मोदी सरकार की आर्थिक निति –

‘आर्थिक’ और ‘विदेश नीति’ पर सरकार कैसे धड़ाम से औंधे मुंह गिरी है..आंकड़े इसकी बानगी भर हैं..सबसे पहले बात आर्थिक नीति की..आरबीआई ने आज ही 2016-17 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है..रिपोर्ट में आरबीआई ने बताया है कि नोटबंदी के बाद चलन से बाहर किए गए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों में से लगभग 99 फ़ीसदी बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट आए हैं। सिर्फ 1 फीसदी नोट वापिस नहीं लौटे हैं। यानी नोटबंदी के बाद 15.44 लाख करोड़ में से 16 हज़ार करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में वापस नहीं लौटे हैं जो 1 फ़ीसदी है। याद कीजिये संसद में मिमयाती हुई उस आवाज़ को जिसने नोटबंदी को संगठित लूट बताया था..अब ये खेल लूट से कहीं आगे का दिखाई देता है। इस लूट का पूरा एक कुनबा है..जिसमें बड़का लूट, मंझला लूट, छोटा लूट, मामा लूट, ताई लूट, ताऊ लूट, बुआ लूट, मासी लूट सभी तरह के लूटेरे रिश्तेदार शामिल हैं। सिर्फ एक फीसदी के लिए 100 से अधिक लोगों की बलि ले ली गई। कई कम्पनियां ताबाह कर एक साथ ढेर सारे गोल्ड मेडल्स दे देने चाहिए। नोटबंदी के बाद बाजार में नौकरी के क्या हाल हैं इसे ऐसे समझिये..कुछ महीने पहले ही ABP न्यूज़ समूह के अंग्रेज़ी अखबार ‘The Telegraph’ से 700 मीडियाकर्मी को निकाल दिया गया..वजह नोटबंदी बताई गई..पिछले साल नवंबर में L&T ने बड़ी छंटनी करते हुए 14,000 लोगों को कंपनी से बाहर कर दिया..नवंबर 2016 में ही नोटबंदी से आई मंदी की वजह से शिल्पा शेट्टी का शॉपिंग चैनल डूब गया..और एक झटके में 2000 इम्प्लॉई बेरोज़गार हो गए। इसी साल मार्च में लाईको कंपनी ने भारत में अपने 85% स्टाफ को निकाल दिया..ऑन लाइन शॉपिंग कंपनी स्नैपडील ने 600 लोगों को नौकरी से निकाल कर बाहर कर दिया..कुछ महीने पहले ही विप्रो ने 600 कर्मचारियों को निकाल दिया..विप्रो से पहले ग्लोबल आईटी कंपनी काग्निजेंट में भारी तादाद में छटनी हुई..जून में भी कंपनी ने 6000 लोगों की छटनी कर दी काग्निजेंट में 72% भारतीय काम करते हैं। दिग्गज आईटी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट भी इसी साल जून में तकरीबन 2,850 कर्मचारियों को जॉब से निकाल चुकी है..कई स्टार्टअप कंपनियों की कमर नोटबंदी की मार से टूट गई..और फंड न होने की वजह से उनपर ताला लग गया..इनमें टाइनी आउल, पेपरटैप, जूरूम्स, पर्पल स्क्वरल, फैशनारा और इंटैलिजेंट इंटरफेसेस जैसे प्रमुख स्टार्टअप का शटर डाउन हो चुका है। सबसे बड़ी बात..स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI कभी भी 27000 कर्मचारियों की छटनी कर सकता है..साथ ही नई भर्तियों में भी 50% की कटौती होने की संभावना है..छटनी के पीछे SBI के अपने छह एसोसिएट बैंकों के साथ होने जा रहे विलय को बताया गया है..उधर अमेरिका में एच-1 बी वीजा में कटौती की वजह से 35 लाख भारतीय कर्मचारियों के सर पर नौकरी जाने का खतरा अब भी मंडरा रहा है..सिंगापुर ने भी अपने देश में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए दरवाज़े-खिड़की बंद कर लिए हैं..सिंगापुर की तरफ से भारतीयों को वीजा देने पर रोक लगा दी गई है। ऑस्ट्रेलिया ने भी कुछ महीने पहले अपने अस्थायी वीजा कार्यक्रम, 457 वीजा को रद्द कर दिया। जिससे वहां काम करने वाले भारतीयों पर नौकरी जाने का खतरा मंडरा रहा है..ये फैसला भी ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने तब लिया..जब वहां के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने इंडिया आकर मोदी के साथ मेट्रो में जमकर चकल्लसबाज़ी की थी..खूब सेल्फी सेल्फी खेला गया था..मेहमान की खातिरदारी हुई थी..बदले में क्या मिला? जब टर्नबुल वापस ऑस्ट्रेलिया पहुंचे, तो जाते ही वीज़ा में बदलाव का फैसला सुना दिया..जैसे मोदी साहब का भोज कड़वा था। आप पूरी दुनिया घूमकर चले आये लेकिन भारत मे इन्वेस्ट कितना आया..बता नहीं पाए..आपने नोटबंदी की, लेकिन नोटबंदी से कितना कालधान वापस आया ये भी नहीं बता पाए, विदेशों में कालधान रखने वाले 627 लोगों की लिस्ट आपके पास है..लेकिन कार्रवाई क्या हुई, पता नहीं..हर साल 2 करोड़ नौकरी, 100 दिन में कालधान और अकाउंट में 15 लाख वाली बात जुमला ही हो गई। अच्छे दिन के नाम पर हर रोज़ बच्चे, बूढ़े, बुजुर्गों को स्वर्ग का टिकट देकर ज़बरदस्ती भगवान के पास भेज रहे हैं। बाढ़, इलाज, डेंगू, चिकनगुनिया के नाम पर पट पट लोग मरे जा रहे। फिर भी आप कहेंगे कि हिसाब न करें काहे भाई ?
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