अभिव्यक्ति और कट्टरता के मायने –

गुरमेहर कौर का एक छात्र संगठन की हिंसा के खिलाफ सोशल मीडिया पर मामूली सा विरोध राजनीति का अखाडा बन गया है। बड़ी चालाकी से कौर के द्वारा पोस्ट किये गए वीडियो में से एक ख़ास हिस्सा काटकर के शहीद की उस बेटी को देशद्रोही साबित कर दिया गया है। इस विवाद में मानो पूरा हिन्दुस्थान एक साल पीछे चला गया हो क्योंकि कौर का वीडियो भी एक साल पुराना है और जो देश विरोधी नारों की नई राजनीति है वो भी एक साल पुरानी है। पिछले साल 9 फरवरी को जो कुछ हुआ रामजस कॉलेज वि

वाद उसी का पार्ट 2 है। हालांकि अब खबरें आ रही है कि दिल्ली पुलिस कन्हैया पर देशद्रोह साबित नहीं कर पाई है लेकिन उसे पूरे समाज के सामने जिस तरह से देशद्रोही के रूप में प्रचारित किया गया क्या उसकी भरपाई हो पायेगी? जेएनयू और रामजस विवाद में एक समानता है कि दोनों ही मामलों में प्रशासन की तरफ से कार्यक्रम की इजाजत दी जाती है लेकिन ऐन वक्त पर उसे रदद् कर दिया जाता है। रामजस कॉलेज में विवाद इसलिए हुआ क्योंकि बस्तर के आदिवादियों पर शोध कर रहे उमर खालिद उस सम्मेलन में बस्तर के हालातों पर बोलने वाले थे, पर खालिद पर राजद्रोह का आरोप होने के कारण एबीवीपी ने उसका विरोध किया। लेकिन, इस बीच एक सवाल है कि हत्या के आरोपी संसद में बोल रहे हैं, बलात्कार के आरोपी विधानसभाओं में बोल रहें है, घोटालों के आरोपी चुनाव प्रचार के लिए जमानत लेकर जनसभाओं में बोल रहे है। इन सब बुनयादी सवालों पर किसी संगठन की देशभक्ति क्यों नहीं जागती? हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बुलाया और उनके जन्मदिन पर अचानक उनको बधाई देने पाकिस्तान पहुंच गये। नरेन्द्र मोदी की इस शांति बहाली की प्रक्रिया के कारण देश में कई आतंकवादी हमले हुये और कई वीर जवान शहीद हो गये। इन सब के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शांति के दूत कहलाये | यही शांति बहाली का काम जब एक वीडियो के जरिये गुरमेहर कौर ने किया तो वो देशद्रोही हो गई। उमर खालिद का विरोध इसलिए नहीं किया गया था कि वह किसी मामले में आरोपी है बल्कि, इसलिए किया था कि वह मुस्लिम है। खालिद का विरोध इसलिए किया गया था ताकि इस विरोध से उत्तरप्रदेश में नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ जैसे लोगों को श्मशान और कब्रिस्तान की बिजली जलाने की ताकत मिले। दरअसल सवाल देशभक्ति या देशद्रोही का नहीं है बल्कि असली ‘सवाल’ का है। पिछले कुछ दिनों से जैसे ही आप सोशल मिडिया या और कहीं सरकार के खिलाफ कोई सवाल उठे तो सुनियोजित तरीके से उस आवाज को दबाने के लिए एक समूह सक्रिय हो जाता है। वो जान से मारने की धमकी देता है, वो लड़कियों को रेप की धमकी देता है। गुरमेहर के मामले में तो केंद्र का सरकार भी उन गुंडों के समर्थन में उतर आई। किरन रिजिजू ने कहा कि कौर को कोई बहका रहा है तो उन्हें यह भी बताना चाहिए था कि उनके कार्यकर्ताओं को आईएसआई के लिए देश की दलाली करने के लिए कौन बहका रहा है। उनको ये भी बताना चाहिए था कि बंगाल बीजेपी की महासचिव को बच्चों को तस्करी के लिए कौन बहका रहा है। ये देशद्रोही और कथित देशभक्ति का ड्रामा इसलिए ही किया जाता है ताकि बुनियादी सवालों पर पर्दा डाला जा सकें। एक सैनिक ने जैसे ही सवाल उठाया कि उसे खाने के लिए अच्छा खाना नहीं मिल रहा और अफसर भ्रष्टाचार कर रहें है तो पूरा सरकारी तंत्र उसकी आवाज को दबाने में लग गया कहीं कोई जाँच नही हुई। धीरे धीरे भारत की विभिन्न रंगों वाली उस तस्वीर को एक रंग में रंगने का काम सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है क्योंकि हमारे वजीरे आला को केसरिया होली मनानी है। लोकतंत्र की हत्या करके कांग्रेस ने जो आपातकाल लगाया था उसमें असहमति रखने वाले लोगों पर झूठे आरोप लगाकर के जेलों में डाल दिया गया था। आज भी ठीक ऐसा ही हो रहा है जो लोग नागपुर की विचारधारा से असहमत है उन्हें देशद्रोही कहा जा रहा है। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि किसी सरकार या विचारधारा का विरोध देश का विरोध नहीं है। लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए विरोध जरुरी है।

सूरज कुमार बैरवा

राजस्थान विश्वविद्यालय

{ यह लेखक के निजी विचार है }

घनश्याम तिवाडी के साथ सरकार कर रही भेदभाव : कैलाश मेघवाल

जयपुर। आज विधानसभा में चर्चा का विषय घनश्याम तिवाड़ी का था। विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने घनशयाम तिवारी को सदन का सितारा बताया है। इसके अलावा घनश्याम तिवारी भी मिडिया से अपनी बात कही।

घनश्यम तिवारी ने मीडिया से कहा कि “ये मिलीभगत का खेल था। दोनो ने मिलकर कार्यवाही स्थगित करवाई। आगे वे कहते है कि मुझे विधानसभा अध्यक्ष ने कहा था की आज बोलना है। लेकिन सुबह मुख्यमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री ने अध्यक्ष से बात की और मेरी बारी स्थगित करवा दी। मुझे ही कह देते की नहीं बोलने देंगे कम से कम दूसरे तो नहीं बोलते। लोग क्यों डर रहे है ये उन्ही से पूछा जाए। मैं तो आरक्षण बेरोज़गारी भूमि सुधारो पर बोलना चाहता था। पद्मिनी पर बोलना चाहता था। संजय लीला भंसाली नहीं ये सरकार ज़िम्मेदार है। पर्यटन विभाग से प्रेरणा लेकर संजय लीला भंसाली ने फ़िल्म बनाने की योजना बनायी थी।

सरकार सदन चलाना नहीं चाहती

इसके अलावा रामेश्वर डूडी ने मीडिया से कहा कि हमें पहले ही लग गया था कि सरकार सदन नहीं चलाना चाहती इसलिए हम सदन छोड़ के भाग गए। पूरे प्रदेश में भय और भ्रष्टाचार बाधा है, आम जन दुखी है।

तो वहीँ विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने घनशयाम तिवारी के बारे में कहा कि उनके साथ सरकार कर रही है भेदभाव, वे सदन के सितारे है। आज मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री में नहीं बन रही है और ना ही मंत्रियों की विधायक से नहीं बन रही है।  कम सदस्य होने के बावजूद हम जनता के भरोसे पर खरा उतर रहे है। सरकार से जवाब माँग रहे है पर उनके पास कोई जवाब नहीं। एसबीसी मामले में सरकार के पास भी कोई जवाब नहीं था और सरकार सदन छोड़ के भाग गयी।

राजस्थान राजनीती एक नज़र-

राजस्थान भाजपा सरकार आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी जमीनी  पकड़ मजबूत करने में लग गई है किन्तु आगामी चुनाव बीजेपी के किये आसान नहीं होगा | राजस्थान जहाँ अपने रंग रंगीले स्वरूप के लिए विश्व विख्यात है वही राजस्था की  वर्तमान राजनीति की स्थिति  पर कुछ ऐसे भी जव्लंत मुद्दे है जो आगामी चुनाव में वसुंधरा सरकार के लिए कठिनाइयाँ  ला सकते है जैसे – गुर्जर आन्दोलन  , ललित मोदी कांड , शिक्षण संस्थानों बंद करना ( हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार  विश्व विधालय ) अम्बेडकर विश्व विधालय आदि |

वर्तमान सरकार के सामने शिक्षक बेरोजगार संगठन ,शिक्षक मित्र ,आगंबाडी  महिला  कार्यकर्त्ता , गहलोत सरकार में पत्रकारों के लिए आवंटित किये गए प्लॉट्स , आदि कुछ ऐसे मुद्दे है जिनका आगामी समय में  वसुंधरा  सरकार को  सामना करना पड़  सकता है  और महंगाई ,नोट बंदी  जैसे मुद्दों को  वर्तमान में कांग्रेस पार्टी  समय -समय पर उछाल रही है जिस से आम जनता यह सोचने पर मजबूर है की नोट बंदी से गरीबो का क्या भला हुआ ,काम धाम छोड़कर बैंको के बाहर घंटो लाइनों में क्यों लगे ,और कुछ लोगो की मौत का जिम्मेदार कोन ,ऐसे कई मुद्दे है जो आगामी राजस्थान विधानसभा  चुनाव में मुख्य रूप से सुने जायेगे |

लेकिन कुछ तो खास है मुख्यमंत्री  वसुंधरा राजे में जो निगम से विधायक होते हुवे सांसद तक उन्ही की सरकार पूर्ण बहुमत से  है | लेकिन सरकार के कुछ विधायक  ऐसे भी है जो मौखे  की तलाश में है की कब सरकार को बेकफूट पर ले सके | इन सभी मुद्दों पर  मुख्यमंत्री की पैनी नज़र है और वह इन सब को हल खोजने में लगी है और सरकार के अंतिम समय में जनता को लुभाने के लिए विभिन सौगाते दे सकती है |

अब जनता जनार्धन है साब कुछ भी कर सकती है क्या पता की विकास ,महंगाई ,सामाजिक मुद्दों पर आगामी चुनाव होगा या कुछ और आधार पर लेकिन यह बात साफ़ है की चुनाव विकास पर कम और जात -पात ,ऊँच-नीच और वह तमाम मुद्दे जिनका जुमलो के अलावा कुछ नहीं बनता के आधार पर वोट डाले जाते है |

राजस्थान की राजनीति में जातीय समीकरण या यो कहे की राजस्थान में जातीय समीकरण को देखकर भी राजनेतिक पार्टिया अपना प्रत्याशी मैदान में उतार ती है जिससे  चुनावो से विकास ,रोजगार ,महंगाई ,सामाजिकता और वह मुद्दे जो आम जनता के विकास के लिए आवश्क है गोंण हो जाते है | और  भाई भतीजे बाद पर चुनाव हो जाते है और आम आदमी अपने को ठंगा सा महसूस करता है |

वर्तमान बीजेपी सरकार 3 साल ,  ठोस  काम  का नारा दे रही है  जो कितना सही है यह तो अब जनता आगामी चुनाव में ही बतायेगी की काम केसा है |

धौलपुर विधानसभा सीट पर राजनीति गर्म

जयपुर | धौलपुर विधानसभा सीट पर उप चुनाव होने है जिसके लिए भाजपा और कांग्रेस में अपने वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है  |  पूर्व विधायक बी एल कुशवाह इस सीट पर बसपा से विधायक थे, लेकिन नरेश हत्या कांड में कुशवाहकोकोर्ट ने  8दिसम्बर 16 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी| जब से कुशवाह ज़ेल में है और उनकी विधानसभा सदस्यता निरस्त हो गई है | जिस परअब  धौलपुर विधानसभा सीट पर आगामी समय पर उप चुनाव होने है, जिसमे भाजपा और कांग्रेस इस सीट पर अपना दबदबा बनानाचाहते है| भाजप ने इस सीट से कुशवाह की पत्नी शोभारानी को भाजपा प्रत्याशी बनाने की योजना  बनाई है वही कांग्रेस ने पूर्व मंत्री बनवारी लाल शर्मा को प्रत्याशी बनाये जाने का प्रस्ताव प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा है |

जनता के काम के लिए गधे से प्रेरणा लेता हूं : मोदी

दिल्ली।  उत्तर प्रदेश में गुजरात के ‘गधे’ पर राजनीति थम नहीं रही है। गुरुवार को यूपी के बहराइच में पीएम नरेंद्र मोदी ने सीएम अखिलेश यादव पर गधे वाली टिप्पणी को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि अखिलेश को अब गधों से डर लगने लगा है। कई सौ किलोमीटर दूर  के गधे से डरने लगे हैं। जातिवादी राजनीति की आदत के कारण वो जानवरों में भी ‘ऊंच-नीच’ देखते हैं। साथ ही पीएम मोदी ने यह भी कहा कि ‘मैं गधे से भी प्रेरणा लेता हूं।

जनता का काम गधे से प्रेरणा लेकर करता हूं

पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गधा अपने मालिक के प्रति वफादार होता है अोर गधा कम खर्चे वाला होता है। मालिक जो काम कराए उसे किसी भी हालत कितना भी थका, भूखा हो जरूर करता है। मैं भी जनता को मालिक मानता हूं। जनता का काम गधे से प्रेरणा लेकर करता हूं। मोदी बहराइच में विजय शंखनाद रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चारों ओर भारतीय जनता पार्टी की आंधी दिखाई दे रही है। पीएम ने कहा कि प्रदेश की जनता उत्तर प्रदेश की भावी पीड़ी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश में कमल खिलाने में लगी है।

पीएम ने महाराष्ट्र के निगम चुनावों का किया जिक्र

मोदी के अनुसार यूपी के मुख्यमंत्री अपने 5 वर्षों के कार्यों का उत्तर नहीं दे रहे हैं और अभी भी बिना संकोच और शर्म के बोल रहे हैं कि काम बोलता है। सपा-कांग्रेस गठबंधन पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता किसी भी अवसरवादी गठबंधन को स्वीकार करने वाली नहीं है। इसके साथ ही पीएम ने महाराष्ट्र के निगम चुनावों का भी जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा कि आज महाराष्ट्र के भी नतीजे आ रहे हैं और उसमें कांग्रेस नजर नहीं आ रही है। पीएम मोदी ने कहा कि यूपी को 27 साल बेहाल करने वाले और ’27 साल यूपी बेहाल’ कहने वाले ये दोनों मिल गए हैं।

हार्दिक पटेल ने थामा – शिव सेना का हाथ

गुजरात आन्दोलन के युवा नेता हार्दिक पटेल ने शिवसेना का हाथ थाम  गुजरात के राजनीती  का केन्द्रीय बिंदु और समीकरणों का समीकरण ही बदल दिया है अब यह देखना होगा की भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के गढ़ कह  जाने वाले गुजरात में क्या राजनेतिक हल चल देखने को मिलती है विदित हे की शिव सेना और भाजपा का गटबंधन सही नहीं चल रहा हे और हार्दिक भाजपा सरकार के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते है आनन्दी बेन पटेल के मुख्यमंत्री  पद के छोड़ने का कारण ही लोग हार्दिल पटेल को ही  मानते है  |

विनोद सेन महामंत्री बने

 

विनोद सेन बने प्रांतीय महासचिव

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भारत विकास परिषद् के चुनाव सम्पन

जयपुर।
भारत विकास परिषद् के उत्तर प्रान्तीय चुनाव रविवार को चुनाव अधिकारी अशोक वशिष्ठ की देखरेख में सम्पन्न हुए। इस दौरान डीडवाना निवासी विनोद सेन को प्रान्तीय महासचिव चुना गया।
इस मौके पर विनोद सेन ने कहा कि परिषद् के पांच ध्येय वाक्य, संस्कार एवं सेवा को आधार मानकार सामाजिक, सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में सेवा व समर्पण के साथ स्वामी विवेकानन्द के आर्दशों को अपनाते हुए मानव की सेवा करना ही परिषद् का मुख्य ध्येय है। सेन के प्रान्त महासचिव निर्वाचित होने पर भारत विकास परिषद् की स्थानीय शाखा ने भी खुशी जताई है व अखिल भारतीय नारायणी धाम महासभा समिति के अध्यक्ष अशोक सरना ,महामंत्री भगवान सहाय मीनावाला ,मंत्री राजेंद्र सरोज ,कोषाध्यक्ष मुरारी लाल बुजवाले ,कैलाश सैन चोंप,शिक्षाविद डॉ एमएल वर्मा ,महेंद्र वर्मा ,मनोज मारोठिया समेत  देश भर के अनेक नामचीन लोगों ने बधाइयाँ प्रेषित की हैं।