अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव –

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत  को कांग्रेस में पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है।  2019  में होने वाले चुनाव को देखते हुए  उन्हें  बड़ी   जिम्मेदारी भी सौंपी गई है
। अब वे गुजरात के प्रभारी  और सचिव बन गए हैं। 2013 में हुई राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस की हुई बड़ी हार के बाद गहलोत को यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। इधर गहलोत को जिम्मेदारी देने के साथ ही राजस्थान कांग्रेस प्रभारी महासचिव गुरुदास कामत ने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है।

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के लिए दिल्ली में बिछी विसात –

नई दिल्ली |  मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही दलित और वंचित वर्ग के समुदाय और  जातियो को  निरंतर निशाना  बनाया जा रहा है | राजनेतिक पार्टिया दलित समुदाय के लोगो को संविधान में वर्णित अधिकारों के नाम पर मात्र योजनओ का निर्माण तो कर देती है लेकिन जमीनी स्तर पर उन योजनाओं पर अमल नहीं होता  | जिसके परिणाम स्वरूप  आजादी के 7 दशक बाद भी  दलित वर्ग सामाजिक हाशिय पर है और रोटी कपडा. शिक्षा .मकान  स्वास्थ्य  जैसी मुलभूत सेवाओं से वंचित है | बाबा साहब डॉ .अम्बेडकर  ने  भी कहा था की जब तक समाज अपने को राजनेतिक  स्तर पर मजबूत नहीं करेगा तब तक समाज हाशिये पर रहेगा और  मुख्यधारा से वंचित रहेगा  यह  कहना है –   हेमंत खिंची   { युवा और सामाजिक कार्यकर्त्ता }

आगामी 2018 विधान सभा के लिए  खटिक समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले खिंची  ने कहा है कि सरकार दलितों और पिछड़ी जातियो के  विकास के नाम पर मात्र आश्वासन देती है | राजस्थान आज दलितों पर हत्याचार के मामले में प्रथम स्थान पर आ गया है  और राज्य सरकार इस और ध्यान नहीं दे रही है | जिससे दलितों में  सरकार के प्रति नाराजगी है| लेकिन आगामी चुनाव ओं में दलित समुदाय को उचित सम्मान और राजनीती में समान भागीदारी हो,  इस के लिए  आगामी समय में वंचित समाज के लोगो को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाना होगा | ताकि  अधिक से अधिक  संख्या में  राजनीति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके   | इस के लिए सभी  समाज के प्रतिनिधियो  ने अपने विचार रखे और  आगामी कार्य योजना का रोड मेप तैयार किया  |

डॉ .अम्बेडकर पर टिप्पणी करने पर विधायक विजय बंसल पिटते -पिटते बचे –

जयपुर | भरतपुर के बीजेपी विधायक विजय बंसल आजकल सस्ती लोक प्रियता के लिए संविधान निर्माता डॉ . भीम राव अम्बेडकर को लेकर दूसरी बार टिप्पणी

की |पहली बार उन्होंने भरतपुर में डॉ. अम्बेडकर जयंती  पर बयान देते हुवे कहा था की -डॉ .भीम राव अम्बेडकर संविधान निर्माता नहीं है वे मात्र संविधान सभा के सदस्य

vijay bansal pic net

थे | लेकिन दूसरी बार टिप्पणी बंसल ने विधानसभा में की तो वह पीटते -पीटते बचे |

क्या था पूरा मामला –

भरतपुर विधायक विजय बंसल ने डॉ.बाबा साहब को लेकर जब विधानसभा में टिप्पणी की तो विधानसभा  में हंगामा हो

गया | पिलानी से बीजेपी विधायक  एवं राज्य अनुसूचित आयोग के चेयरमेन सुंदरलाल उनसे भीड़ गए | नोबत हाथापाई तक पहुँच गई |मंत्री अरुण चुतुर्वेदी ने बीच – बचाव किया | सुन्दर लाल के समर्थन में हीरा लाल नागर सहित बीजेपी के विधायक खड़े हो गए और बंसल का विरोध करने लगे |बाद में बीजेपी के कुछ विधायक बंसल को हाथ पकड़कर सदन से बाहर ले गए |लेकिन कांग्रेस ने बंसल का  जोरदार विरोध किया ओर वैल में आकर नारेबाजी करने लगे |कांग्रेस ने बंसल को सदन से बरखास्त करने की माँग की | बाद में विधानसभा उपाध्यक्ष  राव राजेन्द्र ने  आदेश दिया की जांच करवाई जाये और बंसल के खिलाफ कारवाई की जाये |

राजस्थान सरकार के तीन वर्ष और दलित……

राजस्थान सरकार के तीन वर्ष और दलित………..

राजस्थान की वर्तमान सरकार ने अपने तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है जिसके दौरान राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य करने में उपलब्धियां भी प्राप्त की है। इन तीन सालों में तकनीकी सूचना तंत्र व आई.टी.इन्टरनेट, के क्षेत्र में तीव्र गति से जो विकास हुआ है उसको भी राज्य सरकार ने अपने मंत्रालय व विभागों में गुड गर्वेनेंस अपना कर अपने शासन बताया ।

इन तीन सालों में सरकार ने अनेक चुनौतियों व बाधाओं का सामना भी करना पडा है। परन्तु यदि हम राज्य के दलितों , आदिवासियों व महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक स्थिति और उनके विकास के आंकडों पर नजर डाले तो पता चलेगा कि धरातल पर चल रही
विकास योजनाओं और कार्यक्रमों का पूरा-पूरा लाभ उन्हे नही मिल पा रहा है। तीन साल पहले पूर्व वृति सरकार द्वारा जो कल्याणकारी योजनाऐं चलाई जा रही थी जिनमे से अनेक कार्यक्रम व योजनाओं को या तो धीरे-धीरे बन्द कर दिया जा रहा है या उन्हें संषोधित करने के नाम पर कुछ कार्यक्रमों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है जिनमें से प्रमुख कल्याणकारी योजनाऐं और कार्यक्रम जैसे महात्मा गांधी नरेगा, इन्द्राआवास योजना, खाद्यय सुरक्षा अधिनियम, स्वास्थ्य सेवाओं मेे निःशुल्क दवा योजनाओं में कटोती कर आम जनता को जीवन जीने के अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रजातंत्र में किसी भी सरकार के लिए प्रत्येक नागरिक स्वस्थ रहे यह सरकार की प्रथम जिम्मेदारी है लेकिन निःशुल्क  बन्द कर भामाशाह योजना दिनांक 15 अगस्त 2014 से शुरू की गई । आम लोगों को लोक कल्याण कायक्रमों , राशन वितरण, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, नरेगा भुगतान छात्रवृति, जननी सुरक्षा योजना को इस भामाषाह योजना से जोडने की सर्वोच्च प्राथमिकता है परन्तु इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भामाषाह योजना के बारे में कोई जानकारी नही है। ऐसे लोगों के पास कार्ड तो है, परन्तु उन्हे इस के लाभ और उद्ेष्य के बारे में पता ही नही है। निःषुल्क वितरण योजना का लाभ प्रदेष मंे दलित व वंचित महिलाओं को मिल रहा था लेकिन दवाईयों, जांचों में कटोती कर निःषुल्क दवा वितरण योजना के लाभ से दलितों व महिलाओं को वंचित किया गया है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना (मनरेगा):- राज्य में ग्रामीण बेरोजगारों, और अल्प आय मजदूरों को रोजगार के लिए मनरेगा अधिनियम के लागू होने के बाद हर ग्रामीण को सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिये। लेकिन मनरेगा के एक दशक  पूरा होने के बाद भी राज्य में सौ दिन का रोजगार गांरटी दिए जाने की मांग करने पर भी केवल पचास दिन का ही रोजगार राज्य सरकार उपलब्ध करवा पा रही है । सरकार रोजगार उपलब्ध करवाने में अभी कोसों दूर ही चल रही है। राज्य में सामाजिक संगठनों, विधायकों की ओर से विधानसभा में आवाज उठाने के बाद भी इस समस्या का कोई कारगर समाधान नहीं निकल सका।
चिन्ता का विषय यह है कि मनरेगा योजना को चलाने के लिए केन्द्र सरकार ने वर्ष 2016 में राज्य सरकार 2455,53 करोड की राशी  दी गई थी जब कि राज्य सरकार की ओर से मनरेगा योजना के लिए 198 करोड की राशि ही जारी की इससे साफ पता चलता है कि सरकार की मंशा  में खोट है इसलिए पूरी आवंटित  आवंटित नही की। मनरेगा में 15 दिन में रोजगार का भुगतान नही करने पर मनरेगा एक्ट के अनुसूची 2 के पेराग्राफ 29 के अनुसार मजदूरी की कुल राशि  पर 0.05 प्रति दिन की दर से ब्याज देना होता है लेकिन राज्य सरकार पिछले चार साल में 25 करोड का ब्याज का भुगता नही कर रही इससे साफ पता चलता है कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों का भुगतान समय पर नही हो पा रहा ना ही मनरेगा के एक्ट क तहत रोजगार व मुआवजा भता मिल रहा है।
अधिनियम में 100 दिन के अधिकार की गांरटी का प्रावधान है लेकिन धरातल पर स्थिति विपरित है। मनरेगा वेबसाईट के आंकडों में राज्य में प्रति परिवार औसत रोजगार दिवस घटे है। इससे वर्ष 2012-13 में 52, वर्ष 2013-14 में 51, वर्ष 2014-15 में 46, और 2015-16 में औसतन 42 प्रति परिवार दिवस तक स्थिति पहुंच गई है।

शिक्षा  –
राजस्थान में शिक्षा  चैकाने वाले तथ्य व आंकडे सामने आते है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि किसी देश का भविष्य देखना हो तो उस देश के बच्चों को देखे।, उनके कथन पर गौर किया जाये तो पता चलता है कि प्रदेश में देश का भविष्य सुरक्षित नही है राजस्थान के प्राथमिक से सीनीयर सैकण्डरी विद्यालयों की शिक्षा दिया जावे तो पता चलता है कि स्कूलों में सवा लाख शिक्षक  की कमी है। पिछले साल 9 लाख बच्चों का नामांकर बढने के बावजूद उपस्थिति घटी है जिससे साफ पता चलता है कि विद्यालयों में शिक्षा  का स्तर सही नही है, माॅनिटरिेग तंत्र मजबूत नही है अफसरों की ढिलाई व सरकार की उदासीनता के कारण से सर्व शिक्षा  अभियान के तहत स्कूल भवन का निर्माण नही किया गया जिसके कारण 788 स्कूल खूुले में या झोपडों में चल रहे है। राज्य सरकार के दावों के बावजूद अभी भी सवा लाख शिक्षकों की कमी है। माध्यमिक  शिक्षा बोर्ड में साढे 88 हजार पर रिक्त है। इनमें प्रधानाचार्य के 1855, प्रधानाध्यापक के 755, व्याख्याता के 26,543 वरिष्ठ अध्यापक के 15,412 अध्यापक स्तर  के प्रथम के 22629, अध्यापक लेवल द्वितीय के 18,308, शाररिक शिक्षा  के 124 तथा पी.टी.आई. ग्रेड थर्ड के 2,631 पर रिक्त है। वहीं प्रारंभिक शिक्षा  में 48 हजार पद रिक्त है। इनमें वरिष्ठ अध्यापकोें के 8609 तृतीय श्रैणी के 38,988 तथा पी.टी.आई. के 517 पद रिक्त है। शिक्षा  विभाग के अभी 2 लाख 76 हजार 616 पद स्वीकृत है। उनमें से 1 लाख 57 हजार 882 पदोें पर अधिकारी, शिक्षक  और कर्मचारी कार्यरत है लेकिन 1 लाख 18 हजार 734 पद खाली है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में स्कूलों की स्वच्छता की स्थिति भयावह है। प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2014 में शुरू  किये गये स्वच्छता अभियान के तहत जारी क्लीन स्कूल गाइडालईन के मुताबिक हर स्कूल में 40 बच्चों पर एक शोचालय  नही होने के कारण से 10 वीं के बाद बहुत सी छात्राऐं खुले में शोच  की जिल्लत के कारण ड्रा-आउट होती है। समानीकरण के नाम पर 17 हजार स्कूलों को बन्द कर दिया जिसमें बन्द किये जाने वाले स्कूलों में ग्रामीण क्षेत्रों में उन स्कूलों को बन्द किया है जो दलित बाहुल्य क्षेत्रों में या उनके आस-पास थी जिसके कारण से दलित छात्र-छात्राऐं ज्यादा प्रभावित हुई है। शिक्षा  के अधिकार के तहत कानून में संशोधन  कर आर.टी.ई में सिर्फ बी.पी.एल. परिवार के बच्चों को ही प्रवेश  का प्रावधान किया है जिसके कारण से भी दलित आदिवासी परिवार के बच्चों को आर.टी.ई. से के अन्तर्गत 25 प्रतिशत  के छात्रों का प्रावधान था उन्हे इस अधिनियम से वंचित कर दिया है।
वर्ष 2015-2016 की हकीकत बयान करते आंकडे इस बात को सिद्व करने के लिए पर्याप्त है कि शिक्षा  से दलित आदिवासी बच्चों की दूरी बढा दी है जो इस प्रकार हैः-
क्र.सं. श्रैणी आवेदन प्रवेश

1 बी.पी.एल. 20853 15883
2. सामान्य 72689 25991
3. एस.सी./एस.टी. 89855 44342
4. ओ.बी.सी./एस.बी.सी. 160989 79527
5. दिव्यांग 1623 536
6. अनाथ 739 उपलब्ध नही

स्वास्थ्य ….
स्वस्थ नागरिक देश  व समाज की मानवीय सम्पति है। व्यक्ति अस्वस्थ होता है तो उसका कुप्रभाव देश  व समाज दोनो पर पडता है जिसका नुकसान देश  व समाज दोनो का उठाना पडता है। प्रदेश  में जंचा-बच्चा के स्वास्थ्य व कुपोषण से मुक्त करने के लिए आंगन बाडी केन्द्रों पर पोषहार वितरण स्वास्थ्य जांच, स्कूलों में पोषाहार, गरम पोषहार आदि योजनाऐं संचालित है लेकिन आज भी प्रदेष में 12.2 प्रतिशत बालक 11.7 प्रतिशत बालिकाएं अति कुपोषित  की शिकार है। प्रदेष में अति कुपोशित लडके 9.4 प्रतिशत , अति कुपोषित  लडकियां 7.6 प्रतिशत, कुपोषित लडके 26.8 प्रतिषत, कुपोषित लडकियां 17.9 प्रतिषत, कम वजनी बालक 29 प्रतिषत, कम वजनी बालिका 24.9 प्रतिशत है। उक्त आंकडो से साफ पता चलता है कि बच्चों की स्थिति स्वास्थ्य के प्रति चिन्ता जनक है।
विधवा व वृद्वा अवस्था पेंषन येाजनाः-
वर्ष 2016-17 के राज्य में वृद्वजनों , विधवा, महिला तथा निःषक्त जनों के कल्याण हेतु पेंषन योजनाअें के लिए राज्य सरकार ने कुल 3682.35 करोड की राशि  प्रस्तावित की है। यह राषि वर्ष 2015-16 के बजट अनुमान में प्रस्तावित राषि 343.38 करोड रूपये कम है। परन्तु इसी वर्ष के संषोधित बजट से करीब 24 करोड रूपये ज्यादा हे। वर्ष 2015-16 के संषोधित बजट में वृद्वजनों, विधवा महिलाओं तथा निःषक्त जनों के कल्याण हेतु पेंषन येाजनाअें के लिए बजट को 368.36 करोड रूपये से घटा दिया गया है। यह कमी मुख्य रूप से वृद्वजनों के लिए पंेषन योजनाओं में की गई है।
खाद्य सुरक्षा योजना से एक करोड लोगों को बाहर कियाः- वर्तमान सरकार ने टस्क फोर्स द्वारा निर्धारित माप दण्डों की आड लेकर 1 करोड लोगों को बाहर किया और जो पात्र लोग छुट गये थे उन्हे खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल  किया गया है। परन्तु विधानसभा में प्रशन  काल के दौरान यह कहा गया है कि राज्य के एक करोड़  लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना के लाभों से वंचित कर दिया गया है। टास्क फोर्स की सिफारिषों के अन्तर्गत खाद्य सुरक्षा योजना के लाभों से वंचित किये गये लोगों में अधिकतर वंचित वर्गो के गरीब व जरूरत मंद लोग है।
इंदिरा आवास योजना:- …………….

राज्य सरकार ने इंदिरा आवास योजना को समाप्त कर इसके स्थान पर मुख्यमंत्री आवास योजना बनाई है परन्तु अभी तक मुख्यमंत्री आवास योजना धरातल पर नही आ पाई है।
पालनहार योजना:- पालनहार योजना में फण्ड का टोटा बच्चों और पालनहार के लए मुसीबत बन गया है। सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग की और से प्रदेश  में करीब 2 लाख एक हजार बच्चे और एक लाख 14 हजार 137 लाभार्थी योजना से जुडे हुए है पर बजट के अभाव में उनका भविष्य खतरे में है।
निष्कर्ष………………
राज्य सरकार के 3 वर्षो के कार्य कलापों का मूल्यांकन करने पर पता चला है कि राज्य सरकार से दलितों, व वंचित वर्ग के लोगों को जितनी आशा  थी वह इन आशा ओं के मुताबिक खरी नही उतर पाई। नई सरकार ने दलितों को जितने दिव्य स्वप्न दिखा कर सत्ता में आई वह दलितों के लिए मृग तृष्णा ही साबित हुई। आज राजस्थान का दलित अपने आप को ठंगा हुआ असहाय महसूस कर रहा है। अब सरकार के पास अग्नी परीक्षा के दो वर्ष का समय है, क्या दो वर्ष में दलितों का कुछ भला हो पायेगा ? यह प्रशन  चिन्ह सरकार के लिए चिन्तन व प्रदेष के दलितों के लिए चिन्ता का विषय है।

(पी.एल.मीमरौठ)
मुख्य कार्यकारी
दलित अधिकार केन्द्र, जयपुर
112, सूर्य नगर,
गोपालपुरा बाई पास,
जयपुर
मो. 9351317611

भारतीय सेना को समर्पित ” PRSI का रजत जयंती समारोह”

जयपुर।  पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के जयपुर चैप्टर द्वारा आयोजित 25वां जनसम्पर्क दिवस  भारतीय  सेना  को समर्प्रित  करते हुए  ” भारतीय सैन्य  बल को नमन “के रूप में मनाया गया  |

भारतीय सैन्य बलों को नमन थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में ब्रिगेडियर हरकीरत सिंह ने कहा कि सेना राष्ट्र शक्ति निर्माण में अनवरत संलग्न रहती है और देश की आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा, तकनीकी अपडेट के जरिये साइबर वार, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने, खेलकूद, सामाजिक सरोकारों में अपनी अहम भूमिका निभाती है।

डॉ अजीत पाठक ने कहा कि सेना के दम पर पूरा हिंदुस्तान चैन की नींद सोता और सुरक्षित  है

ऐसे में हर हिंदुस्तानी का फर्ज बनता है कि अपने सम्मान के जरिए सैनिकों का मनोबल बढायें। उन्होंने एक कविता के माध्यम से आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र में सैनिकों को होने वाली परेशानियों का शब्द चित्रण किया और तीखे  स्वर में आतंकियों को चेतावनी भी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सांसद रामचरण बोहरा ने कहा कि सेना और सैनिक सदा से सम्मान की नजरों से देखा जाता है। बढ़ती आतंकवादी चुनौतियों ने इनकी जिम्मेदारी और बढ़ा दी है।इस अवसर पर जयपुर में पत्र सूचना कार्यालय की निदेशक डॉ प्रज्ञा पालीवाल को जनसम्पर्क श्री से सम्मानित किया गया |

इसी कड़ी में डिजिटल पी.आर में विशेष योगदान हेतू -मनीष  हूजा . जनसंचार शिक्षण विशिष्टता हेतू प्रो . राजन महान  सर , व विश्वविधालय में अध्धयन  जनसंचार के स्टूडेंट्स  को समानित किया गया |

मुसलमानों को संविधान ने दिया है अधिकार बीजेपी ने नहीं -ओवैसी

AIMIM नेता असदुद्दीनने कहा है कि किसी भी धार्मिक समुदाय को अधिकार देने वाली बीजेपी कौन होती है? ये अधिकार मुसलमानों को संविधान ने दिया है। ओवैसी का ये बयान टेलीकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी जानती है कि मुस्लिम समुदाय के लोग उनकी पार्टी को वोट नहीं देते हैं फिर भी बीजेपी मुसलमानों का पूरा सम्मान करती है और ना ही कभी धर्म के आधार पर मुस्लिम समुदाय के लोगों से भेदभाव करती है। ओवैसी ने कहा कि, ‘ रविशंकर प्रसाद का कहना कि हमनें उन्हें सम्मान दिया अधिकार दिया, आखिर ये हम कौन हैं, मुसलमानों को अधिकार संविधान ने दिया है, ये अधिकार संविधान प्रदत हैं और संविधान इन अधिकारों को मुहैया कराने की गारंटी लेता है।’

केन्द्रीय टेलीकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार (21 अप्रैल) को भारत की विविधता से जुड़े एक सवाल में मुस्लिमों को बिना किसी भेदभाव के सम्मान और अधिकार देने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, ‘हमें मुसलमानों का वोट नहीं मिलता है मैं बड़ी स्पष्टता से इसे स्वीकार करता हूं लेकिन क्या हमने उन्हें उचित सम्मान दिया है या नहीं।’ कांग्रेस ने भी बीजेपी के इस बयान की आलोचना की है और कहा है कि अगर आपको किसी पार्टी के वोट नहीं मिलते है तो इसके कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए। पार्टी नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, ‘हमें देखना चाहिए कि हमें कौन वोट नहीं कर रहा है, और इसके कारणों की तलाश करनी चाहिए और देखना चाहिए क्या इन कारणों को दूर किया जा सकता है, मुझे नहीं पता ये सम्मान की बात कहां से आयी है।’

रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि बीजेपी कभी भी मुसलमानों के साथ भेदभाव नहीं करती है। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे पर थोड़ी बहुत चीजें आती है भी है तो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री इस मसले का समाधान करते हैं। रविशंकर प्रसाद ने शनिवार (22 अप्रैल) को इस मुद्दे पर फिर ट्वीट किया और अपनी राय रखी, उन्होंने कहा, ‘हरेक भारतीय, चाहे वह हिन्दू, मुसलमान या क्रिश्चयन या फिर किसी वंचित तबके का व्यक्ति हो, सभी के लिए विकास हमारी मुख्य चिंता है।’ अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘ हम भारतीय नागरिकों के विकास को वोटबैंक के पैमाने पर नहीं मापते हैं।’

देश शर्मसार ” अन्नदाताओं ने पिया पेशाब अब विस्टा खाने के चेतावनी “-

दिल्ली |  जंतर-मंतर पर एक महीने से ज्यादा वक्त से विरोध-प्रदर्शन करने रहे तमिलनाडु के किसानों का धैर्य शायद अब जवाब दे चुका है। किसानों ने शनिवार को अपना विरोध जताने के लिए पेशाब पिया। किसानों ने अब रविवार को मानव मल खाकर प्रदर्शन की चेतावनी दी है। गौरतलब है कि तमिलनाडु के किसान केंद्र से कर्ज माफी और वित्तीय सहायता की मांग के साथ धरने पर बैठे हैं। सूखे के कारण उनकी फसल मारी गई है। इन किसानों की मांग है कि सरकार उनके लिए सूखा राहत पैकेज जारी करे | इस बारे मे सूचना पहले से ही दे दी गई थी। फिर भी सरकार ने ध्यान नही दिया। फिर भी माँगे नही मानी गई तो रविवार को इपना मल खा कर प्रदर्शन करेगे।

      जयपुर यूथ को आकर्षित करता नया कैरियर-

                      REDFIRE .VFX

युवा वर्ग फिल्मो में दिखाई गए द्रश्य को देख रोमांच से भर जाता है और यह सोचता है की jams bond फिल्मो में खतरनाक स्टंट कैसे

कर लेते होगे ,कैसे  कोई ऐसे सीन  कर लेता है जो नामुकिन से है और भी कई फिल्मो ,विज्ञापन  के ऐसे द्रश्य जो दर्शको को मंत्रमुघ कर देते  है -यह सब कमाल है vfx का  |

 

क्या है   VFX –    यह एक तकनीक है जिस में कुछ विडिओ साफ्टवेयर होते है जिस के माध्यम से विडिओ को एडिड कर के उन्हें स्पेशल इफेक्ट्स  द्वारा  आकर्षक और रोमांचक बनाया जाता है इसमें कुछ एडिडिंग सोफ्टवेयर का  संयोजन होता है

 VFX  एक्सपर्ट  अतुल सोनी  निदेशक  रेड फायर . वि एफ अक्स  जयपुर  के अनुसार –

वर्तमान समय में  VFX इंडस्ट्री बहुत काम हुवा है और अब यह इंडस्ट्री  युवा वर्ग  को बड़ी संख्या में अपनी और आकर्षित कर  रही  है आज आप देख रहे होगे की बाहुबली  फिल्म सुपर हीट रही और उसका बिजनेस 500 करोड़ से अधिक का रहा और हाल ही में रिलीज मूवी सुलतान , क्रश , लगभग आज के दौर में सभी फिल्मो में बहुतअधिक स्तर पर vfx  का काम हो रहा है और आने वाले  समय  में vfx के बिना किसी फिल्म का बनाना नामुकिन है

रोजगार –   आने  वाले समय  में बड़ी संख्या में इंडस्ट्री  में vfx में प्रक्षित युवा ओं की  भारी मांग होगी , इंडस्ट्री में इस समय 3D MOVIES , MOTION GRAPHIC SOFTWARE ,SOUND VIDIEO  EDITING SOFT. ,DIGITAL VISUAL EFFECTS { VFX } , ANIMATION -MOVIES- AD व MOTION GRAPHICS TECHNICS , SOUND VIDEO EDITING TECHNICS मुख्य सॉफ्टवेर है जिनकी  इंडस्ट्री में भारी माँग |

वेतन –    प्रक्षित युवा ओं को 25000 से लाखो तक { अनुभव के आधार पर }

अंतरराष्टीय स्तर पर VFX –

अक्सर फिल्म की कहानी और अपील के लिए अभिन्न होते हैं यद्यपि पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान अधिकांश दृश्य प्रभावों का काम पूरा हो जाता है, लेकिन इसे आमतौर पर पूर्व-उत्पादन और उत्पादन में ध्यानपूर्वक योजनाबद्ध और कोरियोग्राफ़ किया जाता  है । ग्राफिक डिजाइन, मॉडलिंग, एनीमेशन और इसी तरह के सॉफ़्टवेयर जैसे कई उपकरणों और तकनीकों के उपयोग के साथ-साथ पोस्ट-प्रोडक्शन में दृश्य प्रभाव मुख्य रूप से निष्पादित किए जाते है , जबकि विशेष प्रभाव जैसे कि विस्फोट और कार का पीछा सेट पर किया जाता है। एक दृश्य प्रभाव पर्यवेक्षक आम तौर पर उत्पादन के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रारंभिक चरण से उत्पादन के साथ शामिल होता है और फिल्म के निदेशक डिजाइन, गाइड और वांछित प्रभावों को हासिल करने के लिए आवश्यक टीमों का नेतृत्व करता है।

विज़ुअल इफेक्ट्स सोसाइटी (वीईएस) मनोरंजन उद्योग का एकमात्र संगठन है जो मनोरंजन के सभी क्षेत्रों में कलाकारों, एनिमेटरों, प्रौद्योगिकीविदों, मॉडल निर्माताओं, शिक्षकों, स्टूडियो नेताओं, पर्यवेक्षकों, पीआर / विपणन विशेषज्ञों और उत्पादकों सहित दृश्य प्रभाव   का प्रतिनिधित्व करता है। फिल्म, टीवी और संगीत वीडियो और गेम के लिए विज्ञापन, 30 देशों में 3,300 से अधिक सदस्यों के एक विविध समूह का समावेश है। विज़ुअल इफेक्ट्स सोसाइटी एक पेशेवर, मानद समाज है  संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, नीदरलैंड, स्विटजरलैंड, तुर्की, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अर्जेंटीना और ब्राज़ील सहित 30 देशों में प्रतिनिधित्व किया गया वीएएस पुरस्कार गार्ड (फरवरी), उत्पादन सम्मेलन (अक्टूबर) और 25 से अधिक शैक्षिक कार्यक्रमों का उत्पादन करता है, 10,000+ सालाना अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचता है।

 बाहूबली फिल्म में   VFX …………….

 

अतुल सोनी { डायरेक्टर REDFIR.VFX  }

MO -9461642634

ई-लर्निंग टीचर ट्रेनिंग कार्यशाला सम्पन्न-

ई-लर्निंग टीचर ट्रेनिंग कार्यशाला सम्पन्न……………………

जयपुर, 19 अप्रेल। उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी की अध्यक्षता में बुधवार को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तत्वावधान में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद तथा ब्रिटिश काउसिंल के सहयोग से एक दिवसीय ई लर्निंग टीचर ट्रेनिंग कार्यशाला का आयोजन हरिश्चंद्र माथुर रीपा में किया गया।

श्रीमती माहेश्वरी ने कहा कि राज्य में उच्च व तकनीकी शिक्षा को गति प्रदान करने के लिए आईसीटी द्वारा महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लास रूम का निर्माण, इंग्लिश लैंग्वेज लैब की स्थापना, आईसीटी लैब्स की स्थापना जैसे कई नवाचार किए जा रहे हैं। उन्होंने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा बारां, करौली व धौलपुर में आगामी सत्र से नवीन अभियान्त्रिकी महाविद्यालय प्रारम्भ किए जाने की स्वीकृति  देने के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।

श्रीमती माहेश्वरी ने वर्क शॉप में उपस्थित अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के वाइस चेयरमैन डाॅ. एमपी पूनिया से अनुरोध किया कि राज्य की विषिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों व आदिवासी बहुल इलाकों की विशेष आवष्यकताओ के मद्देनजर राजकीय महाविद्यालयों की आधारभूत संरचना के विकास के लिए एआईसीटीई द्वारा विषिष्ट अनुदान दिए जाने की आवश्यकता है ताकि ये संस्थाएं एनबीए एक्रीडेषन के लिए तैयार हो सकें।

डाॅ एम पी पूनिया ने कहा कि विष्व में हर छठा व्यक्ति भारतीय है। लेकिन फिर भी योग्य 100 छात्रांे में से केवल 24 छात्र ही उच्च षिक्षा प्राप्त करते हैं जबकि विदेषांे में यह अनुपात 70 से 80 के मध्य है। उन्होंने कहा कि देष के अधिकाधिक छात्रांे को उच्च षिक्षा तथा कौषल विकास से जोड़ने की एक महती आवष्यकता है और इसके लिए राज्य सरकारों को मिषन मोड में प्रयास करने चाहिए।

उल्लेखनीय है कि यह कार्यशाला राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के पॉलिटेक्निक,  महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों को ‘स्वयं’ के लिए ई लर्निंग कंटेंट तैयार करने तथा पोर्टल पर रजिस्टर कर तैयार कंटेंट को विद्यार्थियों एवं अन्य जिज्ञासुओं के लिए सुलभ रूप से उपलब्ध करवाने के लिए की गई थी।

समारोह के अध्यक्ष अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजहंस उपाध्याय ने सभी सम्मानित सदस्यों का स्वागत करते हुए ई-लर्निंग को आज की आवष्यकता बताते हुए 24 बाय 7 टीचिंग पर जोर दिया। स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर तथा आयुक्त काॅलेज षिक्षा श्री आषुतोष पेडणेकर ने राज्य में चल रहे आईसीटी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

एआईसीटीई निदेषक डाॅ. मनप्रीत मन्ना ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रारम्भ किए गए ई लर्निंग पोर्टल स्वयं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। रूसा की संयुक्त निदेषक डाॅ. रेनू बापना ने एआईसीटीई द्वारा ई लर्निंग की पहली वर्कषाप राजस्थान में आयोजित करने पर सभी को बधाई तथा एआईसीटीई और ब्रिटिष काउसिंल को धन्यवाद दिया |

बाल विवाह के रोकथाम के लिए राज्य मंत्री अनीता भदेल ने कलेक्टरों और अधिकारियों से वीडियो काॅन्फे्रसिंग

जयपुर, 19 अप्रैल । महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री  अनिता भदेल ने बुधवार को बाल विवाह की रोकथाम के लिए राज्य के सभी जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, उपनिदेषक, महिला एवं बाल विकास विभाग, कार्यक्रम अधिकारी महिला अधिकारिता, उपखण्ड अधिकारी, उप पुलिस अधीक्षक, बाल विकास परियोजना अधिकारियों के साथ विडियो कान्फ्रेन्स कर तैयारियों का जायजा लिया।

श्रीमती अनिता भदेल ने बाल विवाह की गहनता को ध्यान में रखते हुए क्रमवार जिलों के कलक्टरों, पुलिस अधीक्षकों एवं अन्य अधिकारियों से चर्चा कर निर्देष दिए। जिला प्रशासन  से बाल विवाह रोकथाम हेतु की जा रही तैयारियों की जानकारी ली गई  इसके साथ ही बाल विवाह रोकथाम के लिए प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देष प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन  को अपना सूचना तंत्र मजबूत किए जाने की आवश्यकता है एवं ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न कार्मिकों एवं कार्यकर्ताओं को पाबन्द किया जावे कि वे उनके क्षेत्र में आयोजित विवाहों में भाग लेकर यह सुनिष्चित करें कि बाल विवाह सम्पन्न ना हों।

श्रीमती भदेल ने कहा कि बाल विवाह की सूचनाओं पर कार्यवाही के साथ ही स्वतः संज्ञान लेते हुए भी बाल विवाह रोकथाम की कार्यवाही की जाए एवं आवश्यकता  पडने पर एफ.आई.आर भी दर्ज करवाई जाए। कान्फ्रेन्स के दौरान विभिन्न जिलों के अधिकारियों द्वारा बाल विवाह रोकथाम के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी जानकारी दी गई।

सचिव श्री कुलदीप रांका ने बताया कि कि प्रदेष में अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा जैसे अवसरों पर बाल विवाह की अधिक संभावना रहती है। ये पर्व इस वर्ष क्रमषः 28 अप्रेल और 10 मई को हैं। इन अवसरों पर बाल विवाह ना होइसके लिए सघन प्रचार-प्रसार अभियान किया जाए। ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न कार्मिकों यथा पटवारी, ग्राम सेवक, आंगनबाडी कार्यकर्ता, साथिन, सहयोगिनी, बीट-कान्सटेबल आदि द्वारा यह ध्यान रखा जाए कि उन क्षेत्रों में बाल विवाह सम्पन्न ना हों।

उन्होंने कहा कि यदि बाल विवाह से संबंधित कोई भी सूचना प्राप्त हो तो संबंधित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी को तुरन्त सूचना दी जावे। बाल विवाह रोकथाम हेतु जिला एवं ब्लाॅक स्तर पर कन्ट्रोल रूम स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की सूचना चाइल्ड हैल्पलाइन नम्बर -1098 पर भी दी जा सकती है।