जैन ने यह भी स्पष्ट किया कि आमजन में जन आधार कार्ड के संबंध में यह भ्रांति है कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा मुद्रित जन आधार कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में चयनित लोगों को केवल एकबार ही मुद्रित कार्ड जारी किया गया है। वर्तमान में आवेदकों को जन आधार ई-कार्ड ही जारी किये जा रहे है। नया जन आधार कार्ड बनवाने हेतु जन आधार पोर्टल पर स्वयं अथवा ई-मित्र पर जाकर निःशुल्क नामांकन कराया जा सकता है। जन आधार कार्ड में संशोधन ई-मित्र पर निर्धारित शुल्क देकर करवा सकते है।

कोविड 19 : इंजेक्‍शन रेम्‍डेसिविर और रेम्‍डेसिविर एक्टिव फार्मास्‍युटिकल इंग्रेडिएंट्स (एपीआई) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया

केन्‍द्र ने देश में कोविड स्थिति में सुधार आने तक  इंजेक्‍शन रेम्‍डेसिविर और रेम्‍डेसिविर एक्टिव
फार्मास्‍युटिकल इंग्रेडिएंट्स (एपीआई) के निर्यात पर  प्रतिबंध लगाया

केन्‍द्र ने रोगियों एवं अस्‍पतालों को रेम्‍डेसिविर की सरल सुविधा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्‍न कदम उठाए

 

नई दिल्ली |  भारत में कोविड मामलों में हाल में काफी तेजी आई है। 11.04.2021 तक कोविड के 11.08 लाख सक्रिय मामले हैं और उनमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसकी वजह से कोविड रोगियों के उपचार में प्रयुक्‍त इंजेक्‍शन रेम्‍डेसिविर की मांग में अचानक बहुत तेजी आ गई है। आने वाले दिनों में इस मांग में और वृद्धि होने की संभावना है।

भारत की सात कंपनियां अमेरिका की मेसर्स गिलीड साइंसेज के साथ स्‍वैच्छिक लाइसेंसिंग समझौते के तहत इंजेक्‍शन रेम्‍डेसिविर का उत्‍पादन कर रही हैं। उनके पास हर महीने लगभग 38.80 लाख यूनिट की संस्‍थापित क्षमता है।

उपरोक्‍त को देखते हुए भारत सरकार ने स्थिति में सुधार आने तक इंजेक्‍शन रेम्‍डेसिविर तथा रेम्‍डेसिविर एक्टिव फार्मास्‍युटिकल इंग्रेडिएंट्स (एपीआई) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

इसके अतिरिक्‍त, भारत सरकार ने रोगियों एवं अस्‍पतालों को रेम्‍डेसिविर की सरल सुविधा सुनिश्चित करने के लिए निम्‍नलिखित कदम उठाए हैं:-

 

 

 

 

  1. दवा की सुविधा सुगम बनाने के लिए रेम्‍डेसिविर के सभी घरेलू विनिर्माताओं को उनकी वेबसाइट पर उनके स्‍टॉकिस्‍ट/वितरकों के विवरणों को प्रदर्शित करने का सुझाव दिया गया है।
  2. ड्रग इंस्‍पेक्‍टरों तथा अन्‍य अधिकारियों को स्‍टॉक का सत्‍यापन करने तथा उनके कदाचारों की जांच करने तथा जमाखोरी और तहबाजारी रोकने के लिए अन्‍य कारगर कदम उठाने का भी निर्देश दिया गया है। राज्‍य स्‍वास्‍थ्‍य सचिव संबंधित राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के ड्रग इंस्‍पेक्‍टरों के साथ इसकी समीक्षा करेंगे।
  3. फार्मास्‍युटिकल विभाग रेम्‍डेसिविर के उत्‍पादन में बढ़ोतरी के लिए घरेलू विनिर्माताओं के संपर्क में बना हुआ है।

भारत सरकार ने राज्‍यों को यह भी सुझाव दिया है कि वर्तमान ‘कोविड-19 के लिए राष्‍ट्रीय नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल’ जो साक्ष्‍य पर आधारित है, को विशेषज्ञों की समिति द्वारा कई परस्‍पर बैठकों के बाद विकसित किया गया है और यह कोविड-19 के रोगियों के उपचार के लिए मार्गदर्शक दस्‍तावेज है। प्रोटोकॉल में रेम्‍डेसिविर को एक इंवेस्टिगेशनल थेरेपी अर्थात विस्‍तृत दिशा-निर्देशों में उल्‍लेखित प्रति संकेतों पर गौर करने के अतिरिक्‍त, जहां सूचित और साझा निर्णय निर्माण अनिवार्य है, के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को सुझाव दिया गया है कि इन कदमों को एक बार फिर से सभी अस्‍पतालों, सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों को संप्रेषित कर दिया जाए और इनके अनुपालन की निगरानी की जाए।

 

 

 

राष्ट्रीय बजरंग दल की कार्यकारिणी का किया विस्तार –

Expansion of executive of National Bajrang Dal –
सीकर | राष्ट्रीय बजरंग दल व अंतराष्ट्रीय हिन्दू परिषद की बैठक केशव संस्कार पब्लिक स्कूल बाजोर में  प्रान्त महामंत्री सीताराम कुमावत की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
हिन्दू नववर्ष व कार्यकारिणी विस्तार को लेकर हुई बैठक में हिंदू नववर्ष को सभी ग्राम स्तर पर ध्वज पताका,रंगोली सजाकर व शंखनाद के साथ स्वागत किया जाए व सभी को बधाई संदेश देकर मनाने की योजना बनाई गई।
विभाग सयोंजक महेंद्र रामसेवजीका, राजकुमार यादव रानोली की अनुसंसा पर जिला महामंत्री मुकेश केशव बाजोर ने जिला व तहसील कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए दीपक चौहान बाजोर को सीकर तहसील अध्यक्ष व छात्रप्रमुख,लोकेश होदकास्या बगड़ियो की ढाणी,जसवंत सिंह शेखावत बाजोर को तहसील उपाध्यक्ष,रविन्द्र जेठीवाल बगड़ियो की ढाणी को तहसील संपर्क प्रमुख,लालचन्द हर्षनिया को मीडिया प्रभारी,विकास सारडीवाल रैवासा को दांतारामगढ़ तहसील संपर्क प्रमुख, अंतराष्ट्रीय हिन्दू परिषद सीकर में शंकरलाल किरोड़ीवाल रैवासा को दांतारामगढ़ तहसील उपाध्यक्ष,संदीप घोड़ेला को श्रीमाधोपुर तहसील महामंत्री का दायित्व दिया गया हैं।
इस दौरान   डॉ. दिनेश कुमावत इंडिया हेल्पलाइन प्रान्त अध्यक्ष (चैयरमैन- जेके हॉस्पिटल रानोली),राजेन्द्र कुमावत कोछोर, सुनील डागर श्रीमाधोपुर, निर्मल कुमावत,जगदीश बागोरिया, जयपाल कुमावत अनेक सैकड़ो कार्यकर्ता मौजूद रहे।