शिक्षा व् मानवीय मूल्यों की बड़ी बाते करने वाले प्राइवेट स्कूल – अब इस महामारी काल में भी शिक्षा का व्यवसायीकरण कर रहें है

Private schools that talk a lot about education and human values ​​-now even in this

pandemic period, education is being commercialized –

जयपुर |  शिक्षा व मानवता का पाठ पढ़ाने वाले स्कूल आज कल इस  वैश्विक महामारी कोरोना में भी पेरेंट्स को छुट्टियों की फीस जमा कराने के लियें दबाव् बना रहे हैं |

इस मुश्किल घड़ी में जहां लॉक डाउन के चलते पिछले 40 दिन से अधिक समय से व्यवसाय बंद हैं घर चलाने का भी खर्च अब मध्यमवर्गीय परिवार के पास नहीं बचा हैं अब स्कूलों के मेल ,कॉल आदि द्वारा पेरेंट्स पर दबाव बनाया जा रहा हैं कि आप अपने बच्चों की फ़ीस जमा किरायें|

sa aabhar

अब मध्यम वर्गीय परिवार मानसिक रूप से तनाव में है एक और तो काम धंधे ठप हैं उसके ऊपर प्रधानमंत्री मोदी व राज्य सरकारों ने आदेश जारी कर के कह दिया हैं कि लॉक डाउन के चलते आप अपने यहां काम करने वाले मजदूरों को नोकरी से नहीं निकाल सकते और उन्हें लॉक डाउन के चलते सैलेरी भी देना अनिवार्य हैं |

अब मध्यम वर्गीय परिवार अपना घर चलायें या जरूरतमंद लोगों की मदद करें या बंद पड़े व्यापार का किराया दे जबकी धंधा चोपट हो चुका हैं और उस पर अलग से स्कूल प्रशासन तीन महीने के फीस मांग रहा हैं जिसको लेकर मध्यम वर्गीय परिवार अतिरिक्त तनाव में जीवन गुजार रहे हैं |

स्कूल प्रशासन ने कहा – निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि वह छुटियों में भी ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं जबकि एक सर्व में कहा गया है कि भारत मे अभी छोटे बच्चे ऑनलाइन स्टडी को प्राथमिकता नहीं देते हैं |

अभिभावकों ने कहा – पेरेंट्स आर सी शर्मा ने कहा कि आज निजी स्कूलों ने शिक्षा का पूर्ण रूप से व्यवसायीकरण कर दिया है यह तो इंसानियत भी मार चुके  है इस आपदा के समय जब देश दुनिया मानवता को बचाने में लगी हैं जब सब मिलकर इस कोरोना महामारी से लड़ रहे है सरकार ने सभी से अपील की है कि वह किरायदारों से 3 माह का किराया ना ले और किसी गरीब को परेशान ना होने दे|

वही दूसरी और  आज यह शिक्षा का मंदिर इस आपदा के समय मे पेरेंट्स पर 3 माह की फीस जमा कराने का दवाब बना रहे हैं जबकि 30 बच्चों पर एक टीचर होता हैं इस के अनुसार भी मोटी फीस लेने वाले स्कूल अपने को ख़राब आर्थिक स्थिति में बता रहे हैं और फीस की अपील का विज्ञापन फुल पेज का देकर पेरेंट्स से फीस की मांग कर रहे हैं जो कि मानवीय मूल्यों के विपरीत हैं

कोरो इंडिया ने 1200 से अधिक परिवार के लियें मदद के हाथ बढ़ायें –

COVID -19 

Social workers associated with coro India extended their helping hand to more than 1200 families – dry ration of more than 10 lakh rupees and other essential goods

जयपुर | वैश्विक महामारी कोविड -19 { कोरोना } ने गरीब परिवारों को मौत से कम कष्ट नहीं दिया  है देश में एकाएक लगे लॉक डाउन ने या बोले कर्फ़्यू ने ग़रीब , दहाड़ी मजदुर ,प्रवासी मजदूरो को संभलने का मौका तक नहीं दिया | गौरतलब है की दहाड़ी मजदुर ,प्रवासी मजदुर और ग़रीब परिवार दहाड़ी के हिसाब से मजदूरी करते है जिसमे बे मुश्किल से उनका गुजरा चल पाता है और लॉक डाउन के बाद अब घर बैठना और घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है  घर में सुखा राशन ख़त्म हो चूका है  , आर्थिक व्यवस्था जो भी थी वह भी अब 30 दिन से अधिक समय बाद चरमा गई है  | इस संकटकाल में सामाजिक संगठन व् भामाशाह लोगो ने मोर्चा संभाला  जिससे गरीब व् जरूरत परिवार को थोडा सहारा मिला है |

 

कोरो इंडिया सामाजिक संगठन के प्रयासों से राजस्थान में अभी तक 7 जिलो ,17 ब्लोक ,70 गाँवों के 1158 परिवारों को 1 माह तक का सुखा राशन निशुल्क उपलब्ध कराया जा चूका है साथ ही कोरो इंडिया के जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मास्क . सोप ,सेनीटाइजर आदी जरुरी सामान भी उपलब्ध करा रहे है |   

कोरो इंडिया – राजस्थान प्रमुख ने कहा 

दीप चंद माली संस्था प्रमुख राजस्थान कोरो इंडिया  ने कहा की अभी तक राजस्थान में कोरो इंडिया  की और से  10 लाख 82 हजार से अधिक रुपयें का सुखा राशन ज़रूरत मंद परिवारों को हमारे  संभाग कोर्डिनेटरो के माध्यम से  – जयपुर ,जोधपुर ,अजमेर और उदयपुर  के जिलो , गाँवों में सहायता की जा रही है इस वैश्विक महामारी में देश वासियों से यही कहना चाहता हूँ आप सरकार के निर्देशों का पालन करे , फिजिकली डिस्टेंस बनायें रखे -कोरोना सक्रमण से  बचाओं ही इसका इलाज है सतर्क रहे ..जागरूक बने |

कोरो इंडिया के द्वारा – सुखा राशन वितरण

जयपुर संभाग  कोर्डिनेटर – सीमा कुमारी ने कहा 

जयपुर संभाग में हम 27 सामाजिक कार्यकर्ता है  इस इस मुश्किल समय में ज़रूरत मंद परिवारों को उनकी ज़रूरत के अनुसार मदद कर रहे है जिन परिवारो को सुखा राशन चाहियें उन्हें कोरो इंडिया की और से महीने भर तक का सुखा राशन दिया जा रहा है अभी तक जयपुर ,अलवर ,दोसा , टोंक में 627 परिवार तक सुखा राशन पहुँचाया गया है  कही पर बीमार लोगो को मेडिकल हेल्प प्रशासन के माध्यम की कराई जा रही है राजस्थान में कोरो टीम के जुड़े सभी कार्यकर्ता सरकार के साथ मिलकर भी जरूरतमंद तक सहायता पंहुचा रहे है |  हम कोशिश कर रहे है इस मुश्किल समय में जितना हो सके जरूरतमंरो की सहायता कर सके क्योकि यह हमारा समाज है और हमे बिना किसी भेद -भाव के इंसानियत व् मानवता के लियें आगे आना है और जरूरत मंदों की मदद करनी है यही हमारा उदेश्य है |

जोधपुर संभाग कोर्डिनेटरमें – ललिता पंवार ने कहा 

जोधपुर में गरीब परिवारों व् दहाड़ी मजदूरो की स्थिति इस लॉक डाउन में अधिक ख़राब हुई है जोधपुर संभाग में नो { 9 } बड़ी कच्ची बस्त्ती है जिनमे पाक विस्थापित बस्त्ती भी  है जिनमे लगभग 500 से अधिक परिवार रहते है कोरो इंडिया की और से अभी तक 270 परिवारों को सुखा राशन वितरण कर दिया गया है वही पाक विस्थापित बस्ती में अभी तक 55 अत्यंत गरीब परिवारों को सुखा राशन वितरण किया जा चूका है

जोधपुर में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुयें – राशन वितरण

इसके साथ ही मास्क , सेनीटाइजर आदी जरूरत का सामान दिया जा रहा है जोधपुर टीम द्वारा सरकार के साथ मिलकर भी जन सहयोग का काम किया जा रहा है  | यह मुश्किल समय है लेकिन यही वह समय है जब आप सच्च में ज़रूरतमंद की सहायता कर के इंसानियत की मिसाल पेश कर सकते है |

उदयपुर संभाग ने हरलाल बैरवा ने बताया की – 

उदयपुर संभाग में गरीब व् जरूरतमंद परिवारों के लियें विशेषकर सीता माता अभयारण के क्षेत्र के आदिवासी परिवार के लोगो को 262 से अधिक पेकेट सुखा राशन वितरण किया है   वही अजमेर संभाग की टीम  कोरो कोर्डिनेटर  नेहा सेन की  नेत्रत्व में  स्थानीय प्रशासन के माध्यम से प्रतिदिन 600 से अधिक लोगों को भोजन करवा रही है वही मेडिकल टीम की हेल्प कर रही है |

उदयपुर संभाग – सुखा राशन वितरण

टारगेट एकाउंट्स – मंदी में भी कमाएं मुनाफा

टारगेट एकाउंट्स के संस्थापक CA संजय जसवानी और स्वीटी उपाध्याय ने इस  मंदी के दौर में अपने प्रशिक्षुओं को लाखों का मुनाफा कराया। टारगेट एकाउंट्स एक ISO एवं NSE द्वारा पंजीकृत कंपनी है, जहाँ प्रशिक्षुओं को वित्तीय साक्षरता और शेयर बाजार एवं रियल एस्टेट का ज्ञान देते हैं।

संजय जसवानी एवं स्वीटी उपाधयाय, सह-संस्थापक, टारगेट एकाउंट्स

संजय जसवानी, जिनके पास शेयर बाजार में 10 वर्षों का अनुभव है, उनका कहना है कि आजकल के दौर में शेयर बाजार तथा वित्तीय
प्रक्रियाओं का ज्ञान होना बोहत आवश्यक हो गया है। संजय कहते हैं,शेयर बाजार आय के उन विकल्पों में से है, जो कि हर दौर और हर परिस्थिति से अछूते रहते हैं। शेयर बाजार के ज्ञान से लोग घर बैठके ही अपनी आय बढ़ा सकते हैं। कोविद-19 के इस कठिन समय में भी ये बाजार अपने ग्राहकों को निराश नहीं कर रहा है।

टारगेट एकाउंट्स के प्रशिक्षुओं का कहना है कि वो इस मंदी के दौर में ज्यादा आय  घर बैठे ही कमा पा रहे हैं। इसके अलावा इन प्रशिक्षुओं ने अपने लाभ और हानि विवरण भी टारगेट एकाउंट्स के इंस्टाग्राम हैंडल पे साँझा किये हुए हैं। टारगेट एकाउंट्स ने अपने आजतक के कार्यकाल में 1,800 से ज़्यादा लोगों को शेयर बाजार का प्रशिक्षण दे चुके हैं। इस कंपनी के इंस्टाग्राम @targetaccounts पर शेयर बाजार के लगभग  50,000 शिक्षार्थी ज्ञान प्राप्त करते हैं।

टारगेट एकाउंट्स की सह-संस्थापक स्वीटी उपाधयाय भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @Investorgirl1998 पर अपने अनुयायियों को शेयर बाजार के बारे में ज्ञान देती हैं। स्वीटी जो की सरल वीडियोस के द्वारा शेयर बाजार के टिप्स अपने इंस्टाग्राम पे समझती हैं, उनका कहना है – मुझे मेरे अनुयायियों की प्रगति और लगन देखके बोहत आनंद मिलता है। मेरी यही इच्छा है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक अपने ज्ञान को पहुंचा सकूँ।

संजय एक प्रसिद्ध किताब के लेखक भी हैं। उनकी किताब  “हाउ टु अवॉयड लोस्स एंड मेक मनी वॉयल स्लीपिंग “अमेज़न पे सर्वश्रेष्ठ किताबों का दर्जा प्राप्त कर चुकी है। इस किताब के लिए संजय को इंडिया स्टार अवार्ड से भी नवाज़ा जा चुका है।

इतना ही नहीं, स्वीटी उपाधय को शेयर बाजार एवं वित्तीय साक्षरता के ज्ञान के लिए इस वर्ष वीमेनस  प्राइड पुरस्कार से नवाज़ा गया। स्वीटी को अपने ज्ञान के कारण कई महाविद्यालयों एवं संस्थानों में भी भाषण के लिए आमंत्रित किया जाता है। संजय, जो स्वयं एक अर्थशास्त्री हैं, वे किसी भी देश कि तरक्की के लिए उसके नागरिकों कि आर्थिक साक्षरता पर ज़ोर देते हैं। उनका मानना है कि जो लोग शेयर बाजार को जानते नहीं है, केवल वही इसे सत्ता या किस्मत कि बाज़ी मानते हैं।

संजय कहते हैं – अमेरिका जैसे विकसित देशों की सफलता का एक कारण ये भी है कि उनके नागरिक आर्थिक रूप से साक्षर हैं। वे शेयर बाजार को समझते हैं तथा उसमे निवेश करते हैं। यही आंकड़ा विकासशील देशों में बोहत काम है, जिस कारण देश के विकास पे भी प्रभाव पड़ता है।

टारगेट एकाउंट्स का सपना यह है कि जैसे लोग स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, दिवाली, होली को उत्साह से मानते हैं, वे वित्तीय स्वतंत्रता के लिए भी एक दिन मनाएं जिससे भारत सफलता कि ऊंचाइयों को छू सके।

आज से शुरू होगी – 400 मोबाइल ओपीडी वैन , प्राइवेट अस्पताल पर सख्त – मुख्यमंत्री गहलोत

288 राशन डीलरों के लाइसेंस निलंबित,

निजी अस्पतालों ने किसी मरीज को वापस भेजा तो सख्त कार्रवाई – मुख्यमंत्री

जयपुर, 21 अप्रेल। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण आम रोगियों को परेशानी का सामना नहीं करना पडे़, इसके लिए प्रदेशभर में बुधवार से 400 ओपीडी मोबाइल वैन संचालित की जाएंगी। ये मोबाइल वैन उपखण्ड मुख्यालयों के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर उपलब्ध होंगी और गांव-कस्बे तक पहुंचकर मरीजों को सामान्य बीमारियों का उपचार उपलब्ध करवाएंगी। किसी को गंभीर बीमारी होने की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी जाएगी, ताकि रोगी को तुरंत इलाज मिल सके। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं।
 गहलोत मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पत्रकारों के साथ वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में कोरोना के कारण नियमित रोगियों को समुचित उपचार सुविधा उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है और कई अस्पतालों को नोटिस भी दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि निजी अस्पताल संकट की इस घड़ी में अपनी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं, अन्यथा सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी निजी अस्पताल से किसी मरीज को बिना इलाज वापस लौटाने की शिकायत नहीं आए।
9 हजार एएनएम एवं जीएनएम के पदों पर नियुक्ति जल्द
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की जंग लंबे समय तक जारी रह सकती है। ऎसे में राज्य सरकार संसाधनों में किसी तरह की कमी नहीं आने देगी। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से लड़ाई के लिए चिकित्साकर्मियों की कमी नहीं रहे, इसके लिए करीब 9 हजार एएनएम एवं जीएनएम के पदों पर नियुक्ति के संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। जल्द की इनकी नियुक्ति होगी। उन्होंने बताया कि 12 हजार पदों पर होने वाली यह भर्ती न्यायालय में उलझ गई थी। अब सरकार ने 3674 न्यायिक प्रकरणों को छोड़कर शेष पदों पर नियुक्ति का निर्णय लिया है।
सभी राज्यों को मिले प्रोत्साहन पैकेज –
 गहलोत ने कहा कि आर्थिक मंदी एवं कोरोना के कारण सभी राज्यों की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। ऎसे में भारत सरकार को प्रोत्साहन पैकेज (स्टीम्यूलस पैकेज) देना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार के समय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3 प्रतिशत प्रोत्साहन पैकेज दिया गया था। यूएसए ने कोरोना से पैदा हालातों को देखते हुए जीडीपी का 10 प्रतिशत तथा फ्रांस, जर्मनी एवं यूके ने जीडीपी का 15 प्रतिशत पैकेज दिया है, जबकि भारत सरकार ने केवल 0.8 प्रतिशत पैकेज दिया है, जो नाकाफी है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि राज्यों को इस संकट से बाहर आने में मदद मिल सके।
राज्यों की सलाह के साथ फैसले ले केंद्र सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में संघीय ढांचे की व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार राज्यों की सलाह के आधार पर निर्णय ले। यदि कोई भी निर्णय आनन-फानन में लिया जाता है तो पूरे देश को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आग्रह किया कि अगर देश में 3 मई से या जब भी लॉकडाउन खुलता है, उसकी तैयारी राज्यों की सलाह के साथ केंद्र सरकार को अभी से करनी चाहिए ताकि देशभर में सुनियोजित ढंग से आर्थिक गतिविधियां शुरू हो सकें।
दूसरे देशों की तरह जांच का दायरा बढ़ाना बेहद जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए जरूरी है कि टेस्ट की संख्या बढ़ाई जाए। भारत सरकार इस पर गंभीरता से विचार करे। इस समय देश में प्रति दस लाख व्यक्तियों पर मात्र 291 टेस्ट हो रहे हैं, जबकि इतनी आबादी पर यूएई में 77 हजार, यूएसए में 12 हजार तथा स्पेन में 20 हजार तक जांचें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि न केवल जांचों की संख्या बढ़े बल्कि रिपोर्ट भी समय पर आए। इसके लिए हमारा जोर अधिक से अधिक पीसीआर किट प्राप्त करने पर है। इसके लिए हमने आईसीएमआर को न्यूक्लियर एक्सटेंशन किट की आपूर्ति बढ़ाने को कहा है। उन्होंने बताया कि बैकलॉग खत्म करने के लिए हमने 4 हजार नमूने दिल्ली भेजे थे, जिनमें से 3800 की रिपोर्ट आ गई है। इनमें 80 पॉजीटिव आए हैं।
हमारे सुझाव पर ध्यान दिया जाता तो नहीं बनता संदेह का वातावरण
 गहलोत ने कहा कि पीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट आने में समय लगता है। इसी कारण हमने रैपिड टेस्ट पर जोर दिया था। उस समय मैंने प्रधानमंत्री जी के साथ वीडियो कांफ्रेंस में अनुरोध किया था कि पीपीई, मास्क, वेंटिलेटर, रैपिड एवं पीसीआर टेस्ट किट आदि की केन्द्रीयकृत खरीद हो, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। अब रैपिड टेस्ट के नतीजों पर देशभर में जो संदेह का वातावरण बना है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उस समय हमारे सुझावों को मान लिया जाता तो आज आईसीएमआर को रैपिड टेस्ट स्थगित करने की नौबत नहीं आती।

लॉकडाउन उल्लंघन पर अब तक 7738 गिरफ्तार,

 गहलोत ने कहा कि मॉडिफाइड लॉकडाउन का यह मतलब नहीं कि लोग घरों से बाहर निकल जाएं। अगर ऎसा हुआ तो सख्त कार्रवाई होगी। आमजन पूरे आत्मानुशासन के साथ लॉकडाउन का पालन करें। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर प्रदेशभर में 7 हजार 738 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। करीब 1 लाख 73 हजार वाहनों का चालान कर 2 करोड़ 59 लाख का जुर्माना वसूला गया है और 94 हजार वाहन जब्त किए गए हैं। इसी तरह निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर 1652 एवं सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं देने वाले 144 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
288 राशन डीलरों के लाइसेंस निलंबित
मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य एवं आवश्यक सामग्री की कालाबाजारी की कहीं भी शिकायत मिलती है, तो कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि एडवाइजरी का पालन नहीं करने और निरीक्षण में अनियमितता पर अब तक 94 एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही 288 से अधिक राशन दुकानों के लाइसेंस निलम्बित किए गए हैं। लॉकडाउन के दौरान आमजन को सही दर पर सामान उपलब्ध करवाने के लिए सरकार पूरे प्रयास कर रही है। मास्क, हैंड सेनेटाइजर, किराना सामान की एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूलने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ तीन हजार से अधिक निरीक्षण कर करीब 316 केस दर्ज किए हैं।

Shivendu Madhava Paving The Way For Young Indian Entrepreneurs

Shivendu Madhava Paving The Way For Young Indian Entrepreneurs

Shivendu Madhava, the founder of a national level technical consultancy firm,   All India Technical Consultancy Corporation Limited  (AITCCL), explains the necessity of several factors that pave the way to the success of young Indian entrepreneurs. He emphasizes that the way to converting a business idea into success is executing the business plan under state-of-the-art consultancy.

According to Shivendu, the government sector requires ideas like Smart City Development plan while the private sectors like Education Department require skill development and curriculum planning. He further highlights that the corporate sectors need feasibility studies and market research. To keep up with these demands, AITCCL aims to provide quality consulting services to these organizations.

Shivendu-Madhava

The golden words of Steve Jobs – ‘Stay Hungry, Stay Foolish’ have been an inspiration for the 27-year old Shivendu Madhava whose startup, AITCCL provides quality consulting services in an array of sectors and business verticals.
AITCCL works in close association with educational constitutions to promote one-on-one training and awareness programs along with entrepreneurship programs. AITCCL hopes to help students turn their dreams of becoming entrepreneurs into reality by guiding them to follow their passion.

AITCCL helps new entrepreneurs in diverse ways such as compliances, forming new ventures and getting all the approvals to commence their business at the earliest. The organization has expanded its wings over Dehradun, Patna, Jaipur, Bhopal, Lucknow, Varanasi, Kolkata, Kochi and Bangalore.

Source- This News is distributed by DIGPU NEWS NETWORK

Venteskraft – All AboutEntrepreneurship And Stock Trading

Venteskraft – All AboutEntrepreneurship And Stock Trading

The founders,Mahin BS and Rahul Rajeev, who are youngsters themselves, advocate for living the best while you are young and emphasise on financial independence and entrepreneurship resonating with the youth of today.

A new age firm in recent times has been gaining a lot of attention, especially youngsters. Venteskraft, cofounded by Mahin BS and Rahul Rajeev, saw its inception in 2014, starting out as a stock market training institution. They offer mentorship in the stock market, aiming to teach students how to use the stock market effectively.

Venteskraft

The company has seen rapid growth in recent years, with 30,000+ individuals under their various programs. Venteskraft provides practical knowledge to trade in the stock market, with their well-crafted strategies and industry depth research and analysis, which has been seeing extreme accuracy.

There are various kinds of memberships, offering choices of online and offline training. They have seen rapid growth in India and UAE with clients in more than 12 countries and operating in Malaysia as well. Their sister venture, Venteskraft Media specializing in business development. Business development is their forte they say as they provide mentorship and consultation to those who want to build their own business development firms.

This initiative, a new wave in digital media, has helped various companies across the country. Business development is a need of the hour in the business world and Venteskraft Media they have moulded specialists to develop expertise in various processes of business development. Venteskraft is becoming quite popular with new entrepreneurs due to their step by step guidance on how to run a business after understanding its process.

The founders,Mahin BS and Rahul Rajeev, who are youngsters themselves, advocate for living the best while you are young and emphasise on financial independence and entrepreneurship resonating with the youth of today. They have been growing social impact, seeing the increased following in social media.

 

ValueScaling Education With Elearning

According to reports, the global e-learning industry grew by 900% in the last 20 years. It is expected to triple its size by 2025 with some of the biggestglobal e-learning markets like Thailand, Philippines, India, and China growing with 30% annual growth rate.

The self-paced e-learning market, however, is said to be declining. So, the learners need the discipline of a classroom with the convenience of a personal study room. Here, gamification of learning comes into play. This concept is fuelled by the amalgamation of Virtual Reality (VR) and Augmented Reality (AR). Educators need to be where the learners are. The future of education is already here.

Ankit Khurana , Founder, ValueScale

 

The biggest question here is what if we could create an interactive game for learning? COVID-19 seems to have already set the path for uninhibited learning, with the schoolteachers doing their job online. Mothers say they feel more in control now, as she can keep an eye on what the child is doing.

E-Learning, as a concept, removes many roadblocks to online learning – Parents with zero experience of digital learning, Teachers who cannot decide the right mix between traditional learning and technology, and the duplicity of work in following schedules of school and other popular apps.

Classrooms are not going away soon but need to be supplemented with online methods. It will help not only students caught in emergency situations like COVID19, but differently abled children, kids whose parents have to stay abroad for long duration and those staying in distant locations. The whole concept of a school, and opportunities available to educational institutions will expand.

ValueScale – Learning Management Solutions

We will need more and more technology providers to support the transition. Schools have reported chaos in the first few days of implementing changes.  ValueScale  is one such industry leader, offering comprehensive e-learning and learning management solutions (LMS) to coaching institutes, schools, corporates & start-ups with complete customisations and freedom to suit their individual requirements.

Ankit Khurana , CEO, ValueScale, holds his majors in Finance And Analytics, which he used to solve calling problems since his past job at Rivigo. On the concept of E-learning at large,  says, “Educational institutions of India from schools to colleges to coaching institutes which prepare students for competitive exams have to think beyond cost & capital inputs, to develop their own solutions. It will solve the massive confusion between multiple learning
applications for parents and students in these difficult times.”

A recent report says that the biggest barrier in adoption of institution-owned online teaching platforms in India, is unavailability of reliable technology teams at the educational institutions, to define the relevant product and its features.

Abhishek Mishra & Ashish Ahuja, Core team members at Valuescale add, “Using technology as an enabler, we at ValueScale are trying to remove this barrier by providing affordable learning management solutions without compromising on performance or features. In the early stage of Valuescale operations, our biggest motivation came from appreciation notes of educators across geographies and owners of educational institutions. It explains how
customized solution ended the confusion and got them unbelievable returns on investment.”

It is high time for educational institutions to launch their own learning management solutions with lessons, projects, assignments, problem-solving spaces, chatbots, prescribed e-learning log-in hours, and a platform for idea contributions from students. The platform will become a launchpad for many big initiatives in future.
Why do we need ValueScaling at all?

Valuescaling is letting an initiative grow in size and quality, at an optimum cost. Elearning technology sure costs less than building a hundred new campuses and managing them. It provides an international reach to tap larger markets and help students who need our systems and expertise. It also means the creation of a franchise network of educators to carry your brand forward with minimum investment, and no dilution in quality.

Valuescaling means never having your students deal with the scarcity of new editions of textbooks. It is being there for your students, both real-time and through asynchronous resources. So, are you up for it?

Raise Your Voice For Real Cause, Not Reel Cause

Adnan Safee, the founder of Nine Angle Foundations, urges the citizens of India to raise their voice for the real cause, and not for any influenced publicity. Nine Angle Foundation is working socially at a very humble level in India, distributing food boxes with a month& ration to the poor and the hungry.

About the global pandemic COVID-19 Coronavirus, Adnan says To all those who are unaware of the brutal reality of life, I ask – What have we achieved by conquering space, if we can& conquer childhood hunger? While the entire world is united to fight against the deadliest virus ever, many people are engaged in blaming each other and making the atmosphere in the country worse. It is disheartening to see people fight against each other
at a time when we need to stand together and fight the COVID-19 crisis in our country

Since the 21-day lockdown was announced by the Indian Prime Minister Narendra Modi, there have been mixed reactions from people all over the country. While some of them are adhering to the strict guidelines by the government, others don& seem to understand it.

There are many others who are finding faults in everything that the Indian PM says and spreading hate about it on the internet.  Speaking on Prime Minister’s call to 9PM9Minutes, Adnan says,& No one is perfect, and neither are our leaders.

Those mocking serious announcements made by the Prime Minster of India, Sh. Narendra Modi should restrain, as unknowingly they are making a mockery of the entire nation. A symbol, a gesture or a shared activity, announced by our Prime Minister was to bring everyone together, to make us feel connected against this unprecedented crisis affecting every one of us, and is a worthy idea.

Without finding any logic we did it, just to stand with and join our entire fellow Indians who believed in it. But people dancing and celebrating on the streets with fireworks is highly condemnable. This stupid act also became the reason of fire at Sholapur Airport at Maharashtra as prima facie report.

We pray for those with the Coronavirus, those who care for them, and those who are suffering from anxiety during this stressful time. In the backdrop of the COVID-19 Coronavirus scare affecting the livelihoods of daily wage earners due to slowing down of the economy, Nine Angle Foundation is focusing on giving financial help, especially to
rickshaw pullers in our vicinity, who have lost their jobs.

Nine Angle Foundation is working primarily on the funds contributed by its founders and few individuals who want to work towards the society. The foundation wishes to spread the culture of healthy food and education across the length and breadth of India.

Itis running initiatives to meet the local regional and national needs of health and education. To join their efforts towards the society, contribute at the Nine Angle Foundation.

 

राजस्थान वाल्मीकि विकास मंच ने लिखा प्रधानमंत्री मोदी को पत्र – सफाई कर्मचारियों की पीड़ा से कराया अवगत

कोरोना – राजस्थान वाल्मीकि विकास मंच ने लिखा राष्टपति रामनाथ कोविंद  व् प्रधानमंत्री  को पत्र – सफाई कर्मचारियों की पीड़ा से कराया अवगत

राजस्थान . जयपुर | कोनोना वैश्विक महामारी को लेकर जहाँ सभी देश चिंतित है भारत के प्रधानमंत्री ने भी देश में कड़े कदम उठायें है लेकिन देश की सफाई व्यवस्था में जिस वंचित समाज की मुख्य ज़िम्मेदारी है केंद्र की सरकार व् राज्य
सरकारों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठायें है जिसका लेकर दलित अधिकार केंद्र राजस्थान के तत्वधान में राजस्थान वाल्मीकि विकास मंच ने देश के महामहिम रामनाथ नाथ कोविंद , प्रधानमंत्री मोदी , राष्टीय अनुसूचित आयोग का
ध्यान समाज के वंचित वर्ग की इस सक्रमण { कोविड -19 } से रक्षा व् उनके परिवार को आश्वत करने का आग्रह किया है और निम्न मांग की मांग की है

  1. सम्पूर्ण भारत के शहरी एंव ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत समस्त सफाई कर्मचारियों की पुनः गणनाकर प्रधान मंत्री जी गरीब कल्याण पैकेज-बीमा योजना के अन्तर्गत छूटे हुए सफाई कर्मचारियों को शामिल कर संशोधित सामूहिक बीमा कोरोना वाईरस के दिशा में सकारात्मक कदम उठायें |

  2. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज आर्थिक अनुदान सहायता की गई है जिसके अंतर्गत भारत सरकार ने करोना महामारी के इलाज में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को 50 लाख रूपये का सामूहिक स्वास्थ्य बीमा करवाया गया है लेकिन सफाई कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है जबकि सफाई कर्मचारियों के काम में सक्रमण का अधिक खतरा है अत : इस में इस पैकेज में इस वर्ग को भी शामिल किया जायें |

संस्था के अध्यक्ष राकेश वाल्मीकि ने कहा है की आज देश में इस वैश्विक महामारी में जिस प्रकार अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का काम है उससे भी अधिक ग्र्ह्नीत काम वाल्मीकि सफाई कर्मचारियों का है यह वंचित समाज बीना किसी सुरक्षा उपकरणों के तरल,ठोस, जैविक, पुनःचकित, खतरनाक अपशिष्ट आदि के इक्ठ्ठा करने से लेकर निस्तारण तक में इनकी भूमिका मुख्य है अत : सरकार को इस दिशा में भी सकारात्मक कदम उठाने चाहियें |

आपका ज़मीर आख़िर जिन्दा क्यों है – 21 वीं सदीं में इंसान मलमूत्र में अपना मुहँ दे रहा है

Why is your conscience alive – in the 21st century man is giving his mouth in excreta

राजस्थान . जयपुर | भारत देश आज परमाणु सम्पन्न है और विश्व पटल पर अपनी एक साख रखता है लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी कुछ ऐसे अमानवीय द्रश्य हमारी आखों के सामने आ जाते है की हम अपने आप से ही कई सवाल कर बैठते थे आख़िर ऐसा क्यों – आज़ादी के 70 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी हमारे समाज के कर्णधार समाज ” वाल्मीकि ” जिन्हें अलग – अलग राज्यों में अलग -अलग नाम से जानते है जैसे राजस्थान में में वाल्मीकि .भंगी .मेहतर .झडमाली . हलालखोर . चुह्दा ,राउत ,हेमा . डोम .डोमर .हाड़ी ,लालबेग आदी तमाम नाम लेकिन इनका काम सिर्फ – सफाई करना है चाहे रोड पर हो या गटर – सीवरेज |

आज़ादी के बाद इस वंचित समाज को क्या मिला –

भारत देश 15 अगस्त 1947 में आज़ाद हो गया देश की सत्ता अब देश के नेताओं के पास आ गई देश के पहले प्रधानमंत्री बनने का गौरव पंडित जवाहर लाल नेहरु को मिला ,उनका पहला देश को संबोधित करने वाला भाषाण एक विजनरी था जिसकी चर्चा आज भी होती है | देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी और 26 जनवरी 1950 को डॉ बाबा साहब अम्बेडकर के अध्यक्ष्यता में ” भारत के संविधान का निर्माण हुआ और लागू हुआ जिसके अंतर्गत देश के सभी व्यक्तियों को सामाजिक ,आर्थिक और राजनेतिक न्याय ,विचार अभिव्यति , धर्म , प्रतिष्टा ,अवसर की समानता आदी अधिकार मिले लेकिन यह वाल्मीकि समाज के लियें उधार सा प्रतीत हो रहा है आज भी |

sabir kureshi pic – shashtri nagar . jaipur .

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भारी – सामाजिक व्यवस्था

भारत देश में एक अभिशाप व्यवस्था है जिसे वर्ण व्यवस्था कहते है इस व्यवस्था ने वंचित वर्ग की जातियों को अद्रश्य गुलामी की बेड़ियों में इस कदर जकड़ रखा हैं की संवेधानिक रूप से SC जातिया जिन्हें अनुसूचित जातियों की श्रेणी में रखा गया है इनका जीवन आज भी चौनोतीपूर्ण है जैसे – वाल्मीकि , रेगर , बलाई ,चमार ,मेघवाल ,खटिक, बैरवा ,आदी इन जातियों का जीवन आज भी संवेधानिक अधिकार होने के बावजूद भी प्रतिदिन अपने स्वाभिमान के लियें संघर्ष करती नज़र आती है आज भी इन्हें अपनी शादी में घोड़ी पर नहीं बैठने दिया जाता , मूंछ नहीं रखने दिया जाता , आज भी इन जातियों को छुआ -छुत का शिकार होना पड़ता है जहाँ ग्रामीण क्षेत्रो में यह प्रत्यश होता है तो शहरी क्षेत्रो शाररिक कम और मानसिक छुआ छुत अधिक होने लगी है जबकि सरकार ने इन वंचित समाज की सुरक्षा के लियें ” SC/ST ACT – 1989 बना रखा है फिर भी असामाजिक लोगों द्वारा इन गरीब वंचित लोगो का शोषण करते रहते है जैसे – राजस्थान में डांगावास कांड , नागौर – पेचकस कांड ,अलवर कांड ,सीकर आदी तमाम जघन्य अपराध राजस्थान के इतिहास में दर्ज है – वैसे राजस्थान दलितों पर हत्याचार के मामले में प्रथम स्थान पर है जो की राज्य के लियें – शर्मनाक है |

सीवरेज वर्कर को लेकर लम्बे समय से काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता हेमलता कांसोटिया ने कहा की –

आज भी वाल्मीकि समाज के लोगों को समाज में सम्मानजनक काम अन्य जातियों द्वारा नहीं करने दिया जाता उनका विभिन्न तरिकों से बहिष्कार किया जाता हैं क्या आप ने अभी तक “वाल्मीकि मिष्ठान भण्डार , भंगी पवित्र भोजनालय , चमार फुटवियर , रेगर महाविधालय देखा है नहीं देखा होगा जबकि – शर्मा पवित्र भोजनालय आप ने अधिकतर हर जगह देखा होगा , शर्मा फुटवियर भी नहीं देखा होगा जबकि यही अंतर है उच्च जाती व् दलित जातियों में |

जब व्यक्ति को उचित काम नहीं मिलेगा तो वह मज़बूरी के कारण मलमूत्र में मुहँ देने को मजबूर है क्योकि उसे अपने बच्चे ,परिवार जो पालना है

उच्च न्यायलय ने सीवरेज वर्कर को लेकर 2005 में में दिशा – निर्देश दियें थे की सीवरेज से संबंधित सभी कार्य मशीनों के माध्यम से होगा लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आया |

में { हेमलता कांसोटिया } ने 2007 में दिल्ली उच्च न्यायलय में सीवरेज वर्कर को लेकर जनहित याचिका डाली गई जिसके परिणाम स्वरूप 2008 में दिल्ली न्यायलय व् सर्वोच्च न्यायलय द्वारा ने सीवरेज लाइन में व्यक्ति को उतरने पर पाबंदी लगा दी गई और सभी राज्यों को आदेश प्रेषित कर दियें . लेकिन आज भी सीवरेज वर्कर की स्थिति वही है की उसे आज भी अन्य व्यक्तियों के मलमूत्र में मुहँ देना पड़ रहा है | अब तो राज्यों सरकारों को इस अमानवीय काम पर पूर्ण रूप से रोक लगाना चाहियें और साथ ही सीवरेज वर्कर को सभी जरुरी सुरक्षा उपकरण देकर मशीनों की सहायता से काम किया जायें |

गाँधी जी 150 वीं वर्ष जयंती और वाल्मीकि समाज –

महात्मा गांधी और दलित समाज –

आजादी के समय से पूर्व ही महात्मा गाँधी दलित समाज और विशेष वाल्मीकि समाज के उद्धार के लियें काम कर रहे थे और उस वक्त सम्पूर्ण देश व् कांग्रेस पार्टी में गाँधी का विशेष स्थान था लेकिन जमीनी स्तर पर जबकि लगभग 100 साल से अधिक समय बीत चूका है लेकिन इस दलित समाज का विकास नहीं हो पाया और यह समाज आज भी मलमूत्र में मुहँ देने को मजबूर है

अब देश महात्मा गांधी की वर्ष भर 150 वीं जयंती मना रही है तो क्या महात्मा गाँधी को आदर्श मानने वाले बड़े नेता प्रधानमंत्री मोदी ,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत क्या इन दलित समाज के लोगों को इस अमानवीय काम से दूर नहीं कर सकते क्या यह महात्मा गांधी व् डॉ अम्बेडकर को सच्चा सम्मान नहीं दे सकते

 

story by – pawan dev 

{ news team – politico }