हिंसा के बाद दो धड़ों में बटा किसान आंदोलन, एक गुट ने जताई शर्मिंदगी तो दूसरे धड़े ने खत्म किया आंदोलन

26 जनवरी को गंणतत्र दिवस के मौके पर जिस तहर की हिंसा देखने को मिली उसके बाद किसान आंदोलनकारी दो भागों में बटते हुए नजर आ रहे है। हिंसा के बाद दो बड़े किसान संगठनों में आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया तो दूसरे धड़े ने हिंसा पर खेद प्रकट करते हुए शर्मिदंगी जताते हुए 30 जनवरी को उपवास रखने का फैसला किया है।

इस आंदोलन को लेकर अब किसान संगठन एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं और हिसां फैलाने वालों को बाहरी बता रहे हैं। हिंसा के बाद से किसान आंदोलन से जुड़े बड़े नेताओं के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गयी है और उनको कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। बताया जा रहा है कि हिंसा के बाद किसान संगठनों को लगने लगा है कि उनको कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। हिंसा के बाद केन्द्र सरकार ने कहा कि वह अभी भी किसानों से वार्ता करने के लिए तैयार है।

दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं पर भी एफआईआर दर्ज की है इनमें राकेश टिकैत,जोगिंदर सिंह, बूटा सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल और राजेंद्र सिंह का नाम भी शामिल है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि ट्रैक्टर मार्च के दौरान इन नेताओं की ओर से नियमों का उल्लंघन किया गया था। सभी किसान संगठनों से जुड़े हैं और सरकार संग बातचीत हो या ट्रैक्टर परेड का रुट तय करना सभी में इनकी अहम भूमिका रही थी।

किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन जो हुआ वो शर्मनाक है। मैं उस समय गाजीपुर बॉर्डर के पास था फिर भी मैं शर्मिंदा हूं और 30 जनवरी को उपवास रखकर हम प्रायश्चित करेंगे।

राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन और भारतीय किसान यूनियन भानु ने हिंसा के बाद ऐलान कर दिया कि वे आंदोलन से अलग हो रहे हैं। हिंसा के बाद यूपी पुलिस भी एक्शन में दिखी और दिल्ली सहारनपुर हाइवे पर के बागपत जिले के बड़ौत में धरने पर बैठे किसानों को आधी रात को हटा दिया।

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आवेदन प्रकिया शुरूः 11 जनवरी से 8 फरवरी तक


परीक्षा तिथिः 25 अप्रैल

अनुपातः 90 रीट- 10 बी.ए.

आरक्षण का लाभः

सिलेब्स में क्या जोड़ा व क्या हटाया गयाः http://www.reetbser21.com/ReETfoRm2021/PDF/REET2021_LEVEL_2_SYLLABUS.pdf

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भारत में मिलेगा दुनिया का सबसे सस्ता कोरोना टीका

कोरोना की मार झेल रही पूरी दुनिया इसके इलाज के पानी की तरह पैसे बर्बाद कर रही है लेकिन इसके बाद भी उसे कारगर इलाज नहीं मिल पा रहा है। भारत में कोरोना के दो टीके बनकर तैयार है और इस सप्ताह में टीकाकरण का अभियान शुरू हो जाएगा और यह टीका दुनिया का सबसे सस्ता टीका होने के साथ बहुत कारगर टीका है जो कोरोना के नये वायरस को भी खत्म करने में कारगर है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि चीन ने दुनिया भर में कोरोना का टीका बहुत अधिक कीमत में बेच रहा है और इसके विपरित भारत में बना टीका बहुत ही सस्ता उपलब्ध होगा।

इस बीच सरकार ने बताया है कि उसने सीरम इंस्टीट्यूट से 1 करोड़ 10 लाख डोज और भारत बायोटेक से 55 लाख डोज खरीदी है। सरकार ने यह भी बताया कि दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले भारत सरकार ने कोरोना वैक्सीन की खरीदारी बेहद कम कीमत खरीदी है।स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से 110 लाख डोज 200 रुपए प्रति डोज खरीदने का करार किया है। जबकि भारत बायोटेक से 55 लाख डोज खरीदने का समझौता किया गया है। भारत बायोटेक से कोवैक्सीन की 38 लाख डोज 296 रुपए रुपए प्रति डोज के हिसाब से खरीदी है जबकि कंपनी ने 16 लाख डोज मुफ्त में देने का फैसला किया है।

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जानकारों के अनुसार फाइजर की वैक्सीन की कीमत प्रति डोज भारतीय मुद्रा के हिसाब से 1400 रुपये ज्यादा है यानी एक व्यक्ति को दो डोज टैक्स छोड़कर 2800 रुपए की होगी। कोरोना वॉरियर्स को दिए जाने वाले पहले तीन करोड़ डोज की कीमत केंद्र सरकार देगी। राज्यों को को कोई पैसा नहीं खर्च करना होगा। सरकार ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 14 जनवरी तक मिल जाएगी।

किसान आंदोलन को लेकर पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार

45 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है और किसान अपनी मांगों लेकर लगातार सरकार के साथ वार्ता कर रहे है लेकिन इसके बाद भी अभी तक कोई उचित समाधान नहीं निकल पाया है। इस आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार ने कई बार किसान संगठनों से आग्रह किया है वह सरकार पर विश्वास करें और आंदोलन खत्म करे लेकिन किसान संगठन ​कृषि बिलों को समाप्त करने की मांग को लेकर अड़े हुए है।

इस बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर आज सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से पूछा है कि क्या वह कानून को स्थगित करती है या फिर वह इस पर रोक लगा दे। भीषण ठंड को देखते हुए अदालत ने कहा कि किसानों की चिंता करनी चाहिए और उनकी समस्या का समाधान करने के लिए एक कमिटी बनानी चाहिए। इसके साथ कोर्ट ने किसान आंदोलन पर सरकार के विवाद निपटाने के लिए जो तरीका अपनाया उसे लेकर भी सख्त टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने किसान कानून समाप्त करवाना चाहते हैं जबकि सरकार मुद्दों पर बात करना चाहती है लेकिन हम एक विशेषज्ञ लोगों की एक कमिटी बनाकर कानूनों पर विचान करेंगे। किसान कमिटी के पास जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि हमने केंद्र सरकार को कहा था कि क्यों नहीं इस कानून को कुछ दिन के लिए स्थगित कर दें और उचित समाधान होने पर इस पर फैसला करें। कोर्ट किसान आंदोलन को हैंडल करने के तरीके से बहुत ज्यादा नाराज है।

मुख्य न्‍यायाधीश एसए बोबडे वाली बेंच किसाना आंदोलन से जुडी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। केंद्र और किसान संगठनों के बीच अगली बैठक 15 जनवरी को होनी है, ऐसे में SC की टिप्पणी बहुत अहम साबित हो सकती है। आज नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों का आंदोलन का 47वां दिन है केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत फेल होने के बाद, किसान संगठनों के नेता आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाने में लगे हैं। कोर्ट की इस बात पर विपक्ष पर केन्द्र सरकार पज जमकर हमला बोल दिया है।

 

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना है कि वह तब तक आंदोलन करेंगे जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाएंगी और सरकार जितनी देर करेगी आंदोलन उतना ही तेज होता जाएगा।

कांग्रेस सभी राज्यों में 15 जनवरी को ‘किसान अधिकार दिवस’ मनाएगी और राजभवनों का घेराव करेंगे। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि ‘अब देश के किसान काले कानून खत्म करवाने के लिए करो या मरो की राह पर चल पड़े हैं।’

 

किसानों आंदालोन को लेकर सर्वोच्च अदालत ने दिया यह सुझाव

किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि कोरोना महामारी के खतर को देखते हुए केंद्र से पूछा कि किसान आंदोलन में कोविड नियमों का ध्यान रखने की जरूरत है। मुख्य न्याया​धीश एस ए बोबडे ने कहा कि ‘हमें नहीं पता कि किसान कोरोना से सुरक्षित हैं या नहीं? अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो तबलीगी जमात की तरह कोरोना का बड़ा विस्फोट होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अगर समय रहते किसाना आंदोलन में कोविड—19 के नियमों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह देश के लिए नई मुशिबत खडी हो सकती है।

केंद्र की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वहां नियमों का पालन नहीं हो रहा है और कोरेाना का खतरा होने का डर बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी निजामुद्दीन मरकज में जमातियों के जुटने की CBI जांच की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही याचिकाकर्ता का कहना था कि मोहम्मद साद कोअभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

यह याचिका जम्मू की रहने वाली वकील सुप्रिया पंडिता ने दायर कहा कि कोरोना के समय बड़े पैमाने पर लोगों के एकत्र होने कि अनुमति कैसे दी गई, जबकि उस समय कोरोना महामारी का खतरा मंडरा रहा था।

किसानों का आंदोलन अभी खत्म होता हुआ नजर नहीं आ रहा है और आने वाले दिनों में अगर किसानों और सरकार के मध्य समझौता नहीं हुआ तो आंदोलन लंबा चल सकता है। कोरोना की खतरे को देखते हुए सरकार ने भी किसानों से अपील की वह अपने बच्चों को घर भेजे व ज्यादा उम्र के लोग बॉर्डर पर नहीं रहे। कल किसानों और सरकार के बीच वार्ता होगी अगर उसमें कोई नतीजा नहीं निकलता है तो किसान इस आंदोलन देशव्यापी करने का काम करेंगे।

किसानों की मांगों पर जल्द लग सकती है मुहर, जानें पूरी खबर

3 नये कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के साथ लगातार वार्ता कर रही केन्द्र सरकार अब उनकी मांगों पर मुहर लगाती हुई नजर आ रही है। किसान संगठनों की 4 मांगों में से सरकार ने उनके एजेंडे की दो मांगें मान लीं। इसमें पराली जलाने को लेकर किसानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और विद्युत संशोधन अधिनियम की मांग मान ली है। हालांकि तीनों कानून वापस लेने और एमएसपी पर बात अभी तक कोई सहमती नहीं बन पायी है और चार जनवरी को होने वाली बैठक में इन मांगों पर भी सहमती बनने के आसार नजर आ रहे हैं।

पीछले एक महीन से ज्यादा समय से किसान दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन कर रहे है और इसके कारण सत्तादल यानी बीजेपी के कई सहयोगी राजनीतिक दल भी उसका साथ छोड़कर किसान आंदोलन में शामिल है। देश के सभी राज्यों से किसान दिल्ली की सीमा पर पहुंच रहे है और इस आंदोलन को तेज करने का प्रयास कर रहे है।

विज्ञान भवन में हुई वार्ता में शामिल 41 किसान संगठनों को एमएसपी खरीद प्रक्रिया के बेहतर अनुपालन के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव दिया। इस बातचीत के दौरान किसान तीनों कानून वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। सरकार ने कड़कड़ाती ठंड के कारण किसान संगठनों से आग्रह किया कि वह बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों को आंदोलन स्थल पर नहीं रखे उन्हें घर भेज दें।

किसानों संगठनों का आंदोलन अब रंग लाता हुआ नजर आ रहा है और हो सकता है आने वाले दिनों ​में किसान संगठनों की सभी मांगों पर मुहर लग जाये। किसान संगठनों ने कहा कि विपक्ष कमजोर होने के कारण किसनों को सड़क पर उतरना पड़ा है। अब यह देखना होगा की अगली वार्ता में क्या हल निकलता है।

वार्ता से पहले किसानों ने साफ कर दिया अपना रूख! जानें पूरी खबर

किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए केन्द्र सरकार ने किसानों से अब तक 6 बार बातचीत करने का प्रयास किया लेकिन इससे कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। केन्द्र सरकार द्वारा किसानों से बातचीत करने के लिए 7वें दौर की वार्ता के लिए बुलाया है लेकिन इस वार्ता से पहले किसानों ने अपना रूख साफ कर दिया है िकवह आंदोलन तभी खत्म करेंगे जब तीनों बिलों को खत्म करने के साथ एमसीपी को कानूनी अधिकार बनाया जाएगा। इस वार्ता से पहले ही लगने लगा है कि सरकार किसी भी हद तक अपने रूख में नरमी नहीं बरतेगी वह इस बिल को लेकर साफ कह चुकी है कि यह बिल किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है जो आने वाले भविष्य में उनको कर्ज जैसी परेशानी से छूटकारा दिलाएगा।

7वें दौर की वार्ता के लिए किसान आज 2 बजे विज्ञान भवन दिल्ली जाएंगे और वहां सरकार के मंत्रियों के साथ वार्ता करेंगे। किसानों के इस आंदोलन में कई सामाजीक संगठनों के साथ पूरा विपक्ष उनका समर्थन कर रहा है लेकिन केन्द्र सरकार को यह लगता है कि यह आंदोलन एक राजनीतिक और विदेशी ताकतों के इशारों पर चल रहा है। इस आंदोलन में जियो कंपनी को लेकर कई प्रकार के भ्रामक प्रचार भी किया जा रहा है जिसके चलते जियो कंपनी के टॉवरों पर बिजली की सप्लाई बंद कर दी गयी है।


किसान आंदोलन को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है कि भारत किसानों पर निर्भर है और वहां पर किसानों की हालात इतनी खराब है कि किसान को आत्महत्या तक करनी पड़ती है। अब यह देखना होगा कि आज की वार्ता के बाद क्या परिणाम निकलता है अगर इस वार्ता के बाद किसान आंदोलन खत्म नहीं करते हैं तो वे इस आंदोलन को और तेज करने का प्रयास करेंगे जिसके चलते केन्द्र सरका की परेशानी बड़ सकती है।

कल किसानों से वार्ता करेगी केन्द्र सरकार, जानें किसान आंदोलन का हाल

जब से संसद में तीनों कृषि कानून को पास किया गया है तब से इन बिलों का विरोध किया जा रहा है। पिछले एक महीने से तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर देशभर के किसानों का जमावड़ा जमा हुआ है। इस आंदोलन के दौरान सरकार और किसानों की बीच कई बार वार्ता हुई है लेकिन इसके अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।

खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि सरकार ने किसान संगठनों को 30 दिसंबर को दोपहर दो बजे दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में बातचीत करने के लिए बुलाया है। सरकार द्वारा किसान 40 किसान संगठनों के नेताओं को पत्र लिखकर कहा है कि है, ”अनुरोध है कि 30 दिसंबर को दोपहर 2 बजे विज्ञान भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री स्तरीय समिति के साथ समाधान हेतु इस बैठक में भाग लेने का कष्ट करें।”

किसान संगठनों का कहना था कि उनकी चार मांगे है जिनमें इसमें सबसे पहला मुद्दा कृषि कानूनों को रद्द करने का रखा गया तो दूसरा एमएसपी को कानून बनाना है। पिछले एक महीने से किसानों ने अपने आंदोलन को तेज करने की रूपरेखा तैयार कर रखी है जिसके कारण हर दिन यह आंदोलन व्यापक होता जा रहा है।

सरकार बार—बार किसानों को समझाने का प्रयास कर रही है कि इस बिल से किसानों का भला होगा लेकिन फिर भी किसान विपक्ष के बहकावे में आकर आंदोलन कर रहे हैं। जबकि किसानों की मांग है कि सरकार इन बिलों को खत्म करके एमएसपी को कानूनी अधिकार बनाये। किसानों के इस आंदोलन को देश भर के राजनीतिक दलों के साथ कई संगठनों का सहयोग मिल रहा है जिसके चलते किसानों का हौसला मजबूत है। किसानों को बार्डर पर सभी प्रकार की परेशानियों के साथ उन्हें कुछ उम्मीद भी उन लोगों से बनी है जो इस आंदोलन को समर्थन करने के​ लिए उनका हौसला बड़ा रहे है।

ब्रिटेन से भारत पहुंचा नया कोरोना वायरस, जानें इसका प्रभाव

भारत में अभी तक कोरोना वायरस का टीका लगना भी शुरू नहीं हुआ और इससे पहले कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन ब्रिटेन से भारत आ पहुंचा है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि हाल ही में ब्रिटेन से लौटे कुछ लोगों में इसके लक्षण पाये गये है और अन्य लोगों की जानकारी लेकर उनका पता लगाया जा रहा है। भारत सरकार ने इस नये लक्षण वाली खबर के बाद से ही ब्रिटेन से आनी वाली फ्लाइट्स पर रोक लगा ​दी है।

ब्रिटेन में अब तक कोरोना वायरस के ज्यादा खतरनाक मरीज मिलने के बाद से ही भारत सरकार ने 21 दिसंबर को ब्रिटेन से आने वाली फ्लाइट्स पर रोक लगा दी जो 31 दिसंबर तक रहेगी। जो लोग इससे पहले फ्लाइट्स से भारत पहुंचे उनकी एयरपोर्ट पर जांच की जा रही है। ब्रिटेन में इस नये वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने ज्यादा डरने की बात कही है और इसकी वैक्सीन बनाने पर काम शुरू कर दिया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोनावायरस का जो नया रूप ब्रिटेन में मिला है वह पहले से लगभग 60 प्रतिया ज्यादा तेजी से फैल सकता है। फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका में भी वायरस में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। हालाकि भारत में कोरोना मरीजों का आंकड़ दिनों दिन कम होता जा रहा है जो अच्छी खबर है। कोरोना का नया रूप बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित होने की बात भी कही जा रही है।

देश में सोमवार केवल 16 हजार 72 नये मरीज मिले है जो जून के आकड़ों के मुताबिक बहुत कम है। अगर बात करें 24 घंटे की तो लगभग 25 हजार मरीज ठीक होने के साथ 250 मरीजों की मौत हुई। अब तक कुल 1 करोड़ कोरोना संक्रमित है इनमें से 98.06 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं और 1.48 लाख मरीजों की मौत हो गयी है।

भारत में नये साल की शुरूआत से ही कोरोना का टीका लगाने की प्रकिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है जो अच्छी खबर है। भारत में तैयार ​की गयी स्वदेशी वैक्सीन सस्ती होने के साथ असरदार भी साबित हो सकती है क्योंकि इसके परिक्षण में अभी तक किसी प्रकार के साईड इफेक्ट देखने को ​नहीं मिले है।

गहलोत—पायलट की गुटबाजी को खत्म करने के लिए माकन ने तैयार किया ये प्लान

राजस्थान में सीएम गहलोत और पायलट के बीच चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने एक प्लान तैयार किया है, क्योंकि इन दोनों की गुटबाजी के कारण दिल्ली आलाकमान की चिंता बढ़ी हुई है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों सचिन पायलट को महासचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है या उनके साथी विधायकों को मंत्रीमंडल में बड़ी जिम्मेदारी भी दीये जाने की खबरे आ रही है।

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने राजस्थान के दौरे के मंथन से ऐसा मंत्र या उपाय निकाला है जो अशोक गहलोत और सचिन पायलट कैंप के बीच सामंजस्य बैठाने में सफल हो सकता है। माकन ने अपने दौरे के दौरान कहा था कि राजस्थान में अब कोई गुटबाजी नहीं है।

पीसीसी की नई टीम राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्रिमंडल विस्तार होने के बाद पता चलेगा कि मकान का प्लान कितना असरदार साबित होता है। सचिन पायलट ने पार्टी आलाकमान को दिल्ली में संगठन की राजनीति करने को लेकर अपनी राय रखी है। वहीं दूसरी तरफ राजनीतिज्ञों के अनुसार अगर राहुल गांधी पार्टी की कमान संभालते हैं तो एआईसीसी में सचिन पायलट को महासचिव की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

वहीं दूसरी तरफ खबर यह भी है कि सचिन पायलट का पूरा ध्यान अब अपने कार्यकर्ताओं, नेताओं और अपनी टीम को राजस्थान में सत्ता और संगठन में उचित स्थान दिलाने पर केन्द्रीत है। पायलट ने अभी तक किसी प्रकार का बयान नहीं दिया है जिससे लगे कि वह पार्टी से नाराज है या उनको पार्टी पर विश्वास नहीं है। पायलट पीसीसी अध्यक्ष रहते हुए पार्टी को मजबूत करने वाले पायलट कैंप के नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में जगह दिलाने की हक में है।

राजस्थान में कांग्रेस के इन दोनों गुटों के बीच सुलह की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अजय माकन को सौंपी गई थी जिसमें वह कामयाब होते दिख रहे हैं। आने वाले दिनों मंत्रीमंडल में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है और पायलट गुट के नेताओं को अहम विभाग दिये जा सकते हैं।