” चंद्र शेखर आज़ाद ” ( भीम आर्मी ) दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में शामिल – जानें ख़ास रिपोर्ट , जमीन से आसमां तक का सफ़र

Chandra Shekhar Azad of Bhim Army was included in the list of 100 influential people by

Time magazine –

 

भीम आर्मी के चंद्र शेखर आज़ाद को टाइम मैगजीन ने 100 प्रभावशाली लोगों की सूचीं में शामिल किया –

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्र शेखर आज़ाद उर्फ़ ” रावण ” को अंतरराष्टीय मैगजीन ” टाइम ” ने 100 दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया हैं यह चंद्र शेखर आज़ाद और पूरी वंचित जमात के लियें यह गर्व की बात हैं चंद शेखर जो अभी 34 वर्ष के है के संघर्ष के के दम आज वह दुनिया 100 प्रभावशाली लोगों की सूचि में शामिल हैं |

चंद्र शेखर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं स्थानीय गाँव में जहाँ दलित समाज के युवाओं के साथ राजपुत और सवर्ण समाज के दबंगों द्वारा जो अत्याचार , मारपीट आदी घटनाओं को रोकने के लियें भीम आर्मी ” भारत एकता मिशन ” के नाम से यह संगठन सामने आया था और साहरनपुर जातीय हिंसा में चंद्र शेखर आज़ाद का नाम देश के सामने आया था उसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था उसके बाद चंद्रशेखर के अन्य साथी कमल वालिया सहित अन्य भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने संगठन के कमान संभाली थी  |

 

 

 

 

चंद्र शेखर आज़ाद अपना आदर्श बाबा साहब अम्बेडकर और उसके बाद  डॉ अम्बेडकर के सपनों को जमीन तक उतारने का काम करने वाले मान्यवर कांशी राम को मानते हैं चंद्र शेखर ने अपने  संगठन को राजनीति रूप देने के उदेश्य से राजनीति पार्टी ” आज़ाद समाज पार्टी ” भी मार्च 2020 में बनाई हैं अब भीम आर्मी व् आज़ाद समाज पार्टी दोनों के संस्थापक चंद्र शेखर आज़ाद हैं दलित समाज में जहाँ भी कहीं जातीय हिंसा होती हैं भीम आर्मी संगठन  पीड़ित के पक्ष में अपनी आजाज उठाते हैं और प्रशासन से कार्यवाही की मांग करते हैं |

टाइम मैगजीन ने अपने आर्टिकल में लिखा हैं चंद्र शेखर आज़ाद व् उनका संगठन भीम आर्मी जहाँ भी जातीय हिंसा होती हैं दलितों के पक्ष में अपनी आवाज़ पीड़ित के पक्ष में उठाते हैं और यह युवाओं का संगठन हैं तो युवा अपनी मोटर साइकिलो के खाफिलें के साथ आंदोलन करते हैं |

आज जिस प्रकार चंद्र शेखर काम कर रहें हैं लगता है दलित समाज को एक लम्बे समय बाद अपना  लीडर मील रहा हैं नेता नहीं |

दिग्गज जाट नेता हनुमान बेनीवाल ने निकाली किसानों के समर्थन में ट्रैक्टर रैली

किसाना आंदोलन मजबूत बनाने के लिए राजस्थान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टीसे सांसद और दिग्गज जाट नेता हनुमान बेनीवाल राज्य के प्रत्येक जिले में किसान आंदोलन के समर्थन में ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। बेनीवाल ने किसानों के समर्थन के लिए एनडीए से अलग होकर बता दिया था कि वह किसानों के हक की बात पर किसानों के साथ खड़े होकर उनका साथ देंगे। बेनीवाल ने कहा कि रैली का आयोजन शुक्रवार को सभी जिला मुख्यालयों शांतिपूर्ण तरीके से किया जायेगा।

बेनीवाल ने कहा इस रैली के माध्यम से केन्द्र सरकार को संदेश दिया जाएगा कि किसानों के मुद्दे को दबाया नहीं जा सकता और राजस्थान के किसान एक है। राजधानी जयपुर में रैली मानसरोवर मेट्रो स्टेशन से शुरू होगी और 14 नंबर बाईपास पर जाकर समाप्त होगी।

बेनीवाल ने कहा कि आंदोलन के समर्थन में उनकी पार्टी शाहजहांपुर बॉर्डर पर पड़ाव डालकर बैठी है और किसानों के पक्ष में आवाज को मजबूत कर रहे है। बेनीवाल ने संसद सत्र के दौरान भी सांसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण और वित्त मंत्री के बजट भाषण पर भी अपना विरोध् दर्ज करवाते हुए कृषि बिलों को वापिस लेने की अपील की थी। इसके बाद वह अब ट्रैक्टर रैली के माध्यम से किसानों का हौसला बढ़ा रहे हैं। इस रैली जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है और इस बात से पता चलता है कि हनुमान बेनीवाल की किसानों के बीच अच्छी पकड़ है।

वही दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों को कहा कि हर गांव से एक ट्रैक्टर पर 15 आदमी 10 दिन का समय लेकर आएं और इस आंदोलन में शामिल हो और इसके बाद वह लौटकर अपनी खेती करे इससे गांव में बैठे किसानों तक हमारी बात पहुचंगी और ज्यादा से ज्यादा किसान इसमें भाग लेंगे।

दिन-रात कांटों व पत्थरों में खेती करने वाले किसानों को कांटों से डराने चला फेकू मोदी

पिछले 2 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है और किसान सगंठन 3 नये कृषि बिलों को समाप्त करने की मांग को लेकर दिल्ली की सिमाओं पर आंदोलन कर रहे है। 2 महीने के अन्तराल में किसानों और सरकार के बीच कई दौरे की वार्ता हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है और इस दौरान किसानों ने सरकार को जगाने के लिए कई प्रकार के प्रयास किये लेकिन मोदी सरकार किसानों की बात को अनसुना कर रही है।

26 जनवरी के दिन ट्रेक्टर परेड़ के दौरान लाल किले पर जो हिंसा हुई उसको लेकर किसानों पर कई तरह के आरोप लगाये जा रहे है और किसान संगठन इस हिंसा पर खेद प्रकट करने के साथ हिंसक प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की और एक बार फिर दिल्ली कूच करने की तैयारी शुरू कर दी है। कृषि कानून के खिलाफ किसानों ने अपने आंदोलन को तेज करने के साथ 6 फरवरी को चक्का जाम का ऐलान कर दिया है। ऐसे में दिल्ली के बॉर्डरों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, गाजीपुर बॉर्डर पर तार, नुकीली कील और बैरिकेडिंग तक लगा दी गई है, सुरक्षा के मध्यनजर ट्रेनों को भी डाइवर्ट किया जा रहा है।


किसानों ने पहले ही चेतावनी दी है कि वह तीनों बिलों खत्म करने के बाद ही अपना आंदोलन खत्म करेंगे। दिल्ली की सीमाओं पर जो कंटीले तारों व कीलों आदि वाली जबर्दस्त बैरिकेडिंग की गई है जिसकों लेकर किसानों ने कहा कि वह दिन-रात खेतों में कांटों व पत्थरों के बीच रहकर खेती करता है तो उसे इन तारों के जाल से नहीं डराये तो सरकार के लिए अच्छा होगा।


सरकार के सख्त रूख को देखते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि हमने सरकार को अक्टूबर तक का समय दिया है और इसके बाद भी सरकार हमारे मांगें नहीं मानती है तो 40 लाख ट्रैक्टरों के साथ देशव्यापा ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। टिकैत ने कहा कि कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं की बात भी कही है। सरकार उन किसानों को डरा रही है जो गर्मी,सर्दी और बारिश के मौसम में तपकर बढ़ा हुआ है और उसे कभी पानी की धार से तो कभी पुलिस बल से तो कभी कांटों का डर दिखा रही है जो किसी हास्यपद से कम नहीं है।

जुमले वाली सरकार का फेकू बजट 2021: जानिए पूरा बजट

कोरोना काल में मोदी सरकार का बजट लोगों को कितना पसंद आयेगा इसके बार में तो अभी लोगों की प्रतिक्रिया आना बाकी है लेकिन कोरोना काल के नाम पर जुमले वाली सरकार का यह फेकू बजट किसानों, सेना और आम जनता के लिए क्या लेकर आया है इसके बार में नीचे विस्तार से जान सकते हैं। पिछले साल कोरोना काल की आड में फेकू सरकार ने 3 नये कृषि कानून बिल पास कराके उन्हें लागू कर दिया लेकिन पिछले 2 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है और फेकू सरकार किसानों की मांग नहीं मान रही है और उनको सड़कों पर रात गुजराने पर मजबूर कर रही है।

75 साल से अधिक उम्र वाले पेंशनधारकों को इनकम टैक्‍स नहीं भरना होगा
ट्राइब्यूनल्स के कामकाज़ को सुधारा जाएगा
जनगणना डिजिटल होगी
लेह में सेंट्रल युनिवर्सिटी बनाई जाएगी
100 नए सैनिक स्कूल खोले जाएंगे
बैंकों में 20,000 करोड़ की पूंजी डाली जाएगी

कश्मीर क्षेत्र में गैस पाइपलाइन का विस्तार किया जाएगा
3 नए रुट्स पर रेलवे नए फ्रंट कॉरोडोर बनेंगे
सरकारी बस सेवा पर 18000 करोड़ का खर्च होगा
मार्च 2022 तक 8500 किमी हाईवे बनाए जाएंगे
3 नए रुट्स पर रेलवे नए फ्रंट कॉरोडोर बनेंगे
अर्बन जल जीवन मिशन लॉन्च किया जाएगा
कोरोना वैक्सीन के लिए 35,000 करोड़ आवंटित

स्वास्थ्य योजना पर 64180 करोड़ रुपये खर्च होंगे
17 नए अस्तपताल शुरु किए जाएंगे
सभी राज्यों का स्वास्थय डाटा बेस बनाया जाएगा
सभी राज्यों का इंटीग्रेटिड डाटा बेस तैयार होगा
किसानों की आय दोगुनी होगी
भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
आत्मनिर्भर भारत के लिए नई योजना लॉन्च करेंगे

हिंसा के बाद दो धड़ों में बटा किसान आंदोलन, एक गुट ने जताई शर्मिंदगी तो दूसरे धड़े ने खत्म किया आंदोलन

26 जनवरी को गंणतत्र दिवस के मौके पर जिस तहर की हिंसा देखने को मिली उसके बाद किसान आंदोलनकारी दो भागों में बटते हुए नजर आ रहे है। हिंसा के बाद दो बड़े किसान संगठनों में आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया तो दूसरे धड़े ने हिंसा पर खेद प्रकट करते हुए शर्मिदंगी जताते हुए 30 जनवरी को उपवास रखने का फैसला किया है।

इस आंदोलन को लेकर अब किसान संगठन एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं और हिसां फैलाने वालों को बाहरी बता रहे हैं। हिंसा के बाद से किसान आंदोलन से जुड़े बड़े नेताओं के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गयी है और उनको कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। बताया जा रहा है कि हिंसा के बाद किसान संगठनों को लगने लगा है कि उनको कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। हिंसा के बाद केन्द्र सरकार ने कहा कि वह अभी भी किसानों से वार्ता करने के लिए तैयार है।

दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं पर भी एफआईआर दर्ज की है इनमें राकेश टिकैत,जोगिंदर सिंह, बूटा सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल और राजेंद्र सिंह का नाम भी शामिल है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि ट्रैक्टर मार्च के दौरान इन नेताओं की ओर से नियमों का उल्लंघन किया गया था। सभी किसान संगठनों से जुड़े हैं और सरकार संग बातचीत हो या ट्रैक्टर परेड का रुट तय करना सभी में इनकी अहम भूमिका रही थी।

किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन जो हुआ वो शर्मनाक है। मैं उस समय गाजीपुर बॉर्डर के पास था फिर भी मैं शर्मिंदा हूं और 30 जनवरी को उपवास रखकर हम प्रायश्चित करेंगे।

राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन और भारतीय किसान यूनियन भानु ने हिंसा के बाद ऐलान कर दिया कि वे आंदोलन से अलग हो रहे हैं। हिंसा के बाद यूपी पुलिस भी एक्शन में दिखी और दिल्ली सहारनपुर हाइवे पर के बागपत जिले के बड़ौत में धरने पर बैठे किसानों को आधी रात को हटा दिया।

परेड खत्म होने के बाद राजपथ पर किसान निकाल सकेंगे ट्रैक्टर रैली

पिछले 2 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है और किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन किसान संगठन 3 नये कृषि कानूनों का खत्म करने की मांग को लेकर अड़े है और हर दिन नये नये तरीके से विरोध प्रदर्शन कर सरकार को अपनी मांगे पूरी करवाने के लिए मजबूर कर रहे है। हाल ही में किसानों को दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर शर्तों के साथ ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति प्रदान कर दी है। लेकिन किसान संगठन इस अनुमति को लेकर भी अपनी नाराजगी जता चुके है किसान संगठनों को कहना है कि ट्रैक्टर रैली की टाइमिंग और जो रूट दिया है वह सही नहीं है।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा को लेकर रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था लेकिन अब कुछ शर्तों के साथ मंजूरी प्रदान की है। ट्रैक्टर रैली निकालने का समय 12 बजे का दिया है जिसका कोई तुक नहीं है और इसके साथ ही किसान संगठनों ने रूट को लेकर भी सवाल उठाया है। किसानों ने बताया है कि रैली को जिन इलाकों से इजाजत दी गई है वह ज्यादातर हरियाणा का भाग है।किसानों की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी दी जाए और तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए और इसी बात को लेकर किसानों का प्रदर्शन 61 दिनों से जारी है।

गणतंत्र की परेड में हिंसा फैलाने की पाकिस्तान की साजिश का भी खुलासा हुआ है और बताया जा रहा है कि हिंसा फैलाने के लिए पड़ोसी देश इंटरनेट मीडिया का सहारा ले रहा है। इसके उन्होंने 300 से ज्यादा ट्विटर अकाउंट बनाए हैं, जिसकी जानकारी इंटेलिजेंस को मिल गई है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के बेहद कड़े बंदोबस्त किए जा गये हैं।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में जानकारी दी गयी कि  गाजीपुर बार्डर पर 46 किलोमीटर सिंघु बार्डर पर 62 किलोमीटर व टीकरी बार्डर पर 63 किलोमीटर के दायरे में परेड निकालने की अनुमति प्रदान की गयी है और इसके साथ तीनों बार्डरों से परेड का 100 किलोमीटर से ज्यादा का रूट दिल्ली में होगा।

भारत में मिलेगा दुनिया का सबसे सस्ता कोरोना टीका

कोरोना की मार झेल रही पूरी दुनिया इसके इलाज के पानी की तरह पैसे बर्बाद कर रही है लेकिन इसके बाद भी उसे कारगर इलाज नहीं मिल पा रहा है। भारत में कोरोना के दो टीके बनकर तैयार है और इस सप्ताह में टीकाकरण का अभियान शुरू हो जाएगा और यह टीका दुनिया का सबसे सस्ता टीका होने के साथ बहुत कारगर टीका है जो कोरोना के नये वायरस को भी खत्म करने में कारगर है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि चीन ने दुनिया भर में कोरोना का टीका बहुत अधिक कीमत में बेच रहा है और इसके विपरित भारत में बना टीका बहुत ही सस्ता उपलब्ध होगा।

इस बीच सरकार ने बताया है कि उसने सीरम इंस्टीट्यूट से 1 करोड़ 10 लाख डोज और भारत बायोटेक से 55 लाख डोज खरीदी है। सरकार ने यह भी बताया कि दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले भारत सरकार ने कोरोना वैक्सीन की खरीदारी बेहद कम कीमत खरीदी है।स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से 110 लाख डोज 200 रुपए प्रति डोज खरीदने का करार किया है। जबकि भारत बायोटेक से 55 लाख डोज खरीदने का समझौता किया गया है। भारत बायोटेक से कोवैक्सीन की 38 लाख डोज 296 रुपए रुपए प्रति डोज के हिसाब से खरीदी है जबकि कंपनी ने 16 लाख डोज मुफ्त में देने का फैसला किया है।

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जानकारों के अनुसार फाइजर की वैक्सीन की कीमत प्रति डोज भारतीय मुद्रा के हिसाब से 1400 रुपये ज्यादा है यानी एक व्यक्ति को दो डोज टैक्स छोड़कर 2800 रुपए की होगी। कोरोना वॉरियर्स को दिए जाने वाले पहले तीन करोड़ डोज की कीमत केंद्र सरकार देगी। राज्यों को को कोई पैसा नहीं खर्च करना होगा। सरकार ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 14 जनवरी तक मिल जाएगी।

किसान आंदोलन को लेकर पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार

45 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है और किसान अपनी मांगों लेकर लगातार सरकार के साथ वार्ता कर रहे है लेकिन इसके बाद भी अभी तक कोई उचित समाधान नहीं निकल पाया है। इस आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार ने कई बार किसान संगठनों से आग्रह किया है वह सरकार पर विश्वास करें और आंदोलन खत्म करे लेकिन किसान संगठन ​कृषि बिलों को समाप्त करने की मांग को लेकर अड़े हुए है।

इस बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर आज सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से पूछा है कि क्या वह कानून को स्थगित करती है या फिर वह इस पर रोक लगा दे। भीषण ठंड को देखते हुए अदालत ने कहा कि किसानों की चिंता करनी चाहिए और उनकी समस्या का समाधान करने के लिए एक कमिटी बनानी चाहिए। इसके साथ कोर्ट ने किसान आंदोलन पर सरकार के विवाद निपटाने के लिए जो तरीका अपनाया उसे लेकर भी सख्त टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने किसान कानून समाप्त करवाना चाहते हैं जबकि सरकार मुद्दों पर बात करना चाहती है लेकिन हम एक विशेषज्ञ लोगों की एक कमिटी बनाकर कानूनों पर विचान करेंगे। किसान कमिटी के पास जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि हमने केंद्र सरकार को कहा था कि क्यों नहीं इस कानून को कुछ दिन के लिए स्थगित कर दें और उचित समाधान होने पर इस पर फैसला करें। कोर्ट किसान आंदोलन को हैंडल करने के तरीके से बहुत ज्यादा नाराज है।

मुख्य न्‍यायाधीश एसए बोबडे वाली बेंच किसाना आंदोलन से जुडी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। केंद्र और किसान संगठनों के बीच अगली बैठक 15 जनवरी को होनी है, ऐसे में SC की टिप्पणी बहुत अहम साबित हो सकती है। आज नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों का आंदोलन का 47वां दिन है केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत फेल होने के बाद, किसान संगठनों के नेता आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाने में लगे हैं। कोर्ट की इस बात पर विपक्ष पर केन्द्र सरकार पज जमकर हमला बोल दिया है।

 

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना है कि वह तब तक आंदोलन करेंगे जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाएंगी और सरकार जितनी देर करेगी आंदोलन उतना ही तेज होता जाएगा।

कांग्रेस सभी राज्यों में 15 जनवरी को ‘किसान अधिकार दिवस’ मनाएगी और राजभवनों का घेराव करेंगे। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि ‘अब देश के किसान काले कानून खत्म करवाने के लिए करो या मरो की राह पर चल पड़े हैं।’

 

कई राज्यों में बरपा बर्ड फ्लू का कहर: जानें राजस्थान का हाल

कोरोना वायरस के टीके की खबर से देश को थोड़ी राहत मिली ही थी कि अब कई राज्यों में बर्ड फ्लू ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक सप्ताल में कई राज्यों में भारी तादाता में पक्षियों की तेजी से मौत हो रही है। राजस्थान में कई जिलों में कौवों की बड़ी संख्या में मौते होने की खबर से सरकारी और प्रशासन की चिंता बढ़ गयी है। अगर बात करें हरियाणा के पंचकुला की तो यहां 1 लाख से अधिक पोल्ट्री पक्षियों की मौत की खबरें सामने आ रही है। इस खबर के बाद प्रशासन ने व्यापक फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

राजस्थान में 100 से ज्यादा पक्षियों की मौत
राजस्थान में भी कई जिलों में पक्षियों की मौत की खबरे आना शुरू हो गया है राज्य के विभिन्न जिलों में 150 से ज्यादा पक्षियों की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 425 से अधिक कौवों, बगुलों और अन्य पक्षियों की मौत हुई है इसके बाद पक्षियों के नमूनों को जांच के लिये भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भेजा गया है।

केरल में 40,000 पक्षियों को मारना पड़ा है।
केरल के कुछ जिलों में बर्ड फ्लू फैलने की जानकारी सामने आई है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के एक किलोमीटर के दायरे में बत्तख, मुर्गियों और अन्य घरेलू पक्षियों को मारने का आदेश जारी किया है। अधिकारियों ने कहा कि वायरस को रोकने के लिए करीब 40,000 पक्षियों को मारना पड़ेगा।

हिमाचल में 1500 से ज्यादा प्रवासी पक्षियों की मौत
हिमाचल प्रदेश में पोंग बांध झील अभयारण्य में अब तक 1500 से ज्यादा प्रवासी पक्षी मृत मिले हैं । अभी तक यहां बर्ड फ्लू की पुष्टि की बात नहीं कही जा रही है।


अगर बर्ड फ्लू के कारण इन पक्षियों की मौत हो रही है तो यह बहुत ज्यादा चिंता का विषय है जो कोरोना काल में प्रशासन के लिए नई परेशानी खड़ी कर सकता है। राजस्थान में पहले भी सांभर जिले में प्रवासी पक्षियों की बड़ी तादाद में मौत हुई थी और इसको लेकर काफी राजनीति भी देखने को मिली थी। लोगों को इस समय ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत है और अब कोरोना के साथ बर्ड फ्लू से भी अपना बचाव करना होगा।

भीम आर्मी : आज़ाद समाज पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बनें – अनिल धेनवाल , यूथ विंग संभालेगें – सुनील भिंडा

भीम आर्मी संगठन की राजनीति पार्टी – ” आज़ाद समाज पार्टी ” का राजस्थान में विस्तार 

सत्यपाल चौधरी  मुख्य प्रभारी , अशोक सिद्धार्थ प्रभारी व् इमरान खान प्रभारी ( आज़ाद समाज पार्टी )  ने राजस्थान में 

प्रदेशाध्यक्ष – अनिल धेनवाल , यूथ विंग प्रदेशाध्यक्ष सुनील भिंडा व् सह – प्रभारी रहीद अहमद मलिक को  पद ग्रहण करवाया 

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प्रदीप बैरवा

जयपुर | भीम आर्मी आजाद  समाज पार्टी का आज राजस्थान में विस्तार हुआ अनिल धेनवाल को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है इसके साथ ही राजस्थान प्रदेश में रईस अहमद मलिक को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है यूथ यूथ विंग में राजस्थान प्रदेश से सुनील डिंडा को यूथ  प्रदेश विंग का अध्यक्ष बनाया गया है गौरतलब है चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ रावण भीम आर्मी के माध्यम से दलित समाज में जो अत्याचार हो रहे हैं

रहीस मलिक सह प्रभारी नियुक्त . राजस्थान

शोषण हो रहा है उसके खिलाफ आवाज उठाते हैं और कुछ ही समय में भीम आर्मी संगठन में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और यह संगठन दलित समाज पर जो अत्याचार छुआछूत जैसी घटनाओं पर प्रशासन का ध्यान दिलाने के लिए संवैधानिक रूप से आंदोलन विरोध प्रदर्शन करते हैं  जिससे सरकार प्रशासन क्या ध्यान समाज के गरीब तबके वंचित दलित मुस्लिम पीड़ित की और जायें और उन्हें  शीघ्र न्याय मिल सके |

गौरतलब है कि राजस्थान में भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल उपाध्यक्ष जितेंद्र  हटवाल और उनकी पूरी टीम दलितों की पैरवी करते हुए उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए राजस्थान में दिख जाते हैं 

सुनील भिंडा – यूथ प्रदेशाध्यक्ष का पद ग्रहण किया

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद सहारनपुर कांड के बाद सुर्खियों में आए थे और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था जिसके बाद उन्होंने भीम आर्मी संगठन को एक संवैधानिक ढांचा देने के लिए राजनीतिक पार्टी का गठन किया जिसका नाम ” आजाद समाज पार्टी ( ASP ) “ रखा गया यह समय की जरूरत थी थी कि भीम आर्मी जैसे संगठन को एक संवैधानिक राजनीतिक संगठन के बैनर के नीचे लाया जायें क्योकि  जिस तरीके से भीम आर्मी संगठन काम करता है उससे प्रशासन और भीम आर्मी के लोगों  में टकराव  देखने को मिलता हैं अब राजनीति पार्टी के गठन के बाद भीम आर्मी या यूं कहें आज़ाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं पर राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं अनुसार ही प्रशासन बर्ताव करेगा |